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  "title": "राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व एडीसी मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने शुरू किया इंस्टाग्राम पर पेड मॉडल, मासिक आय लाखों में पहुंची",
  "summary": "भारतीय सेना से समय पूर्व सेवानिवृत्ति लेने के बाद मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने इंस्टाग्राम पर सशुल्क सब्सक्रिप्शन व्यवस्था शुरू की है, जिससे वे हर महीने छह लाख रुपये से अधिक कमा रहे हैं।",
  "content": "सैन्य सेवा को अलविदा कहने के बाद डिजिटल मंचों पर अपनी नई पहचान स्थापित करने वाले पूर्व सैन्य अधिकारी मेजर ऋषभ सिंह संब्याल इन दिनों सोशल मीडिया पर एक बड़े बदलाव के केंद्र में हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व एडीसी रहे मेजर ऋषभ ने अपने इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर पेड सब्सक्रिप्शन मॉडल लागू किया है। इस नई व्यवस्था के तहत वे अपने मंच पर विशेष सामग्री देखने के इच्छुक फॉलोअर्स से मासिक आधार पर शुल्क ले रहे हैं, जिसकी वजह से इंटरनेट पर उनके इस व्यावसायिक कदम को लेकर व्यापक चर्चा छिड़ गई है।\n\nलाखों फॉलोअर्स के बीच सशुल्क ग्राहकों की बढ़ती संख्या\nमेजर ऋषभ सिंह संब्याल की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इंस्टाग्राम पर उन्हें करीब 23 लाख लोग फॉलो करते हैं। इस विशाल फॉलोअर बेस में से 3096 उपयोगकर्ताओं ने उनका पेड सब्सक्रिप्शन ले लिया है। इस सेवा के लिए उन्होंने तकनीकी प्लेटफॉर्म के हिसाब से अलग दरें तय की हैं। एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम वाले फोन का उपयोग करने वाले ग्राहकों के लिए यह मासिक शुल्क 180 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि आईफोन उपयोगकर्ताओं के लिए यह दर 199 रुपये प्रति माह रखी गई है। इस मॉडल के जरिए सेना की वर्दी उतारने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया को एक स्वतंत्र और लाभप्रद आजीविका का जरिया बना लिया है।\n\nसेना में 12 साल का सेवाकाल और राष्ट्रपति भवन में विशेष भूमिका\nमेजर ऋषभ सिंह संब्याल का सैन्य सफर बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने भारतीय सेना को लगभग 12 साल तक अपनी सेवाएं दीं। अपने करियर के दौरान वे जाट रेजिमेंट में तैनात रहे और उन्होंने 4 पैरा स्पेशल फोर्सेस के लिए भी अपनी स्वेच्छा से सेवाएं दी थीं। जब वे देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के एडीसी यानी एडे-डी-कैंप के रूप में आधिकारिक सरकारी कार्यक्रमों में उनके साथ नजर आए, तो उनकी विशिष्ट कार्यशैली और आकर्षक व्यक्तित्व ने जनमानस का ध्यान खींचा। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरों और वीडियो को इतनी व्यापक प्रतिक्रिया मिली कि कई इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने उन्हें नेशनल क्रश की संज्ञा तक दे डाली थी।\n\nडिजिटल कंटेंट क्रिएशन की दिशा में नया कदम\nअगस्त 2026 में सेना से समय पूर्व सेवानिवृत्ति लेने के उपरांत उन्होंने पूर्णकालिक रूप से कंटेंट निर्माण के क्षेत्र में प्रवेश किया। सैन्य सेवा में रहने के दौरान भी उनके कठिन प्रशिक्षण, फिटनेस दिनचर्या और फौजी जीवन के अनुभवों से जुड़े छोटे वीडियो और रील्स को दर्शकों का भरपूर स्नेह मिलता रहा था। सेवानिवृत्ति के पश्चात उन्होंने इसी डिजिटल पहुंच और लोकप्रियता को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने का फैसला किया। इसी क्रम में वे हाल ही में राज शमानी के लोकप्रिय पॉडकास्ट में भी उपस्थित हुए थे, जहां उन्होंने एडीसी के पद के दायित्वों, सुरक्षा प्रोटोकॉल और प्रशिक्षण से जुड़ी बारीकियों को खुलकर साझा किया था।