# सुल्तानपुर के केएनआईटी में फखरुद्दीन अली अहमद ने लगाया था यह ऐतिहासिक बरगद, अब पूरे होने जा रहे हैं 50 साल

> सुल्तानपुर के कमला नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी परिसर में मौजूद बरगद का विशाल पेड़ इतिहास की गवाही दे रहा है। इसे साल 1976 में देश के तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने अपने हाथों से रोपा था।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-08-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/sulatanapura-ke-keenaaiti-men-fakhruddin-ali-ahmed-ne-lagaya-tha-yaha-aitihasika-baragada-aba-pure-hone-ja-rahe-hain-50-sala-20563 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुल्तानपुर, केएनआईटी, बरगद का पेड़, फखरुद्दीन अली अहमद, उत्तर प्रदेश इतिहास

सुल्तानपुर जिले में कई ऐसी ऐतिहासिक धरोहरें और पेड़ मौजूद हैं, जिनकी अपनी एक अलग मान्यता और आस्था जुड़ी हुई है, हालांकि कई बार उनके पुख्ता प्रमाण नहीं मिल पाते हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे खास वृक्ष के बारे में बता रहे हैं, जिसे किसी आम नागरिक ने नहीं बल्कि देश के सर्वोच्च पद पर बैठे राष्ट्रपति ने खुद लगाया था। यह वाकया साल 1976 का है, जब कमला नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (केएनआईटी) के उद्घाटन का खास अवसर था। उस दौर के केंद्रीय मंत्री बाबू केदारनाथ सिंह के बुलावे पर राष्ट्रपति सुल्तानपुर पहुंचे थे और उन्होंने ही इस पौधे को रोपा था। आज यह बरगद का पेड़ लगभग 50 साल का हो चुका है और इसका आकार बेहद विशाल हो गया है।

## राष्ट्रपति के हाथों से रोपा गया था यह बरगद
कमला नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में कार्यरत प्रोफेसर डॉ. सौरभ मणि त्रिपाठी बताते हैं कि सुल्तानपुर में कई ऐसे पुराने पेड़ और स्थल हैं जो सिर्फ पर्यावरण का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि अपने अंदर इतिहास का एक पूरा अध्याय समेटे हुए हैं। इन्हीं में से एक बरगद का यह पेड़ संस्थान के परिसर की शोभा बढ़ा रहा है, जिसे देश के तत्कालीन राष्ट्रपति ने अपने कर-कमलों से लगाया था।

इतिहास के पन्नों को पलटें तो 28 जुलाई 1976 का दिन सुल्तानपुर के लिए बेहद महत्वपूर्ण था। इसी तारीख को कमला नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के आधिकारिक उद्घाटन समारोह का आयोजन किया गया था। केंद्र सरकार में कद्दावर मंत्री और सुल्तानपुर के दिग्गज नेता बाबू केदारनाथ सिंह के विशेष आमंत्रण पर भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद यहां आए थे। उद्घाटन के इस भव्य कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद और बाबू केएन सिंह ने मिलकर परिसर में इस बरगद के पौधे को रोपा था। उस वक्त शायद ही किसी ने यह कल्पना की होगी कि यह छोटा सा पौधा आने वाले समय में शहर के इतिहास की एक जीवंत निशानी बन जाएगा।

## आज भी शान से खड़ा है यह ऐतिहासिक वृक्ष
वक्त बीतता गया और आज यह बरगद का पौधा एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है। यह उस दौर की याद दिलाता है जब देश के प्रथम नागरिक ने सुल्तानपुर की इस पावन धरती पर कदम रखा था। इस पेड़ की जड़ें केवल जमीन के भीतर नहीं फैली हैं, बल्कि वे इस शहर के अतीत और संस्कृति से भी गहराई से जुड़ी हुई हैं। भारतीय संस्कृति में बरगद के पेड़ को लंबी आयु, दृढ़ता और परंपरा का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में यह वृक्ष सुल्तानपुर के लिए सिर्फ एक साधारण पौधा नहीं रह गया है, बल्कि 28 जुलाई 1976 की उस ऐतिहासिक और गौरवशाली घटना की एक जीती-जागती याद बन चुका है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** यह ऐतिहासिक वृक्ष देश के संस्थानों और परिसरों में संरक्षित प्राकृतिक धरोहरों के महत्व को रेखांकित करता है।

**सुल्तानपुर में:** स्थानीय नागरिकों और छात्रों के लिए यह पेड़ शहर के गौरवशाली शैक्षणिक और राजनीतिक इतिहास की एक प्रत्यक्ष निशानी है।

## सवाल-जवाब

### 1. केएनआईटी परिसर में बरगद का पेड़ किसने लगाया था?
इस बरगद के पेड़ को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने 28 जुलाई 1976 को लगाया था।

### 2. यह बरगद का पेड़ अब कितने साल का हो चुका है?
आज यह बरगद का पेड़ लगभग 50 साल पुराना हो चुका है और इसका आकार काफी बड़ा हो गया है।

### 3. राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद सुल्तानपुर किस कार्यक्रम में आए थे?
वे कमला नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के उद्घाटन समारोह में शामिल होने के लिए सुल्तानपुर पहुंचे थे।

### 4. राष्ट्रपति को सुल्तानपुर किसने आमंत्रित किया था?
तत्कालीन केंद्रीय मंत्री और सुल्तानपुर के प्रमुख राजनेता बाबू केदारनाथ सिंह के आमंत्रण पर राष्ट्रपति वहां आए थे।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._