सिरमौर के पांवटा में घुसा हाथियों का झुंड, फसलों और मकानों को पहुंचा भारी नुकसान सिरमौर जिले के पांवटा उपमंडल में उत्तराखंड सीमा से आए जंगली हाथियों ने फसलों, ट्यूबवेल और मकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। दहशतजदा ग्रामीणों और किसान संघ ने वन विभाग से तुरंत बचाव और मुआवजे की मांग उठाई है। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्थित पांवटा उपमंडल के ग्रामीण इलाकों में जंगली हाथियों का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। उत्तराखंड सीमा से सटे इस इलाके में हाथियों के एक दल ने प्रवेश कर खेतों, सिंचाई उपकरणों और रिहाइशी मकानों को काफी क्षति पहुंचाई है। लगातार हो रही इन घटनाओं की वजह से स्थानीय किसानों और निवासियों के बीच डर का माहौल बना हुआ है। बहराल और सतीवाला गांव में जमकर तबाही हाथियों के झुंड ने 14 अगस्त को बहराल गांव में धावा बोला, जहां उन्होंने एक रिहाइशी मकान की दीवार को तोड़ दिया। इस घटना के दौरान घर के अंदर कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, जिसके कारण एक बड़ा हादसा होने से बच गया। हालांकि, इस क्षेत्र में संपत्ति का गंभीर नुकसान हुआ है। इसी बहराल इलाके के किसान महिमा सिंह के ट्यूबवेल को भी हाथियों ने तोड़कर भारी आर्थिक चपत लगाई है। तबाही का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। सतीवाला गांव में भी हाथियों के झुंड ने बड़े पैमाने पर फसलों को रौंद डाला। किसान नीतू राम के खेत में खड़ी धान की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई, जबकि उनके खेत में लगे चेरी और केले के पेड़ों को भी हाथियों ने उखाड़ फेंका। इसके अतिरिक्त, कुछ ही दिनों पहले सतीवाला के दो अन्य किसानों, सोनू राम और ठग्गा राम की मवेशियों पर हाथियों ने हमला कर दिया था, जिसमें उनकी गायों को कुचलकर मार डाला गया। किसानों का बढ़ता डर और वन विभाग को चेतावनी हाल के दिनों में हाथियों की आवाजाही आबादी वाले इलाकों और घरों के बेहद करीब तक बढ़ गई है। गांव के आसपास हाथियों को मंडराते देख ग्रामीण अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए भारतीय किसान यूनियन के प्रखंड अध्यक्ष जसविंदर सिंह बिलिंग ने वन विभाग के समक्ष अपनी मांगें रखी हैं। किसान संघ ने मांग की है कि प्रशासन और वन अधिकारी हाथियों को रिहाइशी क्षेत्रों में घुसने से रोकने के लिए तुरंत कड़े कदम उठाएं। साथ ही, प्रभावित किसानों को उनके हुए नुकसान की भरपाई के लिए उचित मुआवजा तुरंत प्रदान किया जाए। जसविंदर सिंह बिलिंग ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने हाथियों की रोकथाम और मुआवजे की प्रक्रिया जल्द शुरू नहीं की, तो किसान वन विभाग के दफ्तरों के सामने उग्र प्रदर्शन करेंगे। सीमावर्ती क्षेत्र में हाथियों की लगातार आवाजाही सिरमौर जिले का यह भूभाग पड़ोसी राज्य उत्तराखंड की सीमा से सटा हुआ है। इस भौगोलिक स्थिति के कारण क्षेत्र से होकर हाथियों के झुंड का आना-जाना बना रहता है। आवाजाही के दौरान ये हाथी अक्सर आक्रामक हो जाते हैं, जिससे सीमावर्ती बस्तियों और कृषि क्षेत्रों में जान-माल का नुकसान बढ़ता जा रहा है। इसका आप पर असर भारत भर में: मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की सुरक्षा और कृषि आजीविका के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। सिरमौर (हिमाचल प्रदेश) में: पांवटा उपमंडल के बहराल और सतीवाला गांवों में किसानों की फसल और संपत्ति को नुकसान हुआ है, जिससे स्थानीय स्तर पर सतर्कता और वन विभाग से सुरक्षा की जरूरत बढ़ गई है। सवाल-जवाब 1. पांवटा में हाथियों ने किन-किन गांवों में तबाही मचाई? हाथियों के झुंड ने मुख्य रूप से बहराल और सतीवाला गांवों में खेतों, मकानों और ट्यूबवेल को नुकसान पहुंचाया। 2. बहराल गांव में 14 अगस्त को क्या घटना हुई? 14 अगस्त को हाथियों ने बहराल गांव में एक मकान की चारदीवारी तोड़ दी। उस वक्त घर खाली होने से बड़ा हादसा टल गया। 3. हाथियों के हमले से किसानों को क्या-क्या नुकसान हुआ है? किसान महिमा सिंह का ट्यूबवेल क्षतिग्रस्त हुआ, नीतू राम की धान की फसल, चेरी और केले के पेड़ तबाह हुए तथा सोनू राम और ठग्गा राम की गायें मारी गईं। 4. किसान यूनियन ने वन विभाग से क्या मांग की है? भारतीय किसान यूनियन के प्रखंड अध्यक्ष जसविंदर सिंह बिलिंग ने हाथियों को गांवों में आने से रोकने और प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग की है। https://trendkia.com/national/siramaura-ke-paonta-men-ghusa-hathiyon-ka-jhunda-phasalon-aura-makanon-ko-pahuncha-bhari-nukasana-17908 TrendKia — Har trend, sabse pehle.