# संसद और सभी विधानसभाएं तुरंत हों भंग, मल्लिकार्जुन खरगे ने मतपत्र से दोबारा चुनाव कराने की उठाई मांग

> कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मौजूदा केंद्र सरकार और मुख्यमंत्रियों को अवैध बताते हुए संसद और विधानसभाओं को भंग कर बैलेट पेपर से नए चुनाव कराने की मांग की है। उन्होंने मतदाता सूची पुनरीक्षण में गड़बड़ी और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी तीखे सवाल उठाए।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/snsada-aura-sabhi-vidhanasabhaen-turnta-hon-bhnga-mallikarjun-kharge-ne-matapatra-se-dobara-chunava-karane-ki-uthai-manga-42428 · **Language:** Hindi
**Tags:** मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस, मतपत्र, ईवीएम, चुनाव आयोग, इंडिया गठबंधन, मतदाता सूची, कलबुर्गी

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 3 अक्टूबर को देश की मौजूदा चुनावी व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थानों की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए लोकसभा के साथ-साथ सभी राज्य विधानसभाओं को तत्काल भंग करने की मांग उठाई है। कर्नाटक के कलबुर्गी में प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने दावा किया कि वर्तमान व्यवस्था के तहत संपन्न हुए तमाम चुनाव पूरी तरह से अवैध थे। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और देश के विभिन्न राज्यों में कार्यरत मुख्यमंत्रियों के पदों पर बने रहने की वैधता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा किया। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक गरिमा को बहाल करने का एकमात्र रास्ता यही है कि पूरी चुनावी प्रणाली को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के बजाय पारंपरिक मतपत्रों पर वापस लाया जाए।

## चुनावी प्रक्रिया की वैधता और मतपत्रों की वापसी
कलबुर्गी में पत्रकारों को संबोधित करते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि आज समूचा देश ऐसे चुनावों के दम पर चलाया जा रहा है जो नियमों और निष्पक्षता की कसौटी पर खरे नहीं उतरते। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रणाली से बने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का पद पर रहना अनुचित है और राज्यों के मुख्यमंत्रियों का चयन भी इसी श्रेणी में आता है। इसी आधार पर उन्होंने मांग रखी कि वर्तमान लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं को भंग कर दिया जाना चाहिए तथा नए सिरे से निष्पक्ष ढंग से मतपत्रों के जरिए चुनाव कराए जाने चाहिए। उनका तर्क था कि जब तक जनता के हर एक वोट की वास्तविक गिनती पर भरोसा नहीं लौटता, तब तक जनादेश निष्पक्ष नहीं माना जा सकता।

कांग्रेस अध्यक्ष ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम के इस्तेमाल पर गंभीर संशय व्यक्त करते हुए दावा किया कि इन मशीनों के दुरुपयोग को लेकर अब सत्ता पक्ष के अपने लोग भी सवाल उठाने लगे हैं। खरगे के मुताबिक, तकनीक के सहारे चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की आशंकाओं ने आम नागरिकों के मन में गहरा अविश्वास पैदा कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निष्पक्ष चुनाव की सबसे बड़ी शर्त पारदर्शिता होती है, जो कागजी मतपत्रों के बिना संभव नहीं दिख रही है।

## मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर गंभीर आरोप
मल्लिकार्जुन खरगे ने मतदाता सूची के जारी विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कवायद में भारी अनियमितताएं और खामियां मौजूद हैं, जिससे लोकतांत्रिक नींव कमजोर हो रही है। खरगे ने 30 सितंबर को आयोजित ‘इंडिया’ गठबंधन की अहम बैठक का ब्योरा साझा किया, जिसमें 20 राजनीतिक दलों के प्रमुख नेताओं के साथ-साथ उनके विधिक प्रकोष्ठों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए थे। उस बैठक में सभी सहयोगी दलों ने एकमत होकर यह निष्कर्ष निकाला था कि एसआईआर की मौजूदा कार्यशैली देश को एक गलत दिशा में धकेल रही है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने विस्तार से बताते हुए कहा कि इस पुनरीक्षण प्रक्रिया की सबसे ज्यादा मार समाज के कमजोर तबकों पर पड़ रही है। गरीबों, अनपढ़ों, दैनिक कामगारों और विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों के नाम सुनियोजित तरीके से सूची से हटाए जा रहे हैं। खरगे ने सवाल उठाया कि यदि किसी भी एक मतदान केंद्र से 500 मतदाताओं के नाम गायब कर दिए जाएं, तो फिर उस चुनाव को स्वतंत्र और निष्पक्ष कैसे कहा जा सकता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि एक तरफ सही मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ मनमाने ढंग से नए नाम जोड़ने की कोशिशें भी चल रही हैं।

