# रूस पर अमेरिकी सीनेट की सख्त पाबंदी से भारत पर बढ़ा 100% टैरिफ का खतरा, वॉशिंगटन में मौजूद जेलेंस्की ने जताया आभार

> अमेरिकी सीनेट ने रूस पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को मंजूरी दी है, जिससे भारत और चीन जैसे देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का रास्ता साफ हो सकता है। संसद की दर्शक दीर्घा में बैठकर इस वोटिंग को देखने वाले यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अमेरिकी सांसदों का शुक्रिया अदा किया है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-07-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/russia-para-us-senate-ki-sakhta-pabndi-se-india-para-barha-100-tariff-ka-khatara-washington-men-maujuda-zelenskiy-ne-jataya-abhara-11751 · **Language:** Hindi
**Tags:** रूस पाबंदी बिल, अमेरिकी सीनेट, भारत अमेरिका टैरिफ, वोलोडिमिर जेलेंस्की, डोनाल्ड ट्रंप, रूस भारत तेल व्यापार

अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट ने रूस के खिलाफ आर्थिक शिकंजा कसने वाले एक अत्यंत कड़े प्रतिबंध विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए अपनी मंजूरी दे दी है। वॉशिंगटन स्थित अमेरिकी कैपिटल परिसर में आयोजित इस महत्वपूर्ण मतदान के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की खुद सीनेट की दर्शक दीर्घा में उपस्थित रहे। सीनेट के इस कदम से मास्को पर वित्तीय दबाव कई गुना बढ़ने की संभावना है, लेकिन इसके दूरगामी असर भारत और चीन जैसे उन प्रमुख देशों पर भी पड़ सकते हैं जो रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का आयात करते हैं। यदि यह विधेयक अंतिम रूप से कानून की शक्ल अख्तियार कर लेता है, तो अमेरिकी प्रशासन के पास भारत समेत पांच बड़े ऊर्जा आयातक देशों के उत्पादों पर 100 प्रतिशत तक का भारी सीमा शुल्क लगाने का अधिकार आ जाएगा।

## कैपिटल की दीर्घा में बैठे जेलेंस्की ने सांसदों का जताया आभार
जिस समय अमेरिकी सीनेट के पटल पर रूस के विरुद्ध प्रतिबंधों की प्रक्रिया पर मतदान चल रहा था, उस समय यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की सीनेट की दीर्घा में बैठकर पूरी कार्यवाही को ध्यान से देख रहे थे। मतदान के दौरान विधेयक को आगे बढ़ाने के पक्ष में 86 अमेरिकी सांसदों ने वोट दिया, जबकि 12 सांसदों ने इसके खिलाफ अपना मत दर्ज कराया। मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद जेलेंस्की ने अमेरिकी सांसदों का हार्दिक धन्यवाद व्यक्त किया और इस कदम को अपनी रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे यूक्रेन के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ करार दिया। उन्होंने कहा कि रूसी अर्थव्यवस्था और उसके युद्ध तंत्र की कमर तोड़ने के लिए इस प्रकार के कड़े वित्तीय प्रतिबंध अत्यंत आवश्यक थे। उनके अनुसार, यह निर्णय केवल एक आर्थिक नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे यूरोपीय महाद्वीप के लिए स्वतंत्रता और एकजुटता का एक सशक्त संदेश भी है। अपनी बातचीत के दौरान जेलेंस्की ने अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के योगदान की विशेष रूप से सराहना की।

## दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम का संकल्प और विधेयक की पृष्ठभूमि
रूस पर कठोर पाबंदियां लगाने वाले इस ऐतिहासिक विधेयक की नींव सबसे पहले अप्रैल 2025 में रखी गई थी। इस विधायी पहल को मूर्त रूप देने में दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम की केंद्रीय भूमिका रही थी, जिन्हें वॉशिंगटन में यूक्रेन का सबसे पक्का रणनीतिक समर्थक माना जाता था। सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने विधायी प्रक्रिया के दौरान यह जानकारी साझा की कि अपने अंतिम दिनों में लिंडसे ग्राहम ने इस ड्राफ्ट पर व्हाइट हाउस के साथ पूर्ण सहमति बना ली थी। ग्राहम का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा कानूनी तंत्र तैयार करना था जो रूस को वित्तीय रूप से पंगु बना सके। अब इस विधेयक में 100 प्रतिशत तक के टैरिफ का जो कड़ा प्रावधान शामिल किया गया है, वह भारत जैसे व्यापारिक साझेदारों के सामने एक नया आर्थिक संकट खड़ा कर सकता है।

