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  "type": "article",
  "title": "पंजाब में तीन विधायकों के इस्तीफे पर गरमाई राजनीति, कांग्रेस बोली- रिमोट से चल रही सरकार और मचेगी भगदड़",
  "summary": "पंजाब में आम आदमी पार्टी के तीन विधायकों के इस्तीफे के बाद कांग्रेस नेताओं ने निशाना साधा है। प्रमोद तिवारी और उदित राज ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार दिल्ली से चलाई जा रही है और आने वाले दिनों में पार्टी में और बड़ी टूट देखने को मिलेगी।",
  "content": "पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के भीतर मची हलचल के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। राज्य में पार्टी के तीन विधायकों द्वारा सदस्यता छोड़े जाने के बाद 2 नवंबर को कांग्रेस ने तीखा हमला बोला। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं प्रमोद तिवारी और उदित राज ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी इस समय गंभीर आंतरिक संकट का सामना कर रही है, जिसके चलते आने वाले दिनों में और भी नेता बगावत की राह पकड़ सकते हैं। यह पूरा विवाद कुंवर विजय प्रताप सिंह, हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौरामाजरा के इस्तीफे के बाद खड़ा हुआ है।\n\nडूबते जहाज से भागने की मची होड़: प्रमोद तिवारी का वार\nकांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने विधायकों के इस्तीफे पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जब कोई जहाज डूबने की कगार पर पहुंचता है, तो उस पर सवार लोग अपनी जान बचाने के लिए सबसे पहले बाहर कूदते हैं। उन्होंने राज्य के राजनीतिक हालात पर कटाक्ष करते हुए कहा कि सियासत को पूरी तरह मजाक बनाकर रख दिया गया है। तिवारी ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि जो नेतृत्व खुद नशे में रहता है, वह दूसरों को नशामुक्त करने का दिखावा कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश और दुनिया भर में इस बात की चर्चा है कि शासन किस तरह चल रहा है, और आम आदमी पार्टी ने जनता के साथ बड़ा विश्वासघात किया है।\n\nदिल्ली से संचालित हो रही सरकार: उदित राज के गंभीर आरोप\nकांग्रेस नेता उदित राज ने भी आम आदमी पार्टी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन तीन विधायकों का हटना केवल शुरुआत है और आने वाले समय में पार्टी छोड़कर जाने वालों की संख्या और बढ़ेगी। उदित राज ने सवाल खड़ा किया कि इतने लंबे समय से ये नेता पार्टी में क्या कर रहे थे, जबकि पार्टी के भीतर असंतोष पहले से सुलग रहा था। उन्होंने दावा किया कि जब पहले पार्टी के सांसदों ने बगावत की थी, उस वक्त भी 40 से 45 विधायक पार्टी छोड़ने का मन बना चुके थे।\n\nउदित राज ने आगे कहा कि आज राज्य की जनता सच्चाई जान चुकी है कि शासन की बागडोर किसके हाथ में है। उन्होंने दावा किया कि राज्य की सरकार चलाने में भगवंत मान की कोई सक्रिय भूमिका नहीं है और वे निष्क्रिय पड़े रहते हैं। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि पंजाब का शासन अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और उनकी टीम द्वारा दिल्ली से चलाया जा रहा है। उदित राज के अनुसार, पार्टी के भीतर मची यह भगदड़ आगे चलकर और भी विकराल रूप लेगी।\n\nसदन से सदस्यता रद्द कराने की तैयारी में आम आदमी पार्टी\nदूसरी तरफ, 2 नवंबर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले विधायकों के खिलाफ आम आदमी पार्टी ने भी जवाबी कानूनी और विधायी तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी इन विधायकों को विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराने के कानूनी विकल्पों पर काम कर रही है। यह पूरा सियासी घटनाक्रम आम आदमी पार्टी द्वारा साल 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों के मद्देनजर अपने 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करने के ठीक एक दिन बाद सामने आया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पार्टी विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां से मिलकर इन विधायकों की सदस्यता निरस्त करने की औपचारिक याचिका दायर करने पर विचार कर रही है।