# सड़कों पर विरोध के बीच चुनावी राज्यों में उलझा विपक्ष, यूपी में सीटों की खींचतान और पंजाब में कांग्रेस की कलह उजागर

> दिल्ली और मुंबई में विरोध प्रदर्शनों के जरिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की कोशिशों के बीच विपक्षी खेमे में चुनावी राज्यों को लेकर खींचतान तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों का तालमेल नहीं बैठ पा रहा, तो वहीं पंजाब में अंदरूनी गुटबाजी के बाद प्रदेश अध्यक्ष पद पर बदलाव देखने को मिला है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/sarakon-para-virodha-ke-bicha-chunavi-rajyon-men-ulajha-vipaksha-up-men-siton-ki-khinchatana-aura-punjab-men-congress-ki-kalaha-uj-42911 · **Language:** Hindi
**Tags:** विपक्षी गठबंधन, पंजाब कांग्रेस, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, परगट सिंह, चरणजीत सिंह चन्नी, समाजवादी पार्टी, जंतर मंतर

केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त मोर्चा बनाने का प्रयास कर रहे विपक्षी गठबंधन को चुनावी राज्यों में गंभीर अंदरूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों ने गांधी जयंती के मौके पर राजधानी दिल्ली और मुंबई की सड़कों पर शक्ति प्रदर्शन करने की कोशिश की थी। इसके बावजूद चुनावी बिसात पर उतरने से पहले ही सहयोगी दलों के बीच आपसी मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश में जहां सीट बंटवारे को लेकर खींचतान जारी है, वहीं पंजाब में कांग्रेस पार्टी के भीतर गुटबाजी और नेतृत्व परिवर्तन ने राज्य की राजनीतिक सरगर्मी को पूरी तरह बढ़ा दिया है।

## जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई
गांधी जयंती यानी दो अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। हालांकि दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए प्रदर्शन स्थल से भीड़ को हटा दिया और लगभग एक हजार लोगों को हिरासत में ले लिया। इस प्रदर्शन में प्रमुख रूप से सौरभ भारद्वाज, आतिशी, संजय सिंह और नेहा बोरा जैसे प्रमुख नेता शामिल थे।

इसके अगले दिन यानी तीन अक्टूबर को नेहा बोरा ने दोपहर एक बजे एक बार फिर कार्यकर्ताओं को जंतर-मंतर पर एकत्रित होने का आह्वान किया था। दिल्ली पुलिस ने इस बार भी किसी तरह के जमावड़े की इजाजत नहीं दी और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करते हुए प्रदर्शनकारियों को वहां जुटने से रोक दिया। इस दौरान लगभग 150 लोगों को हिरासत में लिया गया। राहुल गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम में महिला प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस द्वारा बदसलूकी किए जाने का आरोप लगाया, जिसे दिल्ली पुलिस ने सिरे से खारिज कर दिया। पुलिस ने इन विरोध प्रदर्शनों और हंगामे को लेकर कुल तीन एफआईआर दर्ज की हैं। दो दिनों के इस घटनाक्रम में पहले दिन जुटी भीड़ दूसरे दिन घटकर महज कुछ दर्जन लोगों तक ही सिमट गई।

## मुंबई में शिवाजी पार्क का मोर्चा और मानवाधिकार आयोग का नोटिस
राजधानी दिल्ली की तरह ही मुंबई के शिवाजी पार्क में भी इसी मुद्दे पर विपक्षी खेमे की ओर से विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दिपके ने ज्ञानेश कुमार के मामले का हवाला देते हुए दिल्ली पुलिस और प्रधानमंत्री को निशाने पर लिया। अभिजीत दिपके ने हालांकि मुंबई पुलिस की कार्यशैली की सराहना की थी, लेकिन यह प्रदर्शन कानूनी और प्रशासनिक पचड़े में फंस गया। मुंबई पुलिस ने इस आयोजन के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज कर ली।

इसके साथ ही मुंबई के प्रदर्शन में नाबालिग बच्चों के इस्तेमाल को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया। सेवा न्याय उत्थान फाउंडेशन के हेड ऑफ इंटरवेंशन सतीश वैद ने इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों और वीडियो फुटेज का हवाला देते हुए दावा किया गया कि भीड़ के ऊपर एक बच्चे को उठाकर भड़काऊ नारेबाजी कराई गई। इसके अलावा यह आरोप भी लगाया गया कि पुलिस की संभावित कार्रवाई से बचने और बच्चों को ढाल के रूप में इस्तेमाल करने की योजना पहले से ही ग्रुप चैट में बनाई गई थी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए सात दिनों के भीतर संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

