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  "type": "article",
  "title": "संसद के मानसून सत्र में पेपर लीक और जन्म पंजीकरण विधेयक पर जोरदार हंगामा, एनएसए अजीत डोभाल की उपस्थिति के बीच लोकसभा स्थगित",
  "summary": "संसद के मानसून सत्र में जन्म और मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक 2026 तथा सुप्रीम कोर्ट जजों की संख्या बढ़ाने का बिल पेश किया जा रहा है। NEET-UG और पेपर लीक विवाद पर विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।",
  "content": "संसद का मानसून सत्र हंगामेदार मोड़ ले चुका है, जहां विपक्ष के तीखे विरोध और नारेबाजी के चलते लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर जोरदार हंगामा किया। इसी बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल भी संसद परिसर पहुंचे। सरकार ने आज के लिए कई महत्वपूर्ण विधायी कार्यों की सूची तैयार की है, जिसमें फर्जी प्रमाण पत्रों पर रोक लगाने के लिए जन्म और मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक 2026 तथा अदालतों में लंबित मुकदमों को तेजी से निपटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा संशोधन विधेयक शामिल है। इसके अलावा एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पर लगातार दूसरे दिन भी सदन में चर्चा जारी है।\n\nजन्म और मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक 2026: जानिए क्या बदल जाएगा\nलोकसभा की संशोधित कार्यसूची के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में 'रजिस्ट्रेशन ऑफ बर्थ्स एंड डेथ्स (अमेंडमेंट) बिल, 2026' पेश करने वाले हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य इस विधेयक के माध्यम से पूरे पंजीकरण ढांचे को पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी बनाना है। नए प्रस्तावित नियमों के तहत यदि किसी व्यक्ति के जन्म या मृत्यु का पंजीकरण एक साल से लेकर दो साल की देरी के बाद कराया जाता है, तो इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट, उप-मंडल मजिस्ट्रेट या फिर किसी कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। वहीं अगर पंजीकरण में दो साल से अधिक की देरी होती है, तो प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आधिकारिक आदेश के बाद ही पंजीकरण प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।\n\nगृह मंत्रालय और केंद्र सरकार का तर्क है कि इन सख्त नियमों से फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने वाले रैकेट पर पूरी तरह से लगाम लगेगी। इसके साथ ही, देश भर के सभी पंजीकरण आंकड़ों को एक केंद्रीय डिजिटल डेटाबेस से जोड़ा जाएगा। इस एकीकृत डेटाबेस को नागरिकों के आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, राशन कार्ड और पासपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों से लिंक किया जाएगा, जिससे डेटा सत्यापन की प्रक्रिया बहुत आसान हो जाएगी और फर्जीवाड़ा रुकेगा।\n\nसुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाला विधेयक पेश\nसंसदीय एजेंडे के तहत केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल 'सुप्रीम कोर्ट (नंबर ऑफ जजेस) अमेंडमेंट बिल, 2026' को विचार और पारित कराने के लिए लोकसभा में प्रस्तुत करेंगे। सरकार का मानना है कि देश की शीर्ष अदालत में मुकदमों की बढ़ती पेंडेंसी और लंबित मामलों के बड़े अंबार को देखते हुए न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि करना बेहद आवश्यक है। इस कानून के बनने से सुप्रीम कोर्ट में मुकदमों की सुनवाई की गति तेज होगी और आम जनता को त्वरित न्याय मिलने में मदद मिलेगी।\n\nपेपर लीक पर संग्राम: राहुल गांधी 12:30 बजे रखेंगे पक्ष\nसदन में एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पर दूसरे दिन भी बहस जारी है। सरकार इस नए कानून को जल्द से जल्द पारित कराने की तैयारी में है ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक कराने वाले माफिया और संगठित गिरोहों के खिलाफ सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जा सके। केंद्र सरकार का दावा है कि इन नए कड़े प्रावधानों से देश की परीक्षा प्रणाली अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी।\n\nदूसरी ओर, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी दोपहर लगभग 12:30 बजे इस मुद्दे पर अपनी बात रखने वाले हैं। राहुल गांधी पेपर लीक विवाद को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। इससे पहले मंगलवार को भी NEET-UG विवाद पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी झड़प देखने को मिली थी। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर कथित बल प्रयोग और पेलेट गन चलाए जाने की खबरों को लेकर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से स्पष्टीकरण मांगा था।