# प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की एक 'हां' और बन गया हरियाणा का यह अद्भुत कैनाल नेटवर्क, जो आज बुझाता है दो राज्यों की प्यास

> 'नहरों की नगरी' टोहाना में मौजूद बलियाला हेड भाखड़ा बांध का पानी हरियाणा और राजस्थान के खेतों तक पहुंचाता है. भारत के पहले प्रधानमंत्री के सामने रखी गई एक शर्त से शुरू हुआ यह इंजीनियरिंग का कमाल, अब उत्तर भारत के पहले परमाणु प्लांट के लिए भी वरदान साबित होने जा रहा है.

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-07-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/pradhanamntri-jawaharlal-nehru-ki-eka-han-aura-bana-gaya-haryana-ka-yaha-adbhuta-kainala-netavarka-jo-aja-bujhata-hai-do-rajyon-ki-9077 · **Language:** Hindi
**Tags:** टोहाना, हरियाणा न्यूज़, भाखड़ा नांगल बांध, जवाहरलाल नेहरू, नहरों की नगरी, गोरखपुर परमाणु प्लांट

हरियाणा राज्य के गतिशील और उभरते हुए शहर टोहाना में कुदरत की खूबसूरती और इंसान की बेहतरीन इंजीनियरिंग का एक बेहद शानदार संगम देखने को मिलता है. जो भी पर्यटक इस अनोखे चौराहे पर घूमने आते हैं, वे यहां के हरे-भरे पेड़ों, तेजी से बहते पानी की सुरीली आवाज और स्थानीय पक्षियों की चहचहाहट को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं. इस अद्भुत नजारे में चार चांद तब लग जाते हैं, जब पानी के इस विशाल सिस्टम के ठीक ऊपर बने एक बड़े रेलवे ब्रिज से कोई ट्रेन धड़धड़ाती हुई गुजरती है. इस जटिल और विशाल जंक्शन को पूरे इलाके में 'सिटी ऑफ कैनाल' यानी 'नहरों की नगरी' के मशहूर नाम से जाना और सराहा जाता है, क्योंकि यहीं से आठ अलग-अलग पानी की धाराएं जन्म लेती हैं. आधिकारिक दस्तावेजों में इसे टोहाना रेगुलेटर हेड या कई बार बलियाला हेड के नाम से पुकारा जाता है. यह विशाल जगह असल में एक बहुत बड़े सिंचाई नेटवर्क का धड़कता हुआ दिल है. इसी विस्तृत जल प्रणाली की बदौलत हरियाणा और राजस्थान के सूखे और बंजर खेतों को पूरी तरह से उपजाऊ और लहलहाती कृषि भूमि में तब्दील करने में कामयाबी मिली है.

 

## प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सामने रखी गई ऐतिहासिक शर्त
 इस शानदार जल वितरण ढांचे के निर्माण की असली कहानी भारत की आजादी के ठीक बाद के उन अहम सालों से जुड़ी हुई है. देश में साल 1948 में उत्तरी नदियों के तेज बहाव का सही इस्तेमाल करने के लिए भाखड़ा नांगल बांध नाम के महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की आधिकारिक तौर पर शुरुआत की गई थी. इस बड़े राष्ट्रीय अभियान की देखरेख की पूरी जिम्मेदारी तत्कालीन चीफ इंजीनियर रायबहादुर कंवर सैन गुप्ता के कुशल हाथों में सौंपी गई थी, जो संयोग से खुद टोहाना शहर के ही रहने वाले थे. ऐतिहासिक किस्सों और स्थानीय जानकारियों के मुताबिक, कंवर सैन गुप्ता इस बड़े बांध प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए पूरी तरह से तैयार थे, लेकिन उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सामने अपनी एक बहुत ही खास और मजबूत शर्त रख दी थी. इस बेहतरीन इंजीनियर ने साफ कह दिया था कि इस व्यापक सिंचाई योजना के तहत उनके अपने शहर टोहाना में एक आधुनिक रेगुलेटर हेड का निर्माण हर हाल में होना चाहिए. इस इंजीनियर की अचूक काबिलियत और प्रोजेक्ट की राष्ट्रीय अहमियत को देखते हुए नेहरू ने यह शर्त फौरन मान ली. इसके बाद कंवर सैन गुप्ता ने अपनी अथक मेहनत से लगातार तीन साल तक काम करके नांगल डैम का सपना सच कर दिखाया और साथ ही यह भी सुनिश्चित किया कि टोहाना हेड का निर्माण पूरी सटीकता के साथ हो.