## पंजाब में अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का इस्तीफा और नया नेतृत्व
सड़क पर दिखाई जा रही कथित एकजुटता के विपरीत राज्यों के चुनावी धरातल पर विपक्षी दलों के बीच कोई तालमेल नजर नहीं आ रहा है। पंजाब में कांग्रेस पार्टी का संगठनात्मक ढांचा भारी अंदरूनी कलह से जूझ रहा है। पार्टी हाईकमान के हस्तक्षेप के बाद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने अक्टूबर 2026 के पहले हफ्ते में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा दे दिया। राजा वड़िंग अप्रैल 2022 से इस पद पर बने हुए थे, जब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सत्ता गंवाकर आम आदमी पार्टी से हार गई थी।

हाईकमान ने नेतृत्व में बदलाव करते हुए पूर्व हॉकी कप्तान परगट सिंह को पंजाब कांग्रेस का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। साल 2027 के आगामी विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरने से पहले इस तरह के बड़े संगठनात्मक फेरबदल ने पंजाब के राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है।

## चन्नी बनाम वड़िंग गुट की खींचतान और सियासी समीकरण
पंजाब कांग्रेस के भीतर लंबे समय से पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के खेमों के बीच खींचतान चल रही थी। चरणजीत सिंह चन्नी का खेमा लगातार राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद पर बनाए रखने का विरोध कर रहा था। दोनों गुटों के बीच जमीन पर अपना वर्चस्व साबित करने, होर्डिंग्स-पोस्टर्स लगाने और सार्वजनिक बयानों को लेकर टकराव पिछले कई महीनों से बना हुआ था।

यह अंदरूनी खींचतान केवल दो नेताओं के बीच की व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है, बल्कि इसके पीछे सामाजिक और राजनीतिक समीकरण भी जुड़े हैं। चरणजीत सिंह चन्नी राज्य में दलित राजनीति के प्रमुख चेहरे के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहते हैं, जबकि राजा वड़िंग जाट सिख समुदाय के राजनीतिक प्रभाव का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसी खींचतान के कारण विरोधी दल कांग्रेस को अंदर से बिखरी हुई पार्टी करार दे रहे हैं। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी को भी आंतरिक रूप से बिखरा हुआ संगठन बता रही है।

## पंजाब में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का आमना-सामना
राष्ट्रीय स्तर पर भले ही दोनों दल एक साथ कदमताल करने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन पंजाब की जमीन पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी एक-दूसरे के खिलाफ पूरी तरह आक्रामक हैं। पदभार संभालते ही पंजाब कांग्रेस के नए अध्यक्ष परगट सिंह ने सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी पर सीधा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि आम आदमी पार्टी के शासनकाल में पंजाब की कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है।

कांग्रेस नेताओं का दावा है कि वे साल 2027 के चुनाव में वापसी कर सरकार बनाने में सफल होंगे। हालांकि जमीनी हकीकत यह है कि पार्टी को पहले अपनी अंदरूनी गुटबाजी और मतभेदों को सुलझाना होगा। साल 2022 में चुनावी हार झेल चुकी कांग्रेस के सामने एक तरफ अपनी आंतरिक दरारें भरने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ उसी दल से मुकाबला करने की मजबूरी है जिसके साथ वह दिल्ली में मंच साझा करती रही है।

## उत्तर प्रदेश में सीटों पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में तनातनी
पंजाब के अलावा उत्तर प्रदेश में भी विपक्षी गठबंधन के बीच दरारें साफ दिखाई दे रही हैं। उत्तर प्रदेश में सहयोगी दल समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस की सियासी महत्वाकांक्षाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य में कांग्रेस 150 विधानसभा सीटों की मांग पर अड़ी हुई है, जबकि समाजवादी पार्टी उसे 50 सीटें देने के पक्ष में भी नहीं दिख रही है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने संगठन और नेतृत्व में बदलाव जरूर किए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सहयोगी दल उसे उसकी सीमित ताकत का अहसास करा रहे हैं। ऐसे में आगामी चुनावी परीक्षाओं से पहले विपक्ष की साझा रणनीति राज्यों के स्तर पर बिखरती हुई नजर आ रही है।

## इसका आप पर असर
विपक्षी दलों के बीच राज्यों के स्तर पर चल रही इस सियासी खींचतान से चुनावी राजनीति और मतदाताओं के सामने स्पष्ट विकल्प बनने में रुकावट आ रही है।

