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  "type": "article",
  "title": "श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट को मिला पहला सीईओ, उत्तराखंड के मदरसों में लागू हुई आधुनिक शिक्षा और लद्दाख में बना 10 हजार रुपये का सिंचाई मॉडल",
  "summary": "अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट में बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तहत सेना के अनुभवी पूर्व अधिकारी को सीईओ का दायित्व सौंपा गया है, वहीं उत्तराखंड सरकार ने मदरसों में आधुनिक पाठ्यक्रम लागू किया है और लद्दाख में जल संकट दूर करने की अनूठी पहल की गई है।",
  "content": "अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दैनिक प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए एक नई प्रशासनिक टीम का गठन किया गया है। इस महत्वपूर्ण फेरबदल के तहत भारतीय वायु सेना में 43 वर्षों तक अपनी सेवाएं दे चुके रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है। पदभार ग्रहण करने के साथ ही जितेंद्र मिश्रा ने स्पष्ट किया कि राष्ट्र सेवा के लंबे अनुभव के बाद अब वे अपना शेष जीवन प्रभु श्रीराम की सेवा और मंदिर के कुशल प्रबंधन में समर्पित करेंगे। इस पुनर्गठन के अंतर्गत ट्रस्ट के संगठनात्मक ढांचे में भी बदलाव किए गए हैं, जिसमें पूर्व कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि को महासचिव का प्रभार सौंपा गया है, जबकि दिल्ली के प्रमुख व्यवसायी और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े महेश भागचंदका को नए कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।\n\nश्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट में प्रशासनिक फेरबदल और नई चुनौतियां\nराम मंदिर निर्माण और उसके बाद के प्रबंधन से जुड़े प्रशासनिक तंत्र को विवादों से दूर रखने तथा पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की गई है। एक अलंकृत और सम्मानित सैन्य अधिकारी के हाथों में प्रशासनिक कमान आने से ट्रस्ट की साख और कार्यप्रणाली में जनविश्वास और अधिक मजबूत होगा। नए नेतृत्व के समक्ष सबसे प्रमुख दायित्व मंदिर प्रशासन की गरिमा, पारदर्शिता और उच्च मानकों को बनाए रखना है।\n\nसंगठन के भीतर निरंतरता बनाए रखने के लिए गोविंद देव गिरि को चंपत राय के स्थान पर नया महासचिव बनाया गया है। वहीं नए कोषाध्यक्ष महेश भागचंदका के व्यावसायिक अनुभव और वित्तीय प्रबंधन क्षमता का लाभ ट्रस्ट के पारदर्शी हिसाब-किताब को बनाए रखने में मिलेगा। यह नई प्रशासनिक टीम मंदिर परिसर के प्रबंधन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और वित्तीय जवाबदेही को नए सिरे से व्यवस्थित करेगी।\n\nउत्तराखंड में मदरसों का आधुनिकीकरण: विज्ञान और कंप्यूटर शिक्षा को प्रोत्साहन\nप्रशासनिक सुधारों के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। उत्तराखंड सरकार ने राज्य में संचालित मदरसों के आधुनिकीकरण की नीति के तहत मुख्यधारा की शिक्षा को बढ़ावा दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई शिक्षा नीति और आधुनिक पाठ्यक्रम के मानदंडों को पूरा करने वाले 26 मदरसों को आधिकारिक मान्यता पत्र प्रदान किए हैं। इसके साथ ही राज्य में औपचारिक मान्यता प्राप्त करने वाले मदरसों की कुल संख्या बढ़कर 33 हो गई है।\n\nराज्य सरकार की इस नीति का मुख्य उद्देश्य मुस्लिम समुदाय के बच्चों को पारंपरिक धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ गणित, विज्ञान और कंप्यूटर जैसे आधुनिक विषयों में पारंगत बनाना है। नई व्यवस्था के तहत मदरसों के पंजीकरण की अंतिम तिथि 30 सितंबर तय की गई है। उल्लेखनीय है कि पूर्ववर्ती मदरसा बोर्ड के कार्यकाल के दौरान राज्य में कुल 452 पंजीकृत मदरसे संचालित थे। हालांकि कुछ संचालक इस बदलाव का विरोध कर रहे हैं, लेकिन सरकार का मानना है कि आधुनिक विषयों का समावेश बच्चों को भविष्य में डॉक्टर, इंजीनियर और वैज्ञानिक बनने के अवसर प्रदान करेगा। करीब 12 साल पहले नरेंद्र मोदी ने भी इस बात पर जोर दिया था कि बच्चों के एक हाथ में धार्मिक ग्रंथ और दूसरे हाथ में कंप्यूटर होना चाहिए, जिससे वे आधुनिक युग की प्रतिस्पर्धा में पीछे न रहें।