रोलेट एक्ट के विरोध के दौरान जब पलवल में अरेस्ट हुए थे महात्मा गांधी, मथुरा पुलिस लाइन में कटी थी रात फरवरी 1919 में ब्रिटिश सरकार द्वारा लागू किए गए काले कानून के विरोध में पंजाब जा रहे महात्मा गांधी को 9 अप्रैल 1919 को पलवल रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद उन्हें मथुरा लाया गया, जहां उन्होंने पुलिस लाइन के बैरक में रात बिताई और अगले दिन मुंबई वापस भेज दिया गया। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान मथुरा शहर ने कई ऐतिहासिक अध्यायों को देखा है, जिनमें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रसंग भी शामिल है। वर्ष 1919 में ब्रिटिश हुकुमत द्वारा बनाए गए एक दमनकारी कानून के विरोध में जब बापू पंजाब जा रहे थे, तब उन्हें बीच रास्ते में गिरफ्तार कर मथुरा लाया गया था। आजादी के आंदोलन के उस दौर में महात्मा गांधी को मथुरा की पुलिस लाइन स्थित बैरक में एक रात के लिए हिरासत में रखा गया था। आज भी मथुरा के इतिहास में इस घटना को एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में याद किया जाता है। काला कानून और महात्मा गांधी का पंजाब दौरा ब्रिटिश सरकार ने फरवरी 1919 में क्रांतिकारी गतिविधियों और देशव्यापी राष्ट्रीय चेतना को दबाने के उद्देश्य से आतंकवादी अपराध अधिनियम लागू किया था। इस कानून को भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों और आम जनता द्वारा 'काला कानून' कहा गया, क्योंकि इसने नागरिक अधिकारों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। महात्मा गांधी ने इस जनविरोधी कानून के खिलाफ देशभर में आवाज उठाई और पंजाब में जारी तनावपूर्ण स्थिति के बीच वहां के लोगों से मिलने का फैसला किया। इसी सिलसिले में 9 अप्रैल 1919 को गांधी जी मुंबई से अमृतसर के लिए ट्रेन से रवाना हुए थे। पलवल में गिरफ्तारी और मथुरा पुलिस लाइन में रात जैसे ही महात्मा गांधी की ट्रेन 9 अप्रैल 1919 को पलवल रेलवे स्टेशन पर पहुंची, वहां मौजूद एक एंग्लो इंडियन स्टेशन मास्टर ने उन्हें ब्रिटिश सरकार का सरकारी फरमान थमा दिया। आदेश दिखाते ही गांधी जी को पलवल स्टेशन पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। उसी दिन अधिकारियों द्वारा उन्हें मथुरा लाया गया। मथुरा पहुंचने पर सुरक्षा कारणों से बापू को मथुरा पुलिस लाइन ले जाया गया और वहां स्थित पुलिस बैरक में रखा गया। महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अपनी वह ऐतिहासिक रात उसी पुलिस बैरक में बिताई थी। स्टेशन पर उमड़ा 5000 लोगों का हुजूम महात्मा गांधी को मथुरा रेलवे स्टेशन लाए जाने की खबर जैसे ही शहर में फैली, बापू की एक झलक पाने के लिए लोगों का तांता लग गया। देखते ही देखते मथुरा स्टेशन पर करीब 5000 लोग एकत्र हो गए। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने कुछ लोगों को स्टेशन का टिकट जारी किया, जबकि कई लोगों को प्रवेश देने से मना कर दिया गया। स्टेशन पर भारी भीड़ जमा होने और उपद्रव या शांति भंग होने की आशंका के कारण ब्रिटिश अधिकारियों ने गांधी जी को वहां ज्यादा देर न रोकने का फैसला लिया। 