रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन के शक्ति प्रदर्शन पर बीजेपी का तंज, खाली कुर्सियों के वीडियो किए जारी दिल्ली के ऐतिहासिक मैदान में विपक्षी दलों के जमावड़े को सत्ताधारी दल ने विफल बताया है। सोशल मीडिया पर फुटेज जारी कर आरोप लगाया गया कि संबोधन के दौरान ही लोग सभा स्थल छोड़ रहे थे। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का ऐतिहासिक रामलीला मैदान एक बार फिर राजनीतिक रस्साकशी का केंद्र बन गया, जहां विपक्षी दलों के संयुक्त मंच इंडिया ब्लॉक ने एक विशाल जनसभा का आयोजन किया। इस शक्ति प्रदर्शन का मुख्य मकसद चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया का विरोध करना था। कार्यक्रम समाप्त होते ही भारतीय जनता पार्टी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए आयोजन की सफलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। सत्तापक्ष की तरफ से इंटरनेट पर ऐसे विजुअल्स साझा किए गए, जिनमें पंडाल के भीतर बड़ी संख्या में बैठने की जगहें खाली नजर आ रही थीं। खाली कुर्सियों के जरिए विपक्ष की घेराबंदी सत्तारूढ़ दल ने विपक्षी नेताओं के बड़े दावों की हवा निकालने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का सहारा लिया। बीजेपी के रणनीतिकारों ने आरोप लगाया कि जिस समय मंच पर प्रमुख वक्ता अपनी बात रख रहे थे, उस वक्त मैदान में भारी सन्नाटा था और श्रोताओं का अभाव साफ दिख रहा था। पार्टी के नेता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए इस पूरी कवायद को पूरी तरह निष्प्रभावी करार दिया। उनके मुताबिक, जब मंच से भाषण दिया जा रहा था, तब नागरिक मैदान से बाहर निकल रहे थे। साझा किए गए इन दृश्यों में कतारों में लगी कुर्सियां खाली दिखाई दीं और लोग धीरे-धीरे निकास द्वारों की ओर बढ़ते नजर आए। इसी आधार पर विपक्ष की व्यापक जनसमर्थन जुटाने की क्षमता पर तीखे सवाल दागे गए। मतदाता सूची पुनरीक्षण और चुनाव आयोग पर सीधा टकराव विपक्षी गठबंधन ने इस समागम की रूपरेखा मुख्य रूप से चुनावी प्रक्रिया में कथित विसंगतियों को उजागर करने के लिए तैयार की थी। इंडिया ब्लॉक से जुड़े विभिन्न दलों का तर्क है कि विशेष गहन पुनरीक्षण के नाम पर मतदाता नामावलियों में अनपेक्षित बदलाव किए जा रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर विपक्षी खेमा चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर अंगुली उठा रहा है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की पुरजोर मांग कर रहा है। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने किसी भी प्रकार के राजनीतिक भेदभाव के आरोपों को सिरे से नकारते हुए स्पष्ट किया है कि नामावलियों में सुधार की यह कवायद पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुकूल है। मंच से नेताओं के तेवर और संबोधन मंच पर मौजूद विभिन्न विपक्षी दिग्गजों ने संवैधानिक मर्यादाओं की रक्षा का संकल्प दोहराया। इस दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा, "हम संविधान को नष्ट नहीं होने देंगे." उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी व्यक्ति अथवा सत्ता संविधान से ऊपर नहीं हो सकती। वहीं कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कड़े शब्दों में ऐलान किया कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त अपने पद से त्यागपत्र नहीं दे देते, तब तक उनका यह साझा आंदोलन लगातार जारी रहेगा। इस बड़े जमावड़े में बिहार के प्रमुख राजनीतिक चेहरे तेजस्वी यादव और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित कई अन्य क्षेत्रीय दलों के प्रमुख नेताओं ने भी अपनी बात रखी। तारीख के चुनाव और त्योहारों पर बीजेपी के तीखे आक्षेप इस पूरे प्रकरण पर केवल भीड़ की संख्या तक ही तकरार सीमित नहीं रही, बल्कि राजनीतिक विमर्श में तारीख और समय के चयन पर भी विवाद खड़ा हो गया। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने विपक्षी मोर्चे पर जोरदार प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि यह गठबंधन केवल अव्यवस्था फैलाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि त्यौहारी सीजन के दौरान ऐसे आयोजनों से स्थानीय व्यापारियों और कारोबारियों के कामकाज पर नकारात्मक असर पड़ता है। इसके अतिरिक्त, सत्तापक्ष ने 1984 के सिख विरोधी दंगों की ऐतिहासिक बरसी के दिन इस तरह का राजनीतिक आयोजन करने पर भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। गौरतलब है कि रामलीला मैदान की यह विशाल सभा उस घटनाक्रम के ठीक बाद हुई, जब शनिवार को विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ एक प्रतीकात्मक जन अभियोग चलाया था, जो संवैधानिक पद से हटाने की कानूनी प्रक्रिया के बजाय शुद्ध रूप से एक राजनीतिक विरोध था। इसका आप पर असर इस राजनीतिक टकराव का सीधा प्रभाव चुनावी प्रक्रियाओं और सामान्य नागरिक जीवन पर पड़ता है। • भारत में: मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर चल रहे इस विवाद से देश भर के मतदाताओं में वोटर लिस्ट के शुद्धिकरण को लेकर सतर्कता बढ़ेगी। नागरिकों को अपनी प्रविष्टियों और पहचान विवरणों की पुनः पुष्टि करने के लिए जागरूक होना पड़ सकता है। • दिल्ली में: मध्य दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में बड़े विरोध प्रदर्शनों के कारण आम जनता और स्थानीय व्यापारियों को यातायात तथा कारोबारी असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। त्योहारी सीजन के दौरान प्रमुख बाजारों के आसपास आवाजाही और सुरक्षा प्रबंधों का असर दैनिक जीवन पर पड़ता है। • संवैधानिक संस्थाओं की साख: चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल खड़े होने से संस्थागत विश्वसनीयता को लेकर जनसंवाद तेज होगा। इसका असर आगामी चुनावों में प्रशासनिक संचालन और मतदान नियमों की सार्वजनिक समझ पर देखा जा सकता है। • नागरिक सतर्कता: दोनों पक्षों की इस खींचतान के बीच आम नागरिकों के लिए मतदाता सूची में अपना नाम समय रहते जांचना और भी आवश्यक हो गया है। चुनाव आयोग द्वारा संचालित आधिकारिक पोर्टल्स के जरिए लोग अपना विवरण सत्यापित कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ विपक्षी गठबंधन और सत्तापक्ष के बीच यह नया घमासान चुनाव आयोग की प्रशासनिक कवायद और राजनीतिक शक्ति संतुलन को लेकर पैदा हुआ है। • मतदाता सूची में विशेष संशोधन: चुनाव आयोग द्वारा संचालित विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर विपक्षी दलों ने प्रक्रियात्मक विसंगतियों का आरोप लगाया। उनका मानना है कि इस कवायद से मतदाता नामावलियों में अनुचित फेरबदल की आशंका पैदा हो रही है। • संवैधानिक पद पर सीधा राजनीतिक हमला: शनिवार को विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ एक प्रतीकात्मक जन अभियोग आयोजित किया था। इस आक्रामक विरोध के बाद रविवार को रामलीला मैदान में शक्ति प्रदर्शन का निर्णय लिया गया। • सत्तारूढ़ दल का जवाबी पलटवार: बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को बेअसर करने के लिए सीधे सभा की जनभागीदारी और भीड़ जुटाने की क्षमता पर निशाना साधा। वीडियो जारी करके विपक्ष के आंदोलन की साख को कमजोर करने की राजनीतिक रणनीति अपनाई गई। • तिथियों और समय को लेकर मतभेद: आयोजन के लिए चुनी गई तारीख को 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी और त्योहारी सीजन से जोड़ते हुए बीजेपी ने विपक्ष की मंशा पर सवाल खड़े किए। सवाल-जवाब 1. विपक्षी इंडिया गठबंधन ने रामलीला मैदान में रैली क्यों बुलाई थी? यह रैली चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के खिलाफ और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित की गई थी। 2. बीजेपी ने इस रैली को लेकर क्या दावा किया है? बीजेपी ने सोशल मीडिया पर खाली कुर्सियों के वीडियो जारी करते हुए दावा किया कि राहुल गांधी के भाषण के दौरान लोग मैदान छोड़कर जा रहे थे और यह आयोजन फ्लॉप रहा। 3. मंच से कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने क्या मुख्य बात कही? राहुल गांधी ने कहा कि वे संविधान को नष्ट नहीं होने देंगे और कोई भी व्यक्ति या सत्ता संविधान से बड़ी नहीं हो सकती। 4. बीजेपी ने रैली की तारीख और समय पर क्या आपत्ति दर्ज कराई? बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि त्योहारी सीजन में रैली से कारोबार प्रभावित होता है और 1984 के दंगों की बरसी के दिन यह आयोजन अनुचित था। 5. चुनाव आयोग का इस पूरे विवाद पर क्या रुख रहा है? चुनाव आयोग ने राजनीतिक पक्षपात के सभी आरोपों को खारिज करते हुए मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया का पूरी तरह बचाव किया है। https://trendkia.com/national/ramlila-ground-men-india-gathabndhana-ke-shakti-pradarshana-para-bjp-ka-tnja-khali-kursiyon-ke-vidiyo-kie-jari-54481 TrendKia — Har trend, sabse pehle.