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  "type": "article",
  "title": "शाहजहांपुर के किसान रनजोद सिंह ने बताया धान की सुरक्षा का फॉर्मूला, मेड़ की सफाई से आधी होगी कीटनाशक की लागत",
  "summary": "धान के खेत की मेड़ों पर उगी घास कीटों और चूहों का आश्रय स्थल बनती है। समय पर सफाई और छटाई करने से फसल रोगमुक्त रहती है और कीटनाशक का खर्च आधा हो जाता है।",
  "content": "धान की फसल को निरोग रखने और पैदावार में बढ़ोतरी के लिए खेत की मेड़ों का बेहतर प्रबंधन बेहद जरूरी माना जाता है। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में धान उगाने वाले किसान अक्सर मुख्य खेत और पौधों की देखभाल में लगे रहते हैं, परंतु किनारे की मेड़ों पर उगने वाली अनावश्यक घास और खरपतवार की अनदेखी कर देते हैं। यही झाड़ियां और अनचाही घास बाद में हानिकारक कीटों व फफूंद जनित बीमारियों का मुख्य केंद्र बन जाती हैं। मेड़ों की सही समय पर देखभाल करने से चूहों का प्रकोप खत्म होता है, कीटनाशक पर होने वाला खर्च घटता है और सिंचाई का पानी भी व्यर्थ नहीं बहता।\n\nकीट-पतंगों और बीमारियों का मुख्य अड्डा बनती हैं अनदेखी मेड़ें\nखेत की सीमा पर बनी मेड़ों पर उगने वाली घनी घास दीमक, तना छेदक और रस चूसक कीटों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना प्रदान करती है। जब फसल शुरुआती अवस्था में छोटी होती है, तब ये कीट मेड़ों की घास में छिपकर अपने अंडे और लावे विकसित करते हैं। जैसे ही फसल बढ़ती है, कीट सीधे धान के पौधों पर हमला बोल देते हैं। यदि रोपाई के समय से ही मेड़ों को साफ रखा जाए, तो कीटों के लावे पहले ही नष्ट हो जाते हैं और तना छेदक, पत्ती लपेटक तथा गंधी बग जैसे खतरनाक जीव फसल तक नहीं पहुंच पाते।\n\nशाहजहांपुर के प्रगतिशील युवा किसान रनजोद सिंह अपने व्यावहारिक अनुभवों को साझा करते हुए बताते हैं कि खेत को रोगमुक्त बनाने के लिए मेड़ों की सफाई सबसे प्राथमिक कदम है। रनजोद सिंह के अनुसार, \"रोपाई से पहले और फसल चक्र के दौरान मेड़ों की छटाई करने से कीटनाशक की लागत आधी हो जाती है।\" नियमित सफाई से फसलों को प्राकृतिक सुरक्षा चक्र मिलता है, जिससे बाजार से महंगे रासायनिक कीटनाशक खरीदने की जरूरत काफी हद तक कम हो जाती है।\n\nचूहों के आतंक से मुक्ति और जल भराव की समस्या पर नियंत्रण\nधान के खेतों में चूहे फसल को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाते हैं। वे अक्सर ऊंची और झाड़ीदार मेड़ों के भीतर अपने बिल तैयार करते हैं और रात के समय बाहर निकलकर धान के तनों को काटकर गिरा देते हैं। मेड़ों को छीलकर और साफ रखकर चूहों के छिपने के स्थानों को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है। इसके अलावा, मजबूत और साफ मेड़ होने से चूहों द्वारा बनाए गए बिलों से पानी का रिसाव नहीं होता, जिससे खेत में पानी रुकता है और अनियंत्रित जल भराव की समस्या से बचाव होता है।