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  "type": "article",
  "title": "प्रशासनिक फेरबदल में आईएएस इशिता राठी बनीं जम्मू की नई एडीसी, पति रवि सिहाग की पोस्टिंग से अब सिर्फ 140 किमी का फासला",
  "summary": "यूपीएससी 2021 की आठवीं रैंक हासिल करने वाली आईएएस अधिकारी इशिता राठी ने जम्मू में अतिरिक्त उपायुक्त प्रशासन का पदभार ग्रहण कर लिया है, जिससे राजौरी में तैनात उनके आईएएस पति रवि सिहाग और उनके बीच की दूरी घटकर महज साढ़े तीन घंटे रह गई है।",
  "content": "संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2021 में अखिल भारतीय स्तर पर आठवीं रैंक हासिल करने वाली आईएएस अधिकारी इशिता राठी ने जम्मू जिले में अतिरिक्त उपायुक्त (प्रशासन) के रूप में अपनी नई प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाल ली है। केंद्र शासित प्रदेशों के हालिया प्रशासनिक फेरबदल के तहत 2022 बैच की इस एजीएमयूटी कैडर अधिकारी को यह अहम दायित्व सौंपा गया है। इस नई तैनाती से पहले वह पुडुचेरी के कराईकल क्षेत्र में बतौर जिला कलेक्टर अपनी सेवाएं दे रही थीं, जहाँ उनके प्रशासनिक कामकाज और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान को व्यापक स्तर पर सराहा गया था।\n\nजम्मू में अतिरिक्त उपायुक्त प्रशासन का पदभार\nउत्तर प्रदेश के बागपत जिले की रहने वाली इशिता राठी अपने सख्त अनुशासन और जमीनी प्रशासनिक सूझबूझ के लिए जानी जाती हैं। जम्मू में पदभार ग्रहण करने के साथ ही स्थानीय प्रशासन और नागरिकों को विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा पारदर्शी व्यवस्था की खासी उम्मीदें हैं। पुडुचेरी में अपने सफल कार्यकाल के बाद केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में उनकी यह तैनाती प्रशासनिक मशीनरी को और चुस्त-दुरुस्त बनाने के उद्देश्य से की गई है। प्रशासनिक मामलों में उनकी मजबूत पकड़ और निर्णय लेने की क्षमता के चलते उन्हें संवेदनशील और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों वाले पदों पर प्राथमिकता दी जाती रही है।\n\n3271 किलोमीटर का फासला सिमटकर रह गया साढ़े तीन घंटे\nइशिता राठी के इस नए तबादले के साथ ही उनके निजी जीवन में भी एक बड़ा और सुखद बदलाव आया है। उनके पति और 2022 बैच के चर्चित आईएएस अधिकारी रवि सिहाग वर्तमान में जम्मू-कश्मीर के ही सीमावर्ती जिले राजौरी में अतिरिक्त उपायुक्त के पद पर कार्यरत हैं। विवाह के शुरुआती दिनों में इस प्रशासनिक दंपती के बीच करीब 3,271 किलोमीटर का विशाल भौगोलिक फासला था, क्योंकि रवि सिहाग को शुरुआत में मध्य प्रदेश कैडर आवंटित हुआ था, जबकि इशिता राठी एजीएमयूटी कैडर के तहत पुडुचेरी में पदस्थ थीं।\n\nअखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा में विवाह के आधार पर कैडर परिवर्तन से जुड़े नियमों के तहत रवि सिहाग ने अपना स्थानांतरण एजीएमयूटी कैडर में करवा लिया था। अब इशिता राठी की जम्मू में और रवि सिहाग की राजौरी में तैनाती होने के बाद दोनों के बीच की दूरी घटकर मात्र 140 किलोमीटर रह गई है। सड़क मार्ग से इस दूरी को तय करने में अब लगभग 3.5 घंटे का समय लगता है, जिससे लंबे समय से बना भौगोलिक अलगाव अब पूरी तरह समाप्त हो गया है।\n\nखाकी की परंपरा से निकला प्रशासनिक नेतृत्व\nइशिता राठी की इस उल्लेखनीय सफलता के पीछे उनके पारिवारिक परिवेश का गहरा प्रभाव रहा है। उनका परिवार पीढ़ियों से कानून व्यवस्था और देश सेवा के प्रति समर्पित रहा है। उनकी माता मीनाक्षी राठी दिल्ली पुलिस में सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) के रूप में तैनात हैं, जबकि उनके पिता आईएस राठी उसी महकमे में हेड कॉन्स्टेबल के रूप में कर्तव्य निभा रहे हैं। इतना ही नहीं, उनके चाचा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। बचपन से ही घर के भीतर कानून, व्यवस्था, अनुशासन और जनसेवा के प्रति बने इस मजबूत वातावरण ने उन्हें प्रशासनिक सेवा में आने की सबसे बड़ी प्रेरणा दी।