# सुधांशु त्रिवेदी ने मतदाता सूची विवाद पर कांग्रेस को घेरा, राहुल गांधी के दावों को बताया तथ्यहीन

> भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस पर भ्रामक प्रचार करने का आरोप लगाते हुए राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं के पुराने बयानों पर सवाल खड़े किए हैं।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/sudhanshu-trivedi-ne-matadata-suchi-vivada-para-congress-ko-ghera-rahul-gandhi-ke-davon-ko-bataya-tathyahina-44008 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुधांशु त्रिवेदी, राहुल गांधी, भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, मतदाता सूची, अमित शाह, चुनाव आयोग

नई दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस नेतृत्व और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने चुनावी शिकस्तों से उपजी हताशा को आधारहीन बयानों की मुख्य वजह बताते हुए कहा कि विपक्षी खेमा पूरे देश में मतदाताओं को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है। त्रिवेदी ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि कई पीढ़ियों से सत्ता पर काबिज रहा परिवार आज संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं की कार्यप्रणाली पर अनर्गल टिप्पणियां कर रहा है। उन्होंने देश की जनता से राहुल गांधी और उनकी पार्टी के नेताओं द्वारा अलग-अलग अवसरों पर दिए गए बयानों के अंतर्विरोधों को समझने का आग्रह किया।

## मतदाता सूची और 13 करोड़ नामों के आंकड़ों पर स्पष्टीकरण
मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण यानी एसआईआर की कवायद के दौरान 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा प्रवक्ता ने सिलसिलेवार ब्योरा पेश किया। उन्होंने आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए बताया कि जिन 13 करोड़ प्रविष्टियों को लेकर विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं, उनमें 2.8 करोड़ ऐसे लोग शामिल हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है। इसके अलावा 6.3 करोड़ लोग अपने पुराने पते से अन्य स्थानों पर स्थानांतरित हो चुके हैं, जबकि 1 करोड़ नाम दोहराव यानी डुप्लीकेट पाए गए हैं और 3 करोड़ लोग अपने पंजीकृत पते पर अनुपस्थित रहे हैं।

सुधांशु त्रिवेदी ने स्पष्ट किया कि इस पूरी जांच प्रक्रिया में यह प्रावधान भी रखा गया है कि यदि किसी वास्तविक नागरिक के पास आधार कार्ड या संबंधित वैध दस्तावेज मौजूद हैं, तो वह अपने प्रमाण प्रस्तुत करके अपना नाम दोबारा दर्ज करा सकता है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से सीधा सवाल किया कि जब पार्टी 13 करोड़ लोगों का दावा करती है, तो वह मृतक व्यक्तियों और फर्जी या डुप्लीकेट नामों को वैध मताधिकार की श्रेणी में रखकर कैसे पेश कर सकती है।

## वोटर डुप्लीकेशन पर कांग्रेस के बदलते रुख पर सवाल
भाजपा सांसद ने याद दिलाया कि कांग्रेस पार्टी खुद पिछले कई वर्षों के दौरान मतदाता सूचियों में दोहराव की शिकायतें दर्ज कराती रही है। उन्होंने कहा कि अभिषेक मनु सिंघवी, अशोक गहलोत, सचिन पायलट और के.सी. वेणुगोपाल जैसे वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने समय-समय पर यह मुद्दा उठाया था कि कई निर्वाचन क्षेत्रों में एक ही मतदाता का नाम कई स्थानों पर दर्ज है। स्वयं राहुल गांधी भी पूर्व में यह तर्क दे चुके हैं कि वोटर डुप्लीकेशन एक गंभीर प्रशासनिक समस्या है।

त्रिवेदी ने कांग्रेस से स्थिति स्पष्ट करने की मांग करते हुए पूछा कि जब उनके नेता 2016, 2018, 2020 और 2021 में वोटर लिस्ट में फर्जी नामों और डुप्लीकेशन की बात कह रहे थे, तब वे सही थे या आज जब उसी खामी को दूर किया जा रहा है तब उनका रुख सही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल अपने राजनीतिक नफा-नुकसान के अनुसार बयानों को बदलता रहता है और जनता के सामने असत्य प्रस्तुत करता है।

