पंजाब में बढ़े ट्रांसपोर्ट शुल्क ने कश्मीर की शादियों में मटन का संकट खड़ा किया पंजाब में पशु वाहनों पर बढ़े शुल्क से कश्मीर में मटन की सप्लाई गड़बड़ा गई है, जिससे दाम बढ़ने के साथ कई परिवारों ने शादी के कार्ड बांटना रोक दिया है और कुछ ने शादियां टाल दी हैं. कश्मीर में इन दिनों शादियों की तैयारी में जुटे परिवार अचानक परेशान हो गए हैं. वजह है मटन का संकट, जो पंजाब सरकार के एक फैसले के बाद खड़ा हुआ है. पंजाब में पशु ले जाने वाले वाहनों पर शुल्क बढ़ा दिया गया है, जिसका सीधा असर कश्मीर पहुंचने वाली भेड़ों की सप्लाई पर पड़ा है. नतीजा यह हुआ कि कई परिवारों ने शादी के इनविटेशन कार्ड बांटना ही बंद कर दिया है, तो कुछ ने शादियां कुछ दिनों के लिए पोस्टपोन कर दी हैं. लोग बस यही उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द मटन की सप्लाई पटरी पर लौट आए. श्रीनगर में ऐसे कई परिवार हैं जिनके घरों में आने वाले हफ्तों में शादियां होनी हैं, लेकिन मटन की किल्लत ने उनकी योजनाओं में खलल डाल दिया है. कश्मीर में मटन सिर्फ एक खाने की चीज नहीं, बल्कि शादी-ब्याह की रस्मों का अहम हिस्सा माना जाता है, इसलिए इसकी कमी सीधे तौर पर परिवारों की तैयारियों पर भारी पड़ रही है. पंजाब का शुल्क बना मुसीबत की जड़ मटन व्यापारियों का कहना है कि पंजाब सीमा पर भेड़ ले जाने वाले हर ट्रक से अब 25,000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं. पहले यह रकम सिर्फ 5,000 रुपये हुआ करती थी. इस भारी बढ़ोतरी ने पूरी सप्लाई चेन को हिला दिया है. कई जगहों पर मटन की सप्लाई पर सीधा असर दिख रहा है, जिससे बाजार में उपलब्धता घट गई है. कीमतों में उछाल, शादियों पर भारी असर इस पूरे विवाद का सीधा असर कीमतों पर पड़ा है. मटन का दाम 700 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 750 रुपये प्रति किलो हो गया है. एक-दो किलो के हिसाब से देखें तो यह फर्क बहुत बड़ा नहीं लगता, लेकिन शादियों में एक साथ 200 से 400 किलो तक मटन की जरूरत पड़ती है. इतनी बड़ी मात्रा में यही मामूली सा दिखने वाला अंतर कई हजार रुपयों का बोझ बन जाता है, जो आम परिवारों के बजट को बिगाड़ रहा है. वजवान की थाली भी हो रही छोटी यह संकट ऐसे वक्त सामने आया है जब कश्मीर में अप्रैल से अक्टूबर तक शादियों का सीजन चलता रहता है. इसका सीधा असर कश्मीरी पारंपरिक दावत वजवान पर भी पड़ा है, जिसमें मटन से बने एक नहीं बल्कि कई तरह के व्यंजन परोसे जाते हैं. अब सप्लाई कम होने से इन व्यंजनों की संख्या भी घटती जा रही है, जिससे मेहमानों की थाली पहले जैसी नहीं रह गई है. जम्मू-कश्मीर सरकार ने बताया मनमाना जम्मू-कश्मीर सरकार ने पंजाब के इस शुल्क को गैरकानूनी और मनमाना करार दिया है. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर पशु ढोने वाले वाहनों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के जारी रखने की मांग की है. उमर अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि ये वाहन सिर्फ हाईवे का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए इस तरह की वसूली का कोई औचित्य नहीं बनता. कश्मीर मटन डीलर्स एसोसिएशन के महासचिव मेहराज-उद-दीन गनी ने बताया कि भेड़ मंडियां लगातार नौ दिनों से बंद पड़ी हैं. उनका कहना है कि यह शादियों का मौसम है, लेकिन व्यापारी हालात के आगे मजबूर हैं और चाहकर भी सप्लाई पूरी नहीं कर पा रहे. कश्मीर में मांसाहार की बड़ी भूमिका कश्मीर में करीब 90 फीसदी लोग मांसाहारी हैं और यहां मटन की खपत पूरे देश में सबसे ज्यादा मानी जाती है. हर साल यहां 600 लाख किलो से ज्यादा मटन खाया जाता है. इसका आधे से ज्यादा हिस्सा हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान से आने वाली भेड़ों से पूरा होता है. सामान्य दिनों में रोजाना 40 से 50 ट्रक, यानी करीब 8,000 भेड़ें कश्मीर पहुंचती हैं. शादी के सीजन में यह संख्या बढ़कर 60 से 70 ट्रक, यानी करीब 11,000 भेड़ों तक पहुंच जाती है. पंजाब सरकार का पक्ष वहीं इस पूरे मुद्दे पर पंजाब सरकार का कहना है कि यह कोई नया टैक्स नहीं, बल्कि पशु मंडी शुल्क है. अधिकारियों का दावा है कि कुछ व्यापारी नियमों का पालन किए बिना पशु बाहर ले जा रहे हैं, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है. दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर के व्यापारियों का तर्क है कि पंजाब सिर्फ रास्ते में पड़ने वाला ट्रांजिट स्टेट है, इसलिए वहां टैक्स लगाया ही नहीं जाना चाहिए. अब आगे क्या इस विवाद को सुलझाने के लिए पंजाब और जम्मू-कश्मीर के अधिकारियों की जल्द बैठक होने की संभावना जताई जा रही है. बैठक के बाद पंजाब सरकार इस मसले पर औपचारिक जवाब देगी, जिस पर कश्मीर के मटन व्यापारियों और शादी की तैयारी कर रहे परिवारों की नजरें टिकी हैं. इसका आप पर असर • भारत में: राज्यों के बीच पशु परिवहन पर लगने वाले शुल्क और टैक्स के मसले सीधे तौर पर मीट की सप्लाई चेन और कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं, जो पूरे देश में उपभोक्ताओं तक असर पहुंचा सकता है. • कश्मीर में: जिन परिवारों में अगले कुछ हफ्तों में शादियां होनी हैं, उन्हें मटन की ऊंची कीमत और सप्लाई में देरी के चलते बजट और डेट प्लानिंग दोनों पर असर झेलना पड़ सकता है, जब तक पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच यह विवाद नहीं सुलझता. सवाल-जवाब 1. कश्मीर में मटन की कमी की वजह क्या है? पंजाब सरकार ने पशु ले जाने वाले वाहनों पर शुल्क बढ़ा दिया है, जिससे भेड़ों की सप्लाई प्रभावित हुई है और कश्मीर में मटन की किल्लत हो गई है. 2. पंजाब सीमा पर अब ट्रकों से कितना शुल्क वसूला जा रहा है? मटन व्यापारियों के मुताबिक भेड़ ले जाने वाले हर ट्रक से अब 25,000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं, जबकि पहले यह रकम 5,000 रुपये हुआ करती थी. 3. मटन की कीमत कितनी बढ़ी है? मटन का दाम 700 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 750 रुपये प्रति किलो हो गया है. 4. इस संकट से शादियों पर क्या असर पड़ रहा है? कई परिवारों ने शादी के इनविटेशन कार्ड बांटना रोक दिया है और कुछ ने शादियां कुछ दिनों के लिए पोस्टपोन कर दी हैं, क्योंकि शादियों में एक साथ 200-400 किलो मटन की जरूरत होती है. 5. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस मुद्दे पर क्या किया? उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर पशु ढोने वाले वाहनों की आवाजाही बिना रुकावट जारी रखने की मांग की और कहा कि ये वाहन सिर्फ हाईवे का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए वसूली का कोई औचित्य नहीं है. 6. पंजाब सरकार इस शुल्क पर क्या कहती है? पंजाब सरकार का कहना है कि यह नया टैक्स नहीं बल्कि पशु मंडी शुल्क है और कुछ व्यापारी नियमों का पालन किए बिना पशु बाहर ले जा रहे हैं, जिससे राजस्व का नुकसान हो रहा है. 7. कश्मीर में हर साल कितना मटन खाया जाता है? कश्मीर में हर साल 600 लाख किलो से ज्यादा मटन खाया जाता है, और यहां की करीब 90 फीसदी आबादी मांसाहारी है. 8. इस विवाद को सुलझाने के लिए आगे क्या होगा? पंजाब और जम्मू-कश्मीर के अधिकारियों की जल्द बैठक होने की संभावना है, जिसके बाद पंजाब सरकार औपचारिक जवाब देगी. https://trendkia.com/national/punjab-men-barhe-transaporta-shulka-ne-kashmir-ki-shadiyon-men-matana-ka-snkata-khara-kiya-4026 TrendKia — Har trend, sabse pehle.