# सावन अमावस्या पर स्पेन और आइसलैंड में छाएगा अंधेरा, जानिए भारत में 12 अगस्त के सूर्य ग्रहण का समय

> 12 अगस्त 2026 को सावन अमावस्या के दिन 21वीं सदी का दुर्लभ पूर्ण सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। स्पेन, आइसलैंड और रूस के कुछ हिस्सों में दिन के समय दो मिनट तक अंधेरा छा जाएगा, जबकि भारत में रात होने के कारण यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा और न ही सूतक काल मान्य होगा।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-08-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/sawan-amavasya-para-spain-aura-iceland-men-chhaega-andhera-janie-india-men-12-agasta-ke-surya-grahana-ka-samaya-15005 · **Language:** Hindi
**Tags:** सूर्य ग्रहण 2026, सावन अमावस्या, पूर्ण सूर्य ग्रहण, सूतक काल, कर्क राशि, स्पेन, अश्लेषा नक्षत्र

खगोलशास्त्र और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से वर्ष 2026 का दूसरा तथा अंतिम सूर्य ग्रहण एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना के रूप में देखा जा रहा है। आगामी 12 अगस्त 2026 को सावन माह की अमावस्या तिथि के पावन अवसर पर 21वीं सदी का एक दुर्लभ और विशाल पूर्ण सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। यह खगोलीय परिघटना दुनिया के कई देशों में एक अनूठा दृश्य पेश करेगी, जहां दिन के उजाले के बीच कुछ पलों के लिए पूरी तरह अंधेरा छा जाएगा। हालांकि, भारतीय उपमहाद्वीप के संदर्भ में स्थिति भिन्न रहेगी। चूंकि ग्रहण का पूरा समय भारत में रात्रि काल का होगा, इसलिए यहां के निवासी इस नजारे को सीधे आकाश में नहीं देख सकेंगे। प्रत्यक्ष दृश्यता न होने के कारण भारत में इस ग्रहण से जुड़ा सूतक काल भी मान्य नहीं रहेगा। इसके बावजूद, धार्मिक और खगोलीय महत्व के कारण लोग इस घटना के समय और प्रभावों को लेकर बेहद उत्सुक हैं।

## भारतीय समयानुसार सूर्य ग्रहण की समय सारणी और सूतक नियम
भारतीय मानक समय (IST) की गणना के अनुसार, 12 अगस्त 2026 की रात लगभग 9 बजकर 4 मिनट पर इस सूर्य ग्रहण की शुरुआत होगी। ग्रहण का यह चक्र मध्यरात्रि को पार करते हुए अगली सुबह यानी 13 अगस्त 2026 की भोर में 4 बजकर 25 मिनट पर समाप्त होगा। इस दौरान मुख्य खगोलीय घटना का मुख्य चरण देर रात 1 बजकर 27 मिनट तक अपनी चरम सीमा पर पहुंचेगा। शास्त्रों के अनुसार सूर्य ग्रहण की शुरुआत से ठीक 12 घंटे पहले सूतक काल आरंभ हो जाता है, जिसमें धार्मिक कार्यों पर कुछ नियम लागू होते हैं। परंतु इस बार ग्रहण की संपूर्ण अवधि के दौरान भारत में रात का समय रहेगा। जब कोई ग्रहण किसी भूभाग में दिखाई ही नहीं देता, तो वहां उसका धार्मिक सूतक काल लागू नहीं माना जाता। इसलिए भारत में श्रद्धालुओं को दैनिक पूजा या धार्मिक अनुष्ठानों के स्थगन की आवश्यकता नहीं होगी।

## दुनिया के किन हिस्सों में दिखेगा दिन में रात जैसा दृश्य?
यद्यपि भारत में यह सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा, परंतु पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध के कई देशों में यह पूर्ण सूर्य ग्रहण का अद्भुत नजारा दिखाएगा। ग्रहण का मुख्य पथ रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्रों से शुरू होकर आगे बढ़ेगा। इसके पश्चात चंद्रमा की छाया आइसलैंड, ग्रीनलैंड, स्पेन और पुर्तगाल के उत्तर-पूर्वी हिस्सों को कवर करते हुए गुजरेगी। स्पेन में इस ग्रहण का प्रभाव सबसे व्यापक देखने को मिलेगा, जहां यह उत्तरी शहर ओविएडो से लेकर भूमध्य सागर में स्थित प्रसिद्ध मलोरका द्वीप तक के विशाल इलाके में फैलेगा। दिलचस्प बात यह भी है कि स्पेन के उन हिस्सों में भी ग्रहण दिखाई देगा जो वर्तमान में भीषण जंगल की आग की चपेट में हैं।

