# प्रतियोगी परीक्षाओं के दिन रैलियों पर लगे रोक, संसदीय समिति ने NTA सुधारों पर सौंपी रिपोर्ट

> संसद की स्थायी समिति ने परीक्षा के दिन जनसभाओं पर रोक लगाने, थोड़ी देरी से आने वाले छात्रों को बचे हुए समय में प्रवेश देने और बायोमेट्रिक औपचारिकताएं अलग से कराने की सिफारिश की है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-11 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/pratiyogi-parikshaon-ke-dina-railiyon-para-lage-roka-snsadiya-samiti-ne-nta-sudharon-para-saunpi-riporta-46385 · **Language:** Hindi
**Tags:** राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी, संसदीय समिति, मुकुल वासनिक, नीट पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाएं, धर्मेंद्र प्रधान

देश भर में आयोजित होने वाली अहम प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान छात्रों को बाहरी दिक्कतों से बचाने के लिए संसद की स्थायी समिति ने कड़े कदम उठाने की सिफारिश की है। राज्यसभा सांसद मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में व्यापक सुधार और प्रशासनिक मजबूती को लेकर अपनी अहम रिपोर्ट राज्यसभा के सभापति को शुक्रवार को सौंप दी। समिति का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि अहम परीक्षाओं के दिन जिला प्रशासन किसी भी तरह के जुलूस, रैली या विशाल जनसभा की अनुमति न दे, ताकि यातायात पूरी तरह सुचारू रहे और किसी भी अभ्यर्थी का कीमती समय जाम या हंगामे के चलते बर्बाद न हो।

## सड़क पर जाम और रैलियों से छूट जाती है परीक्षा
संसदीय समिति की यह रिपोर्ट राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की प्रशासनिक खामियों को लेकर उपजे भारी विवाद और देशव्यापी छात्र आंदोलनों की पृष्ठभूमि में तैयार की गई है। इस विवाद के चलते व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से इस्तीफा तक देना पड़ा था। समिति ने रेखांकित किया कि परीक्षा के दिन बड़े जुलूसों अथवा राजनीतिक और सामाजिक सभाओं के कारण सड़कों पर भारी जाम लग जाता है, जिससे अभ्यर्थी तय समय पर अपने परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच पाते हैं।

इसी समस्या के समाधान के लिए समिति ने सिफारिश की है कि लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में जरूरी संशोधन किए जाएं। इस संशोधन के जरिए जिला स्तर के प्रशासन को यह स्पष्ट निर्देश दिया जाए कि परीक्षा के दिन किसी भी सार्वजनिक रैली या जनसभा की इजाजत बिल्कुल न दी जाए। इसके साथ ही स्थानीय पुलिस और प्रशासन पहले से ऐसे व्यापक प्रबंध करे जिससे यातायात और कानून-व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त रहे और किसी भी अभ्यर्थी को टल सकने वाले व्यवधानों का शिकार न होना पड़े।

## कुछ मिनट की देरी पर पूरे साल की मेहनत न हो बेकार
वर्तमान व्यवस्था के तहत राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी केवल परामर्श जारी करती है, जिसमें परीक्षार्थियों से कहा जाता है कि वे समय से काफी पहले केंद्रों पर पहुंचें और रास्ते में होने वाले आयोजनों का ध्यान खुद रखें। संसदीय समिति ने इस प्रक्रियागत रवैये पर गंभीर चिंता जताई। समिति ने स्पष्ट किया कि कई बार अप्रत्याशित कारणों से केंद्र पर महज चंद मिनट देरी से पहुंचने वाले छात्रों को प्रवेश द्वार से ही लौटा दिया जाता है। इस कठोर नियम की वजह से छात्रों की पूरे एक साल की कड़ी मेहनत और उनका भविष्य पल भर में तबाह हो जाता है।

समिति का मानना है कि कई बार वास्तविक और अपरिहार्य कारणों से परीक्षार्थी केंद्र पर पहुंचने में विलंब का शिकार हो जाते हैं। ऐसे छात्रों के साथ मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए समिति ने एक नया तंत्र बनाने की वकालत की है। इसके तहत अगर कोई छात्र देर से पहुंचता है, तो उससे देरी का वाजिब कारण दर्ज कराते हुए एक लिखित वचनपत्र पर हस्ताक्षर कराए जाएं और फिर उसे तुरंत परीक्षा कक्ष में जाने दिया जाए। हालांकि समिति ने यह सख्त शर्त भी जोड़ी है कि ऐसे परीक्षार्थी को केवल शेष बचे हुए समय में ही पर्चा हल करने की इजाजत मिले और किसी भी सूरत में अतिरिक्त समय न दिया जाए।

## 15 मिनट का अलग समय मिले जांच औपचारिकताओं के लिए
परीक्षा कक्ष के भीतर के माहौल को लेकर भी समिति ने व्यावहारिक सुधार की पेशकश की है। वर्तमान में जब छात्र भारी मानसिक और समय के दबाव में परीक्षा दे रहे होते हैं, तब वीक्षक उनके पास आकर उपस्थिति पत्रक पर हस्ताक्षर, बायोमेट्रिक जांच और अन्य कागजी औपचारिकताएं पूरी करवाते हैं। समिति ने पाया कि बीच परीक्षा में होने वाली इन प्रक्रियाओं से छात्रों का ध्यान भटकता है और उनका बहुमूल्य समय जाया होता है।