## संवैधानिक संस्थाओं पर आरोपों को लेकर क्विज का तंज
संवाददाता सम्मेलन में सुधांशु त्रिवेदी ने कौन बनेगा करोड़पति कार्यक्रम का उदाहरण देते हुए कटाक्ष किया कि देश में इस विषय पर एक सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता आयोजित होनी चाहिए कि कांग्रेस ने अब तक कितनी राष्ट्रीय संस्थाओं पर लांछन लगाए हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल ने भारतीय सेना से लेकर भारतीय वायु सेना तक और देश के रक्षा तंत्र से लेकर भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल, भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई, प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी और यहां तक कि देश में बनी टीकों और वैक्सीन तक पर सवाल खड़े किए हैं।

उन्होंने कहा कि जब भी कोई राष्ट्रीय संस्था नियमों के तहत काम करती है या देश का मान बढ़ाती है, कांग्रेस पार्टी उस पर संदेह व्यक्त करने लगती है। भारतीय न्यायपालिका और भारतीय मीडिया की निष्पक्षता पर भी बार-बार उंगली उठाई जाती है। त्रिवेदी ने कहा कि संस्थाओं की विश्वसनीयता पर प्रहार करना कांग्रेस की पुरानी कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है।

## कल्याणकारी योजनाओं में फर्जी लाभार्थियों की छंटनी का उदाहरण
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि व्यवस्था की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जांच-पड़ताल की प्रक्रिया भारत में कोई नई बात नहीं है। विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में असली और हकदार लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने के लिए पहले भी विस्तृत सत्यापन अभियान चलाए गए हैं। उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि केंद्र में मौजूदा सरकार के सत्ता में आने के बाद जब राशन कार्डों की राष्ट्रव्यापी जांच कराई गई, तो 5.8 करोड़ ऐसे फर्जी राशन कार्ड पाए गए जिनका जमीन पर कोई वास्तविक अस्तित्व ही नहीं था और उनके जरिए खाद्यान्न उठाया जा रहा था।

इसी तरह वर्ष 2019 के बाद जब महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा के जॉब कार्डों का भौतिक सत्यापन किया गया, तो 4.45 करोड़ ऐसे कार्ड निरस्त किए गए जो गैर-मौजूद लोगों के नाम पर जारी थे और उनके नाम से मजदूरी निकाली जा रही थी। त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि जिस तंत्र ने वर्षों तक फर्जी राशन और मनरेगा मजदूरी का दुरुपयोग किया, वही तत्व आज मृत और दोहरे मतदाताओं के सहारे चुनावी व्यवस्था में अनुचित लाभ उठाने का प्रयास कर रहे हैं।

## विगत चुनावी इतिहास और नेतृत्व की सक्रियता पर उठाए सवाल
भाजपा प्रवक्ता ने चुनावी इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया कि देश में अंतिम बार व्यापक स्तर पर एसआईआर प्रक्रिया वर्ष 2003 में संचालित की गई थी। उन्होंने कांग्रेस से पूछा कि 2003 से पहले पार्टी कितने राज्यों में शासन कर रही थी। त्रिवेदी ने कहा कि इस प्रक्रिया के लागू होने से पहले ही कांग्रेस उन महत्वपूर्ण राज्यों की सत्ता से हमेशा के लिए बाहर हो चुकी थी, जहां से कुल मिलाकर 228 लोकसभा सीटें आती हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि यह राजनीतिक गिरावट राहुल गांधी के सक्रिय राजनीति में पदार्पण से पहले ही शुरू हो चुकी थी।

इसके साथ ही त्रिवेदी ने राहुल गांधी की चुनावी प्रतिबद्धता पर भी प्रश्नचिह्न लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जैसे नेता राज्य विधानसभा चुनावों में 25 दिनों तक लगातार रहकर सांगठनिक रणनीति बनाते हैं और प्रचार करते हैं। इसके विपरीत राहुल गांधी कभी किसी चुनाव में 15 दिन, 10 दिन या एक सप्ताह भी लगातार रुककर जमीनी स्तर पर काम नहीं करते। उन्होंने कांग्रेस को चुनौती दी कि वह वर्ष 2004 के बाद से किसी ऐसे विधानसभा चुनाव का उदाहरण सामने रखे, जिसमें उनके नेता ने किसी राज्य में लगातार डेढ़ या दो सप्ताह बिताए हों।

## इसका आप पर असर
मतदाता सूची के सत्यापन और नाम हटाए जाने को लेकर राजनीतिक दलों के बीच चल रहे इस विवाद का सीधा असर आम मतदाताओं की जागरूकता पर पड़ता है।

- **दस्तावेज सत्यापन:** यदि आपका नाम किसी कारणवश स्थानांतरित या अनुपस्थित श्रेणी में दर्ज हो गया है, तो आप आधार कार्ड दिखाकर सुधार करा सकते हैं। स्थानीय निर्वाचन कार्यालय या मतदान केंद्र पर संबंधित पहचान पत्र प्रस्तुत करके अपने नाम को मतदाता सूची में सक्रिय बनाए रखा जा सकता है।
- **स्थानांतरित नागरिक:** नए पते पर बसने वाले नागरिकों को अपने नए निर्वाचन क्षेत्र में समय रहते नाम पंजीकृत कराना आवश्यक है। पुराने पते से नाम कटने की स्थिति में समय पर नया आवेदन नहीं करने से मतदान के दिन असुविधा हो सकती है।
- **फर्जी प्रविष्टियों पर रोक:** मतदाता सूची में मृतक और दोहरे नामों की छंटनी से चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित होती है। इससे वास्तविक नागरिकों के मत का उचित मूल्य बना रहता है और किसी प्रकार के दुरुपयोग की संभावना समाप्त होती है।
- **सार्वजनिक योजनाओं की पारदर्शिता:** राशन कार्ड और मनरेगा जैसे कार्यक्रमों में फर्जी नामों को हटाने से सरकारी लाभ केवल पात्र लोगों तक पहुंचता है। इससे वास्तविक लाभार्थियों को समय पर सहायता मिलती है और सरकारी संसाधनों की बर्बादी रुकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह राजनीतिक टकराव विपक्षी दलों द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों के बाद सामने आया है।

- **एसआईआर प्रक्रिया के आंकड़े:** निर्वाचन अधिकारियों द्वारा किए गए सत्यापन में बड़ी संख्या में मृतक, स्थानांतरित और दोहराव वाले नाम पाए गए थे। भाजपा का पक्ष है कि यह नियमित प्रशासनिक सफाई थी, जबकि कांग्रेस ने इसे मतदाताओं के मताधिकार से वंचित करने का प्रयास बताया।
- **नेताओं के पुराने बयान:** वर्ष 2016 से 2021 के बीच कांग्रेस के कई प्रमुख नेताओं ने स्वयं मतदाता सूची में डुप्लीकेशन की शिकायतें उठाई थीं। अब उसी समस्या के समाधान पर सवाल खड़े किए जाने को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर वैचारिक विरोधाभास का आरोप लगाया।
- **कल्याणकारी योजनाओं का पूर्व अनुभव:** केंद्र सरकार द्वारा 5.8 करोड़ फर्जी राशन कार्ड और 4.45 करोड़ फर्जी मनरेगा कार्ड रद्द किए जाने के उदाहरणों को आधार बनाकर प्रशासनिक सत्यापन को आवश्यक ठहराया गया। सरकारी तंत्र का तर्क है कि बिना भौतिक जांच के व्यवस्था में पारदर्शिता नहीं लाई जा सकती।

## सवाल-जवाब

### 1. सुधांशु त्रिवेदी ने 13 करोड़ वोटर्स के आंकड़ों का क्या विभाजन बताया?
उन्होंने बताया कि इनमें 2.8 करोड़ मृतक, 6.3 करोड़ स्थानांतरित, 1 करोड़ डुप्लीकेट और 3 करोड़ अनुपस्थित लोग शामिल हैं।

### 2. क्या कटे हुए नाम वाले लोग अपना नाम वापस जुड़वा सकते हैं?
हां, यदि किसी नागरिक के पास आधार कार्ड या अन्य वैध दस्तावेज हैं, तो वह कागज दिखाकर अपना नाम दोबारा दर्ज करा सकता है।

### 3. भाजपा ने राशन कार्ड और मनरेगा के संबंध में कौन से आंकड़े दिए?
भाजपा प्रवक्ता ने बताया कि जांच में 5.8 करोड़ फर्जी राशन कार्ड और 4.45 करोड़ फर्जी मनरेगा जॉब कार्ड पाए गए थे।

### 4. सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के चुनावी प्रचार को लेकर क्या सवाल पूछा?
उन्होंने पूछा कि राहुल गांधी 2004 के बाद किसी ऐसे विधानसभा चुनाव का नाम बताएं जहां वे लगातार डेढ़ या दो हफ्ते रुककर प्रचार में रहे हों।

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