आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने की जेन ज़ी की तारीफ, उधर सरकार ने AI डीपफेक पर कसा नकेल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने नई पीढ़ी की देशभक्ति और ईमानदारी पर भरोसा जताया है, जबकि केंद्र सरकार ने डीपफेक और अवैध एआई सामग्री हटाने के लिए 3 घंटे की सख्त समय सीमा तय कर दी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने देश की नई पीढ़ी यानी जेन ज़ी के युवाओं के साथ संवाद करते हुए उनकी देशभक्ति और ईमानदारी पर पूर्ण विश्वास जताया है। दो हजार से अधिक युवाओं की उपस्थिति में आयोजित इस विशेष संवाद कार्यक्रम के दौरान आरएसएस प्रमुख ने कहा कि आज का युवा पुरानी पीढ़ी की तुलना में कहीं अधिक ईमानदार और देश के प्रति समर्पित है। इसके साथ ही, डिजिटल मंचों पर सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से भारत सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों के लिए नियम अत्यंत सख्त कर दिए हैं। नए नियमों के अंतर्गत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को किसी भी गैरकानूनी, एआई-जनरेटेड या डीपफेक सामग्री की शिकायत मिलने के तीन घंटे के भीतर उसे अपने मंच से हटाना अनिवार्य कर दिया गया है। युवाओं के आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था पर मोहन भागवत का दृष्टिकोण जंतर-मंतर पर हाल के समय में हुए छात्र प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए सरसंघचालक मोहन भागवत ने दो-टूक कहा कि युवाओं के आंदोलनों को राष्ट्रविरोधी या विदेशी फंडिंग से संचालित बताना पूरी तरह से गलत है। उन्होंने ऐसे आरोप लगाने वाले लोगों के विचारों से असहमति जताई और स्पष्ट किया कि देश का भविष्य सुधारने में जुटी युवा पीढ़ी पर अविश्वास करना उचित नहीं है। मोहन भागवत के अनुसार, युवाओं को अपनी मांगों के लिए आंदोलन करने का पूरा अधिकार है क्योंकि आंदोलन भी आपसी संवाद शुरू करने का एक लोकतांत्रिक तरीका होता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यदि समस्याओं पर समय रहते संवाद स्थापित कर लिया जाए, तो आंदोलन जैसी नौबत ही पैदा नहीं होगी। देश की वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर चर्चा करते हुए आरएसएस प्रमुख ने खुलकर स्वीकार किया कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में कमियां मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि जब तक इस सच्चाई को स्वीकार नहीं किया जाएगा, तब तक शिक्षा क्षेत्र में आवश्यक सुधार करना संभव नहीं होगा। इसलिए, शिक्षा प्रणाली की कमियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले युवाओं ने कुछ भी गलत नहीं किया है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़े सवाल के जवाब में मोहन भागवत ने कहा कि उनके पास इस विशिष्ट घटना की पूर्ण जानकारी नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह दृढ़ता से जोड़ा कि यदि उनके सामने किसी एक पक्ष की बात चुनने का विकल्प रखा जाए, तो वे बिना किसी हिचकिचाहट के जेन ज़ी के युवाओं की बात पर आंख मूंदकर भरोसा करेंगे। सामाजिक भेदभाव, आरक्षण नीति और संवाद का व्यापक संदेश देश में आरक्षण व्यवस्था के मुद्दे पर सरसंघचालक मोहन भागवत ने संघ के रुख को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि जब तक समाज में सामाजिक भेदभाव और असमानता की स्थिति बनी रहेगी, तब तक आरक्षण की व्यवस्था निरंतर जारी रहनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने एक महत्वपूर्ण सामाजिक विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि जिन परिवारों या व्यक्तियों को आरक्षण का लाभ मिल चुका है और जिनकी सामाजिक तथा आर्थिक स्थिति में पर्याप्त सुधार आ चुका है, वे यदि स्वयं बड़ा दिल दिखाते हुए आरक्षण का लाभ लेना छोड़ दें, तो इससे समाज में एक अत्यंत सकारात्मक और प्रेरणादायी संदेश जाएगा। मोहन भागवत के इस संबोधन के तीन मुख्य निष्कर्ष सामने आते हैं। पहला यह कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है और इसके विरुद्ध आवाज उठाना अनुचित नहीं है। दूसरा यह कि नई पीढ़ी अत्यंत समझदार और देशभक्त है, इसलिए उसे विदेशी फंड से संचालित बताकर बदनाम करना गलत है। तीसरा यह कि वे छात्रों की नीयत पर पूर्ण विश्वास रखते हैं। बिना किसी तरह के संकोच या किंतु-परंतु के