## प्रतिबंध विधेयक के मुख्य प्रावधान और 15 प्रतिशत छूट का नियम
इस अमेरिकी विधेयक का प्राथमिक उद्देश्य वॉशिंगटन की ओर से व्लादिमीर पुतिन के युद्ध कोष में जाने वाले राजस्व को पूरी तरह रोकना है। अमेरिकी रणनीतिकारों का मानना है कि रूसी कच्चे तेल और गैस की अंतरराष्ट्रीय बिक्री ही मास्को को अपनी सैन्य कार्रवाइयों को जारी रखने का मुख्य सहारा प्रदान करती है। इस विधेयक के लागू होने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह कानूनी अधिकार प्राप्त हो जाएगा कि वे उन पांच प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक का दंडात्मक टैरिफ लगा सकें जो रूस से सर्वाधिक ऊर्जा आयात करते हैं। हालांकि, विधायी मसौदे में एक विशेष राहत खंड भी जोड़ा गया है। यदि कोई देश रूस से अपनी कुल प्राकृतिक गैस का 15 प्रतिशत से कम हिस्सा आयात करता है और साथ ही रूसी ऊर्जा संसाधनों पर अपनी निर्भरता को चरणबद्ध तरीके से कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाता नजर आता है, तो उसे इन भारी पाबंदियों से छूट दी जा सकती है।

## भारत-रूस ऊर्जा संबंधों और नई दिल्ली के समक्ष उत्पन्न चुनौतियां
भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय संबंध दशकों पुराने हैं और ऊर्जा के मोर्चे पर दोनों देशों की साझेदारी काफी मजबूत रही है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, चीन के बाद भारत दुनिया में रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार देश है। ऐसी स्थिति में, यदि यह नया विधेयक अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद लागू होता है और भारत के खिलाफ 100 प्रतिशत टैरिफ का इस्तेमाल किया जाता है, तो नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच व्यापारिक संबंधों में भारी तनाव आ सकता है। भारत के लिए इस प्रकार की अमेरिकी कार्रवाई का सामना करना एकदम नया नहीं है। इससे पहले अगस्त 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से कच्चा तेल खरीदने की वजह से भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगा दिया था। उस निर्णय के बाद भारत पर लगने वाला कुल अमेरिकी टैरिफ बढ़कर 50 प्रतिशत के उच्च स्तर तक पहुंच गया था। अब इस नए कानून के बनने से भारतीय निर्यातकों के सामने कहीं अधिक गंभीर आर्थिक चुनौती खड़ी हो सकती है।

## द्विपक्षीय व्यापार वार्ता और संतुलन की कठिन राह
अमेरिका का यह ताजा कड़ा रुख ऐसे संवेदनशील मोड़ पर आया है जब भारत और अमेरिका एक महत्वाकांक्षी द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए गहन बातचीत में व्यस्त हैं। दोनों पक्षों के बीच जारी चर्चाओं से यह उम्मीद जताई जा रही थी कि नया ट्रेड डील संपन्न होने के बाद भारतीय उत्पादों पर लगने वाला कुल अमेरिकी शुल्क घटकर महज 18 प्रतिशत के स्तर पर आ जाएगा। लेकिन सीनेट में इस रूस प्रतिबंध विधेयक के तेजी से आगे बढ़ने के कारण जारी व्यापारिक वार्ता पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। वॉशिंगटन के इस कड़े रुख के कारण भारत के लिए अपनी राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने और अमेरिकी बाजार में अपने व्यापारिक हितों की रक्षा करने के बीच एक सूक्ष्म संतुलन बिठाना बेहद जटिल साबित होगा।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** यदि यह विधेयक कानून बनकर 100 प्रतिशत टैरिफ में बदलता है, तो अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान महंगे हो सकते हैं, जिससे निर्यातकों पर असर पड़ेगा।

**वैश्विक स्तर पर:** रूस से कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति श्रृंखला में संभावित बाधाओं के कारण आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा कीमतें बढ़ सकती हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. अमेरिकी सीनेट में रूस प्रतिबंध विधेयक के पक्ष और विपक्ष में कितने वोट पड़े?
विधेयक को आगे बढ़ाने के पक्ष में 86 अमेरिकी सांसदों ने वोट दिया, जबकि 12 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया।

### 2. इस नए अमेरिकी विधेयक से भारत पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
यदि यह विधेयक पूरी तरह कानून बनता है, तो रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीदने के कारण भारत पर 100 प्रतिशत तक का अमेरिकी टैरिफ लगाया जा सकता है।

### 3. कौन से देश इस टैरिफ के दायरे से छूट प्राप्त कर सकते हैं?
जो देश रूस से अपनी कुल प्राकृतिक गैस का 15 प्रतिशत से कम आयात करते हैं और अपनी निर्भरता घटाने के प्रयास में जुटे हैं, उन्हें राहत मिल सकती है।

### 4. अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारत पर कितना अतिरिक्त टैरिफ लगाया था?
अगस्त 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, जिससे कुल टैरिफ 50 प्रतिशत पहुंच गया था।

### 5. भारत और अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड डील वार्ता पर इसका क्या असर हो सकता है?
प्रस्तावित ट्रेड डील से भारत पर लगने वाला टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत होने की उम्मीद थी, लेकिन इस नए विधेयक के कारण व्यापारिक और ऊर्जा प्राथमिकताओं में संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

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