सुदीप बंदोपाध्याय पर बरसीं महुआ मोइत्रा, लोकसभा स्पीकर से अतिरिक्त समय मांगने पर खड़े किए तीखे सवाल नदिया में मीडिया से बातचीत करते हुए महुआ मोइत्रा ने सुदीप बंदोपाध्याय के स्वास्थ्य संबंधी बयानों और राजनीतिक रुख पर कड़ा एतराज जताया। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा अंदरूनी घमासान एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। नदिया जिले में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता और सदन में दल के नेता रहे सुदीप बंदोपाध्याय पर तीखा हमला बोला। लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष जवाब देने के लिए अतिरिक्त चार हफ्तों की मोहलत मांगने के कदम पर उन्होंने बंदोपाध्याय के राजनीतिक रुख और बयानों पर सार्वजनिक रूप से गंभीर सवाल उठाए। लोकसभा स्पीकर से समय मांगने पर तीखा एतराज लोकसभा अध्यक्ष ने एक मामले में सुदीप बंदोपाध्याय को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस भेजा था। इस नोटिस के जवाब में बंदोपाध्याय ने अस्वस्थता और अन्य कारणों का हवाला देते हुए चार अतिरिक्त हफ्तों का समय देने का अनुरोध किया। इस कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए महुआ मोइत्रा ने कहा कि बार-बार समय मांगने की रणनीति समझ से परे है। उन्होंने बंदोपाध्याय की उम्र और उनके पहले दिए गए राजनीतिक आश्वासनों का उल्लेख करते हुए उनके फैसलों की मंशा पर सवाल खड़े किए। स्वास्थ्य और दिल्ली में गतिविधियों को लेकर लगाए आरोप नदिया में पत्रकारों से रूबरू होते हुए महुआ मोइत्रा ने बंदोपाध्याय पर दोहरे रुख का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि फोन पर संपर्क करने पर उन्हें बताया गया था कि वह अपोलो अस्पताल में हैं और पेट में दर्द की शिकायत है, जबकि दूसरी ओर वह अपनी गाड़ी में घूमते दिखे। मोइत्रा ने आरोप लगाया कि एक तरफ अस्वस्थता का दावा किया जा रहा है और दूसरी तरफ वह प्रधानमंत्री के साथ नाश्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस उम्र में इस तरह के असत्य बयान देना बिल्कुल अनुचित है और ऐसे नेताओं के वास्तविक कदमों की पड़ताल होनी चाहिए। विलय की समयसीमा और एनडीए से जुड़े दावे महुआ मोइत्रा ने गठबंधन और संभावित विलय की चर्चाओं को लेकर भी बंदोपाध्याय को घेरा। उन्होंने कहा कि पहले एसीपीआई और एनडीए का हिस्सा होने तथा 1 सितंबर से 22 सितंबर के बीच विलय होने की बात कही गई थी। जब यह समयसीमा 22 सितंबर तक तय थी, तो अब और समय मांगने का कोई औचित्य नहीं बनता। मोइत्रा ने दोहराया कि वह स्वयं पूरी तरह तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़ी हैं, और यदि आज कोई उनसे पूछे तो वह बिना किसी झिझक के एक सेकंड में कहेंगी कि वह पार्टी के साथ हैं। बंगाल की राजनीति में तेज हुई बयानबाजी पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारों में पिछले कई महीनों से यह चर्चा चल रही थी कि सुदीप बंदोपाध्याय बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के निरंतर संपर्क में हैं। महुआ मोइत्रा के इस तीखे बयान के सामने आने के बाद विपक्षी दल बीजेपी ने भी तत्काल प्रतिक्रिया दी। बीजेपी नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि सत्ताधारी दल के अंदर आपसी विश्वास पूरी तरह खत्म हो चुका है और वरिष्ठ सांसद एक-दूसरे की पोल खोल रहे हैं। बीजेपी की ओर से दावा किया गया कि कई वरिष्ठ सांसद जल्द ही पाला बदलने की तैयारी में हैं, जिससे आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में समीकरण और जटिल हो सकते हैं। इसका आप पर असर तृणमूल कांग्रेस के दो प्रमुख सांसदों के बीच सार्वजनिक खींचतान का असर पार्टी संगठन और बंगाल की राजनीति पर पड़ेगा। • भारत में: संसद के भीतर तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल के समन्वय और विधायी कामकाज पर इस विवाद का सीधा असर देखने को मिल सकता है। विपक्षी दल राष्ट्रीय स्तर पर इस कलह को प्रमुख मुद्दा बनाकर पार्टी की एकता पर सवाल खड़े करेंगे। • पश्चिम बंगाल में: राज्य में सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं और स्थानीय संगठन में आंतरिक खेमेबाजी के कारण असमंजस का माहौल बन सकता है। लोकसभा चुनावों और आगामी राजनीतिक रणनीतियों को लेकर दोनों गुटों के समर्थकों के बीच टकराव बढ़ने की संभावना है। • मतदाताओं के लिए: वरिष्ठ नेताओं के परस्पर विरोधी बयानों से जनता के बीच राजनीतिक स्थिरता और जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताओं को लेकर संशय पैदा होता है। आने वाले दिनों में विभिन्न हलकों में नेताओं के पाला बदलने की अटकलें मतदाता व्यवहार को प्रभावित कर सकती हैं। • संसदीय कार्यवाही पर: लोकसभा अध्यक्ष द्वारा जारी नोटिस पर वरिष्ठ सांसद के जवाब और संभावित निर्णयों से सदन में दल की आधिकारिक स्थिति प्रभावित होगी। इससे सदन के भीतर पार्टी के मुख्य सचेतक और संसदीय दल के नेतृत्व के अधिकार क्षेत्र पर भी बहस तेज होगी। ऐसा क्यों हुआ लोकसभा अध्यक्ष के नोटिस पर सुदीप बंदोपाध्याय द्वारा अतिरिक्त मोहलत मांगे जाने और उनकी कथित राजनीतिक मुलाकातों ने इस विवाद को जन्म दिया। • सीधा कारण: लोकसभा स्पीकर द्वारा भेजे गए नोटिस का जवाब देने के लिए सुदीप बंदोपाध्याय ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर चार हफ्तों की अतिरिक्त अवधि मांगी, जिस पर महुआ मोइत्रा ने कड़ी आपत्ति जताई। • पृष्ठभूमि और संपर्क: पिछले कई महीनों से ऐसी चर्चाएं थीं कि बंदोपाध्याय विपक्षी नेतृत्व के संपर्क में थे, जिससे पार्टी के भीतर पहले से ही अविश्वास की स्थिति बनी हुई थी। • विरोधाभासी बयान: मोइत्रा के अनुसार, एक तरफ अस्पताल में भर्ती होने और पेट दर्द का दावा किया जा रहा था, जबकि दूसरी तरफ दिल्ली में महत्वपूर्ण नेताओं के साथ बैठकें और नाश्ते की बातें सामने आ रही थीं। • आगे की संभावना: इस सार्वजनिक टकराव के बाद तृणमूल कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व अनुशासनहीनता पर कदम उठा सकता है अथवा लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार करेगा। सवाल-जवाब 1. महुआ मोइत्रा ने सुदीप बंदोपाध्याय पर क्या आरोप लगाए हैं? महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि बंदोपाध्याय ने अस्पताल में भर्ती होने का दावा किया जबकि वह घूम रहे थे और प्रधानमंत्री से नाश्ते पर मुलाकात कर रहे थे। 2. सुदीप बंदोपाध्याय ने लोकसभा अध्यक्ष से क्या अनुरोध किया था? उन्होंने स्वास्थ्य कारणों और अन्य परिस्थितियों का हवाला देते हुए नोटिस का जवाब दाखिल करने के लिए चार अतिरिक्त हफ्तों का समय मांगा था। 3. महुआ मोइत्रा ने 1 सितंबर से 22 सितंबर की समयसीमा के बारे में क्या कहा? उन्होंने कहा कि जब एसीपीआई और एनडीए के साथ कथित विलय की बातचीत 22 सितंबर तक की थी, तो अब और समय मांगने का कोई मतलब नहीं है। 4. इस विवाद पर बीजेपी की क्या प्रतिक्रिया आई है? बीजेपी नेताओं ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस में नेता एक-दूसरे की पोल खोल रहे हैं और कई वरिष्ठ सांसद जल्द ही पाला बदल सकते हैं। https://trendkia.com/national/sudip-bandyopadhyay-para-barasin-mahua-moitra-lok-sabha-speaker-se-atirikta-samaya-mangane-para-khare-kie-tikhe-savala-37142 TrendKia — Har trend, sabse pehle.