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  "type": "article",
  "title": "सोशल मीडिया के कमेंट सेक्शन से युवाओं को जाल में फंसा रहे पाकिस्तानी हैंडलर्स, सुरक्षा एजेंसियों ने उजागर की डिजिटल साजिश",
  "summary": "पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टर और हैंडलर्स इंस्टाग्राम के कमेंट सेक्शन का इस्तेमाल करके भारतीय युवाओं को ऑनलाइन अपने जाल में फंसा रहे हैं। जांच एजेंसियों की कार्रवाई से सामने आया है कि किस तरह छोटे-छोटे कामों के बहाने युवाओं को गंभीर वारदातों में शामिल किया जा रहा है।",
  "content": "स्मार्टफोन की स्क्रीन पर एक साधारण सा वीडियो स्क्रॉल करते समय दिखने वाला कमेंट किस तरह किसी युवा के जीवन को अपराध और जांच एजेंसियों की फाइलों तक पहुंचा सकता है, इसकी एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। सीमा पार पाकिस्तान में बैठे कुछ कुख्यात गैंगस्टर और उनके सहयोगी भारतीय युवाओं को अपनी आपराधिक और आतंकी साजिशों का मोहरा बनाने के लिए इंस्टाग्राम जैसे लोकप्रिय सोशल मीडिया मंचों का सहारा ले रहे हैं। जांच एजेंसियों द्वारा की गई गहन पड़ताल से यह बात उजागर हुई है कि इस डिजिटल नेटवर्क के निशाने पर मुख्य रूप से 19 से 23 वर्ष की आयु के ऐसे युवा हैं जो गंभीर आर्थिक तंगी, नशे की लत, पारिवारिक कलह या प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति किसी नाराजगी से जूझ रहे हैं। शुरुआती संपर्क बेहद सहज और सामान्य प्रतीत होता है। किसी विवादास्पद या संवेदनशील पोस्ट के नीचे एक साधारण कमेंट से बातचीत शुरू होती है, जो धीरे-धीरे डायरेक्ट मैसेज तक पहुंचती है। इसके बाद भरोसे का निर्माण किया जाता है और शुरुआत में बेहद छोटे काम दिए जाते हैं। हालांकि, यही छोटे-छोटे कार्य आगे चलकर पोस्टर चिपकाने, वीडियो रिकॉर्डिंग करने, अवैध हथियारों की तस्करी करने और सरकारी या पुलिस ठिकानों को निशाना बनाने जैसी खतरनाक वारदातों की रूपरेखा में बदल जाते हैं।\n\nसोशल मीडिया पर छंटाई और नेटवर्क का पूरा तरीका\nडिजिटल माध्यम से चलाए जा रहे इस पूरे तंत्र की सबसे खतरनाक बात यह है कि इसमें किसी भी हैंडलर को भारत की सीमा लांघने या भौतिक रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं पड़ती। मोबाइल स्क्रीन और इंटरनेट कनेक्टिविटी के माध्यम से ही भारत के भीतर ही युवाओं की पहचान की जाती है और उनसे संपर्क साधा जाता है। पिछले दो वर्षों के दौरान उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों में हुई विभिन्न सुरक्षा कार्रवाइयों के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर एजेंसियों को ऐसे अनेक मामलों की जानकारी मिली है, जिनमें 19 से 23 साल के नवयुवकों को पाकिस्तानी हैंडलरों द्वारा बरगलाया गया। इन युवाओं को अपने जाल में फंसाने के लिए हैंडलर्स अलग-अलग रणनीतियों का उपयोग करते हैं। कुछ युवाओं को नकदी और त्वरित धन कमाने का प्रलोभन दिया जाता है, जबकि कुछ को समुदाय या धर्म के नाम पर भावनात्मक रूप से उकसाया जाता है। वहीं दूसरी ओर, कई मामलों में युवाओं के भीतर मौजूद व्यक्तिगत बदले की भावना या समाज में एकाएक हीरो बनने की चाहत का फायदा उठाया जाता है।\n\nजांच अधिकारियों के अनुसार, इंस्टाग्राम का कमेंट सेक्शन इस पूरे नेटवर्क के लिए प्राथमिक स्तर पर संभावित लोगों की छंटाई करने वाले मैदान की तरह कार्य करता है। पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स जानबूझकर उत्तेजक, विवादास्पद या भावनात्मक रूप से संवेदनशील रील और पोस्ट साझा करते हैं। इसके बाद इन पोस्ट पर आने वाली प्रतिक्रियाओं, कमेंट्स और यूजर प्रोफाइल का बारीकी से अध्ययन किया जाता है। यदि किसी यूजर के प्रोफाइल या कमेंट्स से उसकी आर्थिक बदहाली, मानसिक परेशानी या सामाजिक असंतोष का संकेत मिलता है, तो उसे लक्षित करके सीधा मैसेज भेजा जाता है। शुरुआती दौर में सामान्य बातचीत के माध्यम से युवा का विश्वास जीता जाता है। जब एक बार संवाद स्थापित हो जाता है, तो उसे पहली बार कोई मामूली काम सौंपा जाता है। कार्य सफलतापूर्वक पूरा होने पर धीरे-धीरे जिम्मेदारी का दायरा और काम का जोखिम बढ़ाया जाता है।