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  "title": "स्वदेशी विमानों से लेकर गरीबी उन्मूलन तक, 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की राह पर देश: नरेंद्र मोदी",
  "summary": "विकसित भारत संकल्प सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में विश्व भारत में बने विमानों की चर्चा करेगा और 140 करोड़ नागरिक मिलकर 2047 तक विकसित देश का लक्ष्य हासिल करेंगे।",
  "content": "सार्वजनिक सेवा में पच्चीस वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक विशेष राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के भविष्य की विकास यात्रा को लेकर एक सशक्त दृष्टिकोण सामने रखा। सेवा ज्योति यात्रा के अंतर्गत आयोजित विकसित भारत संकल्प सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के समक्ष आने वाली हर मुश्किल का समाधान यहाँ की विशाल आबादी की सामूहिक शक्ति में निहित है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जिस प्रकार वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर भारतीय वैमानिकों और पायलटों की प्रतिभा की सराहना हो रही है, उसी प्रकार आने वाले दिनों में देश में निर्मित वाणिज्यिक विमानों का लोहा भी पूरी दुनिया मानेगी।\n\nदूरदर्शी नीतियों और विनिर्माण क्षमता से बदलेगा विमानन परिदृश्य\nविमानन क्षेत्र के विस्तार पर चर्चा करते हुए यह बात रेखांकित की गई कि दूरगामी आर्थिक नीतियों और निरंतर किए जा रहे श्रम के दम पर ही आत्मनिर्भरता के इन बड़े लक्ष्यों को प्राप्त किया जाएगा। राष्ट्र के सामने मौजूद विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भले ही राह में बाधाएँ हों, लेकिन हमारे पास उनसे निपटने के लिए 140 करोड़ समाधान भी मौजूद हैं। घरेलू स्तर पर विमानों के निर्माण का यह सपना देश के औद्योगिक सामर्थ्य और आधुनिक तकनीकी क्षमता को वैश्विक पटल पर स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।\n\nदार्शनिक परंपरा और ऐतिहासिक संकल्पों की विरासत\nदेश के वैचारिक और आध्यात्मिक आधार का स्मरण करते हुए स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरबिंदो के ऐतिहासिक विचारों को सामने रखा गया। स्वामी विवेकानंद के उस कथन को उद्धृत किया गया जिसमें उन्होंने एक अद्भुत, अत्यंत गौरवशाली और सामर्थ्यवान राष्ट्र के पुनरुत्थान की बात कही थी। इसके साथ ही महर्षि अरबिंदो के उस विचार का भी उल्लेख हुआ, जिसके अनुसार राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का सूर्य निश्चित रूप से उदित होगा और उसका प्रकाश संपूर्ण विश्व को आलोकित करेगा। इस संदर्भ में यह बात जोड़ी गई कि वर्तमान पीढ़ी उन्हीं पूर्वजों की संतान है जिन्होंने अदम्य साहस और कभी न समाप्त होने वाली जिजीविषा के साथ कठिन तप, त्याग और बलिदान देकर इस आधुनिक स्वरूप की नींव रखी थी।\n\nवैश्विक शीर्ष अर्थव्यवस्था और व्यापक विकास के महत्वाकांक्षी लक्ष्य\nवर्तमान समय को बड़े और असाधारण लक्ष्य तय करने की उपयुक्त अवधि बताते हुए इस बात पर जोर दिया गया कि अब राष्ट्र को हर क्षेत्र में नेतृत्वकारी भूमिका निभानी होगी। इन प्राथमिकताओं में देश को विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित करना, प्रत्येक नागरिक को सशक्त बनाकर निर्धनता से पूरी तरह मुक्त करना और अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगे का मान बढ़ाना शामिल है। चाहे शिक्षा का क्षेत्र हो, मनोरंजन और सिनेमा हो, स्वास्थ्य एवं कल्याण हो, खेलकूद की दुनिया हो अथवा नवाचार और आधुनिक तकनीक का दायरा हो, लक्ष्य ऐसा होना चाहिए कि दुनिया हर मोर्चे पर भारत की ओर उम्मीद से देखे।\n\nएक दशक में पच्चीस करोड़ लोगों का गरीबी से बाहर आना\nसामाजिक कल्याण और आर्थिक सुधारों की सफलता को दर्शाते हुए गरीबी उन्मूलन के आधिकारिक आँकड़ों को साझा किया गया। किसी समय जो कार्य सर्वथा असंभव जान पड़ता था, वह अब जमीनी हकीकत बन चुका है। पिछले एक दशक की अवधि में पच्चीस करोड़ नागरिकों को गरीबी रेखा के दायरे से सफलतापूर्वक बाहर निकाला गया है। इस उपलब्धि को 140 करोड़ नागरिकों की असीम क्षमता का प्रमाण बताते हुए कहा गया कि ढाई दशक के प्रशासनिक और सार्वजनिक अनुभव के आधार पर यह स्पष्ट दिखता है कि देश अपनी आँखों के सामने एक ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है।\n\n2047 के अमृत काल का संकल्प और सेवा ज्योति यात्रा\nसौ वर्ष पहले की जनसांख्यिकी से तुलना करते हुए बताया गया कि उस दौर में देश की जनसंख्या 40 करोड़ से भी कम थी, जबकि आज 140 करोड़ से अधिक लोग एकजुट होकर आगे बढ़ रहे हैं। वर्ष 2026 में देखा जा रहा यह सपना 2047 तक पूर्ण रूप से साकार होकर रहेगा और देश को रुकने का कोई कारण नहीं है। इस सभा का मूल उद्देश्य केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ सभी पात्र लाभार्थियों तक सुनिश्चित करना और आम जनमानस को 2047 तक एक पूर्ण विकसित राष्ट्र के निर्माण के संकल्प से सक्रिय रूप से जोड़ना है।\n\nइसका आप पर असर\nयह संबोधन राष्ट्रीय विनिर्माण प्राथमिकताओं और दीर्घकालिक आर्थिक लक्ष्यों की दिशा तय करता है।\n\n• कल्याणकारी योजनाओं तक पहुँच: सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक शत-प्रतिशत पहुँचाने के लिए अभियान तेज किया जा रहा है। आम नागरिक स्थानीय शिविरों और प्रशासनिक कार्यक्रमों के माध्यम से विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के लिए अपना पंजीकरण करा सकते हैं।\n• घरेलू विनिर्माण और रोजगार: विमानन और उच्च तकनीक विनिर्माण पर जोर देने से इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्रों में नए अवसर सृजित होंगे। युवाओं और कुशल श्रमिकों के लिए एयरोस्पेस व सहायक उद्योगों में दीर्घकालिक रोजगार के रास्ते खुलेंगे।\n• आर्थिक विकास का दायरा: देश को शीर्ष तीन वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में लाने के लक्ष्य से कारोबारी नियमों और बुनियादी ढाँचे में सुधार को गति मिलेगी। इससे छोटे कारोबारियों और उद्यमों को व्यापार के अनुकूल माहौल और वित्तीय सहयोग प्राप्त होगा।\n• गरीबी उन्मूलन का प्रभाव: पिछले दशक में पच्चीस करोड़ लोगों के गरीबी से बाहर आने के बाद अब अंतिम छोर तक सामाजिक सुरक्षा का विस्तार किया जा रहा है। निम्न आय वर्ग के परिवारों को स्वास्थ्य, पोषण और बुनियादी सुविधाओं का निरंतर लाभ सुनिश्चित किया जाएगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह कार्यक्रम सार्वजनिक जीवन में प्रधानमंत्री के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 'सेवा ज्योति यात्रा' के अंतर्गत आयोजित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य वर्ष 2047 तक देश को पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने की रूपरेखा प्रस्तुत करना और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करना था।\n\n• सार्वजनिक सेवा का रजत जयंती वर्ष: यह सम्मेलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक सेवा में 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। इस अवसर पर पिछले ढाई दशक के प्रशासनिक अनुभवों और विकास मॉडलों के परिणामों को साझा किया गया।\n• 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य: स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र की श्रेणी में लाने का संकल्प जन-जन तक पहुँचाना इस सभा का प्राथमिक उद्देश्य था। सरकार विभिन्न सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों के लिए चरणबद्ध रोडमैप तैयार कर रही है।\n• कल्याणकारी योजनाओं की पूर्णता: केंद्रीय योजनाओं के लाभ से कोई भी पात्र व्यक्ति वंचित न रहे, इसे सुनिश्चित करने के लिए 'सेवा ज्योति यात्रा' का आयोजन किया गया। इसके तहत राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर योजनाओं की पहुँच की समीक्षा की जा रही है।\n• आत्मनिर्भर विनिर्माण पर बल: भारत के तेजी से बढ़ते विमानन बाजार में घरेलू विनिर्माण की आवश्यकता को रेखांकित करने के लिए 'मेड इन इंडिया' विमान का विजन प्रस्तुत किया गया। देश में पायलटों की मजबूत मौजूदगी के बाद अब विमान उत्पादन क्षमता विकसित करना अगला बड़ा कदम है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विमानन क्षेत्र को लेकर क्या बात कही?\nउन्होंने कहा कि वर्तमान में विश्व भारतीय पायलटों की प्रतिभा की सराहना कर रहा है, लेकिन आने वाले समय में दुनिया 'मेड इन इंडिया' विमानों की भी चर्चा करेगी।\n\n2. देश को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य किस वर्ष तक तय किया गया है?\nवर्ष 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।\n\n3. पिछले एक दशक में कितने लोग गरीबी से बाहर निकले हैं?\nआधिकारिक वक्तव्य के अनुसार, पिछले दस वर्षों के दौरान पच्चीस करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं।\n\n4. संबोधन में किन महापुरुषों के विचारों का उल्लेख किया गया?\nप्रधानमंत्री ने स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरबिंदो के गौरवशाली भारत संबंधी विचारों का उल्लेख किया।\n\n5. 'विकसित भारत संकल्प सभा' किस उपलक्ष्य में आयोजित की गई थी?\nयह सभा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक सेवा में 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 'सेवा ज्योति यात्रा' के अंतर्गत आयोजित की गई थी।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-10-07",
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