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  "type": "article",
  "title": "दीवाली की रात दिल्ली एनसीआर में धुएं का गुबार, एक्यूआई चार सौ के पार",
  "summary": "दीवाली के मौके पर दिल्ली और आसपास के इलाकों में आतिशबाजी के बाद वायु गुणवत्ता बेहद खराब हो गई। कई इलाकों में एक्यूआई चार सौ के पार पहुंच गया और लोगों को सांस लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ा।",
  "content": "दीवाली की रात राष्ट्रीय राजधानी और उसके आसपास के क्षेत्रों में जश्न का माहौल धीरे-धीरे प्रदूषण की घनी चादर में तब्दील हो गया। रात गहराने के साथ ही पूरे इलाके में धुएं का गुबार फैल गया और सड़कों तथा रिहायशी बस्तियों में दृश्यता का स्तर काफी कम हो गया। लोगों ने आंखों में चुभन, सांस लेने में तकलीफ और हवा में बारूद की तेज महक की शिकायतें दर्ज कराईं। हालांकि प्रशासन की ओर से पटाखों के इस्तेमाल पर रोक लगाने और केवल हरित पटाखों का उपयोग करने की हिदायत दी गई थी, फिर भी तमाम बस्तियों में धड़ल्ले से आतिशबाजी का दौर जारी रहा। इस भारी प्रदूषण के कारण रात के दस बजते-बजते राष्ट्रीय राजधानी के बीस निगरानी केंद्रों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई गंभीर श्रेणी में जा पहुंचा, जबकि उस समय औसत एक्यूआई तीन सौ इकहत्तर दर्ज किया गया।\n\nसोनिया विहार और जहांगीरपुरी में सबसे खराब स्थिति\n\nकेंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, रविवार को रात दस बजे के समय राष्ट्रीय राजधानी के कुल उनसठ निगरानी केंद्रों में से बीस जगहों पर हवा की स्थिति गंभीर पाई गई। इसके अलावा छह केंद्रों पर यह खराब और बाकी तैंतीस जगहों पर बेहद खराब श्रेणी में रिकॉर्ड की गई। सोनिया विहार में प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक दर्ज किया गया जहां एक्यूआई चार सौ तरेसठ तक जा पहुंचा, जबकि जहांगीरपुरी में यह आंकड़ा चार सौ पचास पर पहुंच गया। इसके अलावा बुराड़ी, अलीपुर और पंजाबी बाग जैसे इलाकों में भी हवा की गुणवत्ता बेहद चिंताजनक बनी रही। सोनिया विहार, जहांगीरपुरी, पंजाबी बाग, बुराड़ी, ओखला और रोहिणी वे प्रमुख इलाके रहे जहां पूरे दिन हवा की सेहत गंभीर श्रेणी के दायरे में ही टिकी रही।\n\nशाम ढलते ही तेज हुई आतिशबाजी\n\nदिन के वक्त शहर की अधिकांश सड़कें और रास्ते काफी हद तक शांत नजर आए, लेकिन शाम को पांच से छह बजे के बीच अचानक आतिशबाजी का सिलसिला जोर पकड़ने लगा। जैसे-जैसे रात आगे बढ़ी, पटाखों का शोर और उनसे निकलने वाला धुआं भी बढ़ता चला गया, जिससे कई क्षेत्रों में धुंध की परत जम गई। पीतमपुरा, बुराड़ी, मयूर विहार और लुटियंस दिल्ली के कुछ हिस्सों से लगातार पटाखे चलाए जाने की खबरें सामने आती रहीं। स्थानीय निवासियों के बयानों के मुताबिक बाहरी दिल्ली के पीतमपुरा और बुराड़ी में आतिशबाजी का दौर काफी देर तक चला, जिसमें बुराड़ी में इसकी तीव्रता सबसे ज्यादा महसूस की गई। मयूर विहार के साथ-साथ बिशंबरदास मार्ग और लुटियंस दिल्ली के लोगों ने भी देर रात तक तेज आवाज में पटाखे फोड़े जाने की बात कही। हालांकि कुछ चुनिंदा जगहों पर रात बीतने के साथ इसकी तीव्रता में थोड़ी कमी जरूर आई।\n\nप्रशासनिक पाबंदियां और लोगों की चिंताएं\n\nदिल्ली सरकार की ओर से दीवाली के पर्व से पहले ही नागरिकों से उच्चतम न्यायालय के दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने और केवल हरित पटाखों का ही इस्तेमाल करने की अपील की गई थी। पूर्वी दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किए गए आदेशों के मुताबिक सात और आठ नवंबर को सुबह छह से सात बजे तथा रात आठ से दस बजे तक का समय ही हरित पटाखे जलाने के लिए तय किया गया था। इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर लोगों ने जमकर आतिशबाजी की। हवा की गुणवत्ता के खराब होने पर नागरिकों ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी गहरी चिंताएं जाहिर कीं। कई उपयोगकर्ताओं ने हवा में धुएं की तेज गंध, घटती दृश्यता और सांस लेने में हो रही परेशानियों का खुलकर जिक्र किया। कुछ जगहों पर धुएं का घनत्व इतना अधिक था कि सड़क के किनारे लगे खंभों की रोशनियां भी धुंधली नजर आने लगीं।