\n\nलद्दाख में उपराज्यपाल की पहल: 10 हजार रुपये में तैयार हुआ सिंचाई मॉडल\nप्राकृतिक संसाधनों के कुशल प्रबंधन का एक उत्कृष्ट उदाहरण लद्दाख से सामने आया है। लद्दाख के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना की दूरदर्शिता से मात्र 10 हजार रुपये की लागत में पथरीली और बंजर भूमि को कृषि योग्य बनाने की दिशा में सफलता मिली है। लेह के स्टोक गांव के पास स्थित नाले से ग्लेशियर पिघलने के कारण प्रतिदिन लगभग 9 करोड़ लीटर पानी बहकर सिंधु नदी में चला जाता था, जिससे स्थानीय खेतों को पानी नहीं मिल पाता था और जमीन बंजर पड़ी रहती थी।\n\nजल संसाधन की इस बर्बादी को रोकने के लिए उपराज्यपाल ने सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग को तत्काल योजना बनाने के निर्देश दिए। भारी मशीनरी की सहायता से मात्र दो दिनों के भीतर नाले के समीप लगभग 200 मीटर लंबे छोटे चैनल और नालियां तैयार की गईं। इस त्वरित कार्रवाई से व्यर्थ बहने वाले 9 करोड़ लीटर जल में से लगभग 8 करोड़ लीटर पानी को 'इगू-पेह नहर' में सफलतापूर्वक मोड़ दिया गया।\n\nइस अल्पकालिक और कम लागत वाली परियोजना के माध्यम से लद्दाख के 12 गांवों की 1,500 एकड़ से अधिक कृषि भूमि को नियमित सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराया जा रहा है। इस पानी के उपयोग से क्षेत्र में प्राकृतिक और रसायन-मुक्त खेती को बढ़ावा मिलेगा। उत्पादित ताजी सब्जियों और खाद्यान्न का उपयोग न केवल स्थानीय आबादी करेगी, बल्कि लद्दाख की सीमाओं पर तैनात भारतीय सेना के जवानों को भी ताजा और पौष्टिक आहार प्राप्त हो सकेगा।\n\nइसका आप पर असर\nयह समाचार प्रशासनिक व्यवस्था, शिक्षा सुधार और स्थानीय संसाधन प्रबंधन से सीधे जुड़ा हुआ है।\n\n• भारत में: अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में सेना के अनुभवी अधिकारी की नियुक्ति से देश भर के श्रद्धालुओं में मंदिर प्रबंधन की साख और पारदर्शिता बढ़ेगी।\n• उत्तराखंड में: राज्य के 33 मान्यता प्राप्त मदरसों में पढ़ने वाले मुस्लिम छात्रों को अब पारंपरिक ज्ञान के साथ विज्ञान और कंप्यूटर की आधुनिक शिक्षा मिलेगी।\n• लद्दाख में: 12 गांवों के किसानों की 1,500 एकड़ बंजर भूमि को सिंचाई का पानी मिलने से स्थानीय कृषि उत्पादन और जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ कौन बने हैं?\nभारतीय वायु सेना में 43 साल सेवा दे चुके रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा राम मंदिर ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बने हैं।\n\n2. ट्रस्ट में अन्य कौन से प्रमुख बदलाव हुए हैं?\nपूर्व कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि नए महासचिव बनाए गए हैं और दिल्ली के व्यापारी महेश भागचंदका को नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।\n\n3. उत्तराखंड में कितने मदरसों को आधुनिक सिलेबस के तहत मान्यता दी गई है?\nउत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 26 मदरसों को नए सिलेबस के तहत मान्यता पत्र दिए, जिसके बाद राज्य में कुल 33 मान्यता प्राप्त मदरसे हो गए हैं।\n\n4. मदरसों में पंजीकरण कराने की अंतिम तिथि क्या है?\nउत्तराखंड में मदरसों के नए सिस्टम के तहत पंजीकरण कराने की अंतिम तिथि 30 सितंबर तय की गई है।\n\n5. लद्दाख में जल संरक्षण परियोजना पर कुल कितना खर्च आया?\nलद्दाख के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना द्वारा शुरू की गई सिंचाई परियोजना पर मात्र 10 हजार रुपये का खर्च आया और इसे 2 दिन में पूरा किया गया।\n\n6. लद्दाख में इस परियोजना से कितनी जमीन और गांवों को पानी मिलेगा?\nइस परियोजना के जरिए 8 करोड़ लीटर पानी 'इगू-पेह नहर' में मोड़ा गया है, जिससे 12 गांवों की 1,500 एकड़ से अधिक जमीन को सिंचाई का पानी मिलेगा।\n\nप्रेरणा और सबक\nकम संसाधनों में बड़ा प्रभाव पैदा करने और राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पण की सीख इस घटनाक्रम से मिलती है।\n\n• न्यूनतम लागत में अधिकतम परिणाम: मात्र 10 हजार रुपये और 2 दिनों के काम से 8 करोड़ लीटर जल का संरक्षण कर 1,500 एकड़ जमीन को उपजाऊ बनाना संसाधन प्रबंधन की बेहतरीन मिसाल है।\n• जीवनपर्यंत सेवा भावना: 43 वर्षों तक वायु सेना में सेवा देने के बाद भी सार्वजनिक हित में नया दायित्व संभालना कर्तव्यनिष्ठा को दर्शाता है।\n• भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण: पारंपरिक तालीम के साथ कंप्यूटर और विज्ञान को अपनाकर आने वाली पीढ़ी को सशक्त बनाना प्रगतिशील सोच का प्रतीक है।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-09-03",
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