इसके अतिरिक्त यूरोप महाद्वीप के अधिकांश देशों, कनाडा, उत्तरी अमेरिका तथा उत्तर-पश्चिम अफ्रीका के विस्तृत भूभाग में यह सूर्य ग्रहण आंशिक रूप से दिखाई देगा। जहां-जहां पूर्ण ग्रहण की रेखा गुजरेगी, वहां कुछ समय के लिए सूर्य पूरी तरह ओझल हो जाएगा और दोपहर में ही रात जैसा सन्नाटा तथा अंधेरा महसूस किया जाएगा।

## अंधेरे की अवधि और विभिन्न शहरों का गणित
पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान अंधेरा छाने की समयावधि अलग-अलग स्थानों पर भिन्न होगी। स्पेन के अधिकांश इलाकों में दिन के समय छाने वाला यह अंधेरा 2 मिनट से कम समय तक सीमित रहेगा। उदाहरण के तौर पर स्पेन के उत्तरी शहर बुर्गेास में चंद्रमा ठीक 1 मिनट 48 सेकंड के लिए सूर्य के प्रकाश को पूरी तरह रोक देगा, जिससे वहां दिन में अचानक रात का अहसास होगा। संपूर्ण ग्रहण काल के दौरान चंद्रमा सूर्य के बिंब को अधिकतम 2 मिनट 18 सेकंड तक पूरी तरह ढक कर रखेगा।

दूसरी ओर, रूस के सुदूरवर्ती क्षेत्रों और ग्रीनलैंड के बर्फ से ढके इलाकों में अंधेरे का यह समय थोड़ा अधिक लंबा रहेगा। वहां के स्थानीय निवासियों और खगोल विशेषज्ञों को लगभग ढाई मिनट से कम अवधि के लिए दिन में रात जैसा दुर्लभ नजारा देखने को मिल सकता है। इतने कम समय के लिए ही सही, लेकिन दिन में अंधेरा छा जाने की यह घटना वैज्ञानिकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव साबित होगी।

## सूर्य ग्रहण का वैज्ञानिक आधार और कोरोना का दृश्य
वैज्ञानिक दृष्टि से सूर्य ग्रहण एक स्वाभाविक खगोलीय प्रक्रिया है। यह स्थिति तब निर्मित होती है जब अपनी कक्षा में चक्कर लगाता चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बिल्कुल बीच में आ जाता है। इस सीधी रेखा में आने के कारण चंद्रमा, सूर्य से आने वाले प्रकाश की किरणों के मार्ग में बाधा बन जाता है और उसकी छाया पृथ्वी पर पड़ती है। जब चंद्रमा का आकार पृथ्वी से देखने पर सूर्य के आकार को पूर्ण रूप से ढक लेता है, तो इसे पूर्ण सूर्य ग्रहण कहा जाता है।

पूर्ण सूर्य ग्रहण की इस विशेष स्थिति में एक और अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है। जब सूर्य का मुख्य भाग पूरी तरह ढक जाता है, तब उसके चारों ओर बाहरी वायुमंडल की एक चमकती हुई रोशनी वाली संरचना स्पष्ट दिखाई देने लगती है। खगोल विज्ञान में सूर्य के इस बाहरी वायुमंडलीय भाग को कोरोना कहा जाता है। आम दिनों में सूर्य की अत्यधिक तेज़ रोशनी के कारण कोरोना को नग्न आंखों या सामान्य उपकरणों से देखना असंभव होता है, लेकिन पूर्ण ग्रहण के कुछ सेकंडों में यह जगमगाती अंगूठी या मुकुट की तरह नजर आता है।

## कर्क राशि, अश्लेषा नक्षत्र और धार्मिक पौराणिक मान्यताएं
ज्योतिष शास्त्र के विद्वानों और पंचांग की गणनाओं के अनुसार, 12 अगस्त को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र के अंतर्गत घटित होगा। वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की चाल, राशि परिवर्तन और नक्षत्रों के प्रभाव को मानव जीवन तथा प्रकृति से जोड़कर देखा जाता है। पौराणिक धार्मिक ग्रंथों में ग्रहण के पीछे राहु और केतु की पौराणिक कथा का उल्लेख मिलता है, जिसके अनुसार राहु और केतु के ग्रास के कारण सूर्य और चंद्रमा पर ग्रहण की छाया पड़ती है।

