{
  "type": "article",
  "title": "शिवाजी पार्क प्रदर्शन में नाबालिगों की मौजूदगी पर एनएचआरसी का कड़ा रुख, मुंबई पुलिस और एक्स को जारी किए नोटिस",
  "summary": "मुंबई के शिवाजी पार्क में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान बच्चों के कथित इस्तेमाल और सोशल मीडिया फुटेज को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जांच के आदेश दिए हैं.",
  "content": "महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क मैदान में 2 अक्टूबर को आयोजित एक सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन के दौरान नाबालिग बच्चों को शामिल किए जाने और उनकी तस्वीरें व वीडियो ऑनलाइन मंचों पर साझा करने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कड़ा संज्ञान लिया है. आयोग ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इस पूरे घटनाक्रम में हस्तक्षेप किया है. इस संवेदनशील मामले की औपचारिक सुनवाई आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा की गई, जिसके बाद संबंधित जांच व प्रशासनिक एजेंसियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं.\n\nचुनावी मुद्दे पर हुआ था प्रदर्शन और दर्ज कराई गई शिकायत\nशिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर को आयोजित यह सभा कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) की तरफ से बुलाई गई थी. इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का विरोध करना और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की मांग उठाना था. हालांकि, इस राजनीतिक और चुनावी कार्यक्रम के दौरान बच्चों की मौजूदगी ने एक नया कानूनी और मानवाधिकार संबंधी विवाद खड़ा कर दिया.\n\nइस पूरे मामले को लेकर सेवा न्याय उत्थान फाउंडेशन के हेड ऑफ इंटरवेंशन सतीश वैद ने आयोग के समक्ष एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी. इस शिकायत में इंटरनेट और सोशल मीडिया मंचों पर सामने आए कई विवादित विजुअल्स का हवाला दिया गया है. इन कथित वीडियो और तस्वीरों में देखा गया कि भीड़ के बीच एक बच्चे को लोगों के कंधों या सिर के ऊपर उठाया गया था और उसी दौरान कथित तौर पर भड़काऊ व आपत्तिजनक नारे लगाए जा रहे थे. शिकायतकर्ता ने यह गंभीर आशंका जताई कि विरोध प्रदर्शन के आयोजकों ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों की वैधानिक कार्रवाई से बचने के लिए नाबालिगों को एक तरह से मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल करने की साजिश रची थी.\n\nपूर्व नियोजित साजिश का आरोप और डिजिटल साक्ष्यों की जांच\nदाखिल शिकायत में इस पहलू पर विशेष जोर दिया गया है कि प्रदर्शन में नाबालिगों की उपस्थिति कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि इसके लिए विभिन्न समूहों और डिजिटल चैट में पहले से ही चर्चा और योजना बनाई गई थी. आशंका यह जताई गई है कि बच्चों की मासूमियत और उनकी नाबालिग कानूनी स्थिति का लाभ उठाकर पुलिस को किसी भी प्रकार के सख्त कदम उठाने या लाठीचार्ज जैसी कार्रवाई से रोकना ही इस रणनीति का मुख्य हिस्सा था.\n\nआयोग ने इस बिंदु को गंभीरता से लेते हुए मुंबई पुलिस आयुक्त को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे मामले से जुड़े सभी डिजिटल साक्ष्यों, तस्वीरों, वीडियो और ऑनलाइन सामग्रियों की निष्पक्षता से पड़ताल करें. अगर प्राथमिक जांच में किसी भी संज्ञेय अपराध का पता चलता है, तो पुलिस को तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया गया है. पुलिस को यह भी पता लगाना होगा कि बच्चे किन खास हालात में इस भीड़भाड़ वाले प्रदर्शन का हिस्सा बने. इसके अलावा, कार्यक्रम के मुख्य आयोजकों, समन्वयकों और बच्चों के साथ मौजूद वयस्कों की इस पूरी प्रक्रिया में क्या भूमिका रही, इसकी विस्तृत छानबीन की जाएगी.