तमिलनाडु के जंगलों में बाघ के हमले से दहशत, जानिए कब किसी वन्यजीव को घोषित किया जाता है आदमखोर तमिलनाडु के नीलगिरी में दो लोगों की मौत के बाद एक बाघ को आदमखोर घोषित किया गया है। जानिए क्या हैं वन्यजीवों को खतरनाक मानने और उन्हें पकड़ने से जुड़े कानूनी नियम। हाल ही में तमिलनाडु के नीलगिरी के जंगलों में एक बाघ द्वारा दो लोगों को अपना शिकार बनाए जाने की घटना सामने आई है। इन दोनों हमलों में पीड़ितों की मौत हो गई और वन विभाग को इस बात के पुख्ता सबूत मिले कि बाघ ने उनके शरीर के कुछ हिस्सों को खाया भी था। इन साक्ष्यों के आधार पर ही वन विभाग ने उस बाघ को आदमखोर करार दिया है। इस सिलसिले में 21 अगस्त को मारे गए शख्स का नाम के. रविकुमार था, जिनका शव उनके घर से महज 200 मीटर की दूरी पर बरामद हुआ था। इससे पहले 9 अगस्त को एम. बालाकृष्णन नाम के एक अन्य व्यक्ति का शव भी आधा खाया हुआ मिला था। कैसे तय होता है आदमखोर होने का पैमाना गुडलूर के जिला वन अधिकारी पी. देवराज के अनुसार, शवों पर मिले चोट के निशान और शरीर के अंगों को खाए जाने के साक्ष्यों के आधार पर इसे आदमखोर माना गया। दोनों घटनास्थल से जो पगमार्क या पंजों के निशान मिले, वे बिल्कुल एक जैसे थे, जिससे यह साबित हुआ कि दोनों वारदातों को अंजाम देने वाला जानवर एक ही है। सिर्फ बाघ ही नहीं, बल्कि इससे पहले उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी और बहराइच में भी भेड़ियों को आदमखोर घोषित किया जा चुका है, जिनके हमलों में कई लोगों की जान गई थी और कई अन्य घायल हुए थे। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर किसी जानवर को आदमखोर घोषित करने के नियम और कानून क्या हैं और क्या सिर्फ एक बार इंसान पर हमला करने से ही उसे यह तमगा मिल जाता है। कानूनी प्रक्रिया और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम भारत में किसी बाघ या अन्य वन्यजीव को आदमखोर घोषित करने के लिए बेहद सख्त कानूनी प्रावधान तय किए गए हैं। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी NTCA के मानक संचालन यानी SOP और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 11 के मुताबिक, केवल एक बार इंसानों पर हमला कर देने भर से किसी बाघ को आदमखोर नहीं माना जा सकता है। इस बात को साबित करने के लिए ठोस वैज्ञानिक सबूतों का होना और मुख्य वन्यजीव वार्डन की औपचारिक अनुमति मिलना अनिवार्य होता है। इस अधिनियम की धारा 11 के तहत किसी खतरनाक जानवर को मारने की इजाजत तभी दी जाती है, जब उसे जिंदा पकड़ने की तमाम कोशिशें पूरी तरह विफल हो चुकी हों, और इस पूरी प्रक्रिया में भी जानवर को कम से कम तकलीफ पहुंचाने पर जोर दिया जाता है। आम बोलचाल और कानूनी परिभाषा में अंतर यदि इसे बेहद आसान भाषा में समझें तो केवल एक या दो बार इंसान पर हमला करने या उसे खाने भर से किसी वन्यजीव को आदमखोर की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है। जब कोई वन्यजीव लगातार और बार-बार इंसानी बस्तियों के पास घात लगाकर इंसानों का शिकार करता है और उन्हें अपना आहार बनाता है, तब जाकर ऐसी विशेष परिस्थितियों में उसे आदमखोर कहा जा सकता है। साल 2019 में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी NTCA ने ‘आदमखोर’ शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगाते हुए उसकी जगह ‘इंसानी ज़िंदगी के लिए ख़तरनाक’ शब्दावली का प्रयोग करना शुरू किया, ताकि समाज में अनावश्यक सनसनी और डर न फैले। इन संशोधित दिशानिर्देशों के तहत किसी भी बड़ी बिल्ली प्रजाति यानी टाइगर या तेंदुए को खतरनाक घोषित करने के लिए कैमरा-ट्रैप से मिले सबूत, डीएनए विश्लेषण और एक विशेष समिति की मंजूरी की जरूरत होती है, जिसमें गैर-सरकारी संगठनों यानी NGO के प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं। किसी भी जानलेवा कदम को उठाने से पहले यह प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है, जहां जानवर को सुरक्षित पकड़ने का प्रयास सबसे पहले किया जाता है और मारना हमेशा आखिरी विकल्प होता है, भले ही कई लोगों की जान जा चुकी हो। जानवरों के अधिकारों पर अदालत का रुख साल 2023 में सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया गया था कि जानवरों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत इंसानों की तरह मौलिक अधिकार प्राप्त नहीं हैं। हालांकि, अदालत ने यह भी माना कि जानवरों का कल्याण और संरक्षण एक पूरी तरह जायज संवैधानिक और कानूनी मुद्दा है, लेकिन वन्यजीव संरक्षण अधिनियम यानी WLPA इंसानों के मुकाबले जानवरों के संरक्षण और सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता देता है। इसका आप पर असर यह खबर मुख्य रूप से वन्यजीव बाहुल्य क्षेत्रों और जंगलों के पास रहने वाले ग्रामीणों और किसानों से जुड़ी है। • भारत में: देश भर के वन क्षेत्रों के पास रहने वाले लोगों को वन्यजीवों की गतिविधियों को लेकर सतर्क रहने की आवश्यकता है। • तमिलनाडु में: नीलगिरी और आसपास के इलाकों में स्थानीय प्रशासन और वन विभाग द्वारा जारी सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी हो गया है। सवाल-जवाब 1. किसी बाघ को आदमखोर कब घोषित किया जाता है? वैज्ञानिक सबूतों, पगमार्क के मिलान और मुख्य वन्यजीव वार्डन की अनुमति के बाद ही किसी बाघ को आदमखोर घोषित किया जाता है। 2. क्या सिर्फ एक बार हमला करने से जानवर आदमखोर बनता है? नहीं, केवल एक बार हमला करने से किसी वन्यजीव को आदमखोर नहीं माना जाता है। 3. WLPA की किस धारा के तहत खतरनाक जानवरों को पकड़ने के नियम हैं? वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 11 के तहत खतरनाक जानवरों से निपटने के कानूनी प्रावधान किए गए हैं। 4. NTCA ने आदमखोर शब्द की जगह क्या इस्तेमाल करना शुरू किया? साल 2019 में NTCA ने आदमखोर की जगह इंसानी ज़िंदगी के लिए खतरनाक शब्द का इस्तेमाल शुरू किया। https://trendkia.com/national/tamil-nadu-ke-jngalon-men-bagha-ke-hamale-se-dahashata-janie-kaba-kisi-vanyajiva-ko-ghoshita-kiya-jata-hai-adamakhora-20702 TrendKia — Har trend, sabse pehle.