 

## हरियाणा और राजस्थान के लिए जीवनरेखा
 भाखड़ा नांगल बांध मुख्य रूप से पंजाब और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहने वाली तेज सतलुज नदी के ऊपर गर्व से खड़ा है और यह अपने आप में एक बड़ा राष्ट्रीय चमत्कार है. इसे देश के सबसे लंबे बांध होने का आधिकारिक गौरव प्राप्त है. ऊंचाई के मामले में भी यह पीछे नहीं है, विशाल टिहरी डैम के बाद यह भारत का दूसरा और पूरी दुनिया का तीसरा सबसे ऊंचा बांध माना जाता है. साल 1954 में जब प्रधानमंत्री नेहरू ने इस फैली हुई नहर प्रणाली की सबसे बड़ी ब्रांच का उद्घाटन किया, तो इस एक कदम ने हरियाणा के कृषि भविष्य को हमेशा के लिए सकारात्मक रूप से बदल दिया. ऐतिहासिक समयरेखा बताती है कि साल 1963 में भाखड़ा नहर का जीवनदायी पानी पूरी रफ्तार के साथ टोहाना तक पहुंच गया था. आज, यह शक्तिशाली बलियाला हेड पानी के इस विशाल बहाव को बहुत ही कुशलता से अलग-अलग दिशाओं में बांटने का काम करता है. इसी मुख्य केंद्र से आठ अलग-अलग नहरें निकलकर दूर-दराज की प्यासी जमीनों की प्यास बुझाती हैं. फतेहाबाद ब्रांच, रतिया नहर और बरवाला नहर जैसी प्रमुख क्षेत्रीय जलधाराएं पूरे हरियाणा में व्यापक स्तर पर पानी पहुंचाती हैं, जो सिरसा जैसे सूखाग्रस्त जिलों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं. वहीं, सिद्धमुख ब्रांच और एक अन्य प्रमुख नहर राजस्थान तक फैले गंगा नहर नेटवर्क को लगातार और जरूरी सिंचाई का पानी उपलब्ध कराती हैं.

 

## इंजीनियरिंग का कमाल और एक बेहतरीन पर्यटन स्थल
 कृषि और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले इसके भारी असर के अलावा, टोहाना जंक्शन पर बना स्थानीय बुनियादी ढांचा अपने आप में बेहद शानदार और देखने लायक है. इस इलाके में एक बहुत ही खूबसूरत और अच्छी तरह से मेंटेन किया गया गेस्ट हाउस मौजूद है, जो एक खास मीटर घर के बिल्कुल बगल में बना है. इस तकनीकी सुविधा को खास तौर पर इसलिए डिजाइन किया गया था ताकि पानी के भारी बहाव को क्यूसिक में बहुत ही सटीकता के साथ मापा जा सके. यह अहम मापक स्टेशन इस बात की तसल्ली करता है कि छोटी धाराओं में बंटने से पहले भाखड़ा की मुख्य ब्रांच से गुजरने वाले भारी पानी की सही ढंग से निगरानी और कंट्रोलिंग हो. एक ही बिंदु पर पांच से सात नहरों के आपस में मिलने, सड़कों के दो चौराहों के क्रॉस होने और ऊपर से गुजरने वाले रेलवे ब्रिज के कारण यह एक बहुत ही आकर्षक और जीवंत माहौल पैदा करता है. इसी वजह से यह इंजीनियरिंग का कमाल धीरे-धीरे एक बेहद लोकप्रिय क्षेत्रीय पर्यटन स्थल बन गया है, जो दूर-दूर से उत्सुक पर्यटकों और पानी से जुड़ी तकनीक में दिलचस्पी रखने वालों को अपनी ओर खींचता है, ताकि वे इंसानी दिमाग और कुदरती बहाव के इस शानदार तालमेल को अपनी आंखों से देख सकें.