\n\nबिना किसी कोचिंग के तीसरे प्रयास में ऑल इंडिया 8वीं रैंक\nशैक्षणिक यात्रा की बात करें तो इशिता राठी ने दिल्ली स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की थी। इसके उपरांत उन्होंने प्रतिष्ठित लेडी श्रीराम कॉलेज से अर्थशास्त्र (ऑनर्स) में स्नातक की उपाधि प्राप्त की और फिर मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में ही स्नातकोत्तर (मास्टर्स) की पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने किसी भी व्यावसायिक कोचिंग संस्थान का सहारा लिए बिना पूरी तरह स्वाध्याय के बल पर संघ लोक सेवा आयोग की तैयारी शुरू की। पाठ्यक्रम के गहन विश्लेषण और तीसरे प्रयास में असाधारण प्रदर्शन करते हुए उन्होंने पूरे देश में 8वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया।\n\nखेतों से निकलकर हिंदी माध्यम के टॉपर बने रवि सिहाग\nइशिता के जीवनसाथी आईएएस रवि सिहाग की संघर्ष गाथा भी देश भर के प्रतियोगी छात्रों के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत है। राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के एक साधारण ग्रामीण किसान परिवार में जन्मे रवि सिहाग ने अपनी प्रारंभिक जिंदगी में खेती-किसानी के कामों में अपने पिता का हाथ बंटाया था। अंग्रेजी माध्यम के दबदबे वाले सिविल सेवा क्षेत्र में उन्होंने साबित किया कि भाषा कभी भी योग्यता या सपनों के आड़े नहीं आ सकती। हिंदी माध्यम से परीक्षा देते हुए उन्होंने चार कठिन प्रयासों के लंबे संघर्ष के बाद यूपीएससी 2021 में अखिल भारतीय स्तर पर 18वीं रैंक हासिल की और हिंदी माध्यम के देश भर में अव्वल टॉपर बने। प्रशासनिक दक्षता और व्यक्तिगत समर्पण के बल पर यह जोड़ा आज देश के युवाओं के बीच विशेष पहचान बनाए हुए है।\n\nइसका आप पर असर\nजम्मू जिले में नई प्रशासनिक तैनाती से स्थानीय प्रशासनिक कामकाज में गति आने और नीतियों के तेज क्रियान्वयन की संभावना है।\n\n• नागरिक सेवाओं पर प्रभाव: अतिरिक्त उपायुक्त (प्रशासन) के तौर पर नए अधिकारी के आने से जिला प्रशासन में जनहित की फाइलों और योजनाओं के निपटारे में तेजी आएगी। स्थानीय लोगों को अपनी प्रशासनिक समस्याओं के समाधान के लिए त्वरित और पारदर्शी प्रक्रिया का लाभ मिलेगा।\n• जम्मू एवं राजौरी क्षेत्र में: जम्मू और सीमावर्ती राजौरी दोनों जिलों में युवा व दक्ष प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रिय मौजूदगी से अंतर-जिला समन्वय और क्षेत्रीय निगरानी बेहतर होगी। इन क्षेत्रों में चल रहे ढांचागत और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की प्रशासनिक समीक्षा में गति देखने को मिल सकती है।\n• सिविल सेवा अभ्यर्थियों के लिए: बिना कोचिंग और हिंदी माध्यम से शीर्ष रैंक हासिल करने वाले इन दोनों अधिकारियों की सफलता छात्रों के लिए एक व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत करती है। ग्रामीण या सीमित संसाधनों वाले अभ्यर्थी स्वाध्याय और निरंतर अभ्यास के महत्व को समझकर अपनी तैयारी को दिशा दे सकते हैं।\n• प्रशासनिक सेवा नियमों का संदेश: अखिल भारतीय सेवाओं में दंपती को निकटतम कार्यक्षेत्र उपलब्ध कराने वाले नियमों के व्यावहारिक उपयोग का यह एक स्पष्ट उदाहरण है। इससे सेवा में कार्यरत अधिकारियों को कार्य और पारिवारिक संतुलन बनाए रखने में मिलने वाले कानूनी प्रावधानों की जानकारी मिलती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह नई प्रशासनिक तैनाती नियमित सरकारी फेरबदल और प्रशासनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के तहत अमल में लाई गई है।\n\n• प्रशासनिक फेरबदल की प्रक्रिया: केंद्र शासित प्रदेशों में प्रशासनिक अधिकारियों के नियमित स्थानांतरण और रिक्त पदों को भरने के उद्देश्य से यह आदेश जारी किया गया। इसके तहत पुडुचेरी में अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद इशिता राठी को जम्मू में महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद की जिम्मेदारी सौंपी गई।