\n\nचैट फॉरेंसिक, एक्स कॉर्प और आईटी मंत्रालय को निर्देश\nप्रदर्शन को लेकर हुई डिजिटल बातचीत को सुरक्षित रखना इस जांच का एक अहम आधार बनाया गया है. आयोग ने निर्देश दिया है कि संबंधित समूहों और चैट संचार का पूरा फॉरेंसिक विश्लेषण किया जाए, ताकि यह साफ हो सके कि बच्चों को लाना पहले से तय था या नहीं. इसके साथ ही, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2015 की धारा 75 और 83(2) के साथ-साथ अन्य लागू बाल संरक्षण कानूनों के संभावित उल्लंघन की भी कानूनी समीक्षा की जाएगी.\n\nनाबालिगों की तस्वीरों और वीडियो के सोशल मीडिया पर तेजी से हो रहे प्रसार को रोकने और उसकी जांच के लिए भी कड़े कदम उठाए गए हैं. आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और भारत में एक्स कॉर्प के शिकायत अधिकारी को नोटिस भेजते हुए संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं. इन दोनों संस्थाओं को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि बाल सुरक्षा नियमों, कंटेंट मॉडरेशन की नीतियों और मौजूदा भारतीय कानूनों का पूरी तरह पालन हो रहा है या नहीं.\n\nबच्चों की सुरक्षा, काउंसलिंग और एक्शन टेकन रिपोर्ट\nकानूनी जांच के अलावा आयोग ने प्रभावित बच्चों की सामाजिक और मानसिक भलाई पर भी ध्यान केंद्रित किया है. महाराष्ट्र सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रधान सचिव को निर्देशित किया गया है कि वे इन बच्चों के बचाव, देखरेख और आवश्यक संरक्षण का तत्काल प्रबंध करें. यदि आवश्यक समझा जाए, तो बच्चों को जिले की सक्षम बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश किया जाना चाहिए, ताकि उन्हें जरूरी मनोवैज्ञानिक मदद, पेशेवर काउंसलिंग और पुनर्वास सहायता प्रदान की जा सके.\n\nआयोग ने विशेष रूप से यह रेखांकित किया है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान बच्चों की पहचान, निजता और उनके मान-सम्मान को किसी भी सूरत में सार्वजनिक न किया जाए और उनके सर्वोत्तम हित को सर्वोपरि रखा जाए. एनएचआरसी ने मुंबई पुलिस, राज्य के बाल विकास विभाग, केंद्रीय आईटी मंत्रालय और संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से एक सप्ताह के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) सौंपने को कहा है, जिसके बाद ही आगे की जिम्मेदारी तय होगी.\n\nइसका आप पर असर\nयह घटनाक्रम राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों में बच्चों की उपस्थिति और सोशल मीडिया पर उनकी पहचान उजागर करने के संबंध में कड़े कानूनी नियमों की रूपरेखा तैयार करता है.\n\n• नागरिकों और अभिभावकों के लिए: किसी भी सार्वजनिक या राजनीतिक प्रदर्शन में नाबालिगों को ले जाने से पहले आयोजकों और अभिभावकों को कानूनी परिणामों के प्रति सतर्क रहना होगा. जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत बच्चों को ढाल बनाना या उन्हें जोखिम में डालना गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आ सकता है.\n• सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के लिए: विरोध प्रदर्शनों में शामिल नाबालिग बच्चों की बिना धुंधली की गई तस्वीरें या भड़काऊ वीडियो पोस्ट करने पर सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कानूनी जांच हो सकती है. आईटी मंत्रालय और डिजिटल प्लेटफॉर्म ऐसे कंटेंट पर बाल सुरक्षा कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई कर सकते हैं.\n• महाराष्ट्र में: मुंबई पुलिस को एक सप्ताह के भीतर इस पूरे मामले की जांच रिपोर्ट राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को सौंपनी है. यदि आयोजकों के खिलाफ संज्ञेय अपराध साबित होता है, तो संबंधित लोगों पर सीधे आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएंगे.\n• देशभर में: यह मामला देश भर के राजनीतिक और गैर-राजनीतिक संगठनों के लिए एक नजीर बन सकता है कि वे अपने प्रदर्शनों में बच्चों की उपस्थिति से बचें. भविष्य में रैलियों के दौरान बाल कल्याण समितियों और पुलिस की निगरानी पहले से अधिक सख्त रहने की संभावना है.\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह मामला मुंबई के शिवाजी पार्क में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान बच्चों के कथित इस्तेमाल और सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री से जुड़ा है.\n\n• तात्कालिक कारण: सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में एक बच्चे को भीड़ के ऊपर उठाया गया था और कथित तौर पर भड़काऊ नारे लगाए जा रहे थे. इस फुटेज के आधार पर सेवा न्याय उत्थान फाउंडेशन ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई.\n• प्रदर्शन की पृष्ठभूमि: कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की मांग के लिए 2 अक्टूबर को यह प्रदर्शन बुलाया था.\n• डिजिटल समन्वय का आरोप: शिकायत में दावा किया गया कि प्रदर्शन में बच्चों को शामिल करने के लिए ऑनलाइन ग्रुप और चैट में पूर्व नियोजित योजना बनाई गई थी ताकि पुलिस कार्रवाई को रोका जा सके.\n• अगला कदम: आयोग ने मुंबई पुलिस, एक्स कॉर्प, केंद्रीय आईटी मंत्रालय और महाराष्ट्र बाल विकास विभाग से एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है, जिसकी समीक्षा के बाद जिम्मेदारी तय होगी.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने किस मामले में संज्ञान लिया है?\nआयोग ने मुंबई के शिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर को हुए एक प्रदर्शन के दौरान नाबालिग बच्चों की भागीदारी और उनके वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के मामले में संज्ञान लिया है.\n\n2. यह विरोध प्रदर्शन किस संगठन ने आयोजित किया था और उनकी मांग क्या थी?\nयह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित गड़बड़ियों को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग के लिए आयोजित किया गया था.\n\n3. एनएचआरसी ने मुंबई पुलिस को क्या निर्देश दिए हैं?\nमुंबई पुलिस को फोटो, वीडियो और डिजिटल सबूतों की जांच करने तथा संज्ञेय अपराध सामने आने पर प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं.\n\n4. शिकायत में बच्चों की मौजूदगी को लेकर क्या आरोप लगाए गए हैं?\nशिकायत में आरोप लगाया गया है कि बच्चों की भागीदारी पहले से चैट में सुनियोजित थी और पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए उन्हें ढाल के तौर पर इस्तेमाल किया गया.\n\n5. इस मामले में किन केंद्रीय और डिजिटल संस्थाओं को नोटिस भेजा गया है?\nइलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और भारत में एक्स कॉर्प के ग्रिवांस ऑफिसर को नोटिस जारी कर डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने को कहा गया है.\n\n6. जांच एजेंसियों को अपनी रिपोर्ट कब तक सौंपनी है?\nआयोग ने संबंधित सभी विभागों और एजेंसियों से एक सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) सौंपने का निर्देश दिया है.",
  "url": "https://trendkia.com/national/shivaji-park-pradarshana-men-nabaligon-ki-maujudagi-para-nhrc-ka-kara-rukha-mumbai-police-aura-x-ko-jari-kie-notisa-42348",
  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-10-03",
  "tags": [
    "एनएचआरसी",
    "मुंबई पुलिस",
    "शिवाजी पार्क",
    "प्रियंक कानूनगो",
    "कॉकरोच जनता पार्टी",
    "जुवेनाइल जस्टिस एक्ट",
    "एक्स कॉर्प",
    "बाल अधिकार"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}