ओटीटी की अश्लीलता पर लगाम कसने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने बनाया खास पैनल, मोहन भागवत ने उठाए थे तीखे सवाल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर परोसी जा रही विवादित सामग्री से निपटने के लिए एक अनौपचारिक समिति का गठन किया है। यह समूह सरकार को विस्तृत प्रस्ताव सौंपने से पहले कानूनी विशेषज्ञों से चर्चा करेगा। डिजिटल माध्यमों पर प्रसारित होने वाली आपत्तिजनक और बोल्ड सामग्री के बढ़ते चलन पर अंकुश लगाने के इरादे से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अब सक्रिय कदम उठाया है। संघ के सर्वोच्च पदाधिकारियों द्वारा इस तरह की डिजिटल सामग्री को सामाजिक और नैतिक मूल्यों के लिए नुकसानदायक बताए जाने के बाद, इस सांस्कृतिक प्रदूषण से मुकाबले के वास्ते एक विशेष अनौपचारिक समूह का गठन किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ महीने पहले अस्तित्व में आए इस पैनल ने अपनी पहली महत्वपूर्ण बैठक भी पिछले महीने संपन्न कर ली है। इस विशेष अनौपचारिक समिति में शिक्षा जगत और सांस्कृतिक संगठनों से ताल्लुक रखने वाले वरिष्ठ प्रचारकों के साथ-साथ विभिन्न विश्वविद्यालयों के पूर्व कुलपति भी शामिल किए गए हैं। संघ से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह समूह गहन विचार-विमर्श के उपरांत एक व्यापक और विस्तृत प्रस्ताव तैयार करेगा। इस दस्तावेज को अंतिम रूप देने के बाद केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और शासन के अन्य संबंधित विभागों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। पारिवारिक ताने-बाने को सुरक्षित रखने और नई पीढ़ी को बचाने के लिए कड़े नियमों की मांग उठाई जा रही है। संघ का स्पष्ट मानना है कि वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर जिस प्रकार की अनियंत्रित और अवांछित सामग्री परोसी जा रही है, वह भारतीय परिवारों विशेषकर युवाओं की मानसिक स्थिति पर गहरा प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। पैनल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने वाली फिल्मों की भांति डिजिटल माध्यमों के लिए भी एक कड़े सेंसर बोर्ड जैसी संस्था का होना अनिवार्य किया जाए। समिति से जुड़े सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस अनौपचारिक समूह के कामकाज के लिए फिलहाल कोई सख्त समय-सीमा तय नहीं की गई है। सरकार के पास अपनी अंतिम सिफारिशें भेजने से पहले यह पैनल देश के जाने-माने कानूनी विशेषज्ञों, न्यायविदों और संविधान के जानकारों से भी विचार-विमर्श करेगा। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि भविष्य में प्रस्तावित नियमों को किसी भी तरह की कानूनी उलझनों से बचाया जा सके और एक ठोस व्यवस्था बनाई जा सके। इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में मोहन भागवत का वह बयान है जो उन्होंने 12 अक्टूबर, 2024 को नागपुर में अपने वार्षिक विजयादशमी संबोधन के दौरान दिया था। उस अवसर पर संघ प्रमुख ने डिजिटल माध्यमों पर परोसी जाने वाली सामग्री पर तीखा हमला बोलते हुए कहा था, “OTT प्लेटफॉर्म पर जिस तरह की चीजें दिखाई जाती हैं, वे इतनी घिनौनी होती हैं कि उनके बारे में बात करना भी अशोभनीय होगा… इसे कानून के जरिए रेगुलेट करने की जरूरत है क्योंकि यह नैतिक पतन के बड़े कारणों में से एक है।” उन्होंने समाज में फैल रही इस कथित विकृति के लिए सीधे तौर पर स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स को जिम्मेदार ठहराया था। संघ के भीतरूनी सूत्रों ने यह जानकारी भी साझा की है कि इस पैनल के गठन का निर्णय मुख्य रूप से कुटुंब प्रबोधन गतिविधियों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर लिया गया है। यह संघ का एक ऐसा अभियान है जिसका मुख्य उद्देश्य पारंपरिक पारिवारिक मूल्यों का पुनरुद्धार करना, विभिन्न पीढ़ियों के बीच आपसी रिश्तों को मजबूत करना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है। पदाधिकारियों का मानना है कि डिजिटल माध्यम आज के दौर में नैतिक मूल्यों के क्षरण के प्रमुख स्रोतों में तब्दील हो चुके हैं। पारंपरिक व्यवस्था की बात करें तो सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने वाली फिल्मों को सिनेमैटोग्राफ एक्ट, 1952 के प्रावधानों के तहत सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन से प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य होता है, जिसे सामान्य बोलचाल में सेंसर बोर्ड कहा जाता है। इसके