\n\nखाद और नमी की बचत से बेहतर होता है जल प्रबंधन\nमेड़ों पर जमने वाली मजबूत जड़ वाली खरपतवार मिट्टी में मौजूद नमी और किसान द्वारा डाली गई खाद को सोख लेती है। इससे मुख्य धान के पौधों को पूरा पोषण नहीं मिल पाता। मेड़ों की सफाई करने से खाद और पोषक तत्व पूरी तरह से धान की फसल को ही मिलते हैं। वहीं दूसरी ओर, मरम्मत की गई और समतल मेड़ें सिंचाई के पानी को खेत के अंदर रोककर रखती हैं, जिससे जल प्रबंधन में सुधार आता है और पानी की बर्बादी रुकती है।\n\nसफाई का सही समय, आवश्यक उपकरण और आसान तकनीक\nकृषि विशेषज्ञ और अनुभवी किसान सलाह देते हैं कि मेड़ों की सफाई रोपाई की शुरुआत से पहले तथा पूरी फसल के दौरान दो से तीन बार अवश्य की जानी चाहिए। सफाई कार्य के लिए किसान खुरपी, फावड़ा या ग्रास कटर का इस्तेमाल करके खरपतवार को जड़ से बाहर निकाल सकते हैं। यदि मेड़ पर घास की मात्रा बहुत अधिक हो, तो विशेषज्ञों के परामर्श के अनुसार उचित खरपतवार नाशक का छिड़काव भी किया जा सकता है। सफाई प्रक्रिया पूरी होने के बाद मेड़ों पर नई मिट्टी चढ़ाकर उन्हें मजबूत, ऊंचा और समतल बना देना चाहिए।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: धान उत्पादक किसान मेड़ों की नियमित सफाई करके कीटनाशकों पर होने वाले अतिरिक्त खर्च को आधा कर सकते हैं और फसल की पैदावार बढ़ा सकते हैं।\n\nशाहजहांपुर में: स्थानीय किसान रोपाई से पहले मेड़ों की मरम्मत और सफाई कर चूहों व कीटों के प्रकोप से अपनी धान की फसल को बचा सकते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. धान के खेत की मेड़ की सफाई करना क्यों जरूरी है?\nमेड़ों पर उगी घास में दीमक, तना छेदक और गंधी बग जैसे कीट पनपते हैं। सफाई करने से कीटों के अंडे और लावे नष्ट हो जाते हैं और फसल सुरक्षित रहती है।\n\n2. मेड़ साफ रखने से कीटनाशक का खर्च कितना कम हो सकता है?\nशाहजहांपुर के किसान रनजोद सिंह के अनुसार, रोपाई से पहले और फसल चक्र के दौरान मेड़ों की नियमित सफाई करने से कीटनाशक की लागत आधी हो जाती है।\n\n3. चूहों के प्रकोप को रोकने में मेड़ की सफाई कैसे मददगार है?\nचूहे ऊंची और झाड़ीदार मेड़ों में बिल बनाते हैं। मेड़ों को छीलकर साफ रखने से चूहों को छिपने की जगह नहीं मिलती और पानी का रिसाव भी रुकता है।\n\n4. मेड़ों की सफाई किस समय और किन औजारों से करनी चाहिए?\nसफाई रोपाई से पहले और फसल चक्र में दो से तीन बार खुरपी, फावड़ा या ग्रास कटर से करनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह से खरपतवार नाशक का छिड़काव भी किया जा सकता है।\n\nप्रेरणा और सबक\nसफलता के सबक:\n\n• छोटे बदलावों पर ध्यान: मुख्य फसल के साथ-साथ खेत की मेड़ों जैसी छोटी जगहों की सफाई पर ध्यान देने से लागत घटती है।\n• अनुभव आधारित तकनीक: पारंपरिक खेती में वैज्ञानिक छटाई की आदत अपनाकर कीटनाशक का खर्च आधा किया जा सकता है।\n• समयबद्ध प्रबंधन: रोपाई से पहले और फसल चक्र में दो-तीन बार रखरखाव करने से नुकसान से बचा जा सकता है।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-08-05",
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    "शाहजहांपुर",
    "कीटनाशक लागत",
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