# पूर्णिया की पदयात्रा में राहुल गांधी पर बरसे हिमंता बिस्वा सरमा, हार पर रोने के बजाय संसद में बहस की दी नसीहत

> बिहार के पूर्णिया में भाजपा की पदयात्रा के दौरान असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी के बयानों और चुनावी शिकायतों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने चुनावी पराजय का रोना छोड़कर संसद में गरिमापूर्ण चर्चा करने की सलाह दी।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-11-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/purniya-ki-padayatra-men-rahul-gandhi-para-barase-himanta-biswa-sarma-hara-para-rone-ke-bajaya-snsada-men-bahasa-ki-di-nasihata-56372 · **Language:** Hindi
**Tags:** हिमंता बिस्वा सरमा, राहुल गांधी, पूर्णिया, बिहार राजनीति, भाजपा पदयात्रा, संसद बहस

बिहार के पूर्णिया शहर में 4 नवंबर को भारतीय जनता पार्टी की तरफ से ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा आयोजित की गई। इस बड़े राजनीतिक कार्यक्रम में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा विशेष रूप से शामिल हुए। इस दौरान मंच और पदयात्रा में बिहार सरकार के मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल, रत्नेश सदा समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और बड़ी तादाद में कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत में असम के मुख्यमंत्री ने चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के बावजूद जुटी विशाल भीड़ का आभार व्यक्त किया। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि इतनी तेज गर्मी में भी लोगों की यह मौजूदगी लोकतंत्र के प्रति उनके उत्साह को दर्शाती है, और वे सब मिलकर इस पदयात्रा को आगे बढ़ाएंगे।

## चुनावी हार और वोट चोरी के आरोपों पर पलटवार
विपक्ष की ओर से चुनावों में धांधली और वोट चोरी के लगातार लगाए जा रहे आरोपों पर हिमंता बिस्वा सरमा ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के प्रमुख नेता देश भर में यह नैरेटिव बनाने का प्रयास कर रहे हैं कि चुनावों में वोट की चोरी हो रही है। उन्होंने इस बात को खारिज करते हुए तंज कसा कि देश में चोरी जरूर हो रही है, लेकिन वह जनादेश या मतों की चोरी नहीं बल्कि जनता के दिलों की चोरी है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भाजपा ने जनसेवा के जरिए आम जनता का दिल जीता है, जिसे विरोधी दल पचा नहीं पा रहे हैं।

असम के मुख्यमंत्री ने विपक्ष की हताशा पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जब ऐतिहासिक स्थलों और प्रतीकों से विदेशी आक्रांताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, तो विपक्षी खेमे में घबराहट साफ दिख रही है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि इतिहास के पुनर्लेखन और आक्रांताओं के महिमामंडन के खत्म होने के बाद अब विपक्ष यह सोचकर परेशान है कि वे चुनाव कैसे जीतेंगे। उन्होंने आगे कहा कि विपक्षी दल न तो असम में जीत सकते हैं, न पश्चिम बंगाल में और न ही बिहार में उन्हें सफलता मिलने वाली है। व्यंग्य करते हुए उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष को चुनाव जीतने की इतनी ही ललक है तो उन्हें पड़ोसी मुल्क भेज दिया जाना चाहिए, जहां वे अपनी किस्मत आजमा सकते हैं।

## दीपावली पर गुलाब वाले वीडियो पर तीखा कटाक्ष
कार्यक्रम के दौरान संवाददाताओं से मुखातिब होते हुए असम के मुख्यमंत्री ने एक सोशल मीडिया वीडियो का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मंगलवार को राहुल गांधी ने एक वीडियो साझा किया था, जिसमें वे हाथ में गुलाब लिए प्रधानमंत्री को दीपावली की शुभकामनाएं दे रहे थे। इस पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं का बुनियादी ज्ञान होना बेहद आवश्यक है। भारतीय रीति-रिवाजों में दीपावली जैसे पावन पर्व की अपनी विशेष परंपराएं हैं, जबकि गुलाब का आदान-प्रदान आमतौर पर वैलेंटाइन डे पर देखा जाता है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक समझ के अभाव में इस तरह के प्रतीकात्मक वीडियो जारी करना केवल राजनीतिक अपरिपक्वता को दर्शाता है।

## सड़क के हंगामे को छोड़कर संसद में बहस की दी सलाह
संसदीय मर्यादा की चर्चा करते हुए असम के मुख्यमंत्री ने विपक्ष के नेता के दायित्वों की याद दिलाई। उन्होंने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि यदि किसी नेता के पास विपक्ष के नेता का संवैधानिक पद है, तो प्रधानमंत्री और सरकार के साथ नीतिगत मुद्दों पर तीखी और सार्थक बहस कहां होनी चाहिए। क्या ऐसी गंभीर राजनीतिक बहसें गलियों और सड़कों पर होनी चाहिए या फिर देश के सर्वोच्च विधायी सदन, यानी संसद के भीतर होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनी हुई संसद ही विचार-विमर्श और नीति निर्माण का सबसे उचित मंच है।

उन्होंने कहा कि भारत एक परिपक्व और संप्रभु लोकतंत्र है, जिसकी तुलना अन्य अस्थिर पड़ोसी देशों से नहीं की जा सकती। जनता को सड़कों पर लाकर अराजकता फैलाने या विदेशी संपर्कों के जरिए आंतरिक राजनीति को प्रभावित करने की कोशिशों को गलत बताते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि विपक्ष को संसद में शांतिपूर्ण ढंग से चर्चा में भाग लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता संसद में गंभीर तर्कों को सुनना चाहती है, न कि केवल निरर्थक शोर-शराबा।

