# सब्जी मंडी थाने में तीन देगची और हुक्के की चोरी से शुरू हुआ था दिल्ली पुलिस का सफर, इसी तारीख को हुआ था वीरप्पन का खात्मा

> 18 अक्टूबर 1861 को दिल्ली के पहले पुलिस स्टेशन में 45 आने के घरेलू सामान की चोरी की पहली एफआईआर दर्ज हुई थी, जबकि 2004 में इसी दिन कुख्यात तस्कर वीरप्पन मारा गया था।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-17 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/sabzi-mandi-thane-men-tina-degachi-aura-hukke-ki-chori-se-shuru-hua-tha-delhi-police-ka-saphara-isi-tarikha-ko-hua-tha-veerappan-k-48920 · **Language:** Hindi
**Tags:** दिल्ली पुलिस, पहली एफआईआर, सब्जी मंडी थाना, वीरप्पन, भारतीय पुलिस अधिनियम 1861, इतिहास

देश की राजधानी में कानून व्यवस्था और औपचारिक पुलिसिंग की शुरुआत एक बेहद दिलचस्प और साधारण चोरी के मामले से हुई थी। आज से करीब 165 साल पहले, महिलाओं के वस्त्र, तंबाकू पीने का एक हुक्का, खाना पकाने में काम आने वाली तीन छोटी देगचियां और एक कटोरे की चोरी ने दिल्ली पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड की नींव रखी थी। 18 अक्टूबर 1861 को दर्ज हुआ यह मामला राजधानी का पहला औपचारिक पुलिस केस बना, जिसकी कुल चोरी की रकम उस वक्त महज 45 आने आंकी गई थी। समय के चक्र के साथ यह तारीख भारतीय इतिहास में दो बिल्कुल अलग, लेकिन बेहद चर्चित घटनाओं के लिए दर्ज हो गई।

## 45 आने की चोरी और सिक्कों का पुराना गणित
आज के दौर में जब किसी नुकसान या चोरी का मूल्यांकन रुपये और पैसे की आधुनिक इकाई में किया जाता है, उस समय की मुद्रा प्रणाली काफी अलग थी। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान एक रुपये में 16 आने हुआ करते थे। शिकायतकर्ता के घर से जो सामान गायब हुआ था, उसका कुल मूल्य 45 आने तय किया गया था, जो आधुनिक गणना के हिसाब से करीब 2 रुपये 81 पैसे के बराबर बैठता है। हालांकि आज यह रकम नगण्य लग सकती है, लेकिन उस समय इस घरेलू सामग्री की कानूनी शिकायत दर्ज कराना ऐतिहासिक साबित हुआ। इसी साधारण रपट ने दिल्ली के पुलिस अभिलेखागार में पहले दस्तावेज के तौर पर हमेशा के लिए अपनी जगह बना ली।

## उर्दू और फारसी की लिखावट में दर्ज हुई थी रपट
दस्तावेजी प्रमाण बताते हैं कि इस ऐतिहासिक मामले की शिकायत कराने वाले व्यक्ति का नाम मैउद्दीन था। वह तत्कालीन दिल्ली के कटरा शीश महल क्षेत्र के निवासी थे, जो उस दौर में नवगठित सब्जी मंडी पुलिस थाने के कार्यक्षेत्र में आता था। मौजूदा समय में पुलिस थानों में एफआईआर के लिए छपे हुए मानकीकृत प्रपत्रों का प्रयोग होता है, मगर 165 साल पहले ऐसा कोई प्रारूप नहीं था। उस दौर में मुगलों के समय से चली आ रही प्रशासनिक परंपरा के कारण अदालतों और सरकारी कामकाज में उर्दू और फारसी भाषा का गहरा प्रभाव था। इसी वजह से दिल्ली की इस सबसे पहली प्राथमिकी का कुछ हिस्सा उर्दू भाषा में और बाकी अंश फारसी लिपि में कलमबद्ध किया गया था।

## जब पंजाब प्रांत का अंग थी दिल्ली और बना पहला थाना
जिस दौर में यह पहली शिकायत लिखी गई, उस वक्त दिल्ली देश की राजधानी नहीं हुआ करती थी। प्रशासनिक ढांचे में दिल्ली को पंजाब प्रांत के एक हिस्से के तौर पर संचालित किया जा रहा था। ईस्ट इंडिया कंपनी के बाद सीधे ब्रिटिश हुकूमत के हाथ में सत्ता आने पर व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 लागू किया गया था। इस नए कानून के तहत अपराधों को धाराओं में दर्ज करने और उनका लिखित रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था बनाई गई। इसी कानूनी सुधार की कड़ी में 18 अक्टूबर 1861 को सब्जी मंडी पुलिस थाने की स्थापना की गई थी, जो दिल्ली का सबसे पहला आधिकारिक पुलिस स्टेशन बना।