## वार्डों और गांवों में फॉर्म भरने की राजनीति
खरगे ने सीधा आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े कार्यकर्ता योजनाबद्ध तरीके से उन वार्डों, ग्राम पंचायतों और देहाती इलाकों में सक्रिय हैं जहां वे विपक्षी रुझान वाले मतदाताओं को निशाना बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि ये लोग संबंधित क्षेत्रों में जाकर नाम विलोपन के लिए फॉर्म भर रहे हैं, ताकि लक्षित वर्ग के लोगों का मताधिकार छीना जा सके। कांग्रेस अध्यक्ष ने इस पूरी गतिविधि को नैतिक और संवैधानिक रूप से पूरी तरह गलत ठहराया।

ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए खरगे ने रेखांकित किया कि आजाद भारत के इतिहास में पूर्व प्रधानमंत्रियों जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और पीवी नरसिम्हा राव में से किसी ने भी सत्ता में रहते हुए ऐसे अलोकतांत्रिक हथकंडे कभी नहीं अपनाए। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों ने हमेशा लोकतांत्रिक संस्थाओं की मर्यादा और मतदाता के मौलिक अधिकार का सम्मान किया, जबकि वर्तमान दौर में संस्थागत मशीनरी का दुरुपयोग खुलकर हो रहा है।

## कमजोर तबकों पर प्रशासनिक जटिलताओं का बोझ
प्रशासनिक प्रक्रियाओं की विषमता पर प्रकाश डालते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इस तरह के दुरुपयोग का सीधा खामियाजा देश के युवाओं, दलितों, वंचितों और गरीब कामगारों को भुगतना पड़ता है। खरगे का कहना था कि एक आर्थिक रूप से सक्षम या रसूखदार व्यक्ति किसी भी सरकारी कार्यालय में जाकर अपने कागजात दुरुस्त करा सकता है और अपना काम निकाल लेता है। इसके विपरीत, एक निर्धन व्यक्ति को अपनी दिहाड़ी और रोज की आजीविका छोड़कर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। यदि मतदाता सूची में उसका नाम गलत हो जाए या कट जाए, तो उसे सुधारने के लिए अपनी रोजी-रोटी का नुकसान उठाना पड़ता है, जो उसके साथ दोहरा अन्याय है।

## निर्वाचन आयुक्त कानून 2023 और कानूनी संरक्षण का विरोध
केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक ढांचे को ध्वस्त करने का आरोप लगाते हुए खरगे ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल अधिनियम, 2023 के प्रावधानों पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने विशेष रूप से इस कानून की धारा 16 का उल्लेख किया, जिसके तहत मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों को उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णयों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई से पूर्ण छूट प्रदान की गई है। खरगे ने कहा कि इस नए नियम के चलते यदि चुनाव आयुक्त कोई भी गंभीर गलती या अनियमितता करते हैं, तो उनके खिलाफ किसी भी मंच पर कोई कानूनी जांच नहीं चलाई जा सकती।

इसके अलावा, खरगे ने चयन समिति के पुनर्गठन पर भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने याद दिलाया कि पहले की व्यवस्था के अनुसार चयन समिति में भारत के प्रधान न्यायाधीश, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री शामिल होते थे। लेकिन 2023 में नया कानून लाकर प्रधान न्यायाधीश को इस समिति से बाहर कर दिया गया और उनकी जगह केंद्र सरकार के एक कैबिनेट मंत्री को बैठा दिया गया। खरगे के मुताबिक, ऐसा इसलिए किया गया ताकि यदि प्रधान न्यायाधीश किसी निष्पक्ष और ईमानदार व्यक्ति के नाम पर अड़ जाएं या सरकार की मनमानी से असहमत हों, तो सरकार को कोई अड़चन न आए और वह अपनी पसंद के व्यक्ति को मुख्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त कर सके।

## विपक्षी सांसदों का मार्च और देशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा
मल्लिकार्जुन खरगे ने ऐलान किया कि विपक्ष इस अन्यायपूर्ण चुनावी प्रक्रिया और एसआईआर के दुरुपयोग के खिलाफ चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने बताया कि आगामी 6 अक्टूबर को नई दिल्ली में एक व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा, जिसमें सभी विपक्षी दलों के सांसद संसद से निर्वाचन आयोग के मुख्यालय तक पैदल मार्च करेंगे। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों का प्राथमिक दायित्व आम जनता को जागरूक करना और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति सचेत करना है।

अपने संबोधन के अंत में खरगे ने कड़े शब्दों में कहा कि यदि विपक्ष द्वारा देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर मंडरा रहे खतरों से आगाह किए जाने के बाद भी लोग सच्चाई देखने के बजाय केवल सत्ताधारी नेतृत्व के नारों में खोए रहते हैं, तो इसका सीधा अर्थ यह होगा कि वे लोकतांत्रिक व्यवस्था के स्थान पर तानाशाही को स्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि जब तक देश में पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव की गारंटी नहीं मिलती, तब तक कांग्रेस और उसके सहयोगी दल जनता की आवाज उठाते रहेंगे।

## इसका आप पर असर
इस राजनीतिक घटनाक्रम का सबसे बड़ा व्यावहारिक असर यह है कि देश भर में मतदाता सूची की जांच और नागरिक पहचान से जुड़ी प्रशासनिक सतर्कता काफी बढ़ जाएगी।

