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  "title": "पूर्वी बेंगलुरु में बदहाल सड़कों से दो किलोमीटर का सफर बना दो घंटे का संकट, अभिभावकों ने उठाए सवाल",
  "summary": "पूर्वी बेंगलुरु के वरथुर-गुंजुर मार्ग पर गड्ढों और अधूरे बुनियादी ढांचे के कारण स्कूली बच्चों को दो किलोमीटर की दूरी तय करने में दो घंटे लग रहे हैं, जिससे परेशान अभिभावकों ने सुरक्षित सड़कों की गुहार लगाई है।",
  "content": "पूर्वी बेंगलुरु के वरथुर-गुंजुर इलाके में रहने वाले परिवारों के लिए बच्चों को स्कूल भेजना रोजमर्रा का सबसे तनावपूर्ण संघर्ष बन चुका है। गड्ढों से भरी सड़कों, उड़ती धूल और बिगड़ती ट्रैफिक व्यवस्था ने इस पूरे कॉरिडोर को जाम के भंवर में धकेल दिया है। कुछ ही मिनटों में तय होने वाली मामूली दूरियां अब कई घंटों की लंबी और थकाऊ परीक्षा बन चुकी हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बुनियादी नागरिक सुविधाओं की अनदेखी के चलते स्कूली बच्चों और कामकाजी लोगों की दिनचर्या बुरी तरह पटरी से उतर चुकी है।\n\nदो किलोमीटर की दूरी और दो घंटे का थकाऊ सफर\nइस बदहाली का सबसे दर्दनाक असर छोटे स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। एक स्थानीय अभिभावक ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि उनकी बेटी की स्कूल बस को महज दो किलोमीटर का फासला तय करने में पूरे दो घंटे का समय लग गया। उन्होंने बताया कि अपनी बच्ची को बेहतर और सुरक्षित बचपन देने तथा स्कूल के नजदीक रहने के लिए उन्होंने भारी होम लोन लेकर यहां मकान खरीदा था। हर महीने लाखों रुपये का टैक्स चुकाने के बावजूद उनके परिवार को इस तरह की नारकीय स्थिति से जूझना पड़ रहा है।\n\nअभिभावकों का स्पष्ट कहना है कि वे किसी राजनीतिक दल या संगठन से जुड़े कार्यकर्ता नहीं हैं, बल्कि आम करदाता हैं। वे केवल इतना चाहते हैं कि उनके बच्चों को स्कूल जाने और सुरक्षित घर लौटने के लिए एक साफ और सही सड़क मिले। दो किलोमीटर की यात्रा में दो घंटे का समय बर्बाद होना बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल रहा है। सुबह जल्दी उठने के बाद सड़कों पर घंटों फंसे रहने से बच्चे न केवल थक जाते हैं, बल्कि उनकी पढ़ाई और खेलकूद के जरूरी घंटे भी सड़कों पर धुल रहे हैं।\n\nजानलेवा गड्ढों और हादसों का खौफ\nवरथुर मुख्य मार्ग क्षेत्र की कई बड़ी सोसायटियों को व्हाइटफील्ड से जोड़ने वाला एक बेहद व्यस्त और महत्वपूर्ण रास्ता है। यहां से प्रतिदिन हजारों नागरिक और अनगिनत स्कूल बसें गुजरती हैं। इसके बावजूद कई वर्षों से यह पूरी सड़क उपेक्षा की शिकार है। जगह-जगह गहरे गड्ढे, सड़कों पर बिखरी बजरी, बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटें और चारों तरफ फैला धूल का गुबार दुर्घटनाओं को खुला न्योता दे रहे हैं। बारिश के दिनों में जलभराव होने के कारण सड़कों के ये गड्ढे छिप जाते हैं और स्थिति और ज्यादा खतरनाक हो जाती है।\n\nस्थानीय लोगों के अनुसार इस इलाके में हादसे अब आम बात हो चुके हैं। सड़कों की जर्जर हालत के चलते स्कूल बस के पलटने जैसी भयानक घटनाएं भी सामने आई हैं। गड्ढों के कारण बाइक सवार संतुलन खोकर गिरते रहते हैं और एक दोपहिया चालक तो बाल-बाल मौत के मुंह से बाहर निकला। कई महिलाएं और राहगीर इन सड़कों पर फिसलकर गंभीर चोटों का शिकार हो चुके हैं। नागरिकों का कहना है कि इनमें से कई दुर्घटनाएं कभी मुख्य समाचारों का हिस्सा नहीं बन पातीं, लेकिन जमीनी स्तर पर हर दिन लोग जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं।\n\nरुकी हुई परियोजनाएं और व्यापक समाधान की मांग\nप्रशासन की ओर से मरम्मत के कई बार दावे किए गए, लेकिन जमीनी हालात जस के तस बने हुए हैं। संकट की एक प्रमुख वजह मुथासंद्रा के पास एक पुल परियोजना का काम ठप होना है, जो लंबे समय से सरकारी मंजूरी के इंतजार में अटका पड़ा है। इसके अलावा कर्नाटक रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड की फ्लाईओवर और सड़क चौड़ीकरण की योजनाएं भी प्रशासनिक सुस्ती और कानूनी अड़चनों के चलते आगे नहीं बढ़ सकी हैं।