शिक्षक दिवस पर नरेंद्र मोदी की दो टूक, बोले- सिर्फ नंबर नहीं, बच्चों का बचपन बचाना भी जरूरी शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल टीचर्स अवॉर्ड के विजेताओं से मुलाकात की। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे बच्चों के स्क्रीन टाइम, व्यवहार में बदलाव और नशे की आदतों पर भी पैनी नजर रखें। कक्षा में बैठा हर बच्चा केवल किताबों के पन्नों को नहीं खंगाल रहा होता है, बल्कि उसके आस-पास का परिवेश भी उसे लगातार प्रशिक्षित कर रहा होता है। कभी आधुनिक मोबाइल की चमकदार स्क्रीन उसे अपनी तरफ आकर्षित करती है, तो कभी सहपाठियों का प्रभाव उस पर पड़ता है। ऐसे में कई बार अकादमिक दबाव भी नौनिहालों को मानसिक उलझन में डाल देता है। इन परिस्थितियों के बीच शिक्षक वह शख्सियत होते हैं जो बच्चों के साथ सबसे अधिक समय व्यतीत करते हैं। शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षकों को उनकी इसी महत्वपूर्ण और व्यापक भूमिका का खास तौर पर स्मरण कराया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विद्यार्थियों का सहज बचपन सुरक्षित रखना भी अध्यापकों का एक बड़ा दायित्व है। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री ने नेशनल टीचर्स अवॉर्ड से सम्मानित कुल 82 शिक्षकों और शिक्षाविदों से मुलाकात की और उनके साथ विस्तृत चर्चा की। इस दौरान उन्होंने केवल स्कूली पाठ्यक्रम और परीक्षा में मिलने वाले अंकों तक ही सीमित बात नहीं की, बल्कि बच्चों के आचरण, उनकी दिनचर्या और रोजमर्रा के व्यवहार पर भी सतर्क दृष्टि बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। व्यवहार में बदलाव और संकेतों को पहचानना प्रधानमंत्री ने अध्यापकों से संवाद करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि छात्र पढ़ाई-लिखाई में कैसा प्रदर्शन कर रहा है, यह निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी ज्यादा इस बात को समझना जरूरी है कि वह अपने सामान्य जीवन में कैसा आचरण कर रहा है। क्या उसके स्वभाव में अचानक किसी तरह का बदलाव आ रहा है? क्या वह अपने मित्रों और साथियों से धीरे-धीरे दूर होता जा रहा है? क्या वह रात के समय बहुत देर तक मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहा है? कहीं वह किसी गलत संगत या नशे जैसी गंभीर लत की तरफ तो नहीं अग्रसर हो रहा है? प्रधानमंत्री ने शिक्षकों को आगाह किया कि इस तरह के शुरुआती लक्षणों को कभी भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए और नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। यदि किसी विद्यार्थी के बर्ताव में कोई भी असामान्य परिवर्तन दिखाई दे, तो उसकी असल वजह का पता लगाने का प्रयास अवश्य किया जाना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर अभिभावकों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया जाना चाहिए ताकि बच्चे को सही मार्ग पर वापस लाने में पूरा सहयोग मिल सके। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मौजूदा समय में संयुक्त परिवारों के लगातार कम होने के दौर के कारण बच्चों के जीवन में एक शिक्षक की जिम्मेदारी और प्रभाव दोनों कई गुना अधिक बढ़ चुके हैं। जिज्ञासा को दबाएं नहीं, स्क्रीन टाइम पर रखें नजर प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी गहरी चिंता व्यक्त की कि बच्चों का स्क्रीन टाइम लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने शिक्षकों को सलाह दी कि वे अभिभावकों के साथ मिलकर इस बात का आंकलन करें कि बच्चा मोबाइल या अन्य डिजिटल स्क्रीन के सामने रोजाना कितना समय व्यतीत कर रहा है। खासतौर पर यह सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है कि बच्चे रात्रि के समय अत्यधिक देर तक मोबाइल का उपयोग न करें। स्क्रीन के इस अत्यधिक इस्तेमाल के नकारात्मक प्रभाव से विद्यार्थियों को बाहर निकालने के लिए उन्हें खेलकूद, विभिन्न शारीरिक गतिविधियों और रचनात्मक कार्यों से जोड़ने की बेहद जरूरत है। प्रधानमंत्री ने अध्यापकों से कहा कि बच्चों को केवल किताबी शिक्षा में उलझाए रखने के बजाय उनके समग्र विकास और दैनिक दिनचर्या पर पूरा ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षक की भूमिका केवल निर्धारित पाठ्यक्रम को पूरा कराने तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए। जब कोई छात्र कोई नया सवाल पूछता है, तो उसकी स्वाभाविक जिज्ञासा को दबाने के बजाय उसे हमेशा एक उचित दिशा दी जानी चाहिए। विद्यार्थियों के भीतर की प्राकृतिक जिज्ञासा ही उनके कुछ नया सीखने का सबसे सशक्त माध्यम होती है। यदि कोई बच्चा किसी विषय के बारे में अतिरिक्त जानकारी चाहता है, अलग तरह के प्रश्न पूछता है या चीजों को अपने अनूठे दृष्टिकोण से समझना चाहता है, तो उसे हतोत्साहित करने के बजाय आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि पठन-पाठन केवल चार दीवारों वाले क्लासरूम तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि बच्चों को वास्तविक और व्यावहारिक दुनिया के साथ जोड़ा जाना बेहद जरूरी है। नशे की लत और श्रम की गरिमा का पाठ युवा पीढ़ी में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री ने शिक्षकों को पूरी तरह सतर्क रहने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी विद्यार्थी के स्वभाव में अचानक कोई नकारात्मक परिवर्तन नजर आए, तो शिक्षक उसे केवल विद्यालय के अनुशासन से जुड़ी एक साधारण समस्या मानकर अनदेखा न कर दें। उस बदलाव के मूल कारणों की तह तक जाने का गंभीर प्रयास होना चाहिए। शिक्षकगण एक मजबूत सेतु की तरह कार्य कर सकते हैं जो छात्र और उसके परिवार के बीच संवाद को बेहतर बना सके। आज के दौर में मोबाइल और स्क्रीन बच्चों की दिनचर्या का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे अभिभावकों के सहयोग से इन डिजिटल माध्यमों पर कड़ी नजर रखें। केवल पाबंदी लगाने या टोकने भर से बच्चों को मोबाइल से दूर नहीं किया जा सकता है, बल्कि इसके लिए उन्हें खेल, शारीरिक श्रम और अन्य सृजनात्मक कार्यों के पुख्ता विकल्प उपलब्ध कराने होंगे। इससे न केवल उनके समय का सदुपयोग होगा, बल्कि उनके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास भी सुनिश्चित हो सकेगा। क्लासरूम से बाहर की दुनिया से रूबरू कराते हुए उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को कामकाज की वास्तविक प्रक्रिया से परिचित कराया जाना चाहिए ताकि किताबों में हासिल किए गए ज्ञान को वे अपने जीवन की असल परिस्थितियों से आसानी से जोड़ सकें। प्रधानमंत्री ने बच्चों के भीतर ‘श्रम की गरिमा’ जैसे बुनियादी संस्कार विकसित करने पर भी विशेष बल दिया। 