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  "title": "राजस्थान के चूरू में दो नाबालिग बहनों को ससुराल के अत्याचार से कराया गया मुक्त, 18 महीने बाद एक्शन में आई टीम",
  "summary": "राजस्थान के चूरू जिले में पुलिस और बाल संरक्षण टीमों ने एक संयुक्त अभियान चलाकर बीकानेर की दो नाबालिग बहनों को उनके ससुराल से सुरक्षित बचा लिया है। जून 2024 में बाल विवाह का शिकार बनीं इन बहनों को 1.5 साल तक मारपीट और ब्लेड से काटे जाने जैसी भयावह प्रताड़ना सहनी पड़ी।",
  "content": "राजस्थान के चूरू जिले में कम उम्र में विवाह और उससे जुड़े गंभीर शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न का एक दर्दनाक मामला सामने आया है। बीकानेर जिले की रहने वाली दो नाबालिग सगी बहनों को चूरू के रतनगढ़ तहसील स्थित कांगड़ गांव में उनके ससुराल से सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है। पीड़ितों को पिछले लगभग डेढ़ साल से उनके ससुराल वाले लगातार प्रताड़ित कर रहे थे। स्थिति तब अत्यधिक गंभीर हो गई जब बुधवार सुबह उनकी सास ने कथित तौर पर दोनों के साथ मारपीट की और उनके हाथों पर ब्लेड से कट लगा दिए। इस घटना के तुरंत बाद हरकत में आई संयुक्त टीमों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों बहनों को बचाकर अपनी देखरेख में ले लिया है।\n\nप्रशासनिक टीमों का संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन\nघटना की जानकारी सामने आते ही सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की चाइल्ड हेल्प लाइन, मानव तस्करी विरोधी यूनिट तथा कालिका पेट्रोलिंग टीम ने एक साझा ऑपरेशन की योजना बनाई। तीनों एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने तुरंत कांगड़ गांव स्थित उस मकान पर दबिश दी जहां दोनों बहनों को बंद रखा गया था। मौके पर पहुंची टीम ने बिना किसी देरी के दोनों बालिकाओं को ससुराल वालों के कब्जे से निकाला और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। चाइल्ड हेल्प लाइन के परियोजना अधिकारी पन्ने सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों बच्चियों को फिलहाल पूरी सुरक्षा में रखा गया है और उनकी गहन काउंसलिंग की जा रही है।\n\nछह बेटियों के बोझ के चलते जून 2024 में हुआ था बाल विवाह\nप्रारंभिक पड़ताल में इस दुखद बाल विवाह की वजह पारिवारिक परिस्थितियां बताई गई हैं। पीड़ितों के पिता की कुल छह बेटियां हैं, और परिवार पर आर्थिक व सामाजिक दबाव के कारण उन्होंने अपनी दो छोटी बेटियों की कम उम्र में ही शादी करने का फैसला कर लिया था। जून 2024 में दोनों बहनों का विवाह चूरू जिले के कांगड़ गांव में करा दिया गया था। विवाह के समय बड़ी बहन केवल 11वीं कक्षा में पढ़ रही थी, जबकि छोटी बहन 9वीं कक्षा की छात्रा थी। शादी होते ही दोनों बच्चियों को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी और उन्हें हमेशा के लिए ससुराल भेज दिया गया, जिससे उनका शैक्षणिक भविष्य पूरी तरह तबाह हो गया।\n\nउम्र का बड़ा फासला और ससुराल में प्रताड़ना की शुरुआत\nइस मामले में उम्र का असमान अंतर भी सामने आया है। शादी के समय बड़ी नाबालिग बहन का विवाह 32 वर्षीय पुरुष से कराया गया था, जबकि 9वीं कक्षा में पढ़ने वाली छोटी बहन की शादी 26 वर्ष के युवक के साथ हुई थी। विवाह संपन्न होने के लगभग छह महीने बाद ही ससुराल पक्ष का व्यवहार पूरी तरह बदल गया। दोनों बहनों पर घरेलू काम का भारी दबाव बनाया जाने लगा और छोटी-छोटी गलतियों पर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। रोजाना डांट-डपट, बेइज्जती और गाली-गलौज उनके दैनिक जीवन का हिस्सा बन गई। धीरे-धीरे यह मौखिक प्रताड़ना गंभीर शारीरिक हिंसा में बदल गई।