\n\nनागरिकों ने प्रशासन से दो-टूक मांग की है कि केवल औपचारिक तौर पर गड्ढों में मिट्टी भरने या कामचलाऊ पैचवर्क करने से काम नहीं चलेगा। जब तक वरथुर, गुंजुर और सरजापुर के पूरे सड़क नेटवर्क को व्यापक स्तर पर ठीक नहीं किया जाएगा, तब तक राहत मिलना संभव नहीं है। लगातार टैक्स भरने वाले शहरी मध्यम वर्ग का सवाल है कि हजारों लोगों के दैनिक आवागमन वाले इस प्रमुख संपर्क मार्ग को इतने सालों तक नजरअंदाज क्यों किया गया।\n\nइसका आप पर असर\nवरथुर-गुंजुर क्षेत्र के नागरिकों और स्कूली बच्चों के दैनिक आवागमन पर इस बुनियादी बदहाली का गहरा प्रभाव पड़ रहा है।\n\n• बेंगलुरु में: ईस्ट बेंगलुरु के वरथुर, गुंजुर और सरजापुर बेल्ट में रहने वाले लोगों का दैनिक यात्रा समय दो से तीन गुना बढ़ गया है। गड्ढों और भारी जाम के चलते वाहनों के रखरखाव का खर्च और ईंधन की खपत तेजी से बढ़ी है।\n• स्कूली बच्चों पर: दो किलोमीटर की दूरी में दो घंटे फंसने से बच्चों के स्वास्थ्य और पढ़ाई के समय पर सीधा असर पड़ रहा है। लगातार झटकों और धूल-मिट्टी के संपर्क में रहने से बच्चों में शारीरिक थकान और श्वसन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।\n• सुरक्षा जोखिम: गड्ढों और अंधेरे के कारण दोपहिया चालकों और स्कूल बसों के पलटने का खतरा लगातार बना हुआ है। राहगीरों और वाहन चालकों को इन रास्तों पर बेहद सतर्कता से यात्रा करने की जरूरत है।\n• संपत्ति और निवेश: लाखों रुपये टैक्स और होम लोन चुकाकर स्कूल के पास घर खरीदने वाले परिवारों का जीवन स्तर बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बुनियादी ढांचे की कमी से क्षेत्र में रियल एस्टेट की उपयोगिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nवरथुर-गुंजुर मार्ग पर भीषण जाम और बदहाली प्रशासनिक अनदेखी और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के अधर में लटके होने के कारण उत्पन्न हुई है।\n\n• बुनियादी ढांचे में देरी: मुथासंद्रा के पास एक महत्वपूर्ण पुल परियोजना सरकारी मंजूरी न मिलने के कारण रुकी हुई है। इस रुकावट से प्रमुख क्रॉसिंग पर वाहनों का भारी दबाव जमा हो जाता है।\n• चौड़ीकरण और फ्लाईओवर का अभाव: कर्नाटक रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड की फ्लाईओवर निर्माण और सड़क चौड़ीकरण की योजनाएं लगातार देरी का शिकार हैं। संकरी सड़कों पर अत्यधिक वाहनों के लोड ने स्थिति को विकट बना दिया है।\n• कामचलाऊ मरम्मत: प्रशासन द्वारा समस्या का समग्र समाधान करने के बजाय केवल छोटे-मोटे पैचवर्क किए जाते रहे हैं। उचित जल निकासी और मजबूत डामरीकरण के अभाव में हर बारिश के बाद गड्ढे दोबारा उभर आते हैं।\n• तेज गति से हुआ रिहायशी विस्तार: व्हाइटफील्ड के नजदीक होने से क्षेत्र में सोसायटियां तेजी से बसीं, लेकिन सड़कों की क्षमता नहीं बढ़ाई गई। दशकों पुरानी क्षमता वाली सड़कों पर हजारों दैनिक वाहनों का भार आ चुका है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. वरथुर-गुंजुर मार्ग पर सबसे बड़ी समस्या क्या है?\nइस मार्ग पर गहरे गड्ढे, उड़ती धूल, टूटी स्ट्रीट लाइटें और भीषण ट्रैफिक जाम मुख्य समस्याएं हैं।\n\n2. स्कूली बच्चों को कितनी दूरी तय करने में दो घंटे लग रहे हैं?\nसड़क की बदहाली और जाम के कारण स्कूल बस को मात्र दो किलोमीटर की दूरी तय करने में दो घंटे लग रहे हैं।\n\n3. इस मार्ग पर हाल ही में कौन से बड़े हादसे हुए हैं?\nस्थानीय निवासियों के अनुसार यहां एक स्कूल बस पलटी, एक महिला गंभीर घायल हुई और गड्ढे की वजह से बाइक सवार बाल-बाल बचा।\n\n4. इस क्षेत्र की कौन सी बुनियादी परियोजनाएं रुकी हुई हैं?\nमुथासंद्रा के पास रुका हुआ पुल प्रोजेक्ट सरकारी मंजूरी के इंतजार में है, साथ ही केआरडीसीएल की फ्लाईओवर और चौड़ीकरण योजनाएं भी लटकी हुई हैं।\n\n5. स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से क्या मांग की है?\nनागरिकों ने मांग की है कि पैचवर्क के बजाय वरथुर, गुंजुर और सरजापुर के पूरे सड़क नेटवर्क को व्यापक रूप से ठीक किया जाए।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-09-19",
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    "वरथुर गुंजुर",
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