# रामलीला मैदान के विरोध प्रदर्शन पर जेपी नड्डा का तीखा प्रहार, राहुल गांधी पर अस्थिरता फैलाने का आरोप

> दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी मोर्चे के शक्ति प्रदर्शन के बीच जेपी नड्डा ने राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला और कहा कि भारत किसी भी सूरत में कोई बनाना रिपब्लिक नहीं है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-11-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/ramlila-maidan-ke-virodha-pradarshana-para-jp-nadda-ka-tikha-prahara-rahul-gandhi-para-asthirata-phailane-ka-aropa-54308 · **Language:** Hindi
**Tags:** जेपी नड्डा, राहुल गांधी, रामलीला मैदान, बीजेपी, कांग्रेस, सिख दंगे 1984, दिल्ली व्यापार नुकसान

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में विपक्षी दलों के गठबंधन के बड़े जमावड़े के बीच भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव काफी तेज हो गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर तीखा जुबानी हमला करते हुए देश में अशांति और अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश किसी की मनमर्जी या अराजक मंसूबों से संचालित नहीं हो सकता। यह टकराव उस समय खुलकर सामने आया जब विपक्षी दलों का मोर्चा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर के खिलाफ दिल्ली में विशाल शक्ति प्रदर्शन कर रहा था।

## लोकतांत्रिक व्यवस्था और बनाना रिपब्लिक टिप्पणी
विपक्षी गठबंधन के इस जमावड़े पर कड़ा एतराज जताते हुए जेपी नड्डा ने सीधे राहुल गांधी को आगाह किया कि वे देश की लोकतांत्रिक ताकत को कमतर आंकने की भूल न करें। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी कान खोलकर सुन लीजिए, यह भारत है, कोई बनाना रिपब्लिक नहीं है जहां आप जब चाहें आगजनी करा दें, दंगे भड़का दें और सत्ता परिवर्तन का एजेंडा चला दें।”

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बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि राहुल गांधी को इस तरह के दिवास्वप्न देखना तुरंत बंद कर देना चाहिए। भारत दुनिया का सबसे प्राचीन और अत्यंत सुदृढ़ लोकतांत्रिक देश है, जो किसी भी प्रकार की अराजकता, आगजनी या दंगे भड़काने की राजनीति से नहीं डगमगाएगा। देश की पूरी शासन व्यवस्था संविधान के स्पष्ट नियमों और जनता द्वारा दिए गए जनादेश के आधार पर ही चलेगी, न कि सड़क पर माहौल बिगाड़कर सत्ता पलटने की कोशिशों से। उन्होंने विपक्षी नेताओं पर संस्थाओं की साख गिराने और जनता में अविश्वास का माहौल खड़ा करने का गंभीर आक्षेप लगाया।

## 1984 के सिख विरोधी दंगों का उल्लेख और कांग्रेस पर वार
अपने संबोधन में जेपी नड्डा ने 1984 के सिख विरोधी दंगों का विशेष रूप से उल्लेख किया और कांग्रेस के इतिहास पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने 1 नवंबर की तारीख को भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे काला और दागदार दिन करार दिया। नड्डा ने आरोप लगाया कि इसी ऐतिहासिक तारीख पर कांग्रेस पार्टी द्वारा पाले गए तत्वों ने निर्दोष सिख नागरिकों का कत्लेआम किया था। उस भयावह दौर में हजारों सिख परिवारों को रातोंरात बेघर कर दिया गया और अनगिनत महिलाएं विधवा हो गईं।

बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की विधवा कॉलोनी आज भी उस क्रूर और खूनी दौर की जीवित गवाह बनकर खड़ी है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि गांधी परिवार ने उस अक्षम्य कृत्य के लिए आज तक सिख समुदाय से निष्कपट भाव से माफी नहीं मांगी है। नड्डा ने कहा कि आज का दिन असल में दंगा पीड़ितों और शहीदों को नमन करने और उनके दर्द को साझा करने का अवसर था, लेकिन राहुल गांधी इस काले दिन का इस्तेमाल रामलीला मैदान में रैली करके अपने संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ साधने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने विपक्षी गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों से भी सीधा सवाल पूछा कि क्या वे इस तारीख पर रैली में शामिल होकर सिख समुदाय के पुराने जख्मों पर नमक छिड़कने के कृत्य में कांग्रेस के सहभागी बन रहे हैं।