\n\nइसका आप पर असर\nपंजाब की राजनीति में तीन विधायकों के इस्तीफे और दलबदल से प्रशासनिक प्राथमिकताओं और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।\n\n• पंजाब में: सत्तारूढ़ दल के भीतर असंतोष बढ़ने से सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक स्थिरता पर असर पड़ सकता है। विधायकों की अयोग्यता याचिका और उपचुनावों की संभावना से संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।\n• भारत में: राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन और विभिन्न राज्यों में दलों के आपसी समीकरणों पर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। क्षेत्रीय दलों में दिल्ली बनाम राज्य नेतृत्व के विवाद अन्य राज्यों के राजनीतिक विमर्श में भी उठ सकते हैं।\n• मतदाताओं के लिए: 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की प्राथमिकताओं में बदलाव देखने को मिलेगा। जिन हलकों के विधायकों ने पाला बदला है, वहां के मतदाताओं को नए राजनीतिक समीकरणों का सामना करना पड़ेगा।\n• विधानसभा की संरचना पर: अध्यक्ष के समक्ष अयोग्यता याचिका जाने से सदन में संख्या बल और विधायी प्रक्रियाओं पर दबाव बनेगा। आने वाले सत्रों में विपक्षी दल सरकार की स्थिरता और नियंत्रण पर सीधे सवाल उठाएंगे।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह राजनीतिक टकराव आम आदमी पार्टी द्वारा 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करने के तुरंत बाद आंतरिक मतभेदों के फूटने से हुआ है।\n\n• टिकट वितरण और चुनावी सूची: पार्टी द्वारा 2027 चुनावों के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली सूची घोषित किए जाने के ठीक एक दिन बाद यह बगावत सामने आई। सूची सामने आने के बाद कुछ मौजूदा विधायकों में उपेक्षा और असंतोष की स्थिति बनी।\n• नेतृत्व और नियंत्रण का विवाद: विपक्षी नेताओं का आरोप है कि राज्य प्रशासन को स्थानीय नेतृत्व के बजाय दिल्ली के वरिष्ठ नेताओं द्वारा नियंत्रित किया जा रहा है। इसी केंद्रीय हस्तक्षेप को असंतोष की बड़ी वजह बताया गया है।\n• पार्टी बदलने का सिलसिला: पहले भी पार्टी सांसदों के अलग होने के दौरान कई विधायकों के छिटकने की चर्चाएं रही थीं। इस बार तीन विधायकों द्वारा सदस्यता छोड़कर भाजपा में शामिल होने से विवाद खुलकर सामने आ गया।\n• अयोग्यता की कार्रवाई: विधायकों के पाला बदलने के बाद दल-बदल विरोधी नियमों के तहत स्पीकर के जरिए सदस्यता खत्म कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके चलते दोनों खेमों में कानूनी और राजनीतिक खींचतान और बढ़ गई है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पंजाब में किन विधायकों ने आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दिया है?\nकुंवर विजय प्रताप सिंह, हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौरामाजरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया है।\n\n2. कांग्रेस नेताओं ने पंजाब सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?\nप्रमोद तिवारी और उदित राज ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार दिल्ली से चलाई जा रही है और भगवंत मान की शासन में कोई सक्रिय भूमिका नहीं है।\n\n3. उदित राज ने कितने विधायकों के पार्टी छोड़ने की संभावना का दावा किया?\nउदित राज ने दावा किया कि जब पहले पार्टी के सांसद बाहर निकले थे, तब 40 से 45 विधायक भी पार्टी छोड़ने के लिए तैयार थे।\n\n4. आम आदमी पार्टी ने बागी विधायकों के खिलाफ क्या कदम उठाया है?\nपार्टी विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां से संपर्क कर इन विधायकों की विधानसभा सदस्यता रद्द कराने और उन्हें अयोग्य घोषित कराने की तैयारी कर रही है।\n\n5. यह राजनीतिक संकट किस बड़े घटनाक्रम के बाद सामने आया?\nयह विवाद आम आदमी पार्टी द्वारा 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए 40 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी करने के अगले दिन शुरू हुआ।",
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