# सीवर और सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान जान गंवाने वालों के परिजनों को मिलेगा 30 लाख मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश

> सुप्रीम कोर्ट ने सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई करते वक्त दम तोड़ने वाले सफाईकर्मियों के परिवारों को 30 लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश पर पूरी सख्ती बरतने को कहा है। कोर्ट ने राज्यों की रिपोर्ट्स की समीक्षा करते हुए चार सप्ताह के भीतर स्पष्ट विवरण के साथ नई रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-28 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/sivara-aura-septika-tainka-saphai-ke-daurana-jana-gnvane-valon-ke-parijanon-ko-milega-30-lakha-muavaja-supreme-court-ka-sakhta-nir-52742 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुप्रीम कोर्ट, मुआवजा, सीवर सफाई, सेप्टिक टैंक, मजदूर सुरक्षा, कानूनी कार्रवाई

देश की सर्वोच्च अदालत ने सीवर, सेप्टिक टैंक और हाथों से मैला साफ करने के दौरान जान गंवाने वाले कर्मचारियों के आश्रितों को 30 लाख रुपये की सहायता राशि देने के नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने का हुक्म दिया है। अदालत ने चेतावनी भरे लहजे में यह भी स्पष्ट किया है कि जिन सूबों और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इन आदेशों की अनदेखी की जाएगी, उनके मामलों को बेहद गंभीरता से परखा जाएगा।

 

## **राज्यों की प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा**
 मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत के सामने 15 अलग-अलग राज्यों की तरफ से अनुपालन हलफनामे और रिपोर्ट्स पेश की गईं। इन दस्तावेजों में मृतकों के परिवारों को आर्थिक मदद मुहैया कराने, पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करने और दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई शुरू करने से जुड़े विवरण दिए गए थे। हालांकि, अदालत ने गौर किया कि कई मामलों में केवल मुआवजा स्वीकृत किए जाने का दावा किया गया था, लेकिन इस बात का कोई पुख्ता सबूत या स्पष्टता नहीं थी कि वह धन वास्तव में पीड़ित परिवारों तक पहुंच भी पाया है या नहीं। इसी तरह, एफआईआर दर्ज किए जाने की स्थिति पर भी कई जगह असमंजस बना हुआ था। खामियों को देखते हुए पीठ ने सभी संबंधित राज्यों को आगामी चार सप्ताह के भीतर अपनी अद्यतन रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।

 

## **निजी ठेकेदारों की जवाबदेही तय**
 न्यायालय के नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, सूबों को अब यह अनिवार्य रूप से बताना होगा कि क्या सहायता राशि का वितरण हो चुका है, मुकदमे दर्ज किए गए हैं या नहीं और दोषियों के खिलाफ क्या विधिक कदम उठाए गए हैं। इसके साथ ही, अदालत ने यह बात बिल्कुल साफ कर दी है कि यदि किसी कर्मचारी की जान किसी प्राइवेट ठेकेदार या संस्थान के अधीन काम करने के दौरान जाती है, तो भी राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी से किनारा नहीं कर सकती है। सरकार की यह प्राथमिक जिम्मेदारी होगी कि वह पीड़ित परिवार को मुआवजा दिलाए और बाद में संबंधित दोषी पक्ष से उस रकम की वसूली करे। देश के अलग-अलग हिस्सों में सेप्टिक टैंक और सीवर में उतरने से मजदूरों की दम घुटने से मौत की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं, जिनमें ओडिशा के रायगढ़ा जैसे हादसे भी शामिल हैं जहां इस तरह की दुर्घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं।

 

## **मुआवजे की मॉडल योजना पर मंथन**
 सुनवाई के दौरान सफाई कर्मियों और सीवर वर्करों के लिए एक व्यापक मॉडल मुआवजा योजना पर भी विचार-विमर्श किया गया। इस प्रस्तावित रूपरेखा को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के साथ व्यापक मंत्रणा के बाद तैयार किया गया है। इस रूपरेखा के तहत मैला ढोने या सफाई के दौरान होने वाली मौतों अथवा स्थायी दिव्यांगता के मामलों को रिकॉर्ड करने, तुरंत पुलिस मामला दर्ज कराने, पीड़ित परिवारों को मुफ्त कानूनी सहायता देने और समयबद्ध तरीके से मुआवजा राशि का भुगतान सुनिश्चित करने की पुख्ता व्यवस्था सुझाई गई है। अदालत ने राज्यों को अपनी प्रशासनिक कमियों को दुरुस्त करने के लिए एक और अवसर प्रदान किया है और निर्धारित चार सप्ताह के भीतर अतिरिक्त अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दोहराया है। बिहार के गोपालगंज में हुई ऐसी ही घटनाओं और दिल्ली के मुंडका क्षेत्र में जहरीली गैस के रिसाव से मजदूरों की जान जाने के मामले इस प्रकार की व्यवस्थाओं की सख्त जरूरत को रेखांकित करते हैं।

