सऊदी अरब और यूएई समेत खाड़ी देशों में कार्यस्थल हादसों का शिकार हो रहे भारतीय श्रमिक, हर हफ्ते 3 की मौत विदेश मंत्रालय के हालिया आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि 2023 से 2025 के दौरान खाड़ी देशों में कार्यस्थल हादसों के कारण हर सप्ताह औसतन 3 भारतीय कामगार अपनी जान गंवा रहे हैं। खाड़ी के देश भारतीय अर्थव्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत को मिलने वाले अरबों डॉलर के रेमिटेंस से लेकर देश की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए तेल और गैस की आपूर्ति तक, इन राज्यों का योगदान काफी बड़ा है। खाड़ी क्षेत्र में लाखों की संख्या में भारतीय नागरिक निवास और काम करते हैं। हालांकि, विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी हालिया आंकड़ों में प्रवासी कामगारों की सुरक्षा को लेकर चिंताजनक स्थिति उजागर हुई है। प्रस्तुत डेटा के अनुसार, खाड़ी देशों में कार्यस्थल पर होने वाली दुर्घटनाओं के कारण हर सप्ताह औसतन तीन भारतीय श्रमिकों की असामयिक मौत हो रही है। खाड़ी देशों में कार्यस्थल हादसों के भयावह आंकड़े विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2023 से लेकर 2025 के बीच विदेशों में कार्यस्थल दुर्घटनाओं के दौरान 800 से अधिक भारतीय प्रवासी कामगारों की मौत हुई। चिंता की बात यह है कि कुल मौतों में से लगभग 55 प्रतिशत मामले अकेले खाड़ी क्षेत्र से सामने आए हैं। हाल ही में कतर में हुए एक भयानक विस्फोट में 12 भारतीय श्रमिकों की मौत के बाद प्रवासी मजदूरों के सुरक्षा मानकों पर सवाल फिर से उठने लगे हैं। आंकड़ों के विस्तृत विश्लेषण से पता चलता है कि इस अवधि में सबसे अधिक मौतों का सामना सऊदी अरब में करना पड़ा, जहां कार्यस्थल हादसों में 182 भारतीयों की जान गई। यह औसतन हर हफ्ते एक से अधिक भारतीय श्रमिक की मौत के बराबर है। इस सूची में दूसरा सबसे बड़ा नाम संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का है, जहां 128 भारतीय मजदूरों ने दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाई। इसके अलावा, विदेश मंत्रालय के आंकड़ों से यह भी सामने आया है कि इसी दौरान विदेशों में भारतीयों द्वारा की गई आत्महत्याओं के अधिकांश मामले भी खाड़ी देशों से दर्ज किए गए हैं, जो वहां काम करने वाले मजदूरों के मानसिक दबाव और कठिन परिस्थितियों को दर्शाते हैं। कामकाजी माहौल, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और तकनीकी खामियां तेलंगाना एनआरआई माइग्रेंट्स एसोसिएशन के अनुसार, लगातार हो रही इन मौतों के पीछे कई प्रमुख वजहें शामिल हैं। इनमें सुरक्षा उपकरणों का पर्याप्त उपयोग न होना, कार्यस्थलों पर स्थापित सुरक्षा मानकों की अनदेखी, औद्योगिक इकाइयों में तकनीकी खामियां और श्रमिकों को मिलने वाली ट्रेनिंग में कमी शामिल हैं। खाड़ी क्षेत्र में काम करने वाले अधिकांश भारतीय श्रमिक निर्माण, रिटेल व्यापार, माल गोदामों और ऑटोमोबाइल जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में तैनात हैं। तेलंगाना एनआरआई सेल के उपाध्यक्ष मंडा भीम रेड्डी का कहना है कि कई बार कामगार स्वयं भी हेलमेट, सुरक्षा जूते और दस्ताने जैसे आवश्यक उपकरण नहीं पहनते या उन्हें कार्यस्थल के जोखिमों के बारे में पूरी जानकारी नहीं होती। इसके अतिरिक्त, मौसम का प्रभाव भी स्वास्थ्य पर गहरा असर डालता है। गर्मियों के महीनों में 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक के कड़े तापमान में लगातार 12 घंटे तक शारीरिक श्रम करने के बाद जब मजदूर अत्यधिक ठंडे वातानुकूलित आवासों में लौटते हैं, तो शरीर पर पड़ने वाला अचानक तापमान अंतर उनके स्वास्थ्य के लिए घातक साबित होता है। मजदूरों का शोषण और मुआवजे की समस्या तेलंगाना सरकार की एनआरआई सलाहकार समिति के अध्यक्ष बीएम विनोद कुमार के अनुसार, कई नियोक्ता श्रमिकों को तीन-तीन महीने तक वेतन नहीं देते और उनसे प्रतिदिन 12 घंटे तक भारी काम करवाते हैं। वेतन भुगतान के समय भी उसमें मनमानी कटौती की शिकायतें आम हैं। इसके अलावा, कार्यस्थल पर होने वाली मौतों की जिम्मेदारी से बचने के लिए कई कंपनियां मौतों का कारण दुर्घटना के बजाय “हार्ट अटैक” या प्राकृतिक कारण बता देती हैं। इस वजह से बहुत कम मामलों में ही पीड़ित परिवारों को बीमा के जरिए उचित मुआवजा मिल पाता है। भारत सरकार द्वारा उठाए गए सुरक्षात्मक कदम संसद के उच्च सदन राज्यसभा में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने स्पष्ट किया कि विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण सरकार की पहली प्राथमिकता है। सरकार ने इस दिशा में कई कदम उठाए हैं • नई दिल्ली, दुबई, रियाद और जेद्दा जैसे प्रमुख स्थानों पर प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र (PBSK) स्थापित किए गए हैं। • विदेशी दूतावासों में समर्पित कल्याण सेल बनाए गए हैं, जो समय-समय पर ओपन हाउस और कांसुलर कैंप आयोजित कर मजदूरों की समस्याओं का निस्तारण करते हैं। • महिला कामगारों के शोषण को रोकने के लिए ईसीआर पासपोर्ट धारक महिलाओं की खाड़ी देशों में भर्ती को केवल सरकारी एजेंसियों और ई-माइग्रेट पोर्टल के माध्यम से अनिवार्य कर दिया गया है। इसका आप पर असर • भारत में: खाड़ी देशों में कार्यरत श्रमिकों के परिवारों को उनके काम के दौरान सुरक्षा और पारदर्शी मुआवजे के नियमों के प्रति जागरूक रहना आवश्यक है। • खाड़ी देशों में: प्रवासी मजदूरों को कार्यस्थल पर सुरक्षा उपकरण पहनने और किसी भी समस्या की स्थिति में ई-माइग्रेट पोर्टल और भारतीय दूतावास के सहायता केंद्रों का सहारा लेना चाहिए। सवाल-जवाब 1. साल 2023 से 2025 के बीच खाड़ी देशों में कितने भारतीय श्रमिकों की मौत कार्यस्थल हादसों में हुई? 2023 से 2025 के दौरान विदेशों में हुई 800 से अधिक मौतों में से लगभग 55 प्रतिशत मौतें खाड़ी देशों में दर्ज की गईं, जो औसतन 3 मौत प्रति सप्ताह है। 2. किस खाड़ी देश में सबसे ज्यादा भारतीय कामगारों की मौत हुई? इस अवधि में सबसे अधिक 182 भारतीय श्रमिकों की मौत सऊदी अरब में हुई, जिसके बाद 128 मौतों के साथ यूएई दूसरे स्थान पर रहा। 3. कार्यस्थल हादसों के प्रमुख कारण क्या बताए गए हैं? सुरक्षा उपकरणों की अनदेखी, तकनीकी खामियां, ट्रेनिंग की कमी, 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान में 12 घंटे तक लगातार काम करना और अचानक तापमान का अंतर इसके प्रमुख कारण हैं। 4. प्रवासी श्रमिकों की मदद के लिए भारत सरकार ने क्या व्यवस्था की है? सरकार ने दुबई, रियाद, जेद्दा और नई दिल्ली में प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र (PBSK) स्थापित किए हैं और महिला श्रमिकों की सुरक्षा के लिए ई-माइग्रेट पोर्टल अनिवार्य किया है। https://trendkia.com/national/saudi-arabia-aura-uae-sameta-khari-deshon-men-karyasthala-hadason-ka-shikara-ho-rahe-bharatiya-shramika-hara-haphte-3-ki-mauta-10661 TrendKia — Har trend, sabse pehle.