# सुरक्षा बलों ने कुलगाम के मोहम्मद लतीफ भट पर घोषित किया 15 लाख का इनाम, दक्षिण कश्मीर में तलाश तेज

> जम्मू-कश्मीर पुलिस के रिकॉर्ड में 22 वर्षीय मोहम्मद लतीफ भट घाटी का एकमात्र सक्रिय स्थानीय आतंकी बताया गया है, जिसकी गिरफ्तारी पर 15 लाख रुपए का इनाम रखा गया है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-08-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/suraksha-balon-ne-kulgam-ke-mohammad-latif-bhat-para-ghoshita-kiya-15-lakha-ka-inama-south-kashmir-men-talasha-teja-16605 · **Language:** Hindi
**Tags:** मोहम्मद लतीफ भट, जम्मू कश्मीर पुलिस, दक्षिण कश्मीर, कुलगाम न्यूज़, आतंकवाद रोधी अभियान, लश्कर ए तैयबा

जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी तंत्र पर सुरक्षा एजेंसियां लगातार दबाव बना रही हैं, लेकिन दक्षिण कश्मीर से सामने आई एक खुफिया रिपोर्ट ने सुरक्षा रणनीतिकारों की चिंता बढ़ा दी है। जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा बनाए गए आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, कुलगाम जिले का 22 वर्षीय मोहम्मद लतीफ भट इस समय संपूर्ण कश्मीर घाटी में सक्रिय एकमात्र स्थानीय आतंकी बचा हुआ है। कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने उसकी गिरफ्तारी में मददगार सूचना देने वाले के लिए 15 लाख रुपए का नकद इनाम घोषित किया है, और दक्षिण कश्मीर से लेकर श्रीनगर तक सार्वजनिक स्थानों पर उसके वांटेड पोस्टर लगाए गए हैं। पुलिस का आरोप है कि पिछले महीने भट ने दो अलग-अलग हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया, जिनमें स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप के एक पुलिस अधिकारी की हत्या और दो गैर-स्थानीय मजदूरों पर हमला शामिल है। साधारण पढ़ाई और नौकरी की जिंदगी छोड़कर अचानक भूमिगत होने वाला यह युवक अब घाटी में सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी परिचालन चुनौती बन गया है।

## कुलगाम में शुरुआती जीवन, शिक्षा और रोजगार का पृष्ठभूमि
मोहम्मद लतीफ भट मूल रूप से दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के अंतर्गत आने वाले खरेवन चादर गांव का रहने वाला है। आतंकी नेटवर्क से जुड़ने से पहले भट का जीवन सामान्य स्थानीय युवाओं जैसा ही था। उसने अपनी शुरुआती और माध्यमिक शिक्षा अश्मुजी स्थित गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल से पूरी की। स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने उच्च शिक्षा के लिए कुलगाम के गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज में दाखिला लिया और स्नातक की पढ़ाई शुरू की। हालांकि, वह अपना डिग्री कोर्स पूरा नहीं कर सका और बीच में ही कॉलेज छोड़ दिया।

कॉलेज की पढ़ाई छोड़ने के बाद भट ने अपने जिले में ही ग्लेजियर के रूप में काम करना शुरू कर दिया, जहां वह कांच की फिटिंग और संबंधित काम देखता था। कुछ समय तक वह एक आम कामकाजी युवक की तरह अपनी आजीविका कमा रहा था। लेकिन वर्ष 2025 की शुरुआत में उसकी जीवनशैली में अचानक बदलाव आया। 2025 की शुरुआत में वह अचानक अपने खरेवन चादर स्थित घर से गायब हो गया और पूरी तरह भूमिगत होकर दक्षिण कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क का हिस्सा बन गया।

## जाकिर अहमद गनई से संपर्क और शोपियां मुठभेड़
पुलिस जांच और खुफिया फाइलों के अनुसार, भट को आतंकी गतिविधियों में शामिल करने में जाकिर अहमद गनई नामक व्यक्ति की मुख्य भूमिका थी। गनई को लश्कर-ए-तैयबा संगठन से जुड़ा हुआ माना जाता था और वह नए युवाओं की भर्ती में सक्रिय था। भट और गनई की गतिविधियों की पहली पुख्ता जानकारी 2 जुलाई की रात को सामने आई, जब दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में एक सर्विलांस सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में दोनों को एक साथ देखा गया।

सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जम्मू-कश्मीर पुलिस और भारतीय सेना ने शोपियां इलाके में एक संयुक्त तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई। इस ऑपरेशन में सुरक्षा बलों ने जाकिर अहमद गनई को मौके पर ही मार गिराया। हालांकि, मुठभेड़ के दौरान भट सुरक्षा बलों को चकमा देकर फरार होने में सफल रहा। 2 जुलाई की इस घटना के बाद से ही पुलिस और सेना की विशेष टीमें उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही हैं।

## अनंतनाग और किलम में हुए दो जानलेवा हमले
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, लतीफ भट ने पिछले महीने दक्षिण कश्मीर में दो अलग-अलग घातक हमलों को अंजाम दिया। पहला हमला 22 जुलाई को अनंतनाग शहर के एक व्यस्त और भीड़भाड़ वाले बाजार में हुआ। वहां भट ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) के हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन को निशाना बनाकर उनकी हत्या कर दी। दिनदहाड़े भीड़भाड़ वाले इलाके में एक पुलिस अधिकारी की हत्या से इलाके में हड़कंप मच गया था।

इस घटना के ठीक नौ दिन बाद, कुलगाम जिले के किलम गांव स्थित एक ईंट भट्ठे पर दूसरा हमला हुआ। वहां भट ने काम कर रहे गैर-स्थानीय मजदूरों पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं, जिसमें दो बाहरी मजदूरों की मौत हो गई। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले साल पहलगाम में हुए बड़े हमले के बाद दक्षिण कश्मीर में स्थानीय आतंकी द्वारा किए गए यह शुरुआती प्रमुख हमले हैं, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को अपनी सतर्कता और ज्यादा बढ़ाने पर मजबूर कर दिया है।

## KRA का गठन और लश्कर-ए-तैयबा के छद्म संगठनों की रणनीति
नवंबर 2025 में कश्मीर रिवोल्यूशनरी आर्मी (KRA) नामक एक नए संगठन ने सार्वजनिक घोषणा करते हुए लतीफ भट के अपने साथ जुड़ने का दावा किया था। हालांकि, भारतीय सुरक्षा एजेंसियां KRA को कोई नया स्वतंत्र संगठन नहीं मानतीं, बल्कि इसे आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का ही एक छद्म नाम या फ्रंट मानती हैं। अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचने और स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारी लेने के लिए ऐसे कई छद्म नाम सामने आए हैं।

घाटी में पिछले कुछ वर्षों के दौरान द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF), पीपुल अगेंस्ट फासिस्ट फोर्सेज (PAFF) और कश्मीर फाइटर्स जैसे कई नाम देखने को मिले हैं। सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि यह सभी संगठन वास्तव में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पुराने प्रतिबंधित आतंकी समूहों के लिए ही काम करते हैं। इनमें से TRF सबसे अधिक सक्रिय रहा, जिसने अक्टूबर 2019 में श्रीनगर के एक बाजार में ग्रेनेड हमले की पहली जिम्मेदारी ली थी। बाद में कई प्रमुख घटनाओं में नाम आने के बाद जनवरी 2023 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने TRF को UAPA कानून के तहत आतंकी संगठन घोषित कर दिया था।

## ओवरग्राउंड वर्कर्स का नेटवर्क और लॉजिस्टिक सपोर्ट की चुनौती
हालांकि पुलिस रिकॉर्ड में लतीफ भट को फिलहाल घाटी का एकमात्र सक्रिय स्थानीय आतंकी दर्ज किया गया है, लेकिन सुरक्षा अधिकारियों का स्पष्ट मानना है कि वह अकेला काम नहीं कर सकता। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, कोई भी आतंकी अकेले इतने हमलों को अंजाम नहीं दे सकता। उसे हथियार, गोला-बारूद, छिपने के सुरक्षित ठिकाने, भोजन और आवाजाही की जानकारी के लिए लॉजिस्टिक सहायता की आवश्यकता होती है। इससे संकेत मिलता है कि भट के पीछे ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGW) का एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा है।

इसलिए सुरक्षा एजेंसियों की मुख्य प्राथमिकता सिर्फ भट को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके पीछे छिपे मददगारों के इस ढांचे को ध्वस्त करना भी है। उसे हथियार कौन मुहैया करा रहा है, हमलों के लिए रेकी कौन कर रहा है और उसे आश्रय कहां मिल रहा है, यह जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक इस सहायक नेटवर्क को खत्म नहीं किया जाता, तब तक खतरे को पूरी तरह से नहीं टाला जा सकता।

## घाटी में विदेशी आतंकियों की मौजूदगी और व्यापक सुरक्षा परिदृश्य
जम्मू-कश्मीर में संपूर्ण सुरक्षा स्थिति का आकलन करते समय अधिकारियों ने केवल स्थानीय आतंकियों की संख्या पर निर्भर न रहने की सलाह दी है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, वर्तमान में आतंकी नेटवर्क पहले की तुलना में काफी गोपनीय और गुप्त तरीके से काम कर रहे हैं, जिससे तकनीकी और मानवीय खुफिया जानकारी जुटाना ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है।

इसके अतिरिक्त, खुफिया रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि घाटी में करीब 30 पाकिस्तानी नागरिक और लश्कर के प्रशिक्षित ऑपरेटिव्स सक्रिय हैं। यह विदेशी आतंकी मुख्य रूप से दक्षिण और उत्तर कश्मीर के घने पहाड़ी जंगलों में छिपे हुए हैं। इस प्रकार, सुरक्षा बलों के सामने दोहरी चुनौती है: एक तरफ एकमात्र बचे स्थानीय आतंकी लतीफ भट और उसके स्थानीय ओवरग्राउंड नेटवर्क का खात्मा करना, और दूसरी तरफ पहाड़ी जंगलों में छिपे विदेशी आतंकियों के खिलाफ सघन अभियान जारी रखना।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे गहन आतंकवाद विरोधी अभियानों से राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र मजबूत होता है और आतंकी नेटवर्क पर शिकंजा कसता है।
- **जम्मू-कश्मीर में:** दक्षिण कश्मीर और श्रीनगर में सुरक्षा बलों की कड़ी नाकेबंदी और सघन जांच अभियानों के कारण आम नागरिकों को यात्रा के दौरान अतिरिक्त समय और सतर्कता बरतनी पड़ सकती है।

## सवाल-जवाब

### 1. कौन है मोहम्मद लतीफ भट?
मोहम्मद लतीफ भट दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले का 22 वर्षीय निवासी है, जिसे पुलिस रिकॉर्ड में कश्मीर घाटी का एकमात्र सक्रिय स्थानीय आतंकी माना गया है।

### 2. सुरक्षा बलों ने मोहम्मद लतीफ भट पर कितना इनाम घोषित किया है?
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना के लिए 15 लाख रुपए के इनाम की घोषणा की है।

### 3. लतीफ भट पर हाल ही में किन हमलों का आरोप है?
उस पर 22 जुलाई को अनंतनाग में हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन की हत्या और नौ दिन बाद कुलगाम के किलम में दो गैर-स्थानीय मजदूरों की हत्या का आरोप है।

### 4. कश्मीर रिवोल्यूशनरी आर्मी (KRA) क्या है?
KRA एक संगठन है जिसने नवंबर 2025 में भट के शामिल होने की घोषणा की थी, जिसे सुरक्षा एजेंसियां लश्कर-ए-तैयबा का ही एक छद्म नाम मानती हैं।

### 5. घाटी में इस समय कितने विदेशी आतंकी छिपे होने का अनुमान है?
सुरक्षा एजेंसियों के आकलन के अनुसार घाटी के पहाड़ी जंगलों में करीब 30 पाकिस्तानी नागरिक और लश्कर के ऑपरेटिव्स छिपे हो सकते हैं।

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