# प्रिंस अलोइस के दौरे से भारत को मिला यूएनएससी में समर्थन और सौ अरब डॉलर के निवेश का भरोसा

> लिकटेंस्टाइन के क्राउन प्रिंस अलोइस की भारत यात्रा के दौरान 100 अरब डॉलर के निवेश विजन की पुष्टि हुई और सुरक्षा परिषद की गैर-स्थायी सीट के लिए समर्थन मिला।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/prince-alois-ke-daure-se-bharata-ko-mila-unsc-men-samarthana-aura-sau-araba-dolara-ke-nivesha-ka-bharosa-52300 · **Language:** Hindi
**Tags:** भारत लिकटेंस्टाइन संबंध, क्राउन प्रिंस अलोइस, यूएनएससी उम्मीदवारी, ईएफटीए व्यापार समझौता, विदेशी निवेश, नरेंद्र मोदी

यूरोपीय देश लिकटेंस्टाइन के क्राउन प्रिंस अलोइस की आधिकारिक भारत यात्रा द्विपक्षीय संबंधों और कूटनीतिक रणनीतियों के लिहाज से बेहद अहम साबित हुई है। चार दिवसीय इस महत्वपूर्ण दौरे पर दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच वैश्विक सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग और दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों पक्षों की ओर से जारी संयुक्त संदेश में वैश्विक शांति को अस्थिर करने वाले तत्वों के खिलाफ एकजुट होकर कड़ा रुख अपनाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

## आतंकवाद पर सख्त रुख और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समन्वय
क्राउन प्रिंस अलोइस 25 से 28 अक्टूबर 2026 तक भारत के आधिकारिक दौरे पर रहे। इस उच्चस्तरीय बैठक के बाद जारी किए गए साझा बयान में सीमा पार आतंकवाद और हिंसक कट्टरपंथ के हर स्वरूप की एक स्वर में भर्त्सना की गई। दोनों देशों ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंक के वित्तपोषण नेटवर्क पर पूर्ण विराम लगाने और हिंसा फैलाने वाले अपराधियों को न्याय के कटघरे में खड़ा करने को वैश्विक प्राथमिकता के रूप में रेखांकित किया गया।

## यूएनएससी में भारत की दावेदारी का खुला समर्थन
इस कूटनीतिक मुलाकात का एक मुख्य केंद्र संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से जुड़ा रहा। प्रिंस अलोइस ने वर्ष 2028-29 की अवधि के लिए सुरक्षा परिषद में भारत की गैर-स्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी का औपचारिक और सार्वजनिक समर्थन किया। इस बहुमूल्य सहयोग के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिकटेंस्टाइन का आभार प्रकट किया और वर्तमान वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप संयुक्त राष्ट्र की संरचना में जरूरी सुधारों की मांग पर बल दिया।

## व्यापार समझौता और बड़े निवेश की दिशा में कदम
रणनीतिक मसलों के अतिरिक्त आर्थिक मोर्चे पर भी यह संवाद अत्यंत प्रभावशाली रहा। भारत और EFTA के बीच हुए व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते (TEPA) के एक वर्ष पूरे होने के अवसर पर आर्थिक साझेदारी की समीक्षा की गई। इसके अंतर्गत आगामी 15 वर्षों के भीतर भारत में 100 अरब अमेरिकी डॉलर के प्रत्यक्ष निवेश और लगभग 10 लाख नए रोजगार सृजित करने के संकल्प की पुष्टि की गई। भविष्योन्मुखी तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, उन्नत विनिर्माण और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में लिकटेंस्टाइन की विशेषज्ञता और भारतीय बाजार की क्षमताओं को साथ लाने पर सहमति बनी।

## कर नियमों में सुगमता और भविष्य का रोडमैप
सीमा पार कारोबार और निवेश को अधिक सुरक्षित व पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से ‘डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट’ (DTAA) के मसौदे को शीघ्र अंतिम रूप देने पर दोनों पक्षों ने सहमति जताई। कूटनीतिक संबंधों को और प्रगाढ़ करने के लिए प्रिंस अलोइस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिकटेंस्टाइन आने का औपचारिक निमंत्रण भी दिया, जिससे आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सहयोग के नए द्वार खुलने की उम्मीद है।

