सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर कृतज्ञ राष्ट्र ने दी श्रद्धांजलि, राष्ट्रीय एकता दिवस पर गूंजा अखंड भारत का संकल्प लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर देश भर में राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जा रहा है। शीर्ष नेतृत्व ने उनके ऐतिहासिक एकीकरण प्रयासों को नमन करते हुए अखंड भारत निर्माण के संकल्प को दोहराया। स्वतंत्र भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के 151वें जन्मदिवस पर समूचा देश उन्हें कृतज्ञतापूर्वक नमन कर रहा है। राष्ट्रीय एकता दिवस के तौर पर मनाए जाने वाले 31 अक्टूबर के इस पुनीत अवसर पर देश भर में विविध आयोजनों की श्रृंखला शुरू हो चुकी है। प्रशासनिक तंत्र, शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों में नागरिकों तथा कर्मचारियों को राष्ट्र की आंतरिक संप्रभुता, अखंडता और सुरक्षा की रक्षा हेतु एकता की शपथ दिलाई जा रही है। 31 अक्टूबर 1875 को जन्मे इस महान स्वतंत्रता सेनानी और प्रख्यात विधिवेत्ता ने स्वाधीनता के पश्चात सैकड़ों बिखरी हुई देसी रियासतों का भारतीय गणराज्य में शांतिपूर्ण विलय कराकर आधुनिक भारत के संप्रभु मानचित्र की नींव रखी थी। शीर्ष नेतृत्व ने राजधानी के पटेल चौक पर अर्पित की पुष्पांजलि राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली स्थित सरदार पटेल चौक पर आयोजित मुख्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने लौह पुरुष की भव्य प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस गरिमामय श्रद्धांजलि सभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी उपस्थित रहे। शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारियों ने देश की स्वतंत्रता और उसके पश्चात राष्ट्र के प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण में सरदार पटेल की निर्णायक भूमिका को नमन किया। इसके साथ ही, गुजरात के केवड़िया में नर्मदा नदी के तट पर स्थित विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के प्रांगण में भी भव्य राष्ट्रीय कार्यक्रम का संयोजन किया गया है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचकर राष्ट्र की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करने वाले हैं। प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के निर्माण में पटेल के विचारों को बताया मार्गदर्शक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने संदेश के माध्यम से सरदार पटेल की अप्रतिम राष्ट्रीय सेवा को याद किया। प्रधानमंत्री ने उन्हें अखंड राष्ट्र का आधार स्तंभ बताते हुए रेखांकित किया कि उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्र को हर मोर्चे पर सशक्त, आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने के लिए समर्पित रहा। प्रधानमंत्री के शब्दों में, मातृभूमि के प्रति उनका त्याग आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को सिद्ध करने में सदैव पथप्रदर्शक रहेगा। अमित शाह ने रियासतों के ऐतिहासिक एकीकरण को किया रेखांकित नई दिल्ली में पुष्पांजलि अर्पित करने के उपरांत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान केंद्र सरकार के कार्यकाल के दौरान ही सरदार साहब के अवदान को यथोचित सम्मान देते हुए उनकी जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने की ऐतिहासिक परंपरा प्रारंभ हुई थी। गृह मंत्री ने कहा कि सरदार पटेल ने भारत के इतिहास के साथ-साथ उसके पूरे भूगोल को नया स्वरूप प्रदान किया। गृह मंत्री ने विस्तार से समझाया कि स्वतंत्रता के समय 562 से अधिक देसी रियासतों में बंटे प्रायद्वीप को एक संप्रभु राजनीतिक व्यवस्था में समाहित करना मानव इतिहास के सबसे जटिल कूटनीतिक अभियानों में से एक था। सरदार पटेल की अद्वितीय कूटनीतिक कुशलता, प्रशासनिक दृढ़ता और अदम्य इच्छाशक्ति के कारण ही देश भौगोलिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक धरातल पर एकजुट हो सका। उनके इसी दृढ़ संकल्प ने देश को संभावित विखंडन से बचाकर एक संगठित राष्ट्र-राज्य का गौरव प्रदान किया। उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय एकता और निस्वार्थ सेवा की मिसाल बताया उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी X पर जारी अपने वक्तव्य में सरदार पटेल के जीवन दर्शन को राष्ट्रीय एकता और निस्वार्थ लोकसेवा का शाश्वत आदर्श बताया। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल का विशाल योगदान भारत की विकास यात्रा को सदैव प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने रेखांकित किया कि किस प्रकार पटेल की विरासत आज के नागरिकों को क्षेत्रीय, भाषाई और सामाजिक विविधताओं से परे उठकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की सीख देती है। रियासतों के विलय की अद्भुत ऐतिहासिक गाथा वर्ष 1947 में जब भारत स्वतंत्र हुआ, तब ब्रिटिश सत्ता ने देशी रियासतों को भारत या पाकिस्तान में शामिल होने अथवा स्वतंत्र रहने का विकल्प देकर एक गहरी प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी थी। उस नाजुक मोड़ पर गृह मंत्रालय का दायित्व संभालने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपने सचिव वीपी मेनन के साथ मिलकर रियासतों के शासकों के साथ निरंतर संवाद स्थापित किया। उन्होंने राजाओं और नवाबों को यह विश्वास दिलाया कि उनके विशेषाधिकारों और सम्मान की रक्षा करते हुए एक साझा लोकतांत्रिक ढांचे में शामिल होना ही उनके और उनकी जनता के हित में है। जहां आवश्यकता पड़ी, वहां पटेल ने बिना किसी हिचकिचाहट के सख्त प्रशासनिक कदम भी उठाए। उनके इसी अडिग रुख और कुशल कूटनीति के परिणामस्वरूप सैकड़ों रियासतों ने भारतीय संघ के विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए। यही कारण है कि इतिहास उन्हें 'लौह पुरुष' और आधुनिक भारत के सबसे महान शिल्पकार के रूप में याद करता है। आज जब देश अपनी स्वतंत्रता के अमृत काल में नई ऊंचाइयों को छू रहा है, तब सरदार पटेल के विचार और उनका दिखाया मार्ग प्रत्येक नागरिक के लिए प्रेरणा का अटूट स्रोत बना हुआ है। इसका आप पर असर राष्ट्रीय एकता दिवस का यह आयोजन देशवासियों में राष्ट्रीय संप्रभुता, साझा नागरिक पहचान और अखंडता के मूल्यों को सुदृढ़ करता है। • भारत में: केंद्र व राज्य सरकारों के कार्यालयों तथा शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई जा रही है। इससे नागरिकों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों में विविधता के बीच राष्ट्रीय एकजुटता की भावना को बढ़ावा मिलता है। • प्रशासनिक कार्यों पर प्रभाव: राष्ट्रीय एकता दिवस पर विशेष सम्मेलनों, रन फॉर यूनिटी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। आम नागरिक और युवा इन सार्वजनिक आयोजनों में भाग लेकर राष्ट्र निर्माण से जुड़ते हैं। • पर्यटन एवं जन जागरूकता: गुजरात के केवड़िया स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर विशेष कार्यक्रमों के चलते पर्यटन और सांस्कृतिक आयोजनों में व्यापक जनसहभागिता देखने को मिलती है। यह स्थल आधुनिक भारत के इतिहास और एकता के प्रतीक के रूप में युवाओं को जागरूक करता है। • युवाओं के लिए संदेश: सरदार पटेल के कूटनीतिक और प्रशासनिक निर्णय देश के युवाओं को अनुशासन और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देते हैं। शिक्षण संस्थानों में निबंध और वाद-विवाद प्रतियोगिताओं के जरिए उनके विचारों का प्रसार किया जाता है। ऐसा क्यों हुआ यह वार्षिक समारोह सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर देश के प्रति उनके ऐतिहासिक योगदान और 562 देशी रियासतों के एकीकरण को याद करने के लिए आयोजित किया जा रहा है। • ऐतिहासिक एकीकरण: स्वतंत्रता प्राप्ति के समय देश कई सौ स्वतंत्र रियासतों में विभाजित होने के कगार पर था। सरदार पटेल ने अपने दृढ़ संकल्प और राजनीतिक कौशल से इन सभी रियासतों को भारतीय संघ में शामिल कराया। • राष्ट्रीय एकता दिवस की घोषणा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने सरदार पटेल के अद्वितीय अवदान को चिरस्थायी बनाने हेतु 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की। इसका उद्देश्य भावी पीढ़ियों को उनके एकीकरण के प्रयासों से जोड़े रखना है। • अखंड भारत का संकल्प: स्वतंत्रता सेनानी, पहले उप प्रधानमंत्री और पहले गृह मंत्री के रूप में पटेल का योगदान आधुनिक लोकतांत्रिक गणराज्य के निर्माण की मजबूत नींव बना। इसलिए राष्ट्र उनके जन्मदिवस पर कृतज्ञता व्यक्त करने हेतु प्रतिवर्ष इस दिवस का आयोजन करता है। सवाल-जवाब 1. सरदार वल्लभभाई पटेल की कौन सी जयंती मनाई जा रही है? देश भर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती मनाई जा रही है। 2. राष्ट्रीय एकता दिवस किस तारीख को मनाया जाता है? राष्ट्रीय एकता दिवस प्रतिवर्ष 31 अक्टूबर को सरदार पटेल के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। 3. नई दिल्ली में किन प्रमुख नेताओं ने सरदार पटेल को श्रद्धांजलि दी? नई दिल्ली स्थित पटेल चौक पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और गृह मंत्री अमित शाह ने पुष्पांजलि अर्पित की। 4. सरदार वल्लभभाई पटेल को 'लौह पुरुष' क्यों कहा जाता है? आजादी के समय सैकड़ों रियासतों को भारतीय संघ में मिलाने के उनके अदम्य साहस और दृढ़ राजनीतिक संकल्प के कारण उन्हें लौह पुरुष कहा जाता है। 5. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रद्धांजलि देने के लिए कहां जा रहे हैं? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के केवड़िया स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पहुंचकर सरदार पटेल को श्रद्धांजलि देने वाले हैं। 6. सरदार पटेल का जन्म कब हुआ था? सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को हुआ था। https://trendkia.com/national/sardar-vallabhbhai-patel-ki-151vin-jaynti-para-kritajna-rashtra-ne-di-shraddhanjali-rashtriya-ekta-diwas-para-gunja-akhnda-bharata-53697 TrendKia — Har trend, sabse pehle.