सैदपुर तहसील में बुनियादी सुविधाओं का घोर संकट, पीने के साफ पानी और बैठने की जगह को तरस रहे वकील और फरियादी गाजीपुर की सैदपुर तहसील में आठ सालों से मूलभूत ढांचे की भारी कमी है, जहां नल में अत्यधिक आयरन और बैठने की पक्की व्यवस्था न होने से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। गाजीपुर जिले की सैदपुर तहसील में अपने मुकदमों और कानूनी कार्यों के सिलसिले में पहुंचने वाले आम नागरिकों और अधिवक्ताओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासनिक स्तर पर किए जाने वाले दावों के उलट जमीनी स्तर पर यहां बुनियादी सुविधाओं की भारी किल्लत बनी हुई है। परिसर में वकीलों और दूरदराज से आने वाले वादकारियों के बैठने के लिए कोई पक्का ढांचा या समुचित व्यवस्था तक मौजूद नहीं है। टीन शेड और टेंट के सहारे बीत रहे साल तहसील परिसर में कार्य करने वाले अधिवक्ता राजेश सिंह के अनुसार, पिछले 7-8 वर्षों से अधिवक्ता और अपने मामलों की पैरवी के लिए आने वाले पक्षकार टीन शेड तथा खांप के टेंट के नीचे बैठने को विवश हैं। मौसम की मार के बीच इस प्रकार की व्यवस्था में कामकाज संभालना बेहद कठिन हो जाता है। विशेष रूप से बारिश के मौसम में स्थिति अत्यंत विकट और नारकीय रूप धारण कर लेती है, जिससे लोगों के लिए वहां खड़ा रहना भी मुश्किल हो जाता है। दूषित पानी की मार और रोज का आर्थिक बोझ परिसर के भीतर पेयजल की व्यवस्था भी पूरी तरह चरमराई हुई है। सरकारी स्तर पर परिसर में स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने के लिए न तो कोई नया हैंडपंप लगाया गया है और न ही पानी की कोई टंकी स्थापित की गई है। जो नल मौजूद हैं, उनके पानी में आयरन की मात्रा इतनी ज्यादा है कि वह स्वास्थ्य के लिहाज से पीने योग्य नहीं रह गया है। इस वजह से वकीलों और आम फरियादियों को प्यास बुझाने के लिए प्रतिदिन 20 रुपये खर्च करके सीलबंद पानी का डिब्बा खरीदना पड़ता है। आठ वर्षों की शिकायतों के बाद भी प्रशासन बेपरवाह अधिवक्ताओं का कहना है कि वे इस गंभीर संकट को लेकर कई बार स्थानीय अधिकारियों से वार्ता कर चुके हैं और मामले को जिलाधिकारी के संज्ञान में भी लाया गया है। इसके बावजूद लगभग आठ वर्षों की लंबी अवधि बीत जाने के बाद भी प्रशासनिक मशीनरी ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। जनप्रतिनिधियों की अनदेखी और प्रशासनिक सुस्ती के कारण यहां आने वाले लोगों को अपने मौलिक नागरिक अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। स्थायी समाधान को लेकर वकीलों में नाराजगी सैदपुर तहसील में रोजाना बड़ी संख्या में लोग अपने मुकदमों की सुनवाई, भूमि संबंधी मामलों और अन्य आवश्यक प्रशासनिक कार्यों के लिए आते हैं। अधिवक्ताओं का स्पष्ट कहना है कि न्यायालयीन वातावरण में पीने के स्वच्छ पानी और बैठने का पर्याप्त इंतजाम अनिवार्य है। लंबे समय से बनी इस लचर व्यवस्था और प्रशासनिक बेरुखी को लेकर अधिवक्ताओं में गहरा रोष व्याप्त है, जो अब इस समस्या का स्थायी समाधान चाहते हैं। इसका आप पर असर इस प्रशासनिक अव्यवस्था का सबसे सीधा असर तहसील आने वाले आम फरियादियों की जेब और उनके स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। • भारत में: ग्रामीण और अर्ध-शहरी न्याय परिसरों में बुनियादी ढांचे की उपेक्षा नागरिकों के दैनिक कार्य और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करती है। यह स्थिति दिखाती है कि प्रशासनिक परिसरों में न्यूनतम नागरिक सुविधाओं का अभाव