त्रिपुरा विलेज कमेटी चुनाव नतीजों में टीएमपी ने दर्ज की एकतरफा जीत, एनडीए गठबंधन ने बनाई मजबूत बढ़त त्रिपुरा के आदिवासी क्षेत्रों में हुए विलेज कमेटी चुनाव के नतीजों में प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मा की टीएमपी ने 74.61 प्रतिशत सीटें जीतकर शानदार प्रदर्शन किया है। भाजपा और सहयोगियों के साथ एनडीए गठबंधन ने विपक्षी लेफ्ट व कांग्रेस को बड़े अंतर से पीछे छोड़ दिया। त्रिपुरा के आदिवासी स्वायत्त क्षेत्रों में स्थानीय स्तर के लोकतंत्र को नया जीवन देने वाले विलेज कमेटी चुनावों के अंतिम परिणाम सामने आ चुके हैं। मतपत्रों के जरिए संपन्न हुए इस मतदान के बाद घोषित परिणामों में सत्तारूढ़ गठबंधन की प्रमुख साझीदार टिपरा मोथा पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एकतरफा जीत हासिल की है। प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मा के नेतृत्व वाली इस पार्टी ने कुल घोषित सीटों के लगभग तीन-चौथाई हिस्से पर अपना परचम लहराया है। इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी और सहयोगी दलों के संयुक्त मोर्चे ने विपक्षी दलों के मंसूबों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। सीटों का विस्तृत गणित और दलों का प्रदर्शन त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल के अधिकार क्षेत्र में आने वाली 587 विलेज कमेटियों की कुल 4,594 सीटों के नतीजे 6 अक्टूबर की सुबह सार्वजनिक किए गए। राज्यभर में बनाए गए 45 मतगणना केंद्रों पर सोमवार सुबह से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतों की गिनती शुरू की गई थी। इस चुनावी मुकाबले में टिपरा मोथा पार्टी यानी टीएमपी ने अकेले दम पर 3,428 सीटें अपने नाम कीं, जो कुल सीटों का 74.61 प्रतिशत हिस्सा बनता है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने 859 सीटों पर कामयाबी दर्ज की, जो कुल सीटों का 18.70 प्रतिशत है। भाजपा के एक अन्य आदिवासी आधार वाले सहयोगी दल इंडिजिनस पीपल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा ने 33 सीटें हासिल कीं, जो 0.72 प्रतिशत के बराबर हैं। दूसरी ओर, विपक्षी खेमे में शामिल सीपीआई (एम) को केवल 87 सीटों पर जीत मिली, जो 1.89 प्रतिशत बैठती हैं। वहीं कांग्रेस पार्टी महज 14 सीटों पर सिमट गई, जिसका आंकड़ा 0.30 प्रतिशत रहा। इस मुकाबले में निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और 173 सीटें जीतकर 3.77 प्रतिशत का आंकड़ा हासिल किया। निर्विरोध निर्वाचन और मतदान का दायरा इन चुनावों के लिए प्रशासनिक स्तर पर कुल 4,597 सीटें अधिसूचित की गई थीं। हालांकि, तीन सीटों के लिए किसी भी उम्मीदवार ने पर्चा नहीं भरा, जिसके चलते वास्तविक मुकाबला 4,594 सीटों के दायरे तक सीमित रहा। राजनीतिक समीकरणों के चलते 1,644 सीटों पर उम्मीदवारों का चुनाव निर्विरोध संपन्न हो गया। इस प्रकार 587 विलेज कमेटियों की बची हुई 2,950 सीटों पर 28 सितंबर को मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। निर्विरोध जीती गई सीटों में भी टिपरा मोथा पार्टी का पलड़ा सबसे भारी रहा। पार्टी ने 1,557 सीटें बिना किसी विरोध के अपनी झोली में डालीं, जो कुल का 33.87 प्रतिशत है। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी ने 81 सीटों पर निर्विरोध जीत हासिल की, जो 1.76 प्रतिशत है। विपक्षी सीपीआई (एम) भी एक सीट पर निर्विरोध जीतने में कामयाब रही। इस पूरे चुनावी रण में सत्ताधारी भाजपा ने अपने दो प्रमुख सहयोगियों टीएमपी और आईपीएफटी के साथ गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ा, जबकि विपक्ष की ओर से सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले लेफ्ट फ्रंट और कांग्रेस ने मिलकर चुनौती पेश की थी। दशक भर बाद चुनाव और स्वायत्त परिषद की पृष्ठभूमि विलेज कमेटी के यह चुनाव सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद पूरे एक दशक के लंबे अंतराल पर आयोजित किए गए। पूर्व शाही परिवार के सदस्य प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मा के नेतृत्व में टीएमपी वर्ष 2021 से 30 सदस्यों वाली त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल की सत्ता संभाल रही है। इस काउंसिल की संरचना में 28 निर्वाचित सदस्य और राज्य सरकार की ओर से मनोनीत किए जाने वाले दो सदस्य शामिल होते हैं। भौगोलिक और प्रशासनिक दृष्टि से यह स्वायत्त परिषद राज्य के कुल 58 ब्लॉक में से 52 ब्लॉक के दायरे को कवर करती है। इस संस्था का गठन 49वें संविधान संशोधन के पश्चात संविधान की छठी अनुसूची के प्रावधानों के अंतर्गत 1 अप्रैल 1985 को किया गया था, जिसका उद्देश्य आदिवासी बहुल इलाकों के अधिकारों और स्वशासन की