# पंजाब में पराली जलाने के 84 मामले दर्ज होने के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया

> धान की कटाई के बाद पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए पंजाब में 28 मामलों में जुर्माना लगाने के साथ 13 किसानों के रिकॉर्ड में रेड एंट्री दर्ज की गई है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/punjab-men-parali-jalane-ke-84-mamale-darja-hone-ke-bada-prashasana-ne-kara-rukha-apanaya-43732 · **Language:** Hindi
**Tags:** पंजाब, पराली दहन, सीएक्यूएम, अमृतसर, तरनतारन, पर्यावरणीय मुआवजा, कृषि प्रदूषण

धान की कटाई शुरू होते ही पंजाब के खेतों में आगजनी रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर सघन निगरानी अभियान चलाया जा रहा है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग द्वारा 5 अक्टूबर तक दर्ज किए गए आधिकारिक ब्योरे से यह साफ हुआ है कि राज्य भर में खेतों में अवशेष जलाने के कुल 84 मामले प्रकाश में आए हैं। इन सूचनाओं पर त्वरित संज्ञान लेते हुए जमीनी अमले ने 78 कृषि क्षेत्रों का भौतिक निरीक्षण पूरा किया। मौके पर पहुंचकर की गई जांच में 30 स्थानों पर आग लगाने की बात साबित हुई, जिसके बाद नियम तोड़ने वालों के खिलाफ दंडात्मक प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

## जुर्माना वसूली और राजस्व रिकॉर्ड में सख्त कदम
पर्यावरण नियमों के उल्लंघन को लेकर 28 अलग-अलग प्रकरणों में कुल 1.40 लाख रुपए का पर्यावरणीय मुआवजा तय किया गया है। अधिकारियों ने इस तय राशि में से अब तक 55 हजार रुपए की वसूली पूरी कर ली है। केवल आर्थिक दंड ही नहीं, बल्कि भविष्य में कड़े संदेश के तौर पर 13 किसानों के भूमि दस्तावेजों में रेड एंट्री दर्ज की जा चुकी है। इसके साथ ही एक गंभीर मामले में पुलिस प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है। जमीनी स्तर पर तैनात नोडल अफसरों एवं पर्यवेक्षकों ने 36 संदिग्ध स्थानों पर कारण बताओ नोटिस और औपचारिक चेतावनियां थमाई हैं।

## अमृतसर और तरनतारन में सबसे अधिक उल्लंघन
क्षेत्रीय स्तर पर आगजनी के मामलों का विश्लेषण करें तो अमृतसर जिला सूची में सबसे ऊपर दिखाई देता है। अकेले इस जिले में आग की 49 घटनाएं सामने आईं, जहां टीमों ने 45 भूखंडों की भौतिक पड़ताल की। इस दौरान 13 जगहों पर अवशेष जलाना सही पाया गया। प्रशासन ने वहां 11 प्रकरणों में 55 हजार रुपए की क्षतिपूर्ति निर्धारित की, जिसमें से 35 हजार रुपए वसूल किए जा चुके हैं, जबकि 32 मामलों में चेतावनी नोटिस थमाए गए हैं।

दूसरे पायदान पर रहे तरनतारन जिले में 18 घटनाएं दर्ज की गईं। जांच दल ने यहां 16 खेतों का मुआयना किया, जिनमें से 9 स्थानों पर आग की पुष्टि हुई। यहां 9 मामलों में कुल 45 हजार रुपए का हर्जाना लगाया गया, जिससे 10 हजार रुपए राजकोष में जमा हुए। इसी जिले में 9 किसानों की जमाबंदी में रेड एंट्री भी की गई है।

## फिरोजपुर और पटियाला में भी दर्ज हुई कार्रवाई
फिरोजपुर जिले में अवशेष जलाने के 5 मामले सामने आए थे। अधिकारियों ने इन सभी 5 खेतों का सत्यापन किया और प्रत्येक जगह आग लगने की बात सच निकली। इस पर 5 मामलों में 25 हजार रुपए का हर्जाना लगाया गया, जिससे 5 हजार रुपए वसूल हुए और 4 किसानों के खिलाफ रेड एंट्री दर्ज हुई। पटियाला जिले में दर्ज 2 मामलों की जांच के दौरान दोनों स्थानों पर पराली जलाना पाया गया। पटियाला में दोनों मामलों पर कुल 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है, जिसकी वसूली होना अभी बाकी है। जिले में एक किसान पर एफआईआर भी दर्ज कराई गई है।