## चुनावी राजनीति में दिल जीतने की नसीहत
अपने संबोधन के अंतिम चरण में असम के मुख्यमंत्री ने चुनावी राजनीति में सफलता का मूलमंत्र साझा किया। उन्होंने कहा कि जो लोग बार-बार वोट चोरी का बहाना बनाते हैं, उन्हें जमीनी राजनीति और जनता से जुड़ाव का तरीका सीखना चाहिए। लगातार मिलने वाली चुनावी हार के बाद शिकायतों का रोना रोने और व्यवस्था पर दोष मढ़ने से कभी चुनावी सफलता हासिल नहीं हो सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव जीतने का एकमात्र रास्ता जनता के बीच जाकर उनका विश्वास और दिल जीतना है। प्रशासनिक प्रक्रियाओं या एसआईआर जैसी व्यवस्थाओं के खिलाफ गैर-जरूरी हंगामा खड़ा करने से किसी भी राजनीतिक दल को कोई चुनावी फायदा नहीं मिलने वाला है।

## इसका आप पर असर
इस राजनीतिक बयानबाजी और पदयात्रा से बिहार के चुनावी माहौल और संसद में सत्ता-विपक्ष के रुख पर सीधा असर देखने को मिलेगा।

- **भारत में:** संसद के आगामी सत्रों में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तीखी नोंकझोंक और तेज हो सकती है। आम नागरिकों को नीतिगत बहसों के दौरान राजनीतिक टकराव के बढ़ते स्तर देखने को मिलेंगे।
- **बिहार में:** सीमांचल क्षेत्र के पूर्णिया में भाजपा का यह शक्ति प्रदर्शन राज्य के आगामी राजनीतिक समीकरणों को मजबूत करने की कोशिश है। स्थानीय कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के बीच चुनावी तैयारियों की सरगर्मी तेजी से बढ़ेगी।
- **विपक्षी राजनीति पर:** चुनाव सुधारों और वोटिंग प्रक्रियाओं को लेकर विपक्ष के रुख पर सत्तारूढ़ गठबंधन का आक्रामक पलटवार जारी रहेगा। इससे विपक्ष को अपनी चुनावी रणनीति और जनसंपर्क के तरीकों की समीक्षा करनी पड़ सकती है।
- **संसदीय मर्यादा पर:** सड़क के विरोध प्रदर्शनों के मुकाबले संसद के पटल पर तर्क रखने की मांग से विधायी बहसों की जवाबदेही पर नए सिरे से चर्चा शुरू हो सकती है। जनता के असल मुद्दों को सदन में मजबूती से उठाने का दबाव सभी दलों पर बना रहेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
बिहार के पूर्णिया में भाजपा की इस पदयात्रा और आक्रामक बयानों की मुख्य वजह आगामी राजनीतिक चुनौतियां और विपक्षी हमलों का पुरजोर जवाब देना है।

- **सीधा कारण:** विपक्ष की ओर से लगातार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग और जनादेश पर सवाल उठाने वाले बयानों के बाद भाजपा ने जवाबी हमला तेज किया है। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर जारी किए गए प्रतीकात्मक वीडियो पर सांस्कृतिक संदर्भों को लेकर यह तीखी प्रतिक्रिया दी गई।
- **पृष्ठभूमि और परिस्थितियां:** बिहार के सीमांचल इलाके में राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए 4 नवंबर को ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा आयोजित की गई थी। इस आयोजन में असम के मुख्यमंत्री समेत बिहार के मंत्रियों और शीर्ष नेताओं को एकजुट कर बड़ा राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया गया।
- **आगे क्या होगा:** चुनावी धांधली के दावों और सांस्कृतिक मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष के बीच वाकयुद्ध और गहराएगा। आने वाले दिनों में यह टकराव संसद के भीतर चर्चाओं और सड़क पर होने वाले राजनीतिक कार्यक्रमों दोनों में और मुखर रूप लेगा।

## सवाल-जवाब

### 1. पूर्णिया में भाजपा ने किस पदयात्रा का आयोजन किया था?
पूर्णिया में 4 नवंबर को 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' शीर्षक से पदयात्रा आयोजित की गई थी।

### 2. इस पदयात्रा में कौन-कौन से प्रमुख नेता शामिल हुए?
इसमें असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, बिहार सरकार के मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल और रत्नेश सदा समेत कई वरिष्ठ भाजपा नेता शामिल हुए।

### 3. वोट चोरी के आरोपों पर हिमंता बिस्वा सरमा ने क्या पलटवार किया?
उन्होंने कहा कि देश में वोटों की नहीं, बल्कि जनसेवा के जरिए जनता के दिलों की चोरी हो रही है।

### 4. दीपावली पर गुलाब के वीडियो को लेकर क्या टिप्पणी की गई?
उन्होंने कहा कि गुलाब वैलेंटाइन डे पर दिए जाते हैं, दीपावली पर नहीं, और विपक्ष को भारतीय संस्कृति की समझ होनी चाहिए।

### 5. असम के मुख्यमंत्री ने विपक्ष के नेता को बहस के लिए क्या सलाह दी?
उन्होंने सलाह दी कि सड़कों पर हंगामा करने के बजाय संसद के भीतर शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण तरीके से बहस की जानी चाहिए।

### 6. चुनाव जीतने को लेकर हिमंता बिस्वा सरमा ने क्या संदेश दिया?
उन्होंने कहा कि हारने पर रोने और शिकायत करने के बजाय जनता का दिल जीतने के लिए जमीन पर काम करना चाहिए।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._