## व्यापारियों की आजीविका और करोड़ों के आर्थिक नुकसान की चिंता
राजनीतिक आरोपों से आगे बढ़ते हुए जेपी नड्डा ने इस विशाल राजनीतिक जमावड़े के कारण दिल्ली के आम व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को झेलने पड़ रहे नुकसान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि दिवाली और छठ जैसे प्रमुख त्योहारों के व्यस्त समय में सड़कों पर इस तरह के भारी जमावड़े से बाजारों की सामान्य गतिविधियां पूरी तरह चरमरा जाती हैं, जिससे स्थानीय खुदरा कारोबारियों की रोजी-रोटी पर सीधा आघात पहुंचता है।

नड्डा ने चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानी सीटीआई द्वारा राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को लिखे गए पत्रों का हवाला दिया। उन्होंने आंकड़ों के साथ स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि पिछले प्रदर्शनों के कारण दिल्ली के कारोबारियों को लगभग 3,000 करोड़ रुपए की भारी चपत लगी थी। वहीं रामलीला मैदान में आयोजित इस ताजा रैली की वजह से 10,000 करोड़ रुपए से भी अधिक के व्यापक आर्थिक नुकसान की गंभीर आशंका खड़ी हो गई है। त्योहारी मौसम में जब छोटे व्यापारी साल भर की कमाई की आस लगाए बैठे होते हैं, ऐसे समय में शहर को जाम और अव्यवस्था में धकेलना बेहद गैर-जिम्मेदाराना कदम है।

## विदेशी दौरों और आर्थिक प्रहार पर नड्डा का अंतिम प्रहार
अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में जेपी नड्डा ने राहुल गांधी के पूर्व के बयानों और विदेशी दौरों की कार्यशैली पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक तय रणनीति के तहत पहले विदेशों में जाकर भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा, छवि और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर प्रश्नचिह्न लगाए जाते हैं और फिर स्वदेश लौटकर देश की आर्थिक ताकत तथा लोकतांत्रिक नींव पर सीधा हमला बोला जाता है।

नड्डा ने दावा किया कि देश की जागरूक जनता अब इन राजनीतिक पैंतरेबाजियों और झांसों को भली-भांति समझने लगी है। लोकतंत्र को बंधक बनाने या जनता के फैसले को सड़कों पर चुनौती देकर अस्थिरता पैदा करने की कोई भी कोशिश सफल नहीं होगी क्योंकि देश संविधान की मर्यादा और जनमत की शक्ति से ही आगे बढ़ेगा।

## इसका आप पर असर
रामलीला मैदान में हुए इस बड़े राजनीतिक प्रदर्शन और उसके बाद शुरू हुए वाकयुद्ध से राजधानी के कारोबारी तंत्र और आम नागरिकों की आवाजाही पर सीधा असर पड़ा है।

- **राष्ट्रीय स्तर पर:** संसद के बाहर मुख्य विपक्षी मोर्चे और सत्ता पक्ष के बीच टकराव तेज होने से राष्ट्रीय नीतिगत फैसलों और विधायी कामकाज में तनातनी और बढ़ सकती है। इससे आने वाले समय में राजनीतिक ध्रुवीकरण और तीखा होने की पूरी संभावना है।
- **दिल्ली में:** त्योहारी सीजन के दौरान हुए इस जमावड़े और ट्रैफिक पाबंदियों के चलते स्थानीय खुदरा व्यापार को 10,000 करोड़ रुपए से अधिक के नुकसान की आशंका जताई गई है। सड़कों पर घंटों लगे जाम के कारण दैनिक यात्रियों और बाजारों में खरीदारी के लिए निकले लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।
- **व्यापारियों के लिए:** चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के अनुसार दिवाली और छठ की बिक्री बाधित होने से छोटे खुदरा दुकानदारों के नकदी प्रवाह पर सीधा असर पड़ेगा। व्यापारिक संगठनों को अपने त्योहारी ऑर्डर और स्टॉक प्रबंधन में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
- **आम नागरिकों के लिए:** मध्य और पुरानी दिल्ली के प्रमुख रास्तों पर आवागमन बाधित होने से यात्रियों को मेट्रो और वैकल्पिक मार्गों का रुख करना पड़ा। किसी भी बड़े राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान शहर के मुख्य केंद्रों में निकलने से पहले रूट एडवाइजरी जांचना जरूरी हो गया है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह राजनीतिक टकराव तब भड़का जब विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और एसआईआर के खिलाफ दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़े विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया।