\n\nमासिक राजस्व का गणित और सब्सक्राइबर्स को मिलने वाली सुविधाएं\nसोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के आंकड़ों तथा थर्ड-पार्टी एनालिटिक्स के विश्लेषण से उनकी कमाई के वित्तीय आंकड़े सामने आए हैं। 3096 सक्रिय सब्सक्राइबर्स की संख्या के आधार पर, प्लेटफॉर्म कटौती और लागू करों से पहले उनका शुरुआती मासिक सकल राजस्व करीब 5.97 लाख रुपये से 6.06 लाख रुपये के बीच आंका गया है। जो उपयोगकर्ता मासिक शुल्क देकर इस क्लब का हिस्सा बनते हैं, उन्हें सामान्य दर्शकों से अलग कई विशेष सुविधाएं मिलती हैं। इन सुविधाओं में एक्सक्लूसिव पोस्ट्स, खास रील्स, पर्दे के पीछे के सीक्रेट अपडेट्स और मेजर संब्याल के साथ सीधे बातचीत करने का अवसर शामिल है।\n\nइंटरनेट पर छिड़ी बहस और अलग-अलग दृष्टिकोण\nएक पूर्व सैन्य अधिकारी द्वारा सोशल मीडिया सामग्री के लिए पैसे लेने की बात सामने आते ही सार्वजनिक मंचों पर मतभेद उभर आए। आलोचकों के एक वर्ग ने इस कदम को सैन्य सेवा की गरिमा के प्रतिकूल और एक तरह का डाउनग्रेड करार दिया। उनका तर्क था कि जिस व्यक्ति ने देश की सुरक्षा के लिए गर्व से वर्दी पहनी हो, उसे इस तरह से व्यावसायिक रुख नहीं अपनाना चाहिए। इसके विपरीत, उनके भारी समर्थकों का स्पष्ट मत है कि सेना से विधिवत सेवानिवृत्त होने के बाद प्रत्येक स्वतंत्र नागरिक की तरह उन्हें भी अपने कौशल, अनुभव और समय के आधार पर नई आजीविका चुनने और कानूनी तरीके से आय अर्जित करने का पूरा अधिकार है।\n\nइसका आप पर असर\nसोशल मीडिया फॉलोअर्स और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर बनने की चाहत रखने वाले लोगों के लिए यह खबर सीधे तौर पर नए मौकों और वित्तीय विकल्पों को दर्शाती है।\n\n• फॉलोअर्स के लिए: विशेष रील्स और सीधी बातचीत पाने के लिए अब उपयोगकर्ताओं को मासिक शुल्क चुकाना होगा। एंड्रॉइड उपयोगकर्ताओं को 180 रुपये और आईफोन उपयोगकर्ताओं को 199 रुपये प्रति माह का भुगतान करना पड़ेगा।\n• कंटेंट क्रिएटर्स के लिए: यह मामला दिखाता है कि किसी भी प्रतिष्ठित पेशे से निकलने के बाद डिजिटल सब्सक्रिप्शन मॉडल एक मजबूत आय का स्रोत बन सकता है। क्रिएटर अपनी समर्पित ऑडियंस के सहारे मासिक लाखों रुपये का ग्रॉस रेवेन्यू जुटा सकते हैं।\n• नौकरीपेशा युवाओं के लिए: सरकारी या पारंपरिक करियर छोड़ने के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को स्वतंत्र करियर के तौर पर चुना जा सकता है। यह विकल्प बिना किसी कॉरपोरेट जॉब के अपने व्यक्तिगत ब्रांड के दम पर कमाई की राह खोलता है।\n• नैतिक और सामाजिक दृष्टिकोण: सार्वजनिक जीवन या प्रतिष्ठित पदों से जुड़े लोगों के कमर्शियल कदमों पर समाज में अलग-अलग राय सामने आ सकती है। कोई भी नया ऑनलाइन बिजनेस शुरू करने से पहले ऐसे जनमत और प्रतिक्रियाओं के लिए तैयार रहना आवश्यक है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nमेजर ऋषभ सिंह संब्याल के इस कदम और चर्चा के पीछे सेना से उनकी सेवानिवृत्ति, विशाल सोशल मीडिया फॉलोइंग और इंस्टाग्राम के सब्सक्रिप्शन टूल्स की उपलब्धता प्रमुख कारण हैं।\n\n• सेना से समय पूर्व सेवानिवृत्ति: उन्होंने अगस्त 2026 में 12 साल की सेवा के बाद भारतीय सेना से समय से पहले रिटायरमेंट ले लिया था। इसके बाद उन्होंने अपने समय और कौशल को डिजिटल क्रिएशन में लगाने का स्वतंत्र फैसला किया।\n• राष्ट्रपति के एडीसी के रूप में मिली ख्याति: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के एडीसी पद पर रहने के दौरान वे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए और उनकी तगड़ी फैन फॉलोइंग बन गई। सोशल मीडिया पर उनके 23 लाख फॉलोअर्स बन चुके थे, जिसे उन्होंने व्यावसायिक रूप दिया।\n• प्लेटफॉर्म के मोनेटाइजेशन विकल्प: इंस्टाग्राम द्वारा क्रिएटर्स को दिए गए पेड सब्सक्रिप्शन फीचर ने फॉलोअर्स से सीधे मासिक शुल्क लेने का तकनीकी ढांचा उपलब्ध कराया। इसी का उपयोग करके उन्होंने विशेष सामग्री के बदले शुल्क लेना शुरू किया।\n• व्यावसायिक करियर का चुनाव: सेना की सेवा पूरी करने के बाद उन्होंने पारंपरिक नौकरियों के बजाय आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था में स्वतंत्र करियर बनाने का निर्णय लिया। पॉडकास्ट में अपनी उपस्थिति के जरिए उन्होंने अपने अनुभवों को साझा कर इस पहुंच को और विस्तार दिया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मेजर ऋषभ सिंह संब्याल चर्चा में क्यों हैं?\nउन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर पेड सब्सक्रिप्शन मॉडल शुरू किया है, जहां वे विशेष कंटेंट दिखाने के लिए अपने फॉलोअर्स से मासिक शुल्क ले रहे हैं।\n\n2. मेजर ऋषभ सिंह संब्याल सेना में किस पद और रेजिमेंट में रहे हैं?\nवे भारतीय सेना में लगभग 12 साल रहे, जाट रेजिमेंट में सेवा दी, 4 पैरा स्पेशल फोर्सेस के लिए वॉलंटियर किया और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के एडीसी रहे।\n\n3. मेजर संब्याल ने सेना से कब रिटायरमेंट लिया था?\nउन्होंने अगस्त 2026 में भारतीय सेना की नौकरी से समय पूर्व सेवानिवृत्ति ली थी।\n\n4. इंस्टाग्राम पर उनके कितने फॉलोअर्स और पेड सब्सक्राइबर्स हैं?\nइंस्टाग्राम पर उनके करीब 23 लाख फॉलोअर्स हैं और उनमें से 3096 लोगों ने उनका पेड सब्सक्रिप्शन ले रखा है।\n\n5. उनके पेड सब्सक्रिप्शन की फीस कितनी है?\nएंड्रॉइड उपयोगकर्ताओं के लिए मासिक फीस 180 रुपये और आईफोन उपयोगकर्ताओं के लिए 199 रुपये रखी गई है।\n\n6. इंस्टाग्राम सब्सक्रिप्शन से उनकी मासिक कमाई कितनी आंकी गई है?\nप्लेटफॉर्म कटौती और टैक्स से पहले उनकी शुरुआती मासिक सकल कमाई करीब 5.97 लाख रुपये से 6.06 लाख रुपये के बीच आंकी गई है।\n\n7. सब्सक्रिप्शन लेने वाले फॉलोअर्स को क्या खास सुविधाएं मिलती हैं?\nउन्हें विशेष पोस्ट्स, रील्स, सीक्रेट अपडेट्स और मेजर संब्याल से सीधे संवाद करने का अवसर मिलता है।\n\n8. सोशल मीडिया पर उनके इस कदम को लेकर क्या विवाद है?\nकुछ लोग इसे सेना की गरिमा के खिलाफ और अनुचित व्यावसायिकता बता रहे हैं, जबकि समर्थक इसे सेवानिवृत्ति के बाद आजीविका कमाने का उनका अधिकार मान रहे हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\nमेजर ऋषभ सिंह संब्याल का यह कदम दिखाता है कि जीवन के किसी भी मोड़ पर नए रास्ते तलाशना और अपनी पहचान को नए क्षेत्र में स्थापित करना पूरी तरह संभव है।\n\n• बदलाव को स्वीकार करने का साहस: 12 साल के लंबे सैन्य करियर के बाद पूरी तरह नए डिजिटल क्षेत्र में कदम रखना यह सिखाता है कि व्यक्ति को अपनी प्रतिभा के दम पर नए अवसरों को आजमाने से नहीं हिचकिचाना चाहिए।\n• कड़ी मेहनत और अनुशासन का असर: स्पेशल फोर्सेस और एडीसी जैसे कठिन पदों पर बिताया गया समय यह साबित करता है कि किसी भी काम में उत्कृष्टता और अनुशासन से ही पहचान मिलती है, जो जीवन के अगले पड़ाव में भी काम आती है।\n• आलोचनाओं के बावजूद अपने निर्णय पर अडिग रहना: जब लोग आपके नए करियर या फैसले पर सवाल उठाएं, तब भी अपने विजन पर भरोसा रखना और नई आजीविका गढ़ना एक स्वतंत्र सोच का परिचायक है।\n• आधुनिक साधनों का सही उपयोग: बदलते दौर में नई तकनीकों और प्लेटफॉर्म्स को समझकर अपने प्रभाव को आत्मनिर्भरता में बदलना प्रगतिशील सोच को दर्शाता है।",
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  "publishedAt": "2026-09-24",
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