सनातन धर्म परंपरा में सूर्यदेव को संपूर्ण सृष्टि के लिए जीवन, ऊर्जा, शक्ति और प्रकाश का प्रत्यक्ष प्रतीक माना गया है। यही कारण है कि सूर्य पर लगने वाले ग्रहण को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और आध्यात्मिक चिंतन का समय माना जाता है। सावन महीने की अमावस्या तिथि का अपना एक अलग और बहुत बड़ा महत्व है। सावन अमावस्या के पावन दिन नदियों में पवित्र स्नान, अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य, पितरों के निमित्त तर्पण एवं स्मरण तथा देवों के देव महादेव भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की परंपरा रही है।

## ग्रहण काल में साधना, नियम और आंखों की सुरक्षा की चेतावनी
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण की अवधि के दौरान ईश्वर का ध्यान करना, मंत्रों का जाप करना, धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना और साधना में लीन रहना विशेष फलदाई माना जाता है। यद्यपि भारत में प्रत्यक्ष दृश्यता न होने से सूतक का बंधन नहीं है, फिर भी आध्यात्मिक रुचि रखने वाले लोग इस समय जप और ध्यान साधना करते हैं। ग्रहण की समाप्ति के पश्चात घर की शुद्धि, स्नान करने तथा जरूरतमंदों को अनाज या वस्त्र दान करने की प्रथा सनातन धर्म में वर्षों से निभाई जाती रही है।

खगोलशास्त्रियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस ग्रहण को देखने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है। सूर्य ग्रहण को कभी भी नग्न आंखों से सीधे देखने की भूल नहीं करनी चाहिए, क्योंकि सूर्य से निकलने वाली तीव्र पराबैंगनी किरणें आंखों की दृष्टि को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती हैं। ग्रहण का दृश्य देखने के लिए हमेशा प्रमाणित और विशेष रूप से निर्मित सोलर फिल्टर या वैज्ञानिक दृष्टि से सुरक्षित उपकरणों का ही प्रयोग किया जाना चाहिए। साधारण धूप के चश्मे या एक्स-रे फिल्म का प्रयोग आंखों की सुरक्षा के लिए बिल्कुल पर्याप्त नहीं होता है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** रात का समय होने के कारण यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा और इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा, जिससे दैनिक दिनचर्या और पूजा-पाठ पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

**यूरोप और अन्य देशों में:** स्पेन, आइसलैंड और रूस जैसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को दिन में कुछ मिनटों के लिए अंधेरे का अनुभव होगा और उन्हें इसे देखने के लिए प्रमाणित सोलर फिल्टर का उपयोग करना होगा।

## सवाल-जवाब

### 1. 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण कब लगेगा?
यह सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को सावन अमावस्या के दिन लगेगा।

### 2. क्या यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा?
नहीं, भारतीय समयानुसार यह घटना रात के समय होगी, इसलिए यह भारत में दिखाई नहीं देगा।

### 3. भारतीय समयानुसार सूर्य ग्रहण का समय क्या रहेगा?
ग्रहण 12 अगस्त की रात 9:04 बजे शुरू होकर 13 अगस्त की सुबह 4:25 बजे समाप्त होगा, जबकि इसका चरम प्रभाव रात 1:27 बजे तक रहेगा।

### 4. यह सूर्य ग्रहण किन देशों में पूर्ण रूप से दिखाई देगा?
यह ग्रहण स्पेन, आइसलैंड, ग्रीनलैंड, रूस और पुर्तगाल के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में पूर्ण रूप से दिखाई देगा।

### 5. क्या इस सूर्य ग्रहण का सूतक काल भारत में मान्य होगा?
भारत में दृश्यता न होने के कारण इस सूर्य ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं होगा।

### 6. पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान अंधेरा कितनी देर रहेगा?
अलग-अलग स्थानों पर अंधेरा 1 मिनट 48 सेकंड से लेकर लगभग 2 मिनट 18 सेकंड तक रहेगा।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._