सार्वजनिक स्वास्थ्य और उत्पादकता को नुकसान पहुंचाता है। • गाजीपुर में: सैदपुर तहसील आने वाले वादकारियों और वकीलों को अपनी प्यास बुझाने के लिए प्रतिदिन 20 रुपये का अतिरिक्त खर्च पानी के जार पर उठाना पड़ रहा है। इसके साथ ही बरसात के मौसम में पक्की छत न होने से वहां अपने मामलों की पैरवी के लिए घंटों खड़े रहना बेहद कष्टकारी बन जाता है। • स्वास्थ्य संबंधी जोखिम: नलों में आयरन की अधिक मात्रा होने के कारण वहां आने वाले लोग दूषित पानी पीने के गंभीर खतरे का सामना कर रहे हैं। बिना सुरक्षित विकल्प के लोग मजबूरी में बाहर से पानी खरीदने पर निर्भर हैं अथवा दूषित स्रोतों से स्वास्थ्य जोखिम उठा सकते हैं। • न्यायिक कार्यप्रणाली: अधिवक्ताओं के बैठने के लिए पक्के कक्ष न होने से मुकदमों की फाइलें सुरक्षित रखना और क्लाइंट्स से परामर्श करना मुश्किल बना हुआ है। आठ वर्षों से जारी इस संकट के समाधान के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा नए बजट और योजनाओं को मंजूरी दिए जाने तक यह समस्या बनी रहेगी। ऐसा क्यों हुआ सैदपुर तहसील परिसर में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली कई वर्षों की प्रशासनिक उपेक्षा, बजटीय आवंटन की कमी और स्थानीय जल गुणवत्ता से जुड़ी समस्याओं का परिणाम है। • प्रशासनिक लापरवाही: तहसील परिसर में नए भवनों या पक्के शेड के निर्माण के लिए आवश्यक प्रस्तावों पर स्थानीय प्रशासन ने आठ सालों में ठोस कार्रवाई नहीं की। वकीलों द्वारा कई बार ज्ञापन देने और शीर्ष अधिकारियों से मिलने के बाद भी फाइलें आगे नहीं बढ़ सकीं। • भूजल में प्राकृतिक अशुद्धता: संबंधित क्षेत्र के भूमिगत जल स्रोतों में आयरन की मात्रा स्वाभाविक रूप से उच्च है, जिससे नलों का पानी बिना शोधन के पीने योग्य नहीं रहता। शासकीय स्तर पर शुद्धिकरण संयंत्र या विशेष वाटर ट्रीटमेंट टैंक स्थापित न किए जाने से समस्या विकराल बनी रही। • जनप्रतिनिधियों की उदासीनता: स्थानीय स्तर पर निर्वाचित प्रतिनिधियों ने जनता और वकीलों की इस बुनियादी मांग को प्राथमिकता नहीं दी। लंबे समय तक इस मांग की निगरानी न होने से तहसील परिसर में निर्माण कार्य ठप पड़ा रहा। सवाल-जवाब 1. सैदपुर तहसील परिसर में मुख्य रूप से किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है? परिसर में वकीलों और फरियादियों के बैठने के लिए पक्के शेड का अभाव है और पीने के लिए सुरक्षित व स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं है। 2. वकील और पक्षकार पिछले कितने समय से टेंट और टीन शेड में बैठ रहे हैं? अधिवक्ताओं के अनुसार वे पिछले 7 से 8 वर्षों से टीन शेड और टेंट के नीचे बैठने को मजबूर हैं। 3. परिसर में मौजूद नल के पानी में क्या खराबी है? नल के पानी में आयरन की मात्रा अत्यधिक है, जिसके कारण वह पीने योग्य नहीं है। 4. पीने के पानी के लिए वकीलों और आम जनता को क्या करना पड़ता है? प्यास बुझाने के लिए लोगों को रोजाना 20 रुपये खर्च करके पानी का डिब्बा खरीदना पड़ता है। 5. क्या इस समस्या को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया गया है? जी हां, अधिवक्ताओं ने कई बार स्थानीय अधिकारियों और जिलाधिकारी से वार्ता की है, लेकिन आठ वर्षों में कोई समाधान नहीं निकला। https://trendkia.com/national/saidpur-tahasila-men-buniyadi-suvidhaon-ka-ghora-snkata-pine-ke-sapha-pani-aura-baithane-ki-jagaha-ko-tarasa-rahe-vakila-aura-phar-37006 TrendKia — Har trend, sabse pehle.