राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के सभी छह पद अनिवार्य करने के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र को भेजा नोटिस सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के सभी छह पद सरकारी कार्यक्रमों में अनिवार्य करने और 1971 के कानून में हुए संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र से 2 सप्ताह में जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कर्नाटक संगीतकार टी.एम. कृष्णा द्वारा दायर एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। इस याचिका में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 में वर्ष 2026 के दौरान किए गए कानूनी संशोधन की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। इस हालिया विधायी बदलाव के जरिए राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को भी विशेष कानूनी संरक्षण के दायरे में शामिल किया गया था। इसके साथ ही, गृह मंत्रालय द्वारा जारी उन प्रशासनिक निर्देशों को भी अदालत में चुनौती दी गई है, जिनके तहत आधिकारिक सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के सभी छह पदों को पूरा गाना अनिवार्य बना दिया गया है। सॉलिसिटर जनरल की दलीलें और नोटिस पर बहस अदालत में सुनवाई शुरू होते ही केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से आग्रह किया कि इस मामले में औपचारिक नोटिस जारी न किया जाए। उनका कहना था कि इस विषय पर कानूनी नोटिस जारी होने से अनावश्यक सनसनी फैलेगी और सार्वजनिक स्तर पर विवाद को बढ़ावा मिलेगा। सॉलिसिटर जनरल ने तर्क रखा कि किसी राष्ट्रीय प्रतीक के कितने पद गाए जाएं, चाहे वे दो पद हों या पूरे छह पद, इसका निर्णय चुनी हुई सरकार के अतिरिक्त आखिर कौन कर सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस प्रकार की नीतिगत व्यवस्था तय करने का अधिकार पूरी तरह सरकार के पास ही होना चाहिए। अदालत की टिप्पणी और जनहित पर चर्चा कार्यवाही के दौरान बेंच की ओर से जस्टिस बागची ने स्पष्ट किया कि इस बात में कोई दोराय या संदेह नहीं है कि वंदे मातरम हमारा राष्ट्रीय गीत है। वहीं दूसरी ओर, याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि इस तरह के व्यापक और संवेदनशील बदलाव लागू करने से पहले आम लोगों की राय ली जानी चाहिए थी। याचिकाकर्ता के इस तर्क पर जस्टिस बागची ने सहमति जताते हुए टिप्पणी की कि यह एक उचित और सही बात है। अदालत में उस समय तीखी बहस देखने को मिली जब याचिकाकर्ता के वकील ने सॉलिसिटर जनरल की दलीलों के दौरान इस्तेमाल किए गए एक खास शब्द पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। वकील ने कहा कि सुनवाई के दौरान नक्सलाइट शब्द का प्रयोग पूरी तरह अनुचित है। केंद्र सरकार को दो हफ्ते में देना होगा स्पष्टीकरण सरकारी आयोजनों में राष्ट्रीय गीत के सभी छह छंदों को अनिवार्य रूप से गाने के सरकारी आदेश के खिलाफ दायर इस याचिका की गंभीरता को देखते हुए शीर्ष अदालत ने सरकार से औपचारिक जवाब तलब कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को अपना विस्तृत पक्ष रखने के लिए दो सप्ताह का समय निर्धारित किया है। निर्धारित समयावधि के भीतर केंद्र को यह स्पष्ट करना होगा कि वर्ष 2026 के संशोधन और गृह मंत्रालय के नए निर्देशों के पीछे क्या कानूनी व संवैधानिक आधार हैं। इसका आप पर असर यह कानूनी प्रक्रिया सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के गायन और इससे जुड़े कानूनी दायित्वों पर सीधा असर डालेगी। • नागरिकों पर प्रभाव: सरकारी दिशा-निर्देशों की कानूनी समीक्षा से यह तय होगा कि राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े नियमों का पालन किस सीमा तक अनिवार्य किया जा सकता है। अदालत का अंतिम निर्णय यह स्पष्ट करेगा कि आम जनता और संस्थाओं पर यह नियम किस तरह लागू होंगे। • सरकारी आयोजनों में बदलाव: केंद्र सरकार के दो हफ्ते में जवाब दाखिल करने के बाद तय होगा कि छह पदों के गायन का नियम जारी रहेगा या उस पर रोक लगेगी। यदि सुप्रीम कोर्ट नियमों में बदलाव करता है, तो आधिकारिक प्रोटोकॉल में संशोधन करना पड़ेगा। • संवैधानिक अधिकार: इस मामले की सुनवाई से व्यक्तिगत अभिव्यक्ति और राष्ट्रीय सम्मान के कानूनों के बीच संतुलन साफ होगा। याचिकाकर्ता ने कानूनी संशोधन की वैधता को चुनौती दी है, जिस पर आगे विस्तृत बहस होगी। • कानूनी संरक्षण का दायरा: 1971 के अधिनियम में 2026 में हुए संशोधन के बने रहने या रद्द होने का असर अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों के संरक्षण पर भी पड़ सकता है। दो सप्ताह की समयसीमा खत्म होने के बाद अदालत इस पर अगली सुनवाई करेगी। ऐसा क्यों हुआ यह मामला केंद्र सरकार द्वारा 1971 के अधिनियम में किए गए संशोधन और गृह मंत्रालय के नए प्रशासनिक आदेशों के विरोध के कारण अदालत तक पहुंचा है। • सीधा कारण: कर्नाटक संगीतकार टी.एम. कृष्णा ने याचिका दायर कर 2026 के उस संशोधन को चुनौती दी, जिसमें वंदे मातरम को कानूनी सुरक्षा दी गई थी और सभी छह पद गाना अनिवार्य किया गया था। इस नए नियम के खिलाफ अदालत में संवैधानिक समीक्षा की मांग की गई है। • पृष्ठभूमि और परिस्थितियां: गृह मंत्रालय ने आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के सभी छह पदों के गायन को अनिवार्य बनाने के निर्देश जारी किए थे। याचिकाकर्ता का तर्क है कि ऐसे नियम बनाने से पूर्व जनसाधारण से विचार-विमर्श नहीं किया गया। • अदालती बहस: केंद्र के अनुसार प्रोटोकॉल तय करना सिर्फ सरकार का अधिकार है, जबकि पीठ ने जनपरामर्श की बात को उचित माना। सरकार के विरोध के बावजूद अदालत ने मामले की गंभीरता देखते हुए दो सप्ताह में जवाब मांग लिया है। सवाल-जवाब 1. सुप्रीम कोर्ट में वंदे मातरम को लेकर याचिका किसने दायर की है? यह याचिका कर्नाटक संगीतकार टी.एम. कृष्णा ने दायर की है। 2. याचिका में किस कानून के संशोधन को चुनौती दी गई है? इसमें राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 में वर्ष 2026 में किए गए संशोधन की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। 3. गृह मंत्रालय के किस आदेश पर सवाल उठाया गया है? सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के सभी छह पदों को गाना अनिवार्य करने के निर्देश को चुनौती दी गई है। 4. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में क्या दलील दी? उन्होंने नोटिस जारी न करने की मांग करते हुए कहा कि इससे सनसनी फैलेगी और गीत के पद तय करना सरकार का अधिकार है। 5. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जवाब देने के लिए कितना समय दिया है? शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। https://trendkia.com/national/supreme-court-ne-vande-mataram-ke-sabhi-chhaha-pada-anivarya-karane-ke-khilapha-yachika-para-centre-ko-bheja-notisa-36235 TrendKia — Har trend, sabse pehle.