\n\nआगे और गंभीर हो सकते हैं हालात\n\nवायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली की तरफ से यह आशंका जताई गई है कि नौ नवंबर से राष्ट्रीय राजधानी की हवा एक बार फिर गंभीर श्रेणी में लौट सकती है और अगले कुछ दिनों तक यही स्थिति बनी रह सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम से जुड़ी प्रतिकूल दशाएं प्रदूषक तत्वों को वायुमंडल में घुलने-मिलने से रोक रही हैं। इसके साथ ही गाड़ियों से निकलने वाला धुआं, दीवाली पर छोड़े गए पटाखे और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाए जाने की घटनाएं मिलकर प्रदूषण के स्तर को लगातार ऊपर उठा रही हैं। चेतावनी प्रणाली के नियमों के मुताबिक यदि वेंटिलेशन इंडेक्स छह हजार वर्ग मीटर प्रति सेकंड से नीचे चला जाता है और हवा की औसत गति दस किलोमीटर प्रति घंटे से कम रहती है, तो हवा में मौजूद कचरा और कण आसानी से बिखर नहीं पाते। नियंत्रण बोर्ड के तय पैमानों के अनुसार शून्य से पचास तक का एक्यूआई अच्छा, इक्यावन से सौ संतोषजनक, एक सौ एक से दो सौ मध्यम, दो सौ एक से तीन सौ खराब, तीन सौ एक से चार सौ बेहद खराब और चार सौ एक से पांच सौ के बीच का आंकड़ा गंभीर श्रेणी में गिना जाता है।\n\nइसका आप पर असर\nदीवाली की रात राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बढ़े प्रदूषण का सीधा असर आम नागरिकों के स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर पड़ा है।\n\n• स्वास्थ्य पर असर: हवा में पीएम टू पॉइंट फाइव कणों की मात्रा बढ़ने से दमा और सांस के मरीजों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। हवा में मौजूद धुएं के कारण आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ की शिकायतें आम हो गईं।\n• स्थानीय प्रभाव: सोनिया विहार और जहांगीरपुरी जैसे इलाकों में एक्यूआई चार सौ पचास के पार पहुंचने से बाहर निकलना मुश्किल हो गया। इन क्षेत्रों में दृश्यता कम होने के कारण यातायात और आवागमन पर भी बुरा असर पड़ा।\n• नियमों का पालन: प्रशासन द्वारा तय किए गए समय और हरित पटाखों के नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ निगरानी बढ़ाई गई है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे अगले कुछ दिनों तक सुबह और शाम के समय बाहरी गतिविधियों से बचें।\n\nऐसा क्यों हुआ\nदीवाली की रात हवा की गुणवत्ता के गंभीर श्रेणी में पहुंचने के पीछे प्रतिकूल मौसम और भारी आतिशबाजी मुख्य कारण रहे।\n\n• आतिशबाजी का प्रभाव: प्रतिबंधों के बावजूद शाम ढलते ही बड़े पैमाने पर पटाखे छोड़े गए, जिससे हवा में खतरनाक कणों का घनत्व अचानक बढ़ गया।\n• मौसम की स्थिति: कम वेंटिलेशन इंडेक्स और धीमी हवा की रफ्तार के कारण प्रदूषक तत्व निचले वायुमंडल में ही फंस गए।\n• अतिरिक्त कारक: वाहनों से निकलने वाले धुएं और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं ने पहले से मौजूद प्रदूषण को और अधिक गंभीर बना दिया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. दीवाली की रात दिल्ली का औसत एक्यूआई कितना दर्ज किया गया?\nरात दस बजे के समय दिल्ली का औसत एक्यूआई तीन सौ इकहत्तर दर्ज किया गया।\n\n2. सबसे अधिक प्रदूषण किस इलाके में दर्ज किया गया?\nसोनिया विहार में सबसे अधिक प्रदूषण दर्ज किया गया जहां एक्यूआई चार सौ तरेसठ तक पहुंच गया।\n\n3. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कितने स्टेशनों पर हवा गंभीर श्रेणी में थी?\nकेंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बीस निगरानी स्टेशनों पर हवा गंभीर श्रेणी में पाई गई।\n\n4. हरित पटाखे जलाने के लिए क्या समय तय किया गया था?\nपूर्वी दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट के आदेशानुसार सुबह छह से सात बजे और रात आठ से दस बजे तक का समय तय किया गया था।\n\n5. दीवाली के दिन कौन सा प्रदूषक सबसे 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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-11-08",
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    "दिल्ली प्रदूषण",
    "दीवाली एक्यूआई",
    "सोनिया विहार",
    "जहांगीरपुरी",
    "प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड",
    "खराब हवा",
    "पटाखे प्रतिबंध"
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