## इसका आप पर असर
यह निर्देश देश भर के सफाई कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए वित्तीय सुरक्षा और कानूनी जवाबदेही तय करने की दिशा में एक अहम कदम है।

- **भारत में:** सभी राज्य सरकारों को सीवर या सेप्टिक टैंक में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिवारों को 30 लाख रुपये की सहायता राशि तय समय में देनी होगी। इस कड़ाई से लापरवाह स्थानीय निकायों और नियोक्ताओं की जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
- **निजी ठेकेदारों के मामले में:** यदि किसी प्राइवेट ठेकेदार के अधीन काम करते समय श्रमिक की मौत होती है, तो भी राज्य सरकार पीड़ित परिवार को मुआवजा देने से बच नहीं सकती है। सरकार पहले मदद राशि देगी और बाद में जिम्मेदार ठेकेदार से उसकी वसूली करेगी।
- **कानूनी कार्रवाई:** अदालत के निर्देश के तहत प्रत्येक मौत के मामले में अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज करनी होगी और दोषियों के विरुद्ध आपराधिक मुकदमे चलाए जाएंगे। इससे इस तरह के जोखिम भरे कार्यों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वालों पर नकेल कसेगी।
- **समयबद्ध रिपोर्टिंग:** राज्यों को चार सप्ताह के भीतर यह स्पष्ट करना होगा कि सहायता राशि वास्तव में खातों में पहुंची है या नहीं। प्रशासनिक स्तर पर देरी होने पर अधिकारियों को गंभीर कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
हाथों से मैला ढोने और सीवर की खतरनाक सफाई के दौरान लगातार हो रही मजदूरों की मौतों पर अंकुश लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने यह सख्त रुख अपनाया है। कई राज्यों द्वारा पिछले आदेशों का अनुपालन ठीक से नहीं किए जाने के कारण अदालत को यह कदम उठाना पड़ा।

- **पूर्व आदेशों की अनदेखी:** सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि राज्यों द्वारा दाखिल की गई पुरानी रिपोर्टों में मुआवजे के वितरण और एफआईआर दर्ज होने की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी। इसी प्रशासनिक लापरवाही के कारण अदालत ने चार हफ्ते का अल्टीमेटम दिया है।
- **सुरक्षा मानकों की कमी:** देश के विभिन्न हिस्सों में बिना सुरक्षा उपकरणों के मजदूरों को जहरीली गैस से भरे सेप्टिक टैंकों में उतारने की घटनाएं लगातार जारी हैं। इन त्रासदियों से निपटने के लिए सामाजिक न्याय मंत्रालय के साथ मिलकर मॉडल योजना तैयार की गई है।
- **निजी संस्थाओं की लापरवाही:** कई बार निजी ठेकेदार कम लागत में काम कराने के चक्कर में मजदूरों की जान को जोखिम में डालते हैं और दुर्घटना के बाद जिम्मेदारी से मुकर जाते हैं। इसी कानूनी loopholes को बंद करने के लिए कोर्ट ने राज्यों को प्राथमिक रूप से उत्तरदायी बनाया है।

## सवाल-जवाब

### 1. सुप्रीम कोर्ट ने सीवर या सेप्टिक टैंक से जुड़ी मौतों पर कितना मुआवजा तय किया है?
सुप्रीम कोर्ट ने मृतकों के परिवारों के लिए 30 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है।

### 2. राज्यों को अपनी नई रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कितना समय दिया गया है?
संबंधित राज्यों को चार सप्ताह के भीतर अतिरिक्त रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

### 3. यदि किसी निजी ठेकेदार के यहां काम करते समय मौत हो जाए, तो मुआवजा कौन देगा?
ऐसी स्थिति में राज्य सरकार की जिम्मेदारी होगी कि वह पीड़ित परिवार को मुआवजा दे और बाद में जिम्मेदार पक्ष से रकम वसूले।

### 4. यह मुआवजा योजना किसके परामर्श से तैयार की गई है?
यह प्रस्तावित मॉडल योजना सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से सलाह लेकर तैयार की गई है।

### 5. अदालत ने राज्यों की रिपोर्ट में क्या खामी पाई थी?
कोर्ट ने पाया कि मुआवजे की मंजूरी की जानकारी तो दी गई थी, लेकिन पैसा परिवारों को मिलने और एफआईआर दर्ज होने की स्थिति स्पष्ट नहीं थी।

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