# साइबर ठगों ने चित्रकूट डीएम पुलकित गर्ग की बनाई फर्जी प्रोफाइल, सेवानिवृत्त जवान के सामान के झांसे में 50000 रुपये की चपत

> चित्रकूट में डीएम पुलकित गर्ग के नाम से फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाकर मानिकपुर के एक निवासी से 50000 रुपये ठग लिए गए। ठगों ने सीआरपीएफ जवान का फर्नीचर बेचने का झांसा दिया था।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-07-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/saibara-thagon-ne-chitrakoot-dm-pulkit-garg-ki-banai-pharji-prophaila-sevanivritta-javana-ke-samana-ke-jhanse-men-50000-rupaye-ki--12060 · **Language:** Hindi
**Tags:** चित्रकूट, साइबर ठगी, पुलकित गर्ग, फर्जी फेसबुक आईडी, ऑनलाइन धोखाधड़ी, यूपी पुलिस

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक बेहद हैरान करने वाला तरीका अपनाया है, जहां प्रशासनिक पद की साख का फायदा उठाकर एक आम नागरिक से 50,000 रुपये ठग लिए गए। ठगों ने चित्रकूट के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग के नाम और फोटो का इस्तेमाल करके सोशल मीडिया पर एक फर्जी प्रोफाइल बनाई थी। इस फर्जी प्रोफाइल के माध्यम से मानिकपुर आर्य नगर के रहने वाले मोहम्मद असलम को निशाना बनाया गया और सेवानिवृत्त सैनिक का फर्नीचर बेचने का झांसा देकर उनसे मोटी रकम ऐंठ ली गई। पीड़ित की शिकायत के बाद साइबर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

## फेसबुक पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर बिछाया ठगी का जाल
आज के दौर में ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वाले नए-नए तरीकों से लोगों को अपनी चपेट में ले रहे हैं। पहले जहां फर्जी बैंक कर्मचारी या पुलिस अधिकारी बनकर फोन पर ओटीपी मांगा जाता था, वहीं अब साइबर अपराधी सोशल मीडिया पर बड़े अधिकारियों के नाम का सहारा ले रहे हैं। चित्रकूट में सामने आए इस मामले में ठगों ने जिलाधिकारी पुलकित गर्ग का चेहरा और नाम इस्तेमाल करते हुए फेसबुक पर फर्जी आईडी तैयार की। इसके बाद अपराधियों ने योजनाबद्ध तरीके से स्थानीय निवासियों से संपर्क साधना शुरू किया।

ठगी के शिकार बने मोहम्मद असलम के अनुसार, उन्हें फेसबुक पर जिलाधिकारी की तस्वीर लगी एक आईडी दिखाई दी। उस प्रोफाइल से संदेश भेजकर बातचीत शुरू की गई और कुछ ही देर में ठग ने मोहम्मद असलम का मोबाइल नंबर हासिल कर लिया। नंबर मिलने के बाद सीधे फोन कॉल की गई, जिसमें सामने वाले व्यक्ति ने खुद को चित्रकूट का जिलाधिकारी बताते हुए उनका भरोसा जीत लिया। अधिकारी का पद सुनकर पीड़ित को किसी भी प्रकार का संदेह नहीं हुआ और वह अपराधियों की बातों में आता चला गया।

## सेवानिवृत्त जवान के फर्नीचर का झांसा और 50,000 रुपये का ट्रांसफर
फोन पर बातचीत के दौरान फर्जी जिलाधिकारी ने मोहम्मद असलम से कहा कि उनके एक सीआरपीएफ साथी का स्थानांतरण हो गया है और वे सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि वे अपना पुराना फर्नीचर साथ नहीं ले जा सकते, इसलिए उसे बहुत कम कीमत में बेचना चाहते हैं। इसके तुरंत बाद मोहम्मद असलम के पास सुमित कुमार नाम के एक अन्य व्यक्ति का फोन आया। सुमित कुमार ने खुद को उसी सामान का मालिक बताया और कुल 95,000 रुपये में फर्नीचर का सौदा तय करने की बात कही।