## इसका आप पर असर
खेतों में अवशेष जलाने पर हो रही इस कठोर कार्रवाई का सीधा असर किसानों की आर्थिक स्थिति और राजस्व सुविधाओं पर पड़ रहा है।

- **भारत में:** राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सहित उत्तरी राज्यों में सर्दियों के दौरान वायु गुणवत्ता बनाए रखने के लिए यह जमीनी निगरानी अहम है। पराली की घटनाओं में कमी आने से मौसमी धुंध और सांस संबंधी परेशानियों के खतरे को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
- **पंजाब में:** नियम तोड़ने वाले किसानों को प्रति उल्लंघन भारी पर्यावरणीय हर्जाना चुकाना पड़ रहा है। राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री दर्ज होने से किसानों को सरकारी योजनाओं के लाभ और ऋण प्राप्त करने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
- **किसानों के लिए:** पकड़े जाने पर न केवल मौके पर जुर्माना वसूला जा रहा है बल्कि पुलिस एफआईआर का कानूनी जोखिम भी बढ़ गया है। ऐसे में किसानों के लिए फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक वैज्ञानिक साधनों को अपनाना ही एकमात्र सुरक्षित रास्ता है।
- **नागरिक स्वास्थ्य:** ग्रामीण और उपनगरीय आबादी को जहरीले धुएं से सीधे तौर पर राहत मिलने की संभावना बढ़ती है। समय रहते की गई प्रशासनिक सख्ती स्थानीय स्तर पर हवा के स्तर को बिगड़ने से रोकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
धान की कटाई और रबी फसलों की बुवाई के बीच सीमित समय होने के कारण किसान खेत जल्दी खाली करने के लिए अवशेषों में आग लगाते हैं, जिसे रोकने के लिए निगरानी तंत्र सक्रिय हुआ है।

- **सीमित बुवाई अंतराल:** धान की कटाई के तुरंत बाद अगली फसल के लिए खेत तैयार करने का समय बहुत कम होता है। पारंपरिक तौर पर अवशेषों को जल्दी साफ करने का सबसे सस्ता और त्वरित तरीका आग लगाना माना जाता रहा है।
- **उपग्रह आधारित निगरानी:** वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग द्वारा उपग्रहों के जरिए खेतों पर निरंतर नजर रखी जा रही है। किसी भी स्थान पर थर्मल विसंगति या आग दिखते ही जमीनी नोडल अधिकारियों को अलर्ट भेजा जाता है।
- **प्रशासनिक जवाबदेही:** वायु प्रदूषण के बढ़ते दबाव के चलते निगरानी दलों पर समय रहते कार्रवाई करने का स्पष्ट निर्देश है। इसी वजह से 84 घटनाओं की सूचना मिलते ही 78 स्थानों पर तुरंत टीमों को भेजकर जांच कराई गई।

## सवाल-जवाब

### 1. पंजाब में 5 अक्टूबर तक पराली जलाने की कितनी घटनाएं सामने आई हैं?
राज्य में 5 अक्टूबर तक कुल 84 आग लगने की घटनाएं रिपोर्ट की गई हैं।

### 2. कितने खेतों की भौतिक जांच की गई और कितनी जगह आग की पुष्टि हुई?
कुल 78 खेतों का स्थलीय निरीक्षण किया गया, जिनमें से 30 स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई।

### 3. किसानों पर कितना पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है?
कुल 28 मामलों में 1.40 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है, जिसमें से 55 हजार रुपए वसूले जा चुके हैं।

### 4. किस जिले में पराली जलाने के सबसे ज्यादा मामले दर्ज हुए?
अमृतसर जिले में सबसे अधिक 49 आग लगने की घटनाएं दर्ज की गई हैं।

### 5. तरनतारन और फिरोजपुर में कितनी घटनाएं सामने आई हैं?
तरनतारन में 18 घटनाएं और फिरोजपुर में 5 पराली जलाने के मामले दर्ज किए गए हैं।

### 6. क्या किसी किसान पर पुलिस प्राथमिकी भी दर्ज हुई है?
हां, पटियाला जिले में पराली जलाने के आरोप में एक मामले में एफआईआर दर्ज की गई है।

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