# तलाक मामले में 30 करोड़ के गुजारे भत्ते की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में हंसी, जस्टिस एससी शर्मा बोले लाखों वाली सैलरी में ज्यादा बड़े अंकों पर चकरा जाता है सिर

> सुप्रीम कोर्ट में वैवाहिक विवाद की सुनवाई के दौरान 30 करोड़ रुपये के भरण-पोषण की मांग पर जस्टिस एससी शर्मा ने मजाकिया लहजे में टिप्पणी की कि लाखों कमाने वाले जजों का दिमाग पांच अंकों से आगे काम नहीं करता।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/talaka-mamale-men-30-karora-ke-gujare-bhatte-ki-manga-para-supreme-court-men-hnsi-justice-sc-sharma-bole-lakhon-vali-sailari-men-j-41283 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुप्रीम कोर्ट, जस्टिस एससी शर्मा, गुजारा भत्ता, तलाक मामला, कोर्टरूम बहस, भरण पोषण

देश की शीर्ष अदालत में एक वैवाहिक विवाद की सुनवाई के दौरान उस वक्त बेहद रोचक और खुशनुमा माहौल बन गया जब गुजारे भत्ते की भारी-भरकम राशि पर दिलचस्प चर्चा छिड़ गई। तारीख 1 अक्टूबर की थी, जब सुप्रीम कोर्ट में तलाक और भरण-पोषण से जुड़े एक मुकदमे की कार्यवाही चल रही थी। पत्नी के वकील ने अदालत के सामने वित्तीय मांगों का विवरण पेश करते हुए जब गुजारे भत्ते के आंकड़े रखे, तो रकम को लेकर शुरू में बेंच और वकील के बीच थोड़ी असमंजस की स्थिति बन गई। जब यह साफ हुआ कि मामला लाखों का नहीं बल्कि करोड़ों का है, तब बेंच पर मौजूद न्यायाधीश की त्वरित हाजिरजवाबी ने पूरे कोर्टरूम को मुस्कराने पर मजबूर कर दिया।

## लाखों से करोड़ों तक पहुंचा भ्रम
मुकदमे की कार्यवाही के दौरान जस्टिस एससी शर्मा ने पत्नी की ओर से पैरवी कर रहे वकील से वित्तीय दावों का ब्योरा समझने के लिए सवाल किया। न्यायाधीश ने यह स्पष्ट करना चाहा कि क्या पत्नी के लिए 45 की रकम मांगी जा रही है और क्या बच्चे के भविष्य के लिए किसी ट्रस्ट में 30 लाख रुपये जमा करने की मांग रखी गई है। इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए वकील ने अदालत को अवगत कराया कि यह आंकड़ा 30 लाख रुपये का नहीं है, बल्कि बच्चे के ट्रस्ट के लिए 30 करोड़ रुपये की मांग की जा रही है।

लाखों की जगह सीधे 30 करोड़ रुपये का आंकड़ा सामने आते ही कोर्टरूम में मौजूद सभी लोगों का ध्यान इस विशाल धनराशि की ओर खिंच गया। इतनी बड़ी वित्तीय मांग सुनकर जस्टिस एससी शर्मा ने बेहद सहज और मजाकिया लहजे में अपनी बात रखी।

## वेतन और अंकों के फेर पर जज की चुटकी
मांग की गई विशाल राशि की हकीकत सामने आने के बाद जस्टिस एससी शर्मा ने अपनी बात रखते हुए कहा कि न्यायाधीशों को वेतन लाखों में मिलता है, इसलिए पांच अंकों के आगे दिमाग काम नहीं करता। अपनी इस मजेदार बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने यह भी साझा किया कि कभी-कभी उन्हें भी मिलियन और बिलियन की गणना में भ्रम हो जाता है। न्यायाधीश की इस बेबाक और हल्की-फुल्की टिप्पणी ने गंभीर कानूनी बहस के बीच तनाव को पूरी तरह दूर कर दिया। कोर्टरूम में मौजूद साथी वकीलों और कानूनविदों के बीच यह त्वरित टिप्पणी काफी देर तक चर्चा का विषय बनी रही।

## फैसला सुरक्षित और कार्यवाही का समापन
यह पूरा कानूनी विवाद पति और पत्नी के बीच चल रहे वैवाहिक अलगाव और उससे जुड़ी भारी वित्तीय देनदारियों से संबंधित है। पत्नी के पक्ष ने अपनी आर्थिक आवश्यकताओं और बच्चे की परवरिश के संदर्भ में अपनी मांगें अदालत के समक्ष मजबूती से रखीं। दोनों पक्षों की ओर से पेश वकीलों ने अपने-अपने मुवक्किलों के अधिकारों को लेकर विस्तृत दलीलें पेश कीं।

दोनों पक्षों की लंबी कानूनी तकरार और आर्थिक दावों को विस्तार से सुनने के पश्चात सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। अदालत ने तत्काल फैसला सुनाने के स्थान पर विस्तृत आदेश बाद में जारी करने का निर्णय लिया। दिलचस्प वाकया यहीं समाप्त नहीं हुआ। जब इस मामले की सुनवाई पूरी हुई, तो जस्टिस एससी शर्मा बेंच से उठकर जाने लगे। उसी क्षण कोर्ट मास्टर ने उन्हें विनम्रतापूर्वक याद दिलाया कि कार्यसूची के अनुसार उस दिन सुनवाई के लिए अभी कुछ अन्य मुकदमे भी सूचीबद्ध हैं। इस पर जस्टिस शर्मा ने मुस्कुराते हुए अपने सहज अंदाज में कहा कि अच्छा, मामले अभी बाकी हैं, सॉरी। इसके बाद पीठ ने शेष मुकदमों की सुनवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।

## इसका आप पर असर
वैवाहिक विवादों में भरण-पोषण और गुजारे भत्ते के मामलों में वित्तीय दावों की सीमा को लेकर यह अदालती चर्चा आम नागरिकों और पक्षकारों के लिए महत्वपूर्ण संकेत देती है।

- **कानूनी दावों की सीमा:** उच्च आर्थिक पृष्ठभूमि वाले मामलों में अदालतों के समक्ष बच्चे के ट्रस्ट और गुजारे भत्ते के लिए करोड़ों रुपये तक की मांगें रखी जा रही हैं। यह दर्शाता है कि न्यायालय पारिवारिक विवादों में जीवन स्तर और आर्थिक हैसियत के आधार पर ही दावों का विश्लेषण करते हैं।
- **अदालती प्रक्रिया की पारदर्शिता:** पीठ के न्यायाधीश स्पष्ट रूप से वित्तीय आंकड़ों और उनकी व्यवहार्यता का परीक्षण करते हैं। पक्षकारों को अपनी याचिकाओं में राशियों का सटीक ब्योरा बिना किसी भ्रम के प्रस्तुत करना आवश्यक होता है।
- **आदेश सुरक्षित होने का अर्थ:** शीर्ष अदालत द्वारा फैसला सुरक्षित रखने से दोनों पक्षों को लिखित व मौखिक तर्कों के आधार पर न्यायसंगत निर्णय की प्रतीक्षा करनी होगी। अंतिम फैसला यह तय करेगा कि बच्चों के ट्रस्ट और भरण-पोषण के ऐसे दावों पर क्या कानूनी मानक लागू होते हैं।
- **अदालती माहौल में सहजता:** न्यायिक कार्यवाही के दौरान जजों की ऐसी सहज टिप्पणियां दर्शाती हैं कि भारी विवादों के बीच भी कानूनी तर्कों को संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण से परखा जाता है। इससे वादकारियों में अदालत के प्रति मानवीय विश्वास मजबूत होता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटना सुप्रीम कोर्ट में एक वैवाहिक विवाद की सुनवाई के दौरान अंकों के उच्चारण और भारी वित्तीय मांग को लेकर उत्पन्न भ्रम के कारण सामने आई।

- **दावे की विशाल राशि:** गुजारे भत्ते और बच्चे के ट्रस्ट के लिए पत्नी की ओर से 30 करोड़ रुपये की असाधारण राशि की मांग रखी गई थी। इतनी बड़ी रकम सामान्य कानूनी मामलों में कम ही देखने को मिलती है, जिसने पीठ का ध्यान खींचा।
- **संख्याओं को लेकर असमंजस:** न्यायाधीश ने वकील द्वारा प्रस्तुत आंकड़े को पहले 30 लाख रुपये समझा था, जिसे वकील ने स्पष्ट करते हुए 30 करोड़ रुपये बताया। इसी भारी अंतर के कारण संख्याओं और सैलरी को लेकर न्यायाधीश की ओर से यह विनोदी टिप्पणी आई।
- **कार्यसूची का क्रम:** सुनवाई समाप्त होने के बाद न्यायाधीश का उठना और कोर्ट मास्टर द्वारा अन्य मुकदमों की याद दिलाना दैनिक अदालती कार्यसूची की व्यस्तता और त्वरित न्यायिक दिनचर्या के चलते हुआ।

## सवाल-जवाब

### 1. सुप्रीम कोर्ट में यह मामला किस विषय पर था?
यह मामला पति-पत्नी के बीच चल रहे वैवाहिक विवाद और तलाक में गुजारे भत्ते तथा वित्तीय दावों से संबंधित था।

### 2. जस्टिस एससी शर्मा ने पांच अंकों को लेकर क्या टिप्पणी की?
उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि जजों को लाखों में वेतन मिलता है, इसलिए पांच अंकों से आगे दिमाग काम नहीं करता और वे कभी-कभी मिलियन-बिलियन में कन्फ्यूज हो जाते हैं।

### 3. पत्नी के वकील ने बच्चे के ट्रस्ट के लिए कितनी राशि मांगी थी?
वकील ने स्पष्ट किया कि बच्चे के लिए 30 लाख रुपये नहीं बल्कि 30 करोड़ रुपये की मांग की जा रही है।

### 4. यह घटना किस तारीख को सुप्रीम कोर्ट में हुई?
यह घटना सुप्रीम कोर्ट में 1 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान हुई।

### 5. सुनवाई के अंत में अदालत ने क्या फैसला लिया?
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।

### 6. सुनवाई के बाद कोर्ट मास्टर ने जस्टिस शर्मा को क्या याद दिलाया?
कोर्ट मास्टर ने याद दिलाया कि उस दिन की सूची में सुनवाई के लिए अभी कुछ और मामले बाकी हैं।

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