\n\nबेल्ट से पिटाई और ब्लेड से हमले के बाद मिली मदद\nपीड़ित बहनों द्वारा दिए गए बयानों के अनुसार, ससुराल में उन्हें नियमित रूप से चमड़े के बेल्ट से पीटा जाता था। बुधवार की सुबह प्रताड़ना की तमाम हदें पार हो गईं जब उनकी सास ने मामूली बात पर झगड़ा शुरू कर दिया और दोनों बहनों की बेरहमी से पिटाई की। आरोप है कि सास ने एक तेजधार ब्लेड उठाकर दोनों बालिकाओं के हाथों पर गहरे कट लगा दिए। इस खौफनाक हमले के बाद किसी तरह यह सूचना चाइल्ड हेल्प लाइन तक पहुंचाई गई। सूचना दर्ज होते ही बाल संरक्षण एजेंसियों और पुलिस टीमों ने बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुंचकर दोनों बच्चियों को बचा लिया।\n\nबाल कल्याण समिति के समक्ष होगी पेशी और आगे का कानूनी कदम\nसुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किए जाने के बाद वर्तमान में विशेषज्ञों द्वारा दोनों पीड़ित बहनों की काउंसलिंग की जा रही है, ताकि वे इस भयावह मानसिक आघात से उबर सकें। अधिकारियों के अनुसार काउंसलिंग की प्रक्रिया पूर्ण होते ही दोनों बालिकाओं को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद बाल कल्याण समिति द्वारा दिए जाने वाले निर्देशों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यह घटना एक बार फिर उजागर करती है कि कम उम्र में विवाह कराने से बच्चों का स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और पूरा जीवन किस तरह संकट में पड़ जाता है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत 18 वर्ष से कम उम्र में शादी कराना गैर-कानूनी है, और इसके खिलाफ आवाज उठाने के लिए टोल-फ्री राष्ट्रीय हेल्प लाइन 1098 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।\n• राजस्थान में: राज्य में बाल विवाह रोकने के लिए चाइल्ड हेल्प लाइन, मानव तस्करी रोधी दस्ता और पुलिस की गश्ती टीमें तैनात हैं, जिससे पीड़ित या गवाह सीधे शिकायत कर तुरंत मदद पा सकते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यह घटना राजस्थान के किस जिले की है?\nयह मामला राजस्थान के चूरू जिले की रतनगढ़ तहसील के कांगड़ गांव का है, जहां बीकानेर की दो नाबालिग बहनों को उनके ससुराल से रेस्क्यू किया गया।\n\n2. दोनों नाबालिग बहनों का विवाह कब और किस उम्र के व्यक्तियों से हुआ था?\nजून 2024 में विवाह के समय बड़ी बहन 11वीं और छोटी बहन 9वीं में पढ़ रही थी। बड़ी बहन की शादी 32 वर्ष और छोटी बहन की शादी 26 वर्ष के व्यक्ति से हुई थी।\n\n3. दोनों बहनों को रेस्क्यू करने में किन टीमों की भूमिका रही?\nसामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की चाइल्ड हेल्प लाइन, मानव तस्करी विरोधी यूनिट और कालिका पेट्रोलिंग टीम ने संयुक्त कार्रवाई करके दोनों बहनों को बचाया।\n\n4. ससुराल में बहनों के साथ किस प्रकार की प्रताड़ना की गई?\nशादी के छह महीने बाद से ही दोनों बहनों के साथ घरेलू काम के नाम पर मारपीट की गई, उन्हें बेल्ट से पीटा गया और सास द्वारा हाथ पर ब्लेड से कट लगाए गए।\n\n5. रेस्क्यू के बाद बालिकाओं की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?\nदोनों बहनों को सुरक्षित स्थान पर रखकर उनकी काउंसलिंग कराई जा रही है, जिसके बाद उन्हें आगे की कार्रवाई के लिए बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया जाएगा।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-08-05",
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