ठगों ने चालाकी दिखाते हुए शर्त रखी कि जिलाधिकारी के निर्देशानुसार सामान उठाने से पहले अग्रिम भुगतान करना अनिवार्य होगा। घटना के समय मोहम्मद असलम किसी काम से प्रयागराज में मौजूद थे। इस वजह से वे स्वयं जाकर सामान की जांच करने में असमर्थ थे। उच्च प्रशासनिक अधिकारी का नाम जुड़ा होने के कारण उन्होंने पूरी बात पर विश्वास कर लिया और बताए गए नंबर पर ऑनलाइन माध्यम से 50,000 रुपये भेज दिए। बाकी रकम सामान की डिलीवरी के समय देने की बात हुई थी।

## रकम मिलते ही बंद हुए फोन नंबर, कलेक्ट्रेट पहुंचे पीड़ित
ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर होते ही ठगों का असली चेहरा सामने आ गया। भुगतान सफल होने के कुछ ही मिनटों बाद दोनों ठगों के मोबाइल नंबर अचानक बंद हो गए। पीड़ित ने लगातार कई दिनों तक उन नंबरों पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। फोन बंद मिलने और संपर्क पूरी तरह टूट जाने के बाद मोहम्मद असलम को अहसास हुआ कि वे एक सोची-समझी साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो चुके हैं।

धोखाधड़ी का अहसास होते ही मोहम्मद असलम सीधे चित्रकूट कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने जिलाधिकारी पुलकित गर्ग और पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह से मुलाकात कर अपने साथ घटी पूरी आपबीती सुनाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया। पीड़ित द्वारा दी गई लिखित तहरीर के आधार पर साइबर अपराध थाने में अज्ञात ठगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में कानूनी मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है और पुलिस की एक विशेष टीम आरोपियों की पहचान करने में जुट गई है।

## पुलिस प्रशासन और जिलाधिकारी ने जारी की विशेष चेतावनी
घटना की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने आम जनता को साइबर अपराधों के प्रति विशेष सावधानी बरतने का परामर्श दिया है। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों पर धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप या फोन कॉल के जरिए किसी बड़े अधिकारी, पुलिसकर्मी या परिचित के नाम पर पैसे की मांग करता है, तो बिना पूरी पड़ताल किए किसी भी खाते में पैसा न भेजें।

पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि किसी भी वित्तीय लेन-देन से पहले संबंधित व्यक्ति के आधिकारिक नंबर पर कॉल करके जानकारी की पुष्टि अवश्य कर लेनी चाहिए। इसके साथ ही जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने भी नागरिकों से अपील की है कि उनके नाम से चल रही किसी भी फर्जी फेसबुक आईडी या संदिग्ध संदेश के बहकावे में न आएं। पुलिस ने लोगों को जागरूक करते हुए कहा है कि किसी भी प्रकार का संदेहास्पद संदेश मिलने पर तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दर्ज कराएं।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** सोशल मीडिया पर वरिष्ठ अधिकारियों या जान-पहचान वालों के नाम से पैसे मांगे जाने पर बिना व्यक्तिगत सत्यापन के ऑनलाइन ट्रांसफर न करें।

**चित्रकूट में:** जिलाधिकारी या अन्य अधिकारियों के नाम से आ रहे संदिग्ध संदेशों पर तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर सेल से संपर्क करें।

## सवाल-जवाब

### 1. चित्रकूट में डीएम के नाम से कितने रुपये की ठगी हुई?
साइबर ठगों ने चित्रकूट के जिलाधिकारी के नाम पर 50,000 रुपये की ऑनलाइन ठगी की।

### 2. ठगी के शिकार पीड़ित व्यक्ति का नाम क्या है?
पीड़ित का नाम मोहम्मद असलम है, जो चित्रकूट के मानिकपुर आर्य नगर के रहने वाले हैं।

### 3. साइबर अपराधियों ने किस बहाने से पैसे ऐंठे?
ठगों ने सेवानिवृत्त सीआरपीएफ जवान का सामान 95,000 रुपये में बेचने का झांसा देकर 50,000 रुपये अग्रिम भुगतान के रूप में ट्रांसफर करवाए।

### 4. मामले में पुलिस प्रशासन ने क्या कानूनी कार्रवाई की है?
पीड़ित की शिकायत पर साइबर थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

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