\n\nउत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से सामने आए केस स्टडी\nसुरक्षा एजेंसियों की पड़ताल में इस पैटर्न के कई प्रत्यक्ष उदाहरण सामने आए हैं। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के रहने वाले 23 वर्षीय अशरफ दानियाल का है। अशरफ महाराष्ट्र के भिवंडी क्षेत्र में काम करता था। जांच एजेंसियों के विवरण के मुताबिक, अशरफ से पहली बार इंस्टाग्राम के जरिए संपर्क साधा गया था। हैंडलरों ने शुरुआत में उससे एक बेहद आसान काम करने को कहा, जिसमें भिवंडी स्थित नारपोली पुलिस स्टेशन का एक संक्षिप्त वीडियो रिकॉर्ड करना शामिल था। अशरफ ने उस परिसर का 17 सेकंड का वीडियो बनाकर हैंडलर को भेज दिया। इस काम से भरोसा कायम होने के बाद, उसे दूसरा बड़ा कार्य सौंपा गया। इस बार उसे पाकिस्तानी गैंगस्टर अबिद जट्ट की तस्वीर वाले 50 पोस्टर छपवाकर स्थानीय इलाके में जगह-जगह लगाने और इस पूरी प्रक्रिया का वीडियो बनाकर भेजने का निर्देश दिया गया। इस मामले की भनक लगते ही मई के महीने में उत्तर प्रदेश एटीएस ने अशरफ को गिरफ्तार कर लिया और उसके खिलाफ गंभीर कानूनी धाराओं के तहत व्यापक जांच शुरू की।\n\nइसी नेटवर्क से जुड़ा एक अन्य मामला मुंबई के कुर्ला इलाके के 21 वर्षीय साजिद मेहबूब शेख का है। एजेंसियों द्वारा की गई जांच से पता चला कि साजिद की बातचीत सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान स्थित हैंडलरों के सहयोगियों के साथ शुरू हुई थी। साजिद का पारिवारिक और व्यक्तिगत जीवन अत्यंत विकट परिस्थितियों से गुजरा था और वह कचरा चुनकर अपना जीवनयापन कर रहा था। उसकी इस बेहद कमजोर आर्थिक स्थिति का फायदा उठाते हुए हैंडलरों ने उसे 25 हजार रुपये की राशि दी। इसके एवज में साजिद को देश की राजधानी दिल्ली में सुरक्षा कर्मियों और महत्वपूर्ण सरकारी इमारतों को निशाना बनाने का कथित काम सौंपा गया था। इस मामले से यह स्पष्ट होता है कि नेटवर्क में शामिल हैंडलर्स किस प्रकार आर्थिक लाचारी को युवाओं को अपने पाले में लाने के लिए एक बड़े औजार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।\n\nव्यक्तिगत विवाद और बदले की भावना का फायदा\nइस नेटवर्क की कार्यशैली का एक अन्य पहलू उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के 20 वर्षीय कृष्ण मिश्रा के मामले से उजागर होता है। उत्तर प्रदेश एटीएस के अनुसार, कृष्ण मिश्रा अपने व्यक्तिगत और पारिवारिक विवादों के कारण अत्यधिक मानसिक तनाव और गुस्से में था। उसकी इसी व्यक्तिगत नाराजगी और कमजोरी का फायदा हैंडलरों ने उठाया। हैंडलर्स ने उसे उकसाया और एक स्थानीय पुलिस अधिकारी से बदला लेने के नाम पर उसे अपने प्रभाव में ले लिया। इसके बाद कृष्ण मिश्रा को हथियार से हमला करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। कार्रवाई के दौरान एजेंसियों ने उसके एक सहयोगी के पास से एक देसी पिस्टल और जिंदा कारतूस बरामद करने का दावा किया। इस घटनाक्रम से सुरक्षा अधिकारियों का यह निष्कर्ष और मजबूत होता है कि इस प्रकार की भर्तियों के लिए किसी विशेष राजनीतिक या धार्मिक विचारधारा का होना आवश्यक नहीं है, बल्कि व्यक्ति की किसी भी तात्कालिक मानसिक या सामाजिक कमजोरी को पहचानकर उसे अपराध की राह पर धकेला जा सकता है।\n\nअधिकारियों के मुताबिक, यह पूरा मॉडल एक चरणबद्ध सीढ़ी की भांति काम करता है। शुरुआती चरण में पोस्टर लगाना, किसी स्थान का वीडियो बनाना या फोटो भेजना जैसे अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले काम दिए जाते हैं। एक बार जब हैंडलर को युवा पर पूरा विश्वास हो जाता है, तो उसे आगजनी करने, अवैध हथियारों की खेप एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने या संवेदनशील प्रतिष्ठानों की रेकी करने जैसे गंभीर और घातक काम सौंपे जाते हैं। पंजाब के गुरदासपुर में नवंबर 2025 में एक पुलिस स्टेशन पर हुए ग्रेनेड हमले के मामले में पकड़े गए युवाओं के तार भी पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टरों से जुड़े पाए गए थे। हालांकि, इन सभी मामलों में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में जारी न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से होनी बाकी है।