# सामुदायिक पशुओं के संरक्षण को गति देने वनतारा ने शुरू किया 'चैंपियंस ऑफ केयर' अभियान

> विश्व पशु दिवस पर शुरू हुई इस राष्ट्रव्यापी पहल में 50 से ज्यादा पशु कल्याण संस्थाएं शामिल हुई हैं, जिसका लक्ष्य सालाना 20 लाख मूक प्राणियों तक सहायता पहुंचाना है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/samudayika-pashuon-ke-snrakshana-ko-gati-dene-vantara-ne-shuru-kiya-champions-of-care-abhiyana-43731 · **Language:** Hindi
**Tags:** अनंत अंबानी, वनतारा, चैंपियंस ऑफ केयर, पशु कल्याण, रिलायंस इंडस्ट्रीज, विश्व पशु दिवस

विश्व पशु दिवस के मौके पर बेसहारा और जरूरतमंद जीवों की सुरक्षा एवं उपचार व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक वृहद राष्ट्रीय कार्यक्रम सामने आया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक और पशु कल्याण के क्षेत्र में सक्रिय फिलांथ्रोपिस्ट अनंत एम. अंबानी ने 'चैंपियंस ऑफ केयर' नामक इस विशेष पहल का आगाज किया है। वनतारा की इस दूरगामी योजना का मुख्य ध्येय जमीनी स्तर पर सामुदायिक पशुओं की सेवा में जुटे ट्रस्टों और संस्थाओं को तकनीकी, ढांचागत और व्यावहारिक सहयोग देकर आत्मनिर्भर व सशक्त बनाना है।

## राष्ट्रीय नेटवर्क और विस्तृत स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
इस राष्ट्रव्यापी अभियान के अंतर्गत समूचे भारत से 50 से अधिक गैर-सरकारी व समर्पित पशु कल्याण संगठनों को एक साझा मंच पर एकत्रित किया गया है। ये सभी संस्थाएं आवारा कुत्तों, बिल्लियों के साथ-साथ बड़े मवेशियों की देखरेख, विशेष पशु चिकित्सालयों के संचालन, त्वरित मोबाइल रेस्क्यू वैन और वेटरनरी चिकित्सा जैसी आपातकालीन सेवाएं संचालित करती हैं। इस संयुक्त प्रयास के माध्यम से प्रत्येक वर्ष देश भर में लगभग 20 लाख बेजुबान जीवों तक सीधी पहुंच बनाने की रूपरेखा तैयार की गई है, जिसके तहत उन्हें समय पर डॉक्टरी इलाज, रेस्क्यू, सुरक्षित आश्रय, पौष्टिक आहार और दीर्घकालिक संरक्षण प्रदान किया जाएगा।

## सड़क पर रहने वाले और कामकाजी जीवों पर विशेष ध्यान
परियोजना के कार्यक्षेत्र में गलियों व मोहल्लों में घूमने वाले कुत्तों और बिल्लियों के अलावा उन मवेशियों, गधों और घोड़ों को भी शामिल किया गया है जिन्हें या तो मालिकों ने छोड़ दिया है या जो कठिन श्रम में इस्तेमाल होते हैं। सड़क हादसों में घायल, उपेक्षित और बेसहारा छोड़े गए पशुओं की निरंतर तीमारदारी पर विशेष जोर रहेगा। इसके साथ ही शहरी इलाकों में कुत्तों और बिल्लियों की अनियंत्रित आबादी को रोकने के लिए वैज्ञानिक पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) कार्यक्रमों तथा जिम्मेदार आबादी प्रबंधन को योजना का अहम अंग माना गया है।

## निस्वार्थ सेवा को संसाधन और मान्यता
पहल की शुरुआत करते हुए अनंत अंबानी ने रेखांकित किया कि हमारे समाज में अनगिनत ऐसे लोग मौजूद हैं जो बेहद सीमित साधनों के बावजूद मूक पशुओं की निरंतर सेवा करते हैं, परंतु उनके इस मौन समर्पण को अक्सर जरूरी पहचान नहीं मिल पाती। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'चैंपियंस ऑफ केयर' का मुख्य मकसद ऐसे ही निस्वार्थ कार्यकर्ताओं और संस्थाओं की ताकत बनना है, ताकि सामुदायिक जीवों के उपचार का दायरा बढ़े और एक अधिक संवेदनशील समाज की नींव मजबूत हो सके। उनके अनुसार, 'एवरी लाइफ मैटर्स' यानी हर जीवन अमूल्य है के विचार का वास्तविक प्रकटीकरण यही जमीनी सेवा है।

