पॉइंट 5140 की ऐतिहासिक जीत: 17,000 फीट की ऊंचाई पर बिना किसी नुकसान के भारतीय सेना ने कैसे लिखा स्वर्णिम इतिहास कारगिल युद्ध के दौरान पॉइंट 5140 पर भारतीय सेना की विजय सैन्य कौशल और साहस का एक अद्भुत उदाहरण है, जिसे अब गन हिल के नाम से जाना जाता है। 1999 में बिना किसी सैनिक को खोए हासिल की गई यह जीत आज भी सेना की गौरवशाली गाथाओं में शामिल है। कारगिल युद्ध के दौरान हिमालय की बर्फीली चोटियों पर लड़ी गई अनेक लड़ाइयों ने भारतीय सैन्य इतिहास में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। इन सभी के बीच पॉइंट 5140 की जीत एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज है, जिसने युद्ध की पूरी दिशा बदल दी थी। आज के समय में इस चोटी को गन हिल के नाम से जाना जाता है। ऑपरेशन विजय की 27वीं वर्षगांठ के मौके पर भारतीय सेना ने उस ऐतिहासिक स्थल तक एक विशेष अभियान का आयोजन किया, ताकि उन वीर सैनिकों को श्रद्धासुमन अर्पित किए जा सकें जिन्होंने 1999 में इस कठिन ऊंचाई पर तिरंगा फहराने का साहस दिखाया था। रणनीतिक महत्व और चुनौती पॉइंट 5140 लगभग 17,000 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित थी। उस समय यह चोटी द्रास क्षेत्र की निगरानी के लिए सबसे महत्वपूर्ण केंद्र थी। दुश्मन इस ऊंचाई का उपयोग भारतीय सेना की हर गतिविधि पर नजर रखने और आसपास के अन्य घुसपैठ वाले क्षेत्रों को रसद और सहायता पहुंचाने के लिए करता था। भारतीय सैन्य नेतृत्व के लिए इस चोटी को दुश्मन के कब्जे से मुक्त कराना केवल एक सामरिक आवश्यकता नहीं थी, बल्कि युद्ध जीतने के लिए इसे अनिवार्य शर्त माना जा रहा था। इस विजय की गाथा केवल पैदल सेना के पराक्रम की नहीं, बल्कि भारतीय तोपखाने की उस सटीक और अचूक शक्ति की भी है जिसने दुश्मन की रक्षा पंक्तियों को जड़ से उखाड़ फेंका। सुनियोजित रणनीति और तोपखाने का प्रहार जून 1999 में अंतिम आक्रमण को अंजाम देने से पहले भारतीय सेना ने आसपास की चोटियों को अपने नियंत्रण में लेकर अपनी स्थिति को बेहद मजबूत कर लिया था। 13 और 14 जून की दरमियानी रात को 18 ग्रेनेडियर्स ने हंप पर अपना अधिकार जमा लिया, जबकि 13 जम्मू एवं कश्मीर राइफल्स ने रॉकी नॉब को मुक्त कराया। इसी दौरान बोफोर्स तोपों ने दुश्मन के बंकरों पर सीधा और सटीक प्रहार किया। भारतीय तोपखाने की गोलाबारी इतनी प्रभावी और प्रचंड थी कि दुश्मन का रक्षा तंत्र पूरी तरह ध्वस्त होने लगा। निर्णायक प्रहार और विजय का परचम 19 और 20 जून 1999 की रात को निर्णायक अभियान की शुरुआत हुई। शत्रुनाश नामक एक व्यापक तोपखाना योजना के अंतर्गत बोफोर्स तोपों और मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम ने दुश्मन के अड्डों पर निरंतर आग बरसाई। पूर्व और पश्चिम, दोनों ही दिशाओं से की गई इस गोलाबारी ने दुश्मन के लड़ने की ताकत को लगभग समाप्त कर दिया। तोपखाने की इस भीषण मार के बाद, भारतीय पैदल सेना ने तेजी से आगे बढ़ना शुरू किया। 20 जून की सुबह 5 बजे, 13 जम्मू एवं कश्मीर राइफल्स ने पॉइंट 5140 पर अपना अधिकार सफलतापूर्वक स्थापित कर लिया। इतिहास में दर्ज दुर्लभ उपलब्धि इस जीत की सबसे बड़ी विशेषता वह उपलब्धि है जो आज भी सैन्य इतिहास में अत्यंत दुर्लभ मानी जाती है। 