\n\nरेफरेंस आधारित भर्ती मॉडल और प्रमुख हैंडलरों के नाम\nदिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के वरिष्ठ अधिकारी अनिल शुक्ला के अनुसार, कम आय वर्ग से आने वाले, नशे की लत का शिकार या जीवन में किसी निश्चित दिशा की तलाश कर रहे युवा इस प्रकार के डिजिटल जाल में बहुत तेजी से फंसते हैं। हैंडलर्स इन युवाओं को भारी पैसे देने, विदेश भेजने का बंदोबस्त करने या अपने समुदाय के भीतर एक नायक के रूप में स्थापित करने के लुभावने वादे करते हैं। उत्तर प्रदेश के एडीजी अमिताभ यश ने इस भर्ती प्रक्रिया को एक रेफरेंस आधारित सिस्टम करार दिया है। इसका अर्थ यह है कि जब एक बार कोई युवा इस जाल में फंस जाता है, तो वह अपने संपर्क में आने वाले अन्य परिचित युवाओं के नाम और मोबाइल नंबर हैंडलरों तक पहुंचाता है। इस प्रकार यह नेटवर्क सोशल मीडिया के वर्चुअल प्लेटफॉर्म से निकलकर वास्तविक दुनिया में एक संक्रामक बीमारी की तरह फैलता जाता है।\n\nजांच एजेंसियों की प्राथमिक पड़ताल में इस पूरी डिजिटल साजिश के पीछे कई प्रमुख नाम सामने आए हैं। इनमें पाकिस्तान में मौजूद गैंगस्टर शहजाद भट्टी और उसके सहयोगी प्रमुखता से शामिल हैं। इसके अलावा अबिद जट्ट, राना हुनैन, हम्माद मेमन और यावर खान जैसे नाम भी विभिन्न मामलों की जांच में उजागर हुए हैं। ये हैंडलर्स अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए लगातार भारतीय युवाओं की गतिविधियों पर नजर रखते हैं और उनकी कमजोरियों का फायदा उठाकर उन्हें देश विरोधी और आपराधिक गतिविधियों में धकेलने का प्रयास कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर ऐसे संदिग्ध खातों को चिन्हित करने और इस डिजिटल नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए निरंतर कार्रवाई कर रही हैं।\n\nइसका आप पर असर\nइस मामले के खुलासे का आम नागरिकों और युवाओं पर सीधा असर पड़ता है:\n\n• भारत में: अभिभावकों और युवाओं को सोशल मीडिया पर अनजान हैंडलर्स या कमेंट सेक्शन में होने वाली संदिग्ध बातचीत के प्रति अत्यधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।\n• उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब और दिल्ली में: स्थानीय सुरक्षा एजेंसियां डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी बढ़ा रही हैं, जिससे संवेदनशील क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों पर त्वरित कार्रवाई हो सके।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पाकिस्तानी हैंडलर्स भारतीय युवाओं से संपर्क कैसे साधते हैं?\nहैंडलर्स इंस्टाग्राम पर विवादास्पद या भावनात्मक रील और पोस्ट डालते हैं। कमेंट सेक्शन में प्रतिक्रिया देने वाले युवाओं के प्रोफाइल खंगालकर उन्हें डायरेक्ट मैसेज भेजा जाता है।\n\n2. डिजिटल भर्ती के लिए किन युवाओं को मुख्य रूप से निशाना बनाया जा रहा है?\nमुख्य रूप से 19 से 23 वर्ष की आयु के ऐसे युवाओं को निशाना बनाया जाता है जो आर्थिक तंगी, नशे की लत, पारिवारिक तनाव या व्यवस्था से नाराजगी से जूझ रहे हैं।\n\n3. शुरुआती छोटे काम बाद में बड़े अपराधों में कैसे बदलते हैं?\nशुरुआत में वीडियो बनाने या पोस्टर लगाने जैसे छोटे काम दिए जाते हैं। विश्वास बनने के बाद रेकी, हथियार पहुंचाने या हमले करने जैसे गंभीर काम सौंपे जाते हैं।\n\n4. कौन-कौन से प्रमुख पाकिस्तानी हैंडलर्स के नाम जांच में सामने आए हैं?\nजांच में शहजाद भट्टी, अबिद जट्ट, राना हुनैन, हम्माद मेमन और यावर खान जैसे हैंडलरों और गैंगस्टरों के नाम उजागर हुए हैं।\n\n5. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार यह नेटवर्क किस मॉडल पर काम करता है?\nयह एक रेफरेंस आधारित मॉडल पर काम करता है, जहां जाल में फंसा युवा अपने परिचितों के संपर्क विवरण हैंडलरों को देता है और नेटवर्क फैलता जाता है।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-08-16",
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