\n\nइसके जवाब में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी दलों के नेताओं ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि केंद्र सरकार छात्रों से लगातार संवाद बनाए हुए है और देश के युवाओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीयत पर पूरा भरोसा है कि वह पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकालेंगे। इस दौरान सत्ता पक्ष के नेताओं ने राहुल गांधी पर तंज कसने से भी परहेज नहीं किया। वहीं दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार की नीतियों पर हमला बोलते हुए कहा कि भले ही उन्होंने 1975 का आपातकाल नहीं देखा, लेकिन पिछले सप्ताह दिल्ली में हुए घटनाक्रम ने उस दौर का अहसास करा दिया। अखिलेश यादव ने छात्रों पर हुई कार्रवाई की आलोचना की और चेतावनी दी कि यदि युवाओं के हितों की अनदेखी की गई तो भारत का 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' यानी जनसांख्यिकी लाभांश 'डेमोग्राफिक डिजास्टर' में बदल सकता है।\n\nअयोध्या और राम मंदिर ट्रस्ट के खातों की जांच की मांग\nसंसद परिसर में राजनीतिक गरमाहट केवल पेपर लीक तक ही सीमित नहीं है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। उन्होंने अयोध्या में श्री राम मंदिर के लिए आए सार्वजनिक दान के कथित दुरुपयोग और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों पर तुरंत चर्चा कराने का आग्रह किया है। के.सी. वेणुगोपाल ने मांग की है कि सदन की नियमित कार्यवाही को स्थगित करके इस विषय पर तुरंत बहस कराई जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश की निगरानी में एक उच्चस्तरीय स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।\n\nइसी तरह का रुख अपनाते हुए राज्यसभा में कांग्रेस सांसद नासिर हुसैन ने भी स्थगन प्रस्ताव का नोटिस प्रस्तुत किया है। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खातों, वित्तीय देन-देन और कार्यप्रणाली की पारदर्शी जांच की मांग उठाई है। ऐसे में संसद के दोनों सदनों में विधायी कार्यों के साथ-साथ इन राजनीतिक संवेदनशील मुद्दों पर भी भारी हंगामा देखने को मिल रहा है।\n\n'वन नेशन, वन इलेक्शन' जेपीसी रिपोर्ट की समय-सीमा और अन्य एजेंडे\nआज लोकसभा में 'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की रिपोर्ट सौंपने की समय-सीमा बढ़ाने से संबंधित प्रस्ताव भी पटल पर रखा जाएगा। इसके अतिरिक्त फर्जी खबरों (फेक न्यूज), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, कोयला तथा खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालयों से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर संबंधित मंत्रियों द्वारा सदन में आधिकारिक बयान दिए जाएंगे। प्रश्नकाल के तुरंत बाद पूरे दिन का ध्यान केवल विधायी कार्यों और लंबित विधेयकों को पारित कराने पर केंद्रित रहने वाला है। वहीं राज्यसभा में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' से संबंधित विधेयक भी कार्यसूची में सूचीबद्ध किया गया है।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: डिजिटल जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों का केंद्रीय डेटाबेस बनने और आधार-पासपोर्ट से जुड़ने से नागरिकों का दस्तावेज सत्यापन अधिक पारदर्शी होगा। इसके साथ ही नए एंटी पेपर लीक कानून से लाखों प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए परीक्षाएं निष्पक्ष बनेंगी।\n\nन्यायिक व्यवस्था में: सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से लंबित मुकदमों की सुनवाई में तेजी आएगी और आम नागरिकों को शीघ्र न्याय मिल सकेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जन्म और मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक 2026 में देरी से पंजीकरण के क्या नियम हैं?\nयदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण 1 से 2 वर्ष की देरी से होता है तो जिला मजिस्ट्रेट, उप-मंडल मजिस्ट्रेट या कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति अनिवार्य होगी। 2 वर्ष से अधिक की देरी पर प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही पंजीकरण संभव होगा।\n\n2. सुप्रीम कोर्ट जजों की संख्या बढ़ाने वाले विधेयक का मुख्य उद्देश्य क्या है?\nकेंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा पेश किए जा रहे इस विधेयक का उद्देश्य शीर्ष अदालत में बढ़ते लंबित मामलों को कम करना और न्यायिक प्रक्रिया को गति देना है।\n\n3. एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक का उद्देश्य क्या है?\nइस विधेयक का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली, पेपर लीक और संगठित नकल के खिलाफ कड़े दंडात्मक प्रावधान लागू करके परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है।\n\n4. अयोध्या राम मंदिर मामले पर विपक्ष ने संसद में क्या मांग रखी है?\nकांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल और नासिर हुसैन ने स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर राम मंदिर के सार्वजनिक दान की कथित अनियमितताओं की जांच सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में कराने की मांग की है।\n\n5. NEET-UG विवाद पर अखिलेश यादव ने क्या बयान दिया?\nसमाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने छात्रों पर कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि पिछले हफ्ते दिल्ली के घटनाक्रम ने आपातकाल जैसा अहसास कराया और चेतावनी दी कि युवाओं की अनदेखी से 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' डिजास्टर में बदल सकता है।",
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  "publishedAt": "2026-07-29",
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