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  "title": "समुद्री रास्ते से जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की तैयारी में लश्कर, खुफिया एजेंसियों ने चेताया",
  "summary": "जमीनी रास्तों से घुसपैठ नाकाम होने के बाद पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा अब समुद्री रास्ते से जम्मू-कश्मीर में आतंकियों का नेटवर्क बढ़ाने की साजिश रच रहा है, खुफिया एजेंसियों ने आगाह किया है.",
  "content": "जम्मू-कश्मीर और पंजाब की सीमाओं पर भारत की चौकसी इतनी सख्त हो चुकी है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लिए जमीनी रास्ते से घुसपैठ कराना अब लगभग नामुमकिन हो गया है. यही वजह है कि संगठन ने अब समुद्री और जलमार्गों के जरिए आतंकियों को भारत भेजने की नई साजिश रचनी शुरू कर दी है. खुफिया एजेंसियों को मिली ताजा जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की मदद से लश्कर उन जलमार्गों का बारीकी से अध्ययन कर रहा है, जिनका इस्तेमाल कर जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को फिर से तेज किया जा सके. सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि इसके पीछे मकसद 2008 जैसे किसी बड़े हमले को दोहराना भी हो सकता है.\n\nजमीनी रास्ता बंद, तो समुद्र की तरफ रुख\nसूत्रों के मुताबिक, हाल के महीनों में ऑपरेशन सिंदूर के बाद से घुसपैठ की कई कोशिशें हुईं, लेकिन हर बार भारतीय सुरक्षा बलों ने आतंकियों की योजना को नाकाम कर दिया. सीमा पर बढ़ी निगरानी और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था के चलते जमीनी रास्ते से भारत में दाखिल होना आतंकियों के लिए बेहद मुश्किल हो चुका है. यही दबाव अब लश्कर को समुद्री रास्तों की तरफ धकेल रहा है.\n\n2008 मुंबई हमले की याद दिलाती रणनीति\nखुफिया अधिकारियों का कहना है कि जलमार्गों का इस्तेमाल लश्कर के लिए कोई नई बात नहीं है. साल 2008 के मुंबई आतंकी हमले में भी लश्कर के 10 आतंकवादी समुद्री रास्ते से ही भारत पहुंचे थे. फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार संगठन का मकसद सीधे किसी एक बड़े हमले तक सीमित नहीं बताया जा रहा, बल्कि जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकियों की तादाद बढ़ाना मुख्य लक्ष्य बताया जा रहा है.\n\nचिनाब-तावी नदियां और अखनूर सेक्टर रडार पर\nइंटेलिजेंस इनपुट बताते हैं कि जम्मू सेक्टर में चिनाब और तावी नदियां लश्कर के निशाने पर हैं. खासतौर पर अखनूर सेक्टर को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि यहां घने जंगल, नदी और जलाशयों का फायदा उठाकर पहले भी घुसपैठ की कोशिशें हो चुकी हैं. आशंका है कि आतंकी कोहरे और अंधेरे की आड़ में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने की योजना बना सकते हैं. अगर वे इस रास्ते से भारत में दाखिल होने में कामयाब हो गए, तो जम्मू-कश्मीर में अपने पुराने नेटवर्क को दोबारा सक्रिय करना उनके लिए आसान हो जाएगा.\n\nसर क्रीक और हरामी नाला भी संभावित रास्ते\nजम्मू-कश्मीर के अलावा गुजरात से सटे सर क्रीक और हरामी नाला इलाके को भी संभावित घुसपैठ मार्ग के तौर पर देखा जा रहा है. इन इलाकों में नियमित गश्त लगाना चुनौतीपूर्ण है, इसलिए आतंकी इनका फायदा उठाने की फिराक में रह सकते हैं. सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि अगर आतंकी गुजरात के रास्ते भारत में दाखिल होने में सफल हो जाते हैं, तो उन्हें सड़क मार्ग से जम्मू-कश्मीर तक पहुंचाने की कोशिश की जा सकती है.