## 2004 में इसी दिन समाप्त हुआ था चंदन तस्कर वीरप्पन का खौफ
अक्टूबर की 18 तारीख अपराध जगत के इतिहास में एक और बड़े मोड़ के लिए जानी जाती है। साल 2004 में इसी तारीख को दक्षिण भारत के जंगलों में दशकों तक आतंक का पर्याय बने कुख्यात दस्यु सरगना और चंदन तस्कर वीरप्पन को सुरक्षाबलों ने मार गिराया था। वीरप्पन पर चंदन की बेशकीमती लकड़ियों की तस्करी, हाथियों के अवैध शिकार और अनगिनत हत्याओं समेत कई संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल की पुलिस दशकों से उसकी तलाश में खाक छान रही थी। अंततः तमिलनाडु के स्पेशल टास्क फोर्स ने एक बड़े खुफिया अभियान के तहत 18 अक्टूबर 2004 को मुठभेड़ में इस दुर्दांत अपराधी का अंत कर दिया।

## इसका आप पर असर
यह ऐतिहासिक विवरण नागरिकों को पुलिस रिकॉर्ड और कानूनी अधिकारों के विकास को समझने में मदद करता है।

- **नागरिक अधिकारों की समझ:** लिखित एफआईआर की शुरुआत से यह तय हुआ कि कोई भी नागरिक अपराध की औपचारिक रपट लिखा सकता है। आज यह प्रक्रिया डिजिटल और ऑनलाइन शिकायतों तक पहुंच चुकी है।
- **दिल्ली के निवासियों के लिए:** राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और थानों का वर्तमान नेटवर्क इसी शुरुआती सब्जी मंडी थाने से विकसित हुआ है। स्थानीय लोग समझ सकते हैं कि उनके शहर का प्रशासनिक ढांचा कैसे बना।
- **कानूनी साक्षरता:** 1861 के पुलिस अधिनियम के लागू होने से दंड और धाराओं का लिखित आधार तैयार हुआ। इससे आम जनता को अपने कानूनी अधिकारों और जांच प्रक्रियाओं की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि जानने का मौका मिलता है।
- **सुरक्षा इतिहास का ज्ञान:** वीरप्पन के खात्मे की तारीख सुरक्षा बलों के दशकों लंबे संयुक्त अभियानों की सफलता को रेखांकित करती है। यह दिखाता है कि जटिल जंगलों में भी अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय कैसे काम करता है।

## ऐसा क्यों हुआ
दिल्ली में पहली एफआईआर और नए पुलिस थाने की स्थापना ब्रिटिश प्रशासन द्वारा कानूनी ढांचे को व्यवस्थित करने की योजना का परिणाम थी, जबकि वीरप्पन का अंत दशकों पुरानी तलाश का नतीजा था।

- **1861 के पुलिस सुधार:** 1857 के घटनाक्रम के बाद ब्रिटिश हुकूमत ने पूरे देश में कानून व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 पारित किया। इसके तहत अपराधों को लिखित रूप में दर्ज करना अनिवार्य बनाया गया, जिसके कारण सब्जी मंडी थाने की स्थापना हुई।
- **दस्तावेजीकरण की नई नीति:** प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए मौखिक शिकायतों के बजाय लिखित रपट दर्ज करने की शुरुआत की गई। इसी नई नीति के तहत मैउद्दीन की शिकायत को दिल्ली की पहली एफआईआर के रूप में दर्ज किया गया।
- **वीरप्पन के खिलाफ संयुक्त अभियान:** चंदन तस्कर वीरप्पन कई दशकों से तीन राज्यों की पुलिस को चकमा दे रहा था। तमिलनाडु के स्पेशल टास्क फोर्स ने खुफिया तंत्र मजबूत करके अंततः 18 अक्टूबर 2004 को एक निर्णायक अभियान में उसे मार गिराया।

## सवाल-जवाब

### 1. दिल्ली की पहली एफआईआर किस तारीख को दर्ज की गई थी?
दिल्ली की पहली एफआईआर 18 अक्टूबर 1861 को दर्ज की गई थी।

### 2. पहली शिकायत में कौन-सा सामान चोरी हुआ था?
इसमें महिलाओं के कपड़े, एक हुक्का, खाना पकाने के तीन छोटे बर्तन और एक कटोरा चोरी होने की शिकायत थी।

### 3. चोरी हुए सामान की कीमत उस समय कितनी आंकी गई थी?
चोरी हुए पूरे सामान की कीमत 45 आने यानी करीब 2 रुपये 81 पैसे आंकी गई थी।

### 4. यह ऐतिहासिक एफआईआर किस थाने में और किन भाषाओं में लिखी गई थी?
यह शिकायत सब्जी मंडी थाने में दर्ज हुई थी और इसे उर्दू तथा फारसी भाषा में लिखा गया था।

### 5. 18 अक्टूबर 2004 को किस कुख्यात अपराधी का अंत हुआ था?
इस तारीख को तमिलनाडु स्पेशल टास्क फोर्स ने चंदन तस्कर वीरप्पन को मुठभेड़ में मार गिराया था।

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