संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल पर विदेश मंत्री एस जयशंकर का सख्त रुख संयुक्त राष्ट्र में विदेश नीति और वैश्विक सुरक्षा पर मीडिया से बातचीत के दौरान विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने पाकिस्तानी पत्रकार के उकसावे वाले सवाल का संयम और स्पष्टता से सामना किया। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने एक पाकिस्तानी पत्रकार द्वारा पूछे गए तीखे सवाल का बेहद शांत और सधे हुए लहजे में सामना किया। उस दौरान विदेश मंत्री भारतीय विदेश नीति, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर जारी प्रयासों को लेकर विस्तृत चर्चा कर रहे थे। उसी समय वहां मौजूद एक पाकिस्तानी पत्रकार ने विषय से भटकाने के उद्देश्य से सवाल उठाने का प्रयास किया। संवाददाता सम्मेलन में उठा विवादित प्रश्न प्रेस वार्ता के दौरान उस पत्रकार ने नाटकीय अंदाज में सवाल दागते हुए कहा कि दक्षिण एशिया आखिर कब तक नई दिल्ली, काबुल और इस्लामाबाद से उत्पन्न होने वाले आतंकवाद की मार झेलता रहेगा। इस सवाल के जरिए उसने इस्लामाबाद को नई दिल्ली और काबुल के बराबर रखकर पाकिस्तान को भी आतंकवाद से पीड़ित देश के तौर पर प्रस्तुत करने की रणनीति अपनाई थी। इस तरह की भाषा का प्रयोग अक्सर अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मंचों पर मूल मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए किया जाता रहा है। सधे हुए अंदाज में दिया गया स्पष्ट संदेश विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने इस उकसावे पर विचलित हुए बिना बेहद ठंडे दिमाग और चेहरे पर हल्की मुस्कान के साथ स्थिति को संभाला। उन्होंने स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए पाकिस्तान के रुख को आईना दिखाया, जिससे वहां मौजूद प्रतिनिधियों और पत्रकारों के बीच सन्नाटा पसर गया। वैश्विक मंचों पर भारत के कड़े रुख और आतंकवाद पर बिना किसी हिचकिचाहट के दो टूक जवाब देने की भारतीय नीति को इस घटनाक्रम ने एक बार फिर प्रदर्शित किया। इसका आप पर असर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद और कूटनीति के मुद्दों पर भारत का रुख वैश्विक सुरक्षा नीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। • भारत में: नागरिकों और कूटनीतिक विश्लेषकों के लिए यह स्पष्ट करता है कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सीमा पार सुरक्षा चिंताओं को बिना किसी समझौते के मजबूती से उठाना जारी रखेगा। इससे वैश्विक कूटनीति में देश की दृढ़ स्थिति की पुष्टि होती है। • वैश्विक स्तर पर: अंतरराष्ट्रीय मंचों पर होने वाली इन बहसों से यह संदेश स्पष्ट जाता है कि आतंकवाद के मुद्दे पर समान तुलना या ध्यान भटकाने के प्रयासों को मान्यता नहीं दी जाएगी। इससे बहुपक्षीय सम्मेलनों में आतंकवाद विरोधी कड़े नियमों की दिशा तय करने में मदद मिलती है। ऐसा क्यों हुआ यह घटनाक्रम संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक सामान्य प्रेस वार्ता के दौरान सामने आया जब दक्षिण एशिया में सुरक्षा और आतंकवाद पर चर्चा चल रही थी। • उकसावे का प्रयास: पत्रकार ने नई दिल्ली, काबुल और इस्लामाबाद को एक साथ रखकर पाकिस्तान को भी पीड़ित दिखाने की कोशिश की थी। इस तरह की रणनीति से बहुपक्षीय मंचों पर मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास किया जाता है। • कूटनीतिक प्राथमिकताएं: विदेश मंत्री भारतीय विदेश नीति और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई पर बात कर रहे थे, जहां भारत का स्पष्ट रुख ऐसे किसी भी प्रयास को स्वीकार न करने का रहा है। • सख्त प्रत्युत्तर: डॉ एस जयशंकर ने संयम बरतते हुए बिना किसी उत्तेजना के स्थिति का जवाब दिया, जिससे सवाल की विश्वसनीयता वहीं समाप्त हो गई। सवाल-जवाब 1. यह घटना कहां और किस दौरान हुई? यह घटना संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान हुई, जहां विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर मीडिया से बातचीत कर रहे थे। 2. पाकिस्तानी पत्रकार ने क्या सवाल पूछा था? पत्रकार ने पूछा था कि दक्षिण एशिया कब तक नई दिल्ली, काबुल और इस्लामाबाद से फैलने वाले आतंकवाद का दंश झेलता रहेगा। 3. पत्रकार के सवाल का मूल उद्देश्य क्या माना गया? इस सवाल का उद्देश्य इस्लामाबाद को अन्य राजधानियों के समकक्ष रखकर पाकिस्तान को भी आतंकवाद का पीड़ित दिखाने की कोशिश करना था। 4. विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर की प्रतिक्रिया कैसी रही? विदेश मंत्री ने बिना उत्तेजित हुए शांत भाव और चेहरे पर हल्की मुस्कान के साथ सधे हुए अंदाज में जवाब देकर स्थिति का सामना किया। https://trendkia.com/national/snyukta-rashtra-mukhyalaya-men-pakistani-patrakara-ke-savala-para-videsha-mntri-s-jaishankar-ka-sakhta-rukha-38623 TrendKia — Har trend, sabse pehle.