- **राष्ट्रीय स्तर पर:** केंद्र में एकजुट दिखने की कोशिश कर रहे दलों का राज्य स्तर पर अलग-अलग रुख मतदाताओं के बीच भ्रम पैदा करता है। इससे राष्ट्रीय स्तर पर किसी संयुक्त नीतिगत एजेंडे पर आम सहमति बनना बेहद कठिन हो जाता है।
- **उत्तर प्रदेश में:** समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच 150 बनाम 50 सीटों के विवाद से कार्यकर्ताओं में असमंजस बना हुआ है। यदि सीट बंटवारे पर जल्द फैसला नहीं होता है तो जमीनी स्तर पर चुनाव प्रचार की तैयारी प्रभावित होगी।
- **पंजाब में:** कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष बदलने और गुटबाजी के चलते आम जनता से जुड़े स्थानीय मुद्दों की जगह पार्टी की अंदरूनी खींचतान चर्चा में है। आगामी 2027 के चुनाव से पहले यह अस्थिरता विपक्ष की जवाबदेही तय करने की क्षमता को कमजोर करती है।
- **आम नागरिकों के लिए:** राजधानी में बिना अनुमति विरोध प्रदर्शनों और बंद के कारण आम यात्रियों को ट्रैफिक जाम और हिरासत जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। भविष्य में ऐसे राजनीतिक प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक आवागमन प्रभावित हो सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह राजनीतिक टकराव राष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त शक्ति प्रदर्शन और राज्यों में अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की परस्पर विरोधी प्राथमिकताओं के कारण पैदा हुआ है।

- **प्रदर्शनों की तात्कालिक वजह:** विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर गांधी जयंती पर नई दिल्ली के जंतर-मंतर और मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन आयोजित किए थे। पुलिस अनुमति न मिलने के कारण इन प्रदर्शनों में टकराव हुआ और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुईं।
- **पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन का कारण:** पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बीच कई महीनों से पोस्टर, बयानबाजी और संगठनात्मक पकड़ को लेकर तीखा मतभेद चल रहा था। इस अंदरूनी कलह को थामने के लिए हाईकमान के हस्तक्षेप के बाद राजा वड़िंग का इस्तीफा हुआ और परगट सिंह को कमान सौंपी गई।
- **उत्तर प्रदेश में सीट विवाद की पृष्ठभूमि:** समाजवादी पार्टी राज्य में अपनी मजबूत स्थिति के आधार पर कांग्रेस को ज्यादा गुंजाइश नहीं देना चाहती, जबकि कांग्रेस 150 सीटों की मांग कर रही है। क्षेत्रीय ताकत और राष्ट्रीय दल की महत्वाकांक्षाओं के बीच यह टकराव पहले भी कई चुनावों में देखने को मिला है।
- **मानवाधिकार आयोग की कार्रवाई का आधार:** मुंबई में प्रदर्शन के दौरान एक बच्चे को उठाकर भड़काऊ नारेबाजी कराने और नाबालिगों को ढाल बनाने के आरोपों पर सेवा न्याय उत्थान फाउंडेशन ने शिकायत दर्ज कराई। इसी शिकायत पर संज्ञान लेते हुए मानवाधिकार आयोग ने विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

## सवाल-जवाब

### 1. दिल्ली के जंतर-मंतर पर कितने लोगों को हिरासत में लिया गया?
दिल्ली पुलिस के अनुसार 2 अक्टूबर को लगभग 1,000 लोगों को और 3 अक्टूबर को करीब 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था।

### 2. पंजाब कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में किसकी नियुक्ति हुई है?
अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद पूर्व हॉकी कप्तान परगट सिंह को पंजाब कांग्रेस का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है।

### 3. उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों को लेकर क्या विवाद है?
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस 150 विधानसभा सीटों की मांग कर रही है, जबकि समाजवादी पार्टी उसे 50 सीटें देने के पक्ष में भी नहीं दिख रही है।

### 4. मुंबई में शिवाजी पार्क प्रदर्शन को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने क्या कदम उठाया?
प्रदर्शन में नाबालिग बच्चों के इस्तेमाल और भड़काऊ नारों की शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सात दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है।

### 5. अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग कब से पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद पर थे?
राजा वड़िंग अप्रैल 2022 से पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर आसीन थे और उन्होंने अक्टूबर 2026 के पहले हफ्ते में इस्तीफा दिया।

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