10 अप्रैल 1919 को उन्हें तुरंत वापस मुंबई के लिए रवाना करने की तैयारी की गई। ट्रेन की बोगी छूटने की अनूठी घटना इतिहास के पन्नों में 10 अप्रैल 1919 की इस वापसी यात्रा से जुड़ी एक दिलचस्प घटना भी दर्ज है। डॉ. सुरेश चंद्र शर्मा के अनुसार, जब महात्मा गांधी को मथुरा से मुंबई वापस भेजने वाली ट्रेन रवाना हुई, तो स्टेशन पर ही ट्रेन की एक बोगी कटकर अलग रह गई। इंजन और बाकी ट्रेन आगे बढ़ गई, जबकि वह बोगी वहीं छूट गई। जब तक अधिकारियों और ट्रेन चालक को इस बात का अहसास हुआ, तब तक ट्रेन लगभग 1 मील आगे निकल चुकी थी। बाद में ट्रेन को रोककर बोगी से जुड़े घटनाक्रम को संभाला गया। प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर गांधी जी की यादों की प्रदर्शनी महात्मा गांधी की इस ऐतिहासिक गिरफ्तारी और मथुरा प्रवास के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर रेलवे स्टेशन पर एक विशेष पहल की गई। मथुरा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर गांधी जी के जीवन और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी यादों की प्रदर्शनी तथा स्टॉल लगाई गई। डॉ. सुरेश चंद्र शर्मा ने बताया कि आम जनता में इस ऐतिहासिक घटना की जानकारी और जागरूकता बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया है। इस प्रदर्शनी के माध्यम से स्टेशन पर आने वाले यात्रियों को महात्मा गांधी के मथुरा आगमन, उनकी गिरफ्तारी और आजादी के आंदोलन में उनके योगदान से अवगत कराया जाता है। इसका आप पर असर • भारत में: यह ऐतिहासिक घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रति जागरूकता बढ़ाती है और देशवासियों को महात्मा गांधी के अहिंसक आंदोलन से प्रेरित करती है। • मथुरा और पलवल में: स्थानीय निवासियों और यात्रियों को मथुरा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर स्थित प्रदर्शनी के माध्यम से क्षेत्र के समृद्ध स्वतंत्रता इतिहास को जानने का अवसर मिलता है। सवाल-जवाब 1. महात्मा गांधी को कब और कहां गिरफ्तार किया गया था? महात्मा गांधी को 9 अप्रैल 1919 को पंजाब जाते समय पलवल रेलवे स्टेशन पर एंग्लो इंडियन स्टेशन मास्टर द्वारा गिरफ्तार किया गया था। 2. गिरफ्तारी के बाद महात्मा गांधी को कहां रखा गया था? गिरफ्तारी के बाद गांधी जी को मथुरा लाया गया, जहां उन्होंने मथुरा पुलिस लाइन के बैरक में एक रात बिताई थी। 3. ब्रिटिश सरकार ने फरवरी 1919 में कौन सा कानून लागू किया था? ब्रिटिश सरकार ने फरवरी 1919 में आतंकवादी अपराध अधिनियम (रोलेट एक्ट) लागू किया था, जिसे स्वतंत्रता सेनानियों ने काला कानून कहा। 4. मथुरा स्टेशन पर कितने लोग महात्मा गांधी को देखने एकत्र हुए थे? महात्मा गांधी के मथुरा पहुंचने की खबर मिलते ही स्टेशन पर लगभग 5000 लोग उनकी एक झलक पाने के लिए जमा हो गए थे। 5. 10 अप्रैल 1919 को ट्रेन से कौन सी अनोखी घटना घटी थी? 10 अप्रैल 1919 को गांधी जी को मुंबई वापस ले जा रही ट्रेन की एक बोगी मथुरा स्टेशन पर ही छूट गई थी और ट्रेन 1 मील आगे चली गई थी। प्रेरणा और सबक प्रेरणा और सीख: • अन्याय का अहिंसक विरोध: महात्मा गांधी ने रोलेट एक्ट जैसे दमनकारी कानून का निडर होकर अहिंसक तरीके से विरोध किया। • लक्ष्य के प्रति समर्पण: गिरफ्तारी और हिरासत के बावजूद बापू देश सेवा और स्वतंत्रता आंदोलन के अपने उद्देश्य से पीछे नहीं हटे। • जनसामान्य से जुड़ाव: बापू की उपस्थिति मात्र से हजारों लोग एकजुट हो गए, जो नेतृत्व के प्रति अपार जनविश्वास को दर्शाता है। https://trendkia.com/national/rowlatt-act-ke-virodha-ke-daurana-jaba-palwal-men-aresta-hue-the-mahatma-gandhi-mathura-pulisa-laina-men-kati-thi-rata-13984 TrendKia — Har trend, sabse pehle.