विपरीत, वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स के कंटेंट के लिए ऐसी कोई पूर्व-प्रमाणन नियामक संस्था अस्तित्व में नहीं है। यह सामग्री मुख्य रूप से इन्फ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी रूल्स, 2021 और संबंधित आईटी तथा आपराधिक कानूनों के दायरे में आती है। जानकारों द्वारा इन डिजिटल माध्यमों के विनियामक ढांचे में मौजूद कमियों का मुद्दा समय-समय पर उठाया जाता रहा है। इस बीच सरकारी स्तर पर भी सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। इस साल 22 जुलाई को सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने संसद के निचले सदन लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी थी कि सरकार ने अश्लील सामग्री प्रसारित करने तथा आईटी अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता की धारा 294 और महिलाओं के अश्लील चित्रण अधिनियम की धारा 4 का उल्लंघन करने के आरोप में पिछले दो वर्षों के दौरान देश में 50 ऐसे प्लेटफॉर्म्स को सार्वजनिक पहुंच से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। इसका आप पर असर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा गठित इस पैनल की सिफारिशों का असर आने वाले समय में देश के डिजिटल मनोरंजन जगत और ओटीटी उपयोगकर्ताओं पर पड़ सकता है। • भारत में: यदि सरकार डिजिटल सामग्री के लिए किसी सख्त सेंसर बोर्ड या नई नियामक व्यवस्था को अनिवार्य बनाती है, तो सभी प्रमुख स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स को अपनी वेब सीरीज और फिल्मों की रिलीज से पहले कड़े संपादन और प्रमाणन दौर से गुजरना होगा। • उपयोगकर्ताओं के लिए: ओटीटी दर्शकों को आने वाले दिनों में बोल्ड और विवादित दृश्यों वाली सामग्री में कमी देखने को मिल सकती है, क्योंकि प्लेटफॉर्म्स कानूनी कार्रवाई के डर से अधिक सतर्क रुख अपनाएंगे। ऐसा क्यों हुआ डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर अश्लीलता और विवादित सामग्री पर नकेल कसने के लिए संघ द्वारा यह कदम पारंपरिक पारिवारिक मूल्यों के क्षरण और समाज में बढ़ती अवांछित प्रवृत्तियों की चिंताओं के कारण उठाया गया है। • नैतिक पतन की चिंता: संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा पूर्व में दिए गए बयानों में डिजिटल माध्यमों को समाज के नैतिक पतन का एक बड़ा कारण बताया गया था, जिसके बाद से ही इस दिशा में ठोस वैचारिक मंथन चल रहा था। • पारिवारिक मूल्यों का संरक्षण: कुटुंब प्रबोधन गतिविधियों के माध्यम से लगातार मिल रहे फीडबैक में यह बात सामने आई थी कि अनियंत्रित डिजिटल सामग्री नई पीढ़ी और पारंपरिक पारिवारिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा रही है। • नियामक अंतराल: सिनेमाघरों की फिल्मों के विपरीत ओटीटी सामग्री के लिए कोई पूर्व-प्रमाणन बोर्ड न होना और केवल आईटी नियमों के तहत कार्रवाई का सीमित दायरा होना भी इस पैनल के गठन की एक मुख्य वजह बना है। सवाल-जवाब 1. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने ओटीटी सामग्री से निपटने के लिए क्या कदम उठाया है? संघ ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर परोसी जा रही विवादित सामग्री पर नकेल कसने के लिए एक गोपनीय अनौपचारिक पैनल का गठन किया है। 2. इस अनौपचारिक पैनल में किन लोगों को शामिल किया गया है? इस समूह में शिक्षा और संस्कृति से जुड़े वरिष्ठ प्रचारकों के अलावा कई विश्वविद्यालयों के पूर्व कुलपतियों को शामिल किया गया है। 3. संघ का यह पैनल अपनी सिफारिशें किसे सौंपेगा? यह पैनल व्यापक विचार-विमर्श के बाद एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार करेगा जिसे केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और अन्य संबंधित विभागों को सौंपा जाएगा। 4. मोहन भागवत ने ओटीटी कंटेंट के बारे में क्या कहा था? मोहन भागवत ने 12 अक्टूबर, 2024 को नागपुर में कहा था कि ओटीटी पर दिखाई जाने वाली चीजें इतनी घिनौनी होती हैं कि उन्हें कानून के जरिए रेगुलेट किया जाना चाहिए। 5. सरकार ने पिछले दो वर्षों में कितने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को बंद किया है? सरकार ने नियमों के उल्लंघन के चलते पिछले दो वर्षों में 50 ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को पब्लिक एक्सेस के लिए बंद कर दिया है। https://trendkia.com/national/rss-forms-special-panel-to-curb-ott-obscenity-following-mohan-bhagwat-remarks-32589 TrendKia — Har trend, sabse pehle.