- **भारत में:** आगामी चुनावों से पहले देश भर के नागरिकों को अपने मतदान केंद्रों पर जाकर मतदाता सूची में अपना और अपने परिजनों का नाम सक्रिय रूप से जांचना होगा। यदि आपका नाम गलत तरीके से कट गया है या विवरण गलत हैं, तो समय रहते स्थानीय निर्वाचन कार्यालय में फॉर्म भरकर सुधार कराना अनिवार्य होगा।
- **कर्नाटक में:** कलबुर्गी और राज्य के अन्य हिस्सों में राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता घर-घर जाकर मतदाता सूचियों की पड़ताल तेज करेंगे। स्थानीय मतदाताओं को अपने पहचान पत्र और निवास प्रमाण पत्र तैयार रखने होंगे ताकि नाम विलोपन या बदलाव की प्रक्रिया में कोई रुकावट न आए।
- **कामगारों और ग्रामीणों के लिए:** विशेष पुनरीक्षण अभियान के दौरान गरीब और दैनिक मजदूरी करने वाले लोगों को अपने मताधिकार की पुष्टि के लिए कार्यदिवस का समय निकालना पड़ सकता है। बीएलओ या पंचायत स्तर पर लगने वाले विशेष कैंपों में जाकर समय रहते अपने नाम की प्रविष्टि सुनिश्चित करनी होगी।
- **चुनावी प्रक्रिया के विश्वास पर:** मतपत्रों की मांग और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर लगातार उठ रहे सवालों से आम जनता में मतदान प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर बहस तेज होगी। राजनीतिक जागरूकता बढ़ने से मतदान के दिन पोलिंग बूथों पर एजेंटों और मतदाताओं की निगरानी अधिक सख्त देखने को मिल सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा संसद भंग करने और मतपत्रों से नए चुनाव कराने की मांग मतदाता सूची पुनरीक्षण में कथित विलोपन और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव के विरोध में सामने आई है।

- **मतदाता सूची में कथित विलोपन:** जारी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान बूथ स्तर पर 500-500 मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों ने विपक्षी दलों में तीव्र आक्रोश पैदा किया। विपक्ष का दावा है कि इस कवायद से गरीब, अल्पसंख्यक और वंचित समुदायों के वैध मताधिकार को जानबूझकर छीना जा रहा है।
- **इंडिया गठबंधन की बैठक का निर्णय:** 30 सितंबर को 20 विपक्षी दलों और उनके विधिक प्रतिनिधियों की बैठक में चुनावी प्रणाली के कथित दुरुपयोग के खिलाफ साझी रणनीति बनी। इस विचार-विमर्श में सभी दलों ने एक सुर में तय किया कि इस मुद्दे पर देशभर में सड़क से लेकर चुनाव आयोग तक कड़ा प्रतिरोध दर्ज कराया जाएगा।
- **2023 के चुनाव आयुक्त कानून का विवाद:** केंद्र सरकार द्वारा पारित 2023 के अधिनियम के जरिए चयन समिति से भारत के प्रधान न्यायाधीश को बाहर कर दिया गया और चुनाव आयुक्तों को कानूनी मुकदमों से छूट दे दी गई। विपक्षी दलों का मानना है कि इस व्यवस्था ने निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।
- **अगला घटनाक्रम:** विपक्षी दलों ने 6 अक्टूबर को नई दिल्ली में संसद से निर्वाचन आयोग के मुख्यालय तक विरोध मार्च निकालने का फैसला किया है। इस अभियान के जरिए जनता को जागरूक करने और आगामी चुनावों के लिए दबाव बनाने की रणनीति तैयार की गई है।

## सवाल-जवाब

### 1. मल्लिकार्जुन खरगे ने लोकसभा और विधानसभाओं को भंग करने की मांग क्यों की?
खरगे का आरोप है कि मौजूदा चुनाव अवैध तरीके से संपन्न हुए थे और वर्तमान सरकार का पद पर बने रहना अनुचित है, इसलिए नए सिरे से मतपत्रों से चुनाव कराए जाने चाहिए।

### 2. कांग्रेस अध्यक्ष ने मतदाता सूची के संबंध में क्या आरोप लगाए हैं?
उन्होंने दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत कई बूथों से 500-500 मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, जिसका असर गरीबों, वंचितों और अल्पसंख्यकों पर पड़ रहा है।

### 3. चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून पर क्या आपत्ति जताई गई?
खरगे ने कहा कि नए कानून के तहत चयन समिति से प्रधान न्यायाधीश को हटाकर केंद्रीय मंत्री को शामिल किया गया और धारा 16 के जरिए आयुक्तों को कानूनी कार्रवाई से छूट दी गई।

### 4. विपक्षी दलों ने आगे के विरोध प्रदर्शन के लिए क्या कार्यक्रम तय किया है?
विपक्षी दलों के सभी सांसद 6 अक्टूबर को नई दिल्ली में निर्वाचन आयोग के मुख्यालय तक विरोध मार्च निकालेंगे और देशव्यापी आंदोलन जारी रखेंगे।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._