## इसका आप पर असर
इस द्विपक्षीय समझौते से भारतीय अर्थव्यवस्था, तकनीकी उद्योग और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

- **भारत में प्रभाव:** आने वाले 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर के निवेश से देश के विनिर्माण और तकनीकी बुनियादी ढांचे को बड़ा संबल मिलेगा। इसके जरिए विभिन्न उच्च तकनीक क्षेत्रों में लगभग 10 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है।
- **वैश्विक मंच पर:** सुरक्षा परिषद की गैर-स्थायी सदस्यता के लिए यूरोपीय राष्ट्र का समर्थन मिलने से वैश्विक कूटनीति में भारत की स्थिति मजबूत होगी। इससे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रणनीतिक फैसलों में भारत की भागीदारी और असरदार बनेगी।
- **उद्योग और निवेशकों के लिए:** डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट के ड्राफ्ट पर तेजी से काम होने से कर संबंधी जटिलताएं दूर होंगी। दोनों देशों के बीच कारोबार करने वाली कंपनियों को दोहरे कराधान से राहत और कानूनी स्पष्टता मिलेगी।
- **तकनीकी क्षेत्र में:** कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हरित ऊर्जा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में संयुक्त प्रयासों से घरेलू शोध और उत्पादन को गति मिलेगी। भारतीय युवाओं और स्टार्टअप्स के लिए इन अत्याधुनिक क्षेत्रों में साझेदारी के नए रास्ते खुलेंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
यह उच्चस्तरीय बैठक और रणनीतिक सहमति भारत और ईएफटीए देशों के बीच बढ़ते आर्थिक व भू-राजनीतिक संबंधों के तहत संभव हुई है।

- **व्यापार समझौते की प्रगति:** भारत और ईएफटीए देशों के बीच हस्ताक्षरित व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते (TEPA) के सफल पहले वर्ष की पूर्णता ने इस मुलाकात की रूपरेखा तैयार की। इस समझौते में निर्धारित निवेश लक्ष्यों को जमीन पर उतारने के लिए दोनों पक्षों ने प्रतिबद्धता दोहराई।
- **सुरक्षा परिषद की रणनीति:** भारत वर्ष 2028-29 के कार्यकाल के लिए यूएनएससी में गैर-स्थायी सदस्यता हासिल करने की कूटनीतिक तैयारी कर रहा है। लिकटेंस्टाइन के खुले समर्थन से यूरोपीय देशों के बीच भारत की दावेदारी को व्यापक मान्यता प्राप्त हुई है।
- **आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता:** अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुई आतंकी घटना के बाद सीमा पार आतंकी गतिविधियों और वित्तीय पोषण पर नकेल कसने की आवश्यकता बढ़ गई थी। इस मुद्दे पर संयुक्त बयान जारी कर दोनों देशों ने आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता का साझा संदेश दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. क्राउन प्रिंस अलोइस का भारत दौरा कब आयोजित हुआ?
लिकटेंस्टाइन के क्राउन प्रिंस अलोइस 25 से 28 अक्टूबर 2026 तक भारत के आधिकारिक दौरे पर रहे।

### 2. यूएनएससी को लेकर प्रिंस अलोइस ने क्या घोषणा की?
उन्होंने वर्ष 2028-29 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद में भारत की गैर-स्थायी सदस्यता की दावेदारी का खुला समर्थन किया।

### 3. दोनों देशों के बीच निवेश को लेकर क्या सहमति बनी?
अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख नए रोजगार सृजित करने के विजन की पुष्टि की गई।

### 4. किन तकनीकी क्षेत्रों में साझेदारी पर जोर दिया गया है?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), अंतरिक्ष तकनीक, उन्नत विनिर्माण और हरित ऊर्जा में संयुक्त सहयोग पर सहमति बनी है।

### 5. संयुक्त बयान में किस आतंकी घटना की कड़े शब्दों में निंदा की गई?
बयान में 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की स्पष्ट और कड़े शब्दों में निंदा की गई।

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