इस व्यवधान को खत्म करने के लिए समिति ने सुझाव दिया है कि उपस्थिति और सत्यापन जैसी सभी औपचारिकताओं को परीक्षा अवधि से पूरी तरह अलग रखा जाए। इसके लिए परीक्षा शुरू होने से 15 मिनट पहले या फिर परीक्षा खत्म होने के बाद 15 मिनट का अतिरिक्त और पृथक समय निर्धारित किया जाना चाहिए। इससे परीक्षार्थी अपने पूरे परीक्षा सत्र के दौरान बिना किसी बाहरी दखल के पूरी एकाग्रता के साथ सवालों को हल कर सकेंगे।

## इसका आप पर असर
यह सिफारिश लागू होने पर प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वाले लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों को मानसिक तनाव और अचानक आने वाली बाधाओं से बड़ी राहत मिलेगी।

- **यातायात में राहत:** परीक्षा के दिन जिला स्तर पर रैलियों पर रोक लगने से सड़कों पर अचानक लगने वाले जाम से मुक्ति मिलेगी। इससे छात्र समय पर बिना किसी तनाव के अपने तय परीक्षा केंद्र तक आसानी से पहुंच सकेंगे।
- **देरी पर बचाव:** किसी अनहोनी या जाम के चलते चंद मिनट लेट होने पर भी छात्रों को केंद्र से सीधे वापस नहीं लौटाया जाएगा। वे अंडरटेकिंग देकर बचे हुए समय में अपना पर्चा लिख सकेंगे, जिससे उनका पूरा साल बर्बाद होने से बच जाएगा।
- **एकाग्रता में सुधार:** परीक्षा हॉल में हस्ताक्षर और चेकिंग की औपचारिकताएं अलग से 15 मिनट में पूरी की जाएंगी। इससे मूल परीक्षा समय के दौरान छात्रों का ध्यान नहीं भटकेगा और वे शांति से पर्चा हल कर पाएंगे।
- **कानून-व्यवस्था का दायित्व:** जिला प्रशासन पर यह वैधानिक जिम्मेदारी होगी कि वह परीक्षा केंद्रों के आसपास कानून-व्यवस्था चाक-चौबंद रखे। स्थानीय प्रशासन को पहले से सुचारू ट्रैफिक रूट तैयार करने होंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की प्रशासनिक विफलताओं को लेकर संसद की स्थायी समिति ने यह विस्तृत समीक्षा तैयार की है।

- **नीट विवाद और जनाक्रोश:** मेडिकल प्रवेश परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों और प्रशासनिक विसंगतियों के चलते देश भर में छात्रों ने जबर्दस्त विरोध प्रदर्शन किया था। इसी विवाद के दबाव में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
- **कठोर नियमों के दुष्परिणाम:** परीक्षा केंद्रों पर महज कुछ मिनट की देरी से पहुंचे छात्रों को बिना किसी सुनवाई के बाहर कर दिया जाता था। इस वजह से छात्रों का एक पूरा साल और मानसिक संतुलन बुरी तरह प्रभावित हो रहा था।
- **अव्यवस्था और खराब योजना:** परीक्षा के दिन स्थानीय प्रशासन द्वारा रैलियों और जुलूसों को मंजूरी देने से बड़े शहरों में भीषण जाम लग जाता था। इस बाहरी व्यवधान को रोकने के लिए लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में संशोधनों की जरूरत महसूस की गई।
- **कक्षा के भीतर व्यवधान:** परीक्षा के दौरान इनविजिलेटर द्वारा बीच में हस्ताक्षर और जांच कराने से छात्रों का समय नष्ट होता था। समिति ने इसे छात्रों की एकाग्रता भंग करने वाला माना और अलग समय तय करने का सुझाव दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. संसदीय समिति की अध्यक्षता किसने की और रिपोर्ट किसे सौंपी गई?
इस स्थायी समिति की अध्यक्षता राज्यसभा सदस्य मुकुल वासनिक ने की और रिपोर्ट राज्यसभा के सभापति को सौंपी गई।

### 2. परीक्षा के दिन रैलियों पर रोक लगाने के लिए किस कानून में बदलाव की सिफारिश की गई है?
समिति ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में आवश्यक संशोधन करने की सिफारिश की है।

### 3. देर से पहुंचने वाले छात्रों के लिए समिति ने क्या नया नियम सुझाया है?
देरी का कारण लिखकर वचनपत्र देने के बाद छात्रों को प्रवेश मिलेगा, लेकिन उन्हें सिर्फ बचे हुए समय में परीक्षा देनी होगी।

### 4. क्या देर से पहुंचने वाले परीक्षार्थियों को अतिरिक्त समय मिलेगा?
नहीं, समिति ने स्पष्ट किया है कि देर से आने वाले छात्रों को किसी भी सूरत में अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।

### 5. परीक्षा के दौरान जांच और हस्ताक्षर के लिए कितना अलग समय मांगा गया है?
समिति ने परीक्षा शुरू होने से पहले या समाप्त होने के बाद 15 मिनट का अलग समय निर्धारित करने की सिफारिश की है।

### 6. यह रिपोर्ट किस विवाद के बाद तैयार की गई है?
यह रिपोर्ट राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा में पेपर लीक विवाद और एनटीए की प्रशासनिक खामियों के बाद लाई गई है।

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