82 शिक्षकों को मिला प्रतिष्ठित नेशनल टीचर्स अवॉर्ड इस वर्ष देश भर से कुल 82 मेधावी शिक्षकों और एजुकेटर्स का चयन प्रतिष्ठित नेशनल टीचर्स अवॉर्ड के लिए किया गया है। इनमें कुल 48 उत्कृष्ट स्कूली शिक्षक शामिल हैं, जबकि 21 शिक्षक उच्च शिक्षण संस्थानों और पॉलिटेक्निक संस्थानों से ताल्लुक रखते हैं। इसके अलावा, इस सूची में 13 कुशल स्किल ट्रेनर भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पुरस्कार प्राप्त करने वाले इन सभी शिक्षकों ने प्रधानमंत्री के साथ अपने अनूठे शैक्षणिक अनुभव साझा किए। उन्होंने अपने-अपने क्लासरूम में अपनाए गए नए, आधुनिक और रचनात्मक प्रयोगों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कुल मिलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संदेश केवल शिक्षकों के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विद्यालयी व्यवस्था, परिवार और पूरे समाज के लिए एक व्यापक दिशा-निर्देश था। एक बच्चे के समग्र विकास का अर्थ केवल परीक्षा में उच्च अंक प्राप्त करना नहीं होता है, बल्कि उसका संतुलित व्यवहार, उसकी अच्छी आदतें, उसकी सीखने की जिज्ञासा और उसका आत्मविश्वास भी उतना ही अधिक महत्वपूर्ण होता है। आज के इस दौर में शिक्षक की भूमिका और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण और बड़ी हो जाती है, क्योंकि कई बार एक बच्चा अपने घर पर अपनी उलझनों को साझा नहीं कर पाता है, लेकिन उसके व्यवहार में आए बदलाव सबसे पहले कक्षा में ही एक शिक्षक की नजर में आ जाते हैं। यही वजह है कि प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से यह आह्वान किया कि वे बच्चों के बचपन को संजोने और उन्हें एक सही राह दिखाने को अपने कर्तव्य का सबसे अहम हिस्सा मानें। इसका आप पर असर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस संदेश का सीधा असर देश भर के स्कूलों, अभिभावकों और विद्यार्थियों की दैनिक जीवन शैली पर पड़ने वाला है। • भारत में: देश भर के शैक्षणिक संस्थानों और अभिभावकों को अब बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम और मोबाइल की लत पर अधिक गंभीरता से ध्यान देना होगा। इससे परिवारों को बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक गतिविधियों के प्रति अधिक सतर्क रहने की प्रेरणा मिलेगी। • अभिभावकों और शिक्षकों के लिए: शिक्षकों और माता-पिता को केवल परीक्षा के अंकों के पीछे भागने के बजाय बच्चों के मानसिक बदलावों, आदतों और संवादहीनता पर पैनी नजर रखनी होगी, जिससे शुरुआती स्तर पर ही कई समस्याओं का समाधान किया जा सके। सवाल-जवाब 1. शिक्षक दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कितने शिक्षकों से मुलाकात की? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर नेशनल टीचर्स अवॉर्ड पाने वाले 82 शिक्षकों और एजुकेटर्स से मुलाकात की। 2. इस साल नेशनल टीचर्स अवॉर्ड पाने वालों में कुल कितने स्कूल शिक्षक शामिल हैं? इस वर्ष 48 स्कूल शिक्षकों को नेशनल टीचर्स अवॉर्ड के लिए चुना गया है। 3. प्रधानमंत्री ने बच्चों के किस मुख्य मुद्दे पर गहरी चिंता जताई? प्रधानमंत्री ने बच्चों के अत्यधिक स्क्रीन टाइम और देर रात तक मोबाइल के इस्तेमाल पर गहरी चिंता जताई है। 4. शिक्षक दिवस पर किन अन्य संस्थानों के शिक्षकों को सम्मानित किया गया? पुरस्कृत शिक्षकों में उच्च शिक्षा संस्थानों, पॉलिटेक्निक और 13 स्किल ट्रेनर भी शामिल हैं। https://trendkia.com/national/shikshaka-divasa-para-narendra-modi-ki-do-tuka-bole-sirpha-nnbara-nahin-bachchon-ka-bachapana-bachana-bhi-jaruri-28065 TrendKia — Har trend, sabse pehle.