17,000 फीट की ऊंचाई पर एक इतने सुरक्षित और मजबूत दुश्मन ठिकाने पर कब्जा करने के बावजूद, इस अभियान में भारतीय सेना का एक भी सैनिक शहीद नहीं हुआ। उच्च हिमालयी युद्धों के इतिहास में यह अपने आप में पहली ऐसी घटना थी, जहां इतनी प्रतिकूल और दुर्गम परिस्थितियों में लक्ष्य को बिना किसी अपने नुकसान के प्राप्त किया गया। इसी असाधारण सफलता और कारगिल युद्ध में तोपखाना रेजिमेंट की निर्णायक भूमिका का सम्मान करते हुए, वर्ष 2023 में पॉइंट 5140 का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर गन हिल कर दिया गया। विरासत का सम्मान इस वर्ष आयोजित किए गए अभियान में कुल 126 सैनिकों ने हिस्सा लिया। इसमें 25 वे सैनिक शामिल थे जिन्होंने 1999 के युद्ध के दौरान सक्रिय भूमिका निभाई थी, साथ ही स्थानीय सैन्य इकाइयों के 101 जांबाज सैनिक भी मौजूद थे। यह आयोजन केवल एक सैन्य यात्रा नहीं थी, बल्कि यह अतीत और वर्तमान के सैनिकों के बीच गौरव, परंपरा और बलिदान की विरासत को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास था। आज जब सैनिक गन हिल की चोटी पर तिरंगा लहराते हैं, तो उन्हें केवल एक पहाड़ी नहीं दिखती, बल्कि उन्हें उस संकल्प और अदम्य साहस की याद आती है जिसने असंभव को संभव बना दिया था। इसका आप पर असर भारत में: यह विजय भारतीय सेना की तोपखाने की अचूक मारक क्षमता और युद्धनीति की श्रेष्ठता को रेखांकित करती है, जिससे नागरिकों का सशस्त्र बलों पर भरोसा और मजबूत होता है। सवाल-जवाब 1. पॉइंट 5140 का नया नाम क्या है? पॉइंट 5140 को अब गन हिल के नाम से जाना जाता है, जिसे 2023 में यह नाम दिया गया था। 2. पॉइंट 5140 की जीत में तोपखाने की क्या भूमिका थी? भारतीय तोपखाने ने बोफोर्स तोपों और रॉकेट लॉन्चरों का उपयोग करके दुश्मन के बंकरों को पूरी तरह नष्ट कर दिया, जिससे पैदल सेना के लिए रास्ता साफ हो गया। 3. क्या इस अभियान में कोई भारतीय सैनिक शहीद हुआ था? नहीं, पॉइंट 5140 को आजाद कराने के अभियान में भारतीय सेना का एक भी सैनिक शहीद नहीं हुआ था। 4. पॉइंट 5140 कितनी ऊंचाई पर स्थित है? यह चोटी लगभग 17,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। प्रेरणा और सबक सफलता और प्रेरणा के पाठ: • पूर्वतैयारी का महत्व: बड़ी जीत हासिल करने के लिए छोटी-छोटी रणनीतिक चोटियों (हंप, रॉकी नॉब) पर नियंत्रण पाना अनिवार्य है। • तकनीकी श्रेष्ठता: आधुनिक हथियारों (बोफोर्स तोप) का सही इस्तेमाल दुश्मन की रक्षा व्यवस्था को बिना किसी नुकसान के ध्वस्त कर सकता है। • साहस और संयम: 17,000 फीट की दुर्गम ऊंचाइयों पर भी अनुशासन और बेहतर तालमेल से असंभव लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है। • विरासत का सम्मान: युद्ध के वीरों और उनके बलिदान को याद रखने के लिए स्मृति चिन्ह और नामकरण (गन हिल) अगली पीढ़ी को प्रेरित करते हैं। https://trendkia.com/national/point-5140-ki-aitihasika-jita-17-000-phita-ki-unchai-para-bina-kisi-nukasana-ke-bharatiya-sena-ne-kaise-likha-svarnima-itihasa-7484 TrendKia — Har trend, sabse pehle.