## नियामक भागीदारी और दो दिवसीय मंथन सत्र
इस राष्ट्रीय आयोजन में भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) के आठ प्रमुख सदस्यों ने भी प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया। बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष और मौजूदा सदस्य एसपी. गुप्ता ने अनंत अंबानी के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पशु कल्याण संगठनों के सामने आने वाली वास्तविक जमीनी दिक्कतों को परखा है और उनके स्थायी निवारण की गंभीर कोशिश की है।

दो दिनों तक चले इस विशेष सत्र के पहले दिन सभी आमंत्रित प्रतिनिधियों ने वनतारा परिसर का विस्तृत मुआयना किया। उन्होंने हाथियों के संरक्षण गृहों के साथ-साथ बाघ, शेर और तेंदुए जैसे विशाल मांसाहारी जीवों के आधुनिक बाड़ों तथा बाइसन, जेब्रा व हिरणों की विभिन्न प्रजातियों के लिए तैयार किए गए प्राकृतिक आवासों का अध्ययन किया। कार्यक्रम के दूसरे दिन विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने परस्पर संवाद किया, अपनी व्यावहारिक बाधाएं रखीं और आधुनिक ज्ञान, विशेषज्ञता तथा बुनियादी संसाधनों को आपस में बांटने के तौर-तरीकों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया।

## समझौता पत्र पर हस्ताक्षर और टिकाऊ बुनियादी ढांचा
सम्मेलन का सबसे निर्णायक मोड़ वनतारा और सभी 50 से ज्यादा सहभागी संगठनों के मध्य औपचारिक 'लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग' का निष्पादन रहा। इस दस्तावेज के आधार पर आपसी तालमेल, ज्ञान के आदान-प्रदान, कर्मियों के प्रशिक्षण और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं के अनुकूल भौतिक सहायता का एक मजबूत ढांचा स्थापित किया गया है।

तय योजना के मुताबिक सभी सहभागी संस्थाओं को पशु शेल्टरों के निर्माण, आधुनिक एंबुलेंस व मोबाइल क्लिनिक यूनिटों, आपातकालीन बचाव उपकरणों, उन्नत जांच व ऑपरेशन संबंधी मेडिकल मशीनों, कर्मचारियों के तकनीकी प्रशिक्षण और आजीवन देखभाल केंद्रों के संचालन के लिए हरसंभव संसाधन मुहैया कराए जाएंगे। इसके अतिरिक्त शेल्टरों को पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए सौर ऊर्जा संयंत्र, वर्षा जल संचयन प्रणाली और सुदृढ़ जल निकासी जैसी टिकाऊ व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। चर्चा के दौरान प्रतिनिधियों ने युवाओं और स्कूली बच्चों में जीव दया की भावना जगाने वाले जागरूकता अभियानों तथा पशुओं में फैलने वाली संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए विशेष क्वारंटीन वार्ड और रोग प्रबंधन तंत्र स्थापित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। आगामी दिनों में इस संजाल में अन्य संस्थाओं को भी जोड़ने की योजना है।

## इसका आप पर असर
यह राष्ट्रीय पहल देश भर में घायल और आवारा पशुओं के लिए आपातकालीन चिकित्सा और शेल्टर सुविधाओं को सुगम बनाएगी।

- **पशु प्रेमियों और नागरिकों के लिए:** आपके इलाके में घायल या बेसहारा मवेशियों और श्वानों के लिए अब बेहतर एंबुलेंस, हेल्पलाइन और वेटरनरी सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इससे स्थानीय स्तर पर किसी घायल जीव के मिलने पर तुरंत रेस्क्यू व अस्पताल सहायता पाना अधिक आसान हो जाएगा।
- **स्थानीय शेल्टरों और ट्रस्टों के लिए:** जमीनी स्तर पर फंड और उपकरणों की कमी से जूझ रही 50 से अधिक गैर-सरकारी संस्थाओं को आधुनिक मेडिकल मशीनें और इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा। इससे स्थानीय पशु चिकित्सालयों में जांच, ऑपरेशन और आजीवन आश्रय की गुणवत्ता में बड़ा सुधार आएगा।
- **शहरी स्वच्छता और सुरक्षा:** बड़े पैमाने पर पशु जन्म नियंत्रण और टीकाकरण अभियानों से आवारा श्वानों की आबादी और रेबीज जैसी बीमारियों के प्रसार पर रोक लगेगी। इसके परिणामस्वरूप रिहायशी कॉलोनियों और सड़कों पर इंसानों व पशुओं के बीच होने वाले टकराव में उल्लेखनीय कमी आएगी।
- **पर्यावरण और संक्रामक रोग नियंत्रण:** पशु आश्रयों में क्वारंटीन वार्ड बनने और सौर ऊर्जा तथा वर्षा जल संचयन लागू होने से बीमारियों के प्रसार का जोखिम घटेगा। यह कदम पशुओं के साथ-साथ आसपास रहने वाले नागरिकों के स्वास्थ्य को भी सुरक्षित रखने में मददगार साबित होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह कदम भारत में सामुदायिक पशु कल्याण संगठनों की सीमित वित्तीय व ढांचागत क्षमताओं को दूर करने के उद्देश्य से उठाया गया है। जमीनी स्तर पर सेवा देने वाली संस्थाएं अक्सर आवश्यक मेडिकल संसाधनों, एंबुलेंस और आधुनिक शेल्टरों की भारी कमी से जूझती हैं।

- **सीमित संसाधनों की चुनौती:** देश भर में सैकड़ों स्वयंसेवक और छोटे संगठन बेसहारा जानवरों की देखभाल करते हैं, लेकिन उनके पास उन्नत चिकित्सा उपकरण और बजट नहीं होता। इस कमी को पाटने के लिए बड़े पैमाने पर संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराया गया है।
- **विश्व पशु दिवस का अवसर:** विश्व पशु दिवस के वैश्विक मंच का उपयोग करते हुए 'एवरी लाइफ मैटर्स' के विचार को मूर्त रूप देने के लिए इस वृहद अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया गया।
- **सामूहिक सहयोग की आवश्यकता:** अलग-अलग काम कर रही संस्थाओं को एक नेटवर्क में लाकर ज्ञान, विशेषज्ञता और तकनीकों को साझा करने के लिए एक औपचारिक मंच की लंबे समय से दरकार थी।
- **नियामक और नीतिगत समर्थन:** भारतीय पशु कल्याण बोर्ड के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में संस्थाओं की जमीनी व्यावहारिक समस्याओं का स्थायी समाधान तलाशने के लिए यह ढांचा तैयार किया गया।

## सवाल-जवाब

### 1. 'चैंपियंस ऑफ केयर' पहल की शुरुआत किसने और किस मौके पर की?
इसकी शुरुआत रिलायंस इंडस्ट्रीज के कार्यकारी निदेशक और फिलांथ्रोपिस्ट अनंत एम. अंबानी ने विश्व पशु दिवस के अवसर पर की है।

### 2. इस अभियान में देश भर से कितनी संस्थाएं शामिल हुई हैं?
इस राष्ट्रीय पहल के तहत देश भर के 50 से अधिक पशु कल्याण संगठनों को एक साझा मंच पर जोड़ा गया है।

### 3. पहल के तहत सालाना कितने पशुओं तक सहायता पहुंचाने का लक्ष्य है?
इसके माध्यम से हर साल देश भर में करीब 20 लाख पशुओं तक चिकित्सा, रेस्क्यू, भोजन और देखभाल पहुंचाने का अनुमान है।

### 4. इस योजना के तहत किन पशुओं की देखभाल पर जोर दिया जाएगा?
इसमें सड़कों पर रहने वाले कुत्तों, बिल्लियों के अलावा छोड़े गए या कामकाजी मवेशियों, गधों और घोड़ों की देखभाल शामिल है।

### 5. भागीदार संगठनों को किस प्रकार की सहायता प्रदान की जाएगी?
संगठनों को एंबुलेंस, बचाव उपकरण, पशु आवास, जांच व उपचार की मशीनें, सौर ऊर्जा जैसी बुनियादी सुविधाएं और प्रशिक्षण दिया जाएगा।

### 6. इस कार्यक्रम में किस सरकारी संस्था के प्रतिनिधियों ने भाग लिया?
भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) के आठ सदस्यों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._