जेन ज़ी का समर्थन करने के इस स्पष्ट बयान की सराहना की जा रही है, क्योंकि सार्वजनिक मंचों पर इस प्रकार खुलकर अपनी बात रखना दूरगामी प्रभाव छोड़ता है। सोशल मीडिया पर AI और डीपफेक के खिलाफ सरकार का कड़ा चाबुक एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, केंद्र सरकार ने डिजिटल स्पेस को सुरक्षित बनाने और एआई के दुरुपयोग को रोकने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों के लिए सामग्री विनियमन के नियमों को बेहद सख्त बना दिया है। नए दिशानिर्देशों के तहत, यदि किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गैरकानूनी, एआई-निर्मित या डीपफेक सामग्री पोस्ट की जाती है, तो शिकायत प्राप्त होने के तीन घंटे के भीतर कंपनियों को उस सामग्री को अपने सर्वर से हटाना होगा। इससे पहले, अदालत या सरकार के आदेश पर ऐसी सामग्रियों को हटाने के लिए 36 घंटे की मोहलत दी जाती थी, जिसे अब घटाकर मात्र तीन घंटे कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, ग्रीवांस रिड्रेसल यानी शिकायत निवारण की समय-सीमा में भी बड़ा बदलाव किया गया है। बच्चों के यौन शोषण और अश्लीलता से जुड़े बेहद संवेदनशील मामलों में कार्रवाई की समय-सीमा को 24 घंटे से घटाकर महज दो घंटे कर दिया गया है। डिजिटल मंचों को अब एआई-जनरेटेड सामग्री की पहचान और रोकथाम के लिए उन्नत ऑटोमेटेड तकनीक अपनानी होगी। इसके साथ ही, एआई से निर्मित सामग्री पर स्पष्ट लेबलिंग और ट्रेसेबल मेटाडेटा को अनिवार्य किया गया है ताकि किसी भी फर्जी सामग्री के मूल स्रोत तक आसानी से पहुंचा जा सके। नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। डीपफेक के बढ़ते खतरे और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता डीपफेक वीडियो और फर्जी एआई कंटेंट के विरुद्ध यह सख्त कदम उठाना वर्तमान डिजिटल युग में अत्यंत आवश्यक हो गया था। आम नागरिकों के लिए वास्तविक वीडियो और एआई द्वारा तैयार किए गए डीपफेक में अंतर कर पाना लगभग असंभव होता जा रहा है। वर्तमान में एआई सामग्री का दुरुपयोग फर्जी दवाइयों के विज्ञापनों, धोखाधड़ी वाली निवेश योजनाओं, वरिष्ठ नागरिकों को ठगने और बच्चों को गुमराह करने के लिए बहुतायत में किया जा रहा है। कई मामलों में डीपफेक वीडियो के जरिए भ्रामक सूचनाएं फैलाकर जनभावनाओं को भड़काने के प्रयास भी सामने आए हैं। पूर्व में यह देखा जाता था कि जब तक किसी फर्जी सामग्री या डीपफेक वीडियो को हटाया जाता था, तब तक हजारों-लाखों लोग उसे देख चुके होते थे और उसके बहकावे में आ जाते थे। अब तीन घंटे के भीतर सामग्री को हटाने की अनिवार्यता लागू होने से साइबर अपराधों और फर्जी सूचनाओं के प्रसार पर प्रभावी रोक लग सकेगी। सरकार द्वारा उठाया गया यह ऐतिहासिक कदम आम नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव सिद्ध होगा। इसका आप पर असर • भारत में: सोशल मीडिया यूजर्स को अब फर्जी एआई विज्ञापनों और डीपफेक ठगी से तेजी से सुरक्षा मिलेगी क्योंकि शिकायत के 3 घंटे में सामग्री हटाना अनिवार्य होगा। • युवाओं के लिए: छात्र आंदोलनों और शिक्षा प्रणाली की कमियों पर आरएसएस प्रमुख के खुले समर्थन से युवा वर्ग के संवाद और अधिकारों को बढ़ावा मिलेगा। सवाल-जवाब 1. मोहन भागवत ने जेन ज़ी (Gen Z) के बारे में क्या कहा? मोहन भागवत ने कहा कि देश की नई जेन ज़ी पीढ़ी पुरानी पीढ़ी से कहीं अधिक ईमानदार और देशभक्त है, और उन पर अविश्वास करना गलत है। 2. जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर मोहन भागवत का क्या रुख था? उन्होंने छात्रों के प्रदर्शन को राष्ट्रविरोधी या विदेशी फंडिंग से संचालित कहने का खंडन किया और कहा कि आंदोलन संवाद शुरू करने का एक जरिया है। 3. सोशल मीडिया पर डीपफेक हटाने के लिए नया नियम क्या है? नए नियमों के तहत शिकायत मिलने के 3 घंटे के भीतर सोशल मीडिया कंपनियों को एआई-जनरेटेड या डीपफेक सामग्री हटानी होगी। 4. बच्चों के शोषण से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री पर कार्रवाई की क्या समय सीमा है? ऐसी संवेदनशील सामग्री की शिकायत मिलने पर कंपनियों को 2 घंटे के भीतर कार्रवाई कर उसे हटाना होगा। https://trendkia.com/national/rss-pramukha-mohan-bhagwat-ne-ki-gen-z-ki-taripha-udhara-sarakara-ne-ai-dipapheka-para-kasa-nakela-14816 TrendKia — Har trend, sabse pehle.