 

## उत्तर भारत के पहले परमाणु प्लांट को मिलेगी ऊर्जा
 जैसे-जैसे देश में बुनियादी ढांचे और बिजली की मांग बढ़ रही है, वैसे-वैसे टोहाना हब की रणनीतिक अहमियत भी कई गुना बढ़ती जा रही है. हाल ही में एक बहुत ही दिलचस्प और भविष्य से जुड़े विकास के तहत, फतेहाबाद जिले के अंदरूनी हिस्से में मौजूद गोरखपुर गांव को जरूरी संसाधन सप्लाई करने के लिए इसी हेडवर्क्स से एक विशेष जल मार्ग तैयार किया गया है. यह खास नहर खेती की सिंचाई के लिए बनाई गई कोई आम नहर नहीं है, इसे इस तरह से इंजीनियर किया गया है कि यह पूरे 50 किलोमीटर की भारी दूरी तक जमीन के बिल्कुल अंदर ही अंदर (अंडरग्राउंड) अपना सफर तय करती है. इस पानी की अंतिम और सबसे अहम मंजिल 'गोरखपुर हरियाणा अणु विद्युत परियोजना' (GHAVP) है, जिसका निर्माण उत्तर भारत के सबसे प्रमुख परमाणु बिजली प्लांट के रूप में बहुत ही तेजी से चल रहा है. करीब ₹42,000 करोड़ के एक विशाल केंद्रीय बजट के सहारे तैयार की जा रही इस आधुनिक सुविधा का मकसद 2800 मेगावाट की स्वच्छ बिजली पैदा करना है. मौजूदा अनुमानों के मुताबिक, इस प्लांट की पहली दो परमाणु इकाइयां साल 2031 तक पूरी तरह से काम करना शुरू कर देंगी. टोहाना हेड से शुरू होने वाली यह लगातार और अंडरग्राउंड जल सप्लाई, इस विशाल परमाणु प्रोजेक्ट के कूलिंग टावरों को ठंडा रखने और इसे सुरक्षित रूप से रोजाना चलाने के लिए बेहद जरूरी साबित होगी.

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** यह ढांचा उत्तर भारत के पहले परमाणु ऊर्जा प्लांट को लगातार पानी की सप्लाई देगा, जिससे भविष्य में देश की बिजली क्षमता काफी बढ़ेगी.
- **हरियाणा और राजस्थान में:** सिरसा, फतेहाबाद और राजस्थान के लाखों किसानों की आजीविका इसी कैनाल नेटवर्क पर निर्भर है, जो सूखे इलाकों को सीधे तौर पर सिंचाई का पानी मुहैया कराता है.

## सवाल-जवाब

### 1. टोहाना रेगुलेटर हेड कहां स्थित है?
टोहाना रेगुलेटर हेड, जिसे बलियाला हेड भी कहा जाता है, हरियाणा के फतेहाबाद जिले के टोहाना शहर में स्थित है.

### 2. टोहाना हेड से कुल कितनी नहरें निकलती हैं?
टोहाना हेड से कुल आठ अलग-अलग नहरें निकलती हैं, जो हरियाणा और राजस्थान के कई हिस्सों में पानी की भारी सप्लाई करती हैं.

### 3. कंवर सैन गुप्ता ने जवाहरलाल नेहरू के सामने क्या शर्त रखी थी?
चीफ इंजीनियर कंवर सैन गुप्ता ने यह शर्त रखी थी कि वह भाखड़ा नांगल बांध प्रोजेक्ट को तभी पूरा करेंगे, जब उनके होमटाउन टोहाना में एक आधुनिक रेगुलेटर हेड बनाया जाएगा.

### 4. टोहाना से किस परमाणु पावर प्लांट को पानी मिलेगा?
टोहाना से निकलने वाले पानी की सप्लाई गोरखपुर गांव में बन रहे 'गोरखपुर हरियाणा अणु विद्युत परियोजना' (GHAVP) को की जाएगी, जो उत्तर भारत का पहला परमाणु पावर प्लांट है.

### 5. भाखड़ा नहर का पानी टोहाना कब पहुंचा था?
भाखड़ा नहर के इस विशाल प्रोजेक्ट का पानी आधिकारिक तौर पर साल 1963 में पूरी रफ्तार के साथ टोहाना हेड तक पहुंच गया था.

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