तानाशाही से युवाओं को नहीं डराया जा सकता, संजय राउत का सत्ता पर बड़ा हमला शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने विरोध प्रदर्शनों पर सरकारी सख्ती की कड़ी आलोचना की है। साथ ही उन्होंने 35,000 फीट की ऊंचाई पर साहस दिखाने वाले कैप्टन स्मित मच्छर की भी सराहना की। शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने मुंबई में संवाददाताओं से चर्चा करते हुए सत्ता पक्ष पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विरोध प्रदर्शनों की आवाज को लाठी, गोली या पुलिसिया बल प्रयोग से कतई दबाया नहीं जा सकता। युवाओं के संघर्ष और जज्बे का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि जनता अब तानाशाही के सामने झुकने वाली नहीं है, चाहे प्रशासन कितना भी दमनकारी रुख अपना ले। विरोध प्रदर्शनों पर सख्ती और नेतृत्व परिवर्तन का दावा संजय राउत ने दिल्ली के जंतर मंतर और मुंबई में हाल के घटनाक्रमों की ओर इशारा करते हुए कहा कि भारी सख्ती और तानाशाही वाले माहौल के बावजूद युवा पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। आंदोलनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई का डटकर मुकाबला किया, गिरफ्तारियां दीं और जेल जाने से भी गुरेज नहीं किया। उन्होंने सरकार के रवैये की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि अतीत में गोलियां और पैलेट गन चलाने के बावजूद जनता के हौसलों को रोका नहीं जा सका है। इसी कड़ी में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए संजय राउत ने कहा, “चाहे लाठी हो, गोली हो या बंदूक, आप हमें रोक नहीं सकते।” उन्होंने सत्ता परिवर्तन की बात कहते हुए जोर दिया कि अब प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को अपने पदों से हटना होगा। उनका दावा है कि आने वाले जनवरी और फरवरी के महीनों में देश के राजनीतिक परिदृश्य में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। शिवाजी पार्क में चुनाव आयोग के खिलाफ हुआ था प्रदर्शन इस पूरे सियासी घमासान की पृष्ठभूमि मुंबई के शिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर को आयोजित प्रदर्शन से जुड़ी है। वहां कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध जताया था। आंदोलनकारियों का मुख्य मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगना था। इसके साथ ही प्रदर्शनकारी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया और चुनावी निष्पक्षता एवं पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे थे। मुंबई पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था, यातायात की समस्या और शिवाजी पार्क के साइलेंस जोन होने का हवाला देते हुए इस प्रदर्शन की आधिकारिक इजाजत नहीं दी थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में समर्थक मैदान में जमा हुए और अपना विरोध दर्ज कराया। इसी घटनाक्रम पर पुलिस की कार्रवाई और प्रशासनिक पाबंदियों को लेकर संजय राउत ने सरकार पर तानाशाही थोपने का सीधा आरोप लगाया है। हवा में अदम्य साहस दिखाने वाले कैप्टन की तारीफ राजनीतिक बयानबाजी के बीच संजय राउत ने कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि जमीन से तकरीबन 35,000 फीट ऊपर हवा में इतना बड़ा निर्णय लेना और आतंकवादी से मुकाबला करना बेहद असाधारण कार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कैप्टन ने एक सच्चे बहादुर इंसान का फर्ज निभाया है और उनका यह पराक्रम किसी खास राज्य की सीमा में नहीं बंधा है, बल्कि वे एक गौरवान्वित भारतीय हैं। संजय राउत के अनुसार, कैप्टन का यह अदम्य साहस पूरे देश के लिए सम्मान और गर्व का विषय है। इसका आप पर असर यह राजनीतिक बयानबाजी नागरिकों के लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार और सार्वजनिक सभाओं की प्रशासनिक अनुमतियों से जुड़े नियमों को रेखांकित करती है। • भारत में: चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची संशोधन की पारदर्शिता को लेकर उठते सवाल देश भर के मतदाताओं की जागरूकता को प्रभावित करते हैं। नागरिक अपने मतदाता पहचान पत्र और सूची में दर्ज विवरणों की पुष्टि के लिए अधिक सतर्क हो सकते हैं। • मुंबई में: शिवाजी पार्क जैसे प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर सभाओं और साइलेंस जोन के कड़े नियमों से शहर में भविष्य के प्रदर्शनों पर असर पड़ेगा। दादर और आसपास के इलाकों में रहने वाले नागरिकों को ऐसे आयोजनों के दौरान ट्रैफिक जाम और सुरक्षा पाबंदियों का सामना करना पड़ सकता है। • आंदोलनकारियों के लिए: बिना अनुमति प्रदर्शन करने पर कानूनी कार्रवाई और हिरासत के जोखिम बने रहते हैं। राजनीतिक संगठनों और कार्यकर्ताओं को सार्वजनिक विरोध दर्ज करने से पहले स्थानीय पुलिस की अनुमतियों का विशेष ध्यान रखना होगा। • नागरिक सुरक्षा पर: आतंकवाद के खिलाफ कैप्टन के साहस की सराहना विमान यात्रियों के बीच सुरक्षा प्रोटोकॉल और त्वरित सूझबूझ के महत्व को पुख्ता करती है। यह घटना दर्शाती है कि आपात स्थितियों में जिम्मेदारी और तत्परता कितनी आवश्यक होती है। ऐसा क्यों हुआ यह राजनीतिक विवाद मुंबई में बिना अनुमति हुए एक विरोध प्रदर्शन पर पुलिस की सख्ती और उसके बाद नेताओं के बीच शुरू हुई तीखी बयानबाजी के कारण खड़ा हुआ। • प्रदर्शन की अनुमति न मिलना: मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क के साइलेंस जोन होने, यातायात में बाधा पड़ने और सुरक्षा चिंताओं के आधार पर सीजेपी के धरने को मंजूरी देने से मना कर दिया था। इसके बावजूद भारी संख्या में समर्थकों के जुटने से पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव पैदा हुआ। • चुनाव आयोग पर सवाल: कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची पुनरीक्षण में पारदर्शिता की मांग उठाई थी। इसी असंतोष के चलते 2 अक्टूबर को विरोध का आह्वान किया गया था। • संजय राउत का तीखा हमला: हिरासत और पुलिस कार्रवाई के विरोध में संजय राउत ने केंद्र सरकार और प्रशासन पर तानाशाही का आरोप लगाया। उन्होंने युवाओं के दमन का दावा करते हुए इसे राजनीतिक सत्ता परिवर्तन से जोड़कर देखा। सवाल-जवाब 1. संजय राउत ने सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं? उन्होंने सरकार पर तानाशाही चलाने और युवाओं के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को लाठी व बल प्रयोग से दबाने का आरोप लगाया है। 2. मुंबई के शिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर को किसका विरोध प्रदर्शन हुआ था? वहां कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके की अगुवाई में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हुआ था। 3. पुलिस ने शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं दी थी? मुंबई पुलिस ने सुरक्षा कारणों, ट्रैफिक की समस्या और शिवाजी पार्क के साइलेंस जोन होने की वजह से अनुमति देने से मना किया था। 4. संजय राउत ने कैप्टन स्मित मच्छर के बारे में क्या कहा? उन्होंने 35,000 फीट की ऊंचाई पर आतंकवादी का सामना करने के लिए कैप्टन की बहादुरी की तारीफ की और इसे पूरे देश के लिए गर्व की बात बताया। https://trendkia.com/national/tanashahi-se-yuvaon-ko-nahin-daraya-ja-sakata-sanjay-raut-ka-satta-para-bara-hamala-42377 TrendKia — Har trend, sabse pehle.