\n• विवाह के आधार पर कैडर आवंटन: पूर्व में 3,271 किलोमीटर दूर मध्य प्रदेश कैडर में तैनात रवि सिहाग ने विवाह नियमों के तहत एजीएमयूटी कैडर के लिए आवेदन किया था। इस वैधानिक प्रक्रिया के पूर्ण होने से दोनों अधिकारी एक ही कैडर और समीपवर्ती जिलों में पदस्थ हो सके।\n• क्षेत्रीय प्रशासनिक आवश्यकता: जम्मू जैसे प्रमुख संभागीय केंद्र में कुशल और अनुभवी अधिकारियों की तैनाती से क्षेत्रीय प्रशासन को मजबूती देना प्राथमिकता रही है। पुडुचेरी के कराईकल में उनके बेहतर कार्य प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें यह अहम जिम्मेदारी दी गई।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. आईएएस इशिता राठी ने जम्मू में कौन सा नया पदभार संभाला है?\nइशिता राठी ने जम्मू जिले में अतिरिक्त उपायुक्त (प्रशासन) के पद पर अपना कार्यभार ग्रहण किया है।\n\n2. जम्मू से पहले इशिता राठी किस पद और स्थान पर तैनात थीं?\nजम्मू आने से पहले वह पुडुचेरी के कराईकल क्षेत्र में बतौर जिला कलेक्टर अपनी प्रशासनिक सेवाएं दे रही थीं।\n\n3. इशिता राठी के पति आईएएस रवि सिहाग वर्तमान में कहाँ पदस्थ हैं?\nरवि सिहाग जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।\n\n4. जम्मू और राजौरी के बीच सड़क मार्ग से अब कितना समय लगता है?\nजम्मू से राजौरी की दूरी लगभग 140 किलोमीटर है, जिसे तय करने में सड़क मार्ग से करीब 3.5 घंटे का समय लगता है।\n\n5. रवि सिहाग का मध्य प्रदेश कैडर से एजीएमयूटी कैडर में तबादला कैसे हुआ?\nआईएएस सेवा के नियमों के तहत विवाह के आधार पर कैडर परिवर्तन की अनुमति मिलने के बाद उन्हें एजीएमयूटी कैडर आवंटित किया गया।\n\n6. यूपीएससी 2021 की परीक्षा में इशिता राठी और रवि सिहाग की क्या रैंक थी?\nयूपीएससी 2021 में इशिता राठी ने ऑल इंडिया 8वीं रैंक हासिल की थी, जबकि रवि सिहाग ने 18वीं रैंक के साथ हिंदी माध्यम में पहला स्थान पाया था।\n\n7. इशिता राठी की उच्च शिक्षा किस विषय और संस्थान से हुई है?\nउन्होंने लेडी श्रीराम कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक और मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर किया है।\n\n8. इशिता राठी के माता-पिता किस विभाग में कार्यरत हैं?\nउनकी मां मीनाक्षी राठी दिल्ली पुलिस में एएसआई और पिता आईएस राठी हेड कॉन्स्टेबल के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\nइशिता राठी और रवि सिहाग की यात्रा दिखाती है कि समर्पण, पारिवारिक सहयोग और स्पष्ट रणनीति से किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।\n\n• स्वाध्याय की शक्ति: इशिता राठी ने बिना किसी महंगी कोचिंग के केवल पाठ्यक्रम के सूक्ष्म अध्ययन और खुद पर भरोसे से परीक्षा पास की। किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में महंगे संस्थानों के बजाय खुद की बनाई रणनीति और अनुशासन सबसे अधिक कारगर सिद्ध होते हैं।\n• भाषा कभी सीमा नहीं बनती: रवि सिहाग ने ग्रामीण पृष्ठभूमि और खेती के साथ हिंदी माध्यम से तैयारी करके देश में 18वीं रैंक हासिल की। यह साबित करता है कि माध्यम या भाषा की बजाय विषय की मौलिक समझ और दृढ़ इच्छाशक्ति सफलता तय करती है।\n• पारिवारिक मूल्यों का महत्व: माता-पिता के अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के माहौल ने इशिता को निरंतर मेहनत करने की दिशा दी। पारिवारिक संस्कार और सादगी जीवन के सबसे चुनौतीपूर्ण पड़ावों को पार करने की आंतरिक ऊर्जा प्रदान करते हैं।\n• विपरीत परिस्थितियों में निरंतरता: चार प्रयासों के उतार-चढ़ाव झेलने के बावजूद रवि सिहाग ने हार नहीं मानी और शीर्ष स्थान हासिल किया। लगातार प्रयास और गलतियों से सीखकर आगे बढ़ने का जज्बा ही इंसान को उसकी वास्तविक मंजिल तक पहुंचाता है।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-10-16",
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