- **विरोध का तात्कालिक कारण:** विपक्षी गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद से इस्तीफे और एसआईआर के विरोध को लेकर शक्ति प्रदर्शन का आह्वान किया था। इसी मंच से केंद्र सरकार पर चुनावी और संवैधानिक संस्थाओं को प्रभावित करने का आरोप लगाया गया।
- **सत्ता पक्ष की जवाबी कार्रवाई:** बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने विपक्षी जमावड़े को देश में अराजकता पैदा करने और जनमत को नकारने की कोशिश करार देते हुए पलटवार किया। उन्होंने इसे विधिसम्मत सरकार के खिलाफ अस्थिरता फैलाने का सुनियोजित एजेंडा बताया।
- **1984 के इतिहास का संदर्भ:** नड्डा ने 1 नवंबर की तारीख को रेखांकित करते हुए कांग्रेस को 1984 के सिख विरोधी दंगों की याद दिलाई और आरोप लगाया कि इस दिन राजनीतिक प्रदर्शन करना पीड़ितों के प्रति संवेदनहीनता है। उन्होंने गांधी परिवार द्वारा माफी न मांगे जाने के पुराने मुद्दे को दोबारा उठाया।
- **व्यापारिक चिंताओं का जुड़ाव:** चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री द्वारा भारी वित्तीय नुकसान की चेतावनी दिए जाने के बाद बीजेपी ने इसे सीधे दिल्ली के व्यापारियों की रोजी-रोटी से जोड़कर विपक्षी रणनीति को कटघरे में खड़ा कर दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. जेपी नड्डा ने राहुल गांधी पर क्या मुख्य आरोप लगाए?
जेपी नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी भारत को बनाना रिपब्लिक समझकर आगजनी, दंगे और अस्थिरता फैलाने का एजेंडा चला रहे हैं।

### 2. रामलीला मैदान में विपक्षी दलों का प्रदर्शन किस मुद्दे पर था?
यह विरोध प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और एसआईआर के विरोध को लेकर आयोजित किया गया था।

### 3. जेपी नड्डा ने 1 नवंबर की तारीख को लेकर क्या कहा?
उन्होंने 1 नवंबर को लोकतांत्रिक इतिहास का काला दिन बताते हुए कहा कि इसी दिन 1984 में सिख विरोधी दंगों में निर्दोष सिखों का कत्लेआम हुआ था।

### 4. रैली से दिल्ली के व्यापारियों को कितने नुकसान का अनुमान जताया गया?
नड्डा ने दावा किया कि पिछले विरोध प्रदर्शनों से 3,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था और इस बार 10,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के नुकसान की आशंका है।

### 5. व्यापारियों के नुकसान के संदर्भ में किस संस्था का उल्लेख किया गया?
इस आर्थिक नुकसान के संदर्भ में चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानी सीटीआई द्वारा नेताओं को भेजे गए पत्रों का उल्लेख किया गया।

### 6. नड्डा ने राहुल गांधी के विदेशी दौरों पर क्या टिप्पणी की?
उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी विदेशों में जाकर भारत का अपमान करते हैं और वापस आकर देश के लोकतंत्र तथा अर्थव्यवस्था पर प्रहार करते हैं।

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