रक्षा करना था। नेताओं के बयान और जनादेश पर प्रतिक्रियाएं चुनावी नतीजों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा कि शुरुआती रुझानों और नतीजों से साफ संकेत मिल रहा था कि जनसमर्थन भाजपा नीत एनडीए के पक्ष में जाएगा। उन्होंने भरोसा जताया कि एनडीए को मिली इस बड़ी जीत से राज्य के विकास को गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि मौजूदा सरकार मैदानी और पहाड़ी दोनों ही क्षेत्रों में बिना किसी भेदभाव के समग्र विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट के जरिए मतदाताओं का आभार प्रकट करते हुए कहा कि वे मतदाताओं के भरोसे, समर्थन और भागीदारी के लिए आभारी हैं और यह फैसला लोगों के लोकतांत्रिक विश्वास को प्रदर्शित करता है। वहीं दूसरी ओर, टीएमपी प्रमुख प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मा ने सोशल मीडिया पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि इन नतीजों से जमीनी स्तर पर आदिवासी समाज को नई राजनीतिक और प्रशासनिक ताकत मिलेगी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में लड़ी गई लंबी कानूनी लड़ाई के बाद यह संवैधानिक अधिकार दोबारा हासिल हुए हैं। उन्होंने इस जीत को किसी खास दल की जीत से ऊपर बताते हुए जनता और टिपरासा समुदाय के अधिकारों की जीत करार दिया। इसका आप पर असर त्रिपुरा के आदिवासी क्षेत्रों में विलेज कमेटियों के गठन से स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों और ग्रामीण बजट प्रबंधन को नई प्रशासनिक दिशा मिलेगी। • भारत में: पूर्वोत्तर के स्वायत्त परिषदों वाले राज्यों में स्थानीय लोकतंत्र की बहाली का यह उदाहरण अन्य क्षेत्रों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत देता है। इससे केंद्र और राज्य की ग्रामीण योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को गति मिलेगी। • त्रिपुरा में: राज्य के 52 ब्लॉक में एक दशक बाद चुनी हुई कमेटियां मिलने से ग्रामीण विकास फंड और बुनियादी ढांचे के काम तेजी से आगे बढ़ेंगे। स्थानीय निवासियों को अपने रोजमर्रा के प्रशासनिक व प्रमाण-पत्र संबंधी कार्यों के लिए निर्वाचित प्रतिनिधि सुलभ होंगे। • आदिवासी समाज के लिए: छठी अनुसूची के तहत जमीनी अधिकारों और स्वायत्त शासन की बहाली से स्थानीय समुदाय सीधे नीतिगत निर्णयों में भागीदार बन सकेगा। टीएमपी को मिले भारी समर्थन से आदिवासी कल्याण की मांगें राज्य स्तर पर और मुखर होंगी। • राजनीतिक समीकरणों पर: भाजपा और टीएमपी के गठबंधन की यह भारी जीत दर्शाती है कि आगामी चुनावों में भी पहाड़ी और मैदानी इलाकों का यह गठजोड़ विपक्ष पर भारी पड़ेगा। विपक्षी वाम मोर्चा और कांग्रेस को अपनी रणनीतियों पर नए सिरे से मंथन करना होगा। ऐसा क्यों हुआ त्रिपुरा में विलेज कमेटी के चुनाव लंबे समय से लंबित थे, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार संपन्न कराया गया। • सीधा कारण: सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के कारण राज्य प्रशासन और चुनाव आयोग को एक दशक के लंबे अंतराल के बाद विलेज कमेटियों के चुनाव कराने पड़े। • पृष्ठभूमि और कानूनी लड़ाई: टीएमपी प्रमुख प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मा ने स्थानीय स्वशासन और संवैधानिक अधिकारों की बहाली के लिए सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत स्तर पर कानूनी लड़ाई लड़ी थी। • गठबंधन की रणनीति: भाजपा ने टीएमपी और आईपीएफटी जैसे प्रमुख आदिवासी दलों के साथ तालमेल कर चुनाव लड़ा, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों के वोटों का बिखराव रुक गया और गठबंधन ने एकतरफा बहुमत हासिल कर लिया। सवाल-जवाब 1. त्रिपुरा विलेज कमेटी चुनाव में किस पार्टी ने सबसे ज्यादा सीटें जीतीं? टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) ने कुल 4,594 सीटों में से 3,428 सीटें (74.61 प्रतिशत) जीतकर सबसे बड़ा बहुमत हासिल किया। 2. विलेज कमेटी चुनाव कितने साल बाद आयोजित किए गए? सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद ये चुनाव पूरे 10 साल (एक दशक) के लंबे अंतराल पर आयोजित किए गए। 3. इस चुनाव में कितनी सीटें निर्विरोध चुनी गईं? विभिन्न दलों द्वारा 1,644 सीटें निर्विरोध जीती गईं, जिनमें से अकेले टीएमपी ने 1,557 सीटें हासिल कीं। 4. भाजपा और विपक्षी दलों का प्रदर्शन कैसा रहा? भाजपा को 859 सीटें (18.70 प्रतिशत) मिलीं, जबकि विपक्षी सीपीआई (एम) ने 87 सीटें और कांग्रेस ने 14 सीटें जीतीं। 5. त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल का दायरा कितना बड़ा है? यह स्वायत्त परिषद राज्य के कुल 58 ब्लॉक में से 52 ब्लॉक पर अधिकार क्षेत्र रखती है और इसमें 30 सदