तरुण तेजपाल मामले में बेटी कारा तेजपाल का बड़ा दावा, पिता को बताया बेकसूर और राजनीतिक साजिश का शिकार बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ द्वारा 10 साल की सजा सुनाए जाने के बाद तरुण तेजपाल की बेटी कारा तेजपाल ने उनके बचाव में बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पिता को स्वतंत्र पत्रकारिता की वजह से राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया है। पत्रकारिता जगत में खासे चर्चित रहे तहलका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल के मामले में नया मोड़ आ गया है। इस प्रकरण में उनकी बेटी कारा तेजपाल खुलकर सामने आई हैं और उन्होंने अपने पिता को पूरी तरह निर्दोष करार दिया है। उनका कहना है कि उनके पिता के खिलाफ रचा गया पूरा घटनाक्रम एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश का हिस्सा है, जिसका एकमात्र उद्देश्य उन्हें चुप कराना था। पिछले 13 वर्षों से इस पूरे मामले से जुड़े दस्तावेजों और साक्ष्यों का बारीकी से अध्ययन करने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि यही वजह है कि उन्हें अपने पिता की बेगुनाही पर पूरा भरोसा है। आम लोगों और पाठकों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि केवल मीडिया की सनसनीखेज सुर्खियों पर आंख मूंदकर भरोसा न किया जाए, बल्कि सच्चाई जानने के लिए इस मामले से जुड़े तमाम सबूतों का खुद गहराई से परीक्षण किया जाए। उनके अनुसार, यह कार्रवाई राजनीतिक रंजिश के तहत की गई है क्योंकि उनके पिता ने उस दौर में भारतीय जनता पार्टी यानी भाजपा के खिलाफ तहलका पत्रिका के माध्यम से अत्यंत निर्भीक और स्वतंत्र तेवर वाली पत्रकारिता को अंजाम दिया था, जो सत्ता के गलियारों में रास नहीं आई। बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला और सजा का ऐलान यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब न्यायपालिका के स्तर पर एक बेहद कड़ा और बड़ा फैसला आया है। बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने तरुण तेजपाल को साल 2013 के बहुचर्चित यौन उत्पीड़न मामले में दोषी ठहराते हुए पूरे 10 साल के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत की ओर से उन्हें तुरंत आत्मसमर्पण करने का स्पष्ट निर्देश भी जारी किया गया है। इस फैसले ने गोवा की निचली अदालत के उस पुराने आदेश को पूरी तरह पलट दिया है, जिसके तहत मई 2021 में उन्हें सभी आरोपों से क्लीन चिट देते हुए बरी कर दिया गया था। कानूनी जानकारों के बीच इस फैसले को एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। मूल घटना नवंबर 2013 के उस दौर की है जब गोवा में एक प्रतिष्ठित थिंकफेस्ट कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा था। इसी कार्यक्रम के दौरान एक पांच सितारा होटल की लिफ्ट के भीतर एक पूर्व जूनियर महिला सहकर्मी ने उनके ऊपर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायती बयानों के मुताबिक यह कथित घटना 7 और 8 नवंबर 2013 के दरमियान होटल के लिफ्ट परिसर में घटी थी। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद कानून का शिकंजा कसते हुए उन्हें 30 नवंबर 2013 को गिरफ्तार कर लिया गया था और बढ़ते नैतिक दबाव के बीच उन्होंने तहलका के प्रधान संपादक पद से अपना इस्तीफा भी सौंप दिया था। निचली अदालत का बरी करना और सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी इस पूरे कानूनी सफर में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। मई 2021 का वह समय भी आया जब गोवा की एक ट्रायल कोर्ट ने तरुण तेजपाल को गलत तरीके से बंधक बनाने, किसी महिला की गरिमा को ठेس पहुंचाने के इरादे से आपराधिक बल प्रयोग करने, यौन उत्पीड़न और यहां तक कि बलात्कार जैसे तमाम गंभीर आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया था। उस वक्त उस अदालत के फैसले को राहत के तौर पर देखा गया था। हालांकि गोवा सरकार ने उस फैसले को चुपचाप स्वीकार नहीं किया और इसके खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील दायर कर दी। हाईकोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद तरुण तेजपाल ने स्वयं भी इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे एक राजनीतिक साजिश करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा है कि वह बॉम्बे हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और वहां न्याय की गुहार लगाएंगे। स्वतंत्र पत्रकारिता और राजनीतिक टकराव के आरोप कारा तेजपाल ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक बyानों में इस बात पर विशेष जोर दिया है कि तहलका की संपादकीय नीति हमेशा से बेहद आक्रामक, निडर और किसी के दबाव में न आने वाली रही है। उनके मुताबिक, इसी स्वतंत्र पत्रकारिता के चलते उनके संस्थापक संपादक को तत्कालीन व्यवस्था और सत्ता की भारी नाराजगी का सामना करने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के राजनीतिक एजेंडे के रास्ते में तरुण तेजपाल एक बहुत बड़ी और मजबूत चुनौती बने हुए थे। ऐसे में उन्हें नेस्तनाबूद करने और उनकी आवाज को हमेशा के लिए दबा देने का सबसे आसान और प्रभावी तरीका यही नजर आया कि उन्हें समाज के सामने एक बलात्कारी के रूप में चित्रित कर दिया जाए। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि कारा के ये तमाम आरोप उनके अपने निजी दावे और दृष्टिकोण हैं। मौजूदा कानूनी स्थिति यह है कि हाईकोर्ट के इस ताजा फैसले के बाद सब कुछ अब केवल और केवल सुप्रीम कोर्ट में होने वाली आगामी सुनवाइयों और वहां की कानूनी कार्रवाइयों पर टिका हुआ है। सवाल-जवाब 1. तरुण तेजपाल मामले में नया कानूनी फैसला क्या आया है? बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने तरुण तेजपाल को 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में 10 साल की सजा सुनाई है और उन्हें आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। 2. निचली अदालत ने इस मामले में क्या फैसला दिया था? मई 2021 में गोवा की एक ट्रायल कोर्ट ने तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। 3. कारा तेजपाल ने अपने पिता के बारे में क्या दावा किया है? कारा तेजपाल ने दावा किया है कि उनके पिता निर्दोष हैं और उन्हें स्वतंत्र पत्रकारिता करने के कारण राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया है। 4. यह घटना किस वर्ष और कहां हुई थी? यह घटना नवंबर 2013 में गोवा में आयोजित थिंकफेस्ट कार्यक्रम के दौरान एक पांच सितारा होटल की लिफ्ट में हुई थी। https://trendkia.com/national/tarun-tejpal-mamle-mein-beti-kara-tejpal-ka-bada-dawa-pita-ko-bataya-bekasura-15519 TrendKia — Har trend, sabse pehle.