\n\n50 से 100 आतंकियों का नेटवर्क खड़ा करने की साजिश\nसूत्रों का दावा है कि लश्कर-ए-तैयबा का लक्ष्य जम्मू-कश्मीर में 50 से 100 सक्रिय पाकिस्तानी आतंकियों का नेटवर्क तैयार करना है. इस मकसद को पूरा करने के लिए संभावित घुसपैठियों को बड़े पैमाने पर समुद्री प्रशिक्षण दिया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक, यह प्रशिक्षण पाकिस्तान के मंगला डैम क्षेत्र में चल रहा है, वही जगह जहां 26/11 मुंबई हमले में शामिल आतंकियों को भी ट्रेनिंग दी गई थी.\n\nभारत की जवाबी तैयारी भी उतनी ही मजबूत\nहालांकि सुरक्षा एजेंसियों का साफ कहना है कि इस साजिश को अमली जामा पहनाना लश्कर के लिए आसान नहीं होगा. गृह मंत्रालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर स्पीडबोट, वाटरक्राफ्ट, फ्लोटिंग बॉर्डर आउटपोस्ट, अत्याधुनिक निगरानी उपकरण और दिन-रात देखने वाले उपकरणों की मदद से चौकसी लगातार बढ़ाई गई है. अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तान के भीतर बलूचिस्तान, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और खैबर पख्तूनख्वा में बढ़ती अस्थिरता के बीच लश्कर जम्मू-कश्मीर में किसी बड़ी आतंकी वारदात के जरिए अपने नेटवर्क को फिर से सक्रिय करने और अंतरराष्ट्रीय ध्यान भटकाने की कोशिश कर सकता है.\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: सीमा से सटे जलमार्गों पर आतंकी खतरे की आशंका बढ़ने के साथ तटीय और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा एजेंसियों की चौकसी, जांच और निगरानी और सख्त हो सकती है.\n• जम्मू-कश्मीर और गुजरात में: अखनूर, सर क्रीक और हरामी नाला जैसे संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को बढ़ी हुई गश्त, चेकिंग और सुरक्षा तैनाती का सीधा सामना करना पड़ सकता है.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. लश्कर-ए-तैयबा अब भारत में घुसपैठ के लिए किस रास्ते का इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है?\nजमीनी रास्तों से घुसपैठ मुश्किल होने के बाद संगठन अब समुद्री और जलमार्गों के जरिए आतंकियों को भारत भेजने की योजना बना रहा है.\n\n2. यह रणनीति नई क्यों नहीं मानी जा रही?\nक्योंकि 2008 के मुंबई हमले में भी लश्कर के 10 आतंकवादी समुद्री रास्ते से ही भारत पहुंचे थे.\n\n3. कौन से इलाके सबसे ज्यादा संवेदनशील माने जा रहे हैं?\nजम्मू सेक्टर में चिनाब और तावी नदियां तथा अखनूर सेक्टर के अलावा गुजरात से सटे सर क्रीक और हरामी नाला इलाके संवेदनशील माने जा रहे हैं.\n\n4. लश्कर का मुख्य लक्ष्य क्या बताया जा रहा है?\nसूत्रों के मुताबिक लश्कर जम्मू-कश्मीर में 50 से 100 सक्रिय पाकिस्तानी आतंकियों का नेटवर्क तैयार करना चाहता है.\n\n5. घुसपैठियों को प्रशिक्षण कहां दिया जा रहा है?\nजानकारी के अनुसार यह प्रशिक्षण पाकिस्तान के मंगला डैम क्षेत्र में दिया जा रहा है, जहां 26/11 हमले के आतंकियों को भी ट्रेनिंग मिली थी.\n\n6. भारत की सुरक्षा एजेंसियां इस साजिश से निपटने के लिए क्या कर रही हैं?\nगृह मंत्रालय के मुताबिक सीमाओं पर स्पीडबोट, वाटरक्राफ्ट, फ्लोटिंग बॉर्डर आउटपोस्ट और अत्याधुनिक निगरानी उपकरणों से चौकसी लगातार बढ़ाई गई है.",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-07-16",
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    "जम्मू-कश्मीर सुरक्षा",
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