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  "type": "article",
  "title": "रोहतक के कबड्डी खिलाड़ी से तिहाड़ की साज़िशों तक, जानिए हिमांशु भाऊ के मोस्ट वांटेड गैंगस्टर बनने की पूरी कहानी",
  "summary": "हरियाणा के हिसार बाल सुधार गृह से भागे एक नाबालिग कबड्डी खिलाड़ी ने दिल्ली, हरियाणा और पंजाब के आपराधिक तंत्र में 'भाऊ गैंग' के नाम से अपनी दहशत कायम की। जानिए उसके अपराधी बनने और पुलिस को चकमा देने का पूरा सफर।",
  "content": "हरियाणा के रोहतक जिले के एक गांव की गलियों में कबड्डी खेलने वाला एक आम सा किशोर देखते ही देखते उत्तर भारत के सबसे खूंखार अपराधियों की सूची में शुमार हो गया। महज 14 साल की उम्र में अपनी सांस थामकर मैदान पर विपक्षी खिलाड़ियों पर दांव आजमाने वाला हिमांशु आज दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में 'हिमांशु भाऊ' के नाम से जाना जाता है। उसकी इस खतरनाक राह पर बढ़ने के पीछे पारिवारिक माहौल, अपराध का खौफ और समय के साथ बढ़ता आपराधिक नेटवर्क जिम्मेदार रहा। हिसार के बाल सुधार गृह से दुस्साहसिक तरीके से फरार होने के बाद से पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में जुटी हुई हैं, लेकिन वह लगातार कानून की गिरफ्त से बाहर बना हुआ है।\n\n \n\nकबड्डी के मैदान से अपराध की पहली दहलीज तक\n\nहिमांशु के बचपन के दिन किसी भी आम ग्रामीण बच्चे की तरह ही बीत रहे थे। वह अपनी सांस थामकर कबड्डी के मैदान में दांव लगाता और उसकी मां अक्सर घर के बाहर से आवाज लगाकर उसे पढ़ाई और स्कूल की याद दिलाती थी। करीब 14 साल की उम्र में जब वह अपनी मां की पुकार सुनकर मुस्कुराते हुए घर लौटता, तो उसके रौबीले अंदाज को देखकर मां हमेशा उसके लिए दुआएं मांगती थी। हालांकि, परिवार के भीतर एक ऐसा साया मौजूद था जो हिमांशु को एक बिल्कुल अलग दिशा में ले जाने वाला था। हिमांशु के शौकी चाचा का नाम इलाके में खौफ का पर्याय बन चुका था और उसका लंबा आपराधिक इतिहास था।\n\n हिमांशु का शौकी चाचा हत्या, हत्या के प्रयास, लूटपाट और रंगदारी वसूलने जैसे संगीन मामलों में हरियाणा की जेल में बंद था। जब भी वह पैरोल पर रिहा होकर गांव लौटता, तो उसके आसपास का खौफनाक माहौल गांव के लोगों को दूरी बनाए रखने पर मजबूर कर देता था। अपने ही घर में खौफ के इस दबदबा को देखकर हिमांशु के मन में भी अपराध की दुनिया के प्रति आकर्षण पैदा होने लगा। शुरुआत में वह गांव में होने वाली छोटी-मोटी कहासुनी और आपसी झगड़ों में कूदने लगा। इसके बाद वह गांव में अवैध शराब के कारोबार को लेकर होने वाली मारपीट और गुटबाजी में सक्रिय रूप से शामिल होने लगा।\n\n साल 2018 में, जब हिमांशु की उम्र महज 15 साल की दहलीज पर थी, तब उसका पहला आधिकारिक मुकाबला पुलिस से हुआ। गांव में अवैध शराब के धंधे को लेकर हुए एक हिंसक विवाद के बाद उसके खिलाफ जीवन की पहली एफआईआर दर्ज की गई। इस घटना के साथ ही पुलिस के सरकारी अभिलेखों में उसके नाम का खाता खुल गया। जैसे-जैसे समय बीतता गया, हिमांशु के कदम कानून की सीमाओं को लांघते चले गए और उसकी आपराधिक गतिविधियों का दायरा तेजी से बढ़ने लगा।\n\n साल 2020 तक पहुंचते-पहुंचते हिमांशु के खिलाफ हत्या के प्रयास जैसा बेहद गंभीर मामला भी दर्ज हो चुका था। यह मामला किसी पुरानी रंजिश का नहीं, बल्कि एक कार को लेकर दोस्तों के बीच शुरू हुए मामूली विवाद का नतीजा था। हिमांशु का अपने दोस्त अंकित के साथ कार को लेकर झगड़ा हो गया था। यह विवाद इतना बढ़ा कि हिमांशु ने अंकित के भाई सनी पर सीधी गोली चला दी। इस हमले में सनी की जान तो किसी तरह बच गई, लेकिन इस घटना ने यह साबित कर दिया कि कबड्डी का उभरता हुआ यह युवा खिलाड़ी अब पूरी तरह से अपराध की राह पर आगे बढ़ चुका है। इस जानलेवा हमले के आरोप में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और हिसार स्थित बाल सुधार गृह भेज दिया।\n\n \n\nहिसार बाल सुधार गृह से दुस्साहसिक फरारी का वो मंजर\n\nबाल सुधार गृह में हिमांशु की मौजूदगी बहुत लंबी नहीं रही। 12 अक्टूबर 2020 की शाम करीब 6 बजे सुधार गृह के परिसर में अचानक चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। तेज आवाजों को सुनकर जब सहायक अधीक्षक मौके पर पहुंचे, तो वहां का नजारा बेहद खौफनाक था। ड्यूटी पर तैनात तीन सुरक्षा वार्डन गंभीर रूप से घायल अवस्था में दर्द से कराह रहे थे। बाल सुधार गृह के भीतर बंद बाल बंदियों ने सुरक्षाकर्मियों पर हमला कर उनके साथ बुरी तरह मारपीट की थी।\n\n अपनी फरारी की योजना को पूरी तरह से अमलीजामा पहनाने के लिए नाबालिगों ने परिसर में मौजूद सभी टेलीफोन के तारों को काट दिया था ताकि बाहर किसी भी तरह का संपर्क न किया जा सके। इसके अलावा उन्होंने वार्डनों के पास मौजूद मोबाइल फोन भी छीन लिए थे। जब स्थिति पर नियंत्रण पाने के बाद पड़ताल शुरू की गई, तो पता चला कि अलग-अलग गंभीर आपराधिक मामलों में बंद 20 नाबालिग वहां से भागने में कामयाब हो गए हैं। इन फरार होने वाले बंदियों में हिमांशु और उसका रिश्तेदार साहिल भी शामिल थे।\n\n घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया और चारों तरफ नाकेबंदी कर दी गई। पुलिस की मुस्तैदी से 20 में से 18 नाबालिगों को अलग-अलग इलाकों से फिर से हिरासत में ले लिया गया। हालांकि, हिमांशु और साहिल पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई को चकमा देकर गायब होने में सफल रहे। उस दिन के बाद से लेकर आज तक पुलिस हिमांशु को दोबारा कभी पकड़ नहीं पाई है।\n\n \n\nदिल्ली के अंडरवर्ल्ड से साठगांठ और वफादारी का इम्तिहान\n\nहिसार के बाल सुधार गृह की दीवारें लांघने से पहले ही हिमांशु ने अपने भविष्य के आपराधिक खाके की पटकथा तैयार कर ली थी। उसे इस बात का भली-भांति अहसास था कि स्वतंत्र रूप से काम करने के लिए उसे बड़े अंडरवर्ल्ड सिंडिकेट के साथ जुड़ना होगा। इसी रणनीति के तहत उसने दिल्ली-एनसीआर के बड़े गैंगस्टर नेटवर्क में अपनी जगह बनाने की कोशिशें शुरू कर दीं। वह किसी तरह दिल्ली के कुख्यात गैंगस्टर नीरज बवाना के बेहद करीबी सहयोगी नवीन बाली के संपर्क में आने में कामयाब रहा।\n\n उस दौर में दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में नीरज बवाना गैंग का गहरा प्रभाव था। नीरज बवाना खुद उस समय तिहाड़ जेल के भीतर बंद था। नवीन बाली से मुलाकात के बाद हिमांशु ने अपनी महत्वाकांक्षा को जाहिर करते हुए सीधे नीरज बवाना से मिलने की इच्छा जताई। हालांकि, नीरज बवाना उस समय तिहाड़ जेल की अति-सुरक्षित आइसोलेशन सेल में कैद था, जिसके कारण नवीन बाली के लिए तुरंत यह मुलाकात करवा पाना संभव नहीं था।\n\n हिमांशु द्वारा बार-बार नीरज से मिलने का दबाव बनाए जाने पर नवीन बाली ने उसके सामने एक कड़ी शर्त रखी। बाली ने हिमांशु से कहा कि अगर वह बड़े गैंग में शामिल होना चाहता है, तो उसे सबसे पहले अपनी वफादारी साबित करनी होगी। इस वफादारी के इम्तिहान के रूप में हिमांशु को विरोधी अशोक प्रधान गैंग के तीन प्रमुख सदस्यों की हत्या करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। हिमांशु ने इस काम को स्वीकार किया और नवीन बाली के गुर्गों की मदद से इस तिहरे हत्याकांड को अंजाम देकर अपनी क्रूरता का सबूत दे दिया।\n\n हालांकि, बाद में जब पुलिस ने तिहाड़ जेल में बंद नीरज बवाना से पूछताछ की, तो उसने हिमांशु के साथ किसी भी तरह के सीधे संबंध से साफ इंकार कर दिया। नीरज बवाना का तर्क था कि वह आइसोलेशन सेल में बंद होने के कारण बाहरी दुनिया की गतिविधियों से पूरी तरह कटा हुआ था। दूसरी तरफ, नवीन बाली ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि वफादारी साबित करने के कुछ ही समय बाद हिमांशु ने अपने साथी साहिल और योगेश कादियान उर्फ बॉबी के साथ मिलकर एक स्वतंत्र गैंग बनाने का फैसला कर लिया था।\n\n \n\nगैंगवार, पुलिस की घेराबंदी और 'भाऊ' गैंग का दबदबा\n\nसमय बीतने के साथ-साथ अपराध की दुनिया में हिमांशु की जड़े और ज्यादा गहरी होती चली गईं। अगस्त 2022 तक के आंकड़ों के अनुसार, केवल रोहतक के शिवाजी कॉलोनी पुलिस स्टेशन में ही उसके खिलाफ हत्या और रंगदारी समेत 12 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हो चुके थे। इसी दौरान, गांव में अवैध शराब के कारोबार पर वर्चस्व को लेकर उसके परिवार और गांव के ही एक अन्य परिवार के बीच रंजिश चरम पर पहुंच गई।\n\n साल 2022 में इस आपसी दुश्मनी ने खूनी मोड़ ले लिया, जब अंधाधुंध गोलीबारी की एक वारदात में दो लोगों की जान चली गई। अपने विरोधी गुट से बदला लेने के लिए हिमांशु ने प्रतिद्वंद्वी पक्ष के एक बस चालक की दिनदहाड़े हत्या कर दी। इस वारदात के बाद हरियाणा पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया और हिमांशु की गिरफ्तारी के लिए बड़े पैमाने पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया।\n\n पुलिस ने हिमांशु को पकड़ने के लिए उसके पैतृक गांव रिताउली में स्थायी रूप से डेरा डाल दिया। गांव के सभी प्रवेश और निकास द्वारों पर कड़े बैरिकेड्स लगा दिए गए। गांव से गुजरने वाली हर गाड़ी की सघन तलाशी ली गई और संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई। पुलिस की इस अभूतपूर्व घेराबंदी और सख्त पहरेदारी के बावजूद हिमांशु पुलिस के बिछाए जाल को काटकर सुरक्षित निकलने में कामयाब रहा।\n\n इसके बाद हिमांशु का नेटवर्क केवल रोहतक या रिताउली तक सीमित नहीं रहा। उसने अपने रिश्तेदार साहिल के साथ मिलकर औपचारिक रूप से अपने नए आपराधिक सिंडिकेट की नींव रखी। इसी मोड़ से हिमांशु को अपराध की दुनिया में 'हिमांशु भाऊ' का नया नाम मिला। देखते ही देखते उसने दिल्ली, हरियाणा और पंजाब के व्यापक इलाकों में अपना मजबूत नेटवर्क खड़ा कर लिया और रंगदारी, सुपारी किलिंग तथा अवैध वसूली के मामलों में एक बड़ा नाम बन गया।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: संगठित अपराध और बाल सुधार गृहों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं, जिससे अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।\n\nदिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में: गैंगस्टर नेटवर्क के प्रसार से स्थानीय कारोबारियों और नागरिकों के लिए सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. हिमांशु भाऊ कौन है और वह क्यों चर्चा में है?\nहिमांशु भाऊ हरियाणा का एक इनामी गैंगस्टर है, जिसने नाबालिग रहते हुए हिसार बाल सुधार गृह से भागकर अपना अलग गैंग बनाया और दिल्ली, हरियाणा तथा पंजाब में अपना नेटवर्क फैलाया।\n\n2. हिमांशु हिसार के बाल सुधार गृह से कब और कैसे फरार हुआ था?\n12 अक्टूबर 2020 की शाम करीब 6 बजे हिमांशु अपने साथियों के साथ 3 सुरक्षा वार्डनों के साथ मारपीट करके, टेलीफोन की तारें काटकर और 20 बंदियों के साथ हिसार सुधार गृह से फरार हुआ था।\n\n3. हिमांशु पर पुलिस का पहला मामला कब दर्ज हुआ था?\nसाल 2018 में महज 15 साल की उम्र में गांव में अवैध शराब के कारोबार को लेकर हुई मारपीट के मामले में हिमांशु के खिलाफ पहली एफआईआर दर्ज की गई थी।\n\n4. दिल्ली के अंडरवर्ल्ड में कदम रखने के लिए हिमांशु ने क्या किया था?\nहिमांशु ने तिहाड़ जेल में बंद गैंगस्टर नीरज बवाना के सहयोगी नवीन बाली से संपर्क किया था और अपनी वफादारी साबित करने के लिए विरोधी अशोक प्रधान गैंग के तीन सदस्यों की हत्या की थी।\n\n5. हिमांशु को पकड़ने के लिए पुलिस ने क्या कदम उठाए?\nअगस्त 2022 में हत्या के मामले के बाद हरियाणा पुलिस ने हिमांशु के पैतृक गांव रिताउली में स्थायी रूप से डेरा डाला, नाकेबंदी की और वाहनों की सघन तलाशी ली, लेकिन वह चकमा देने में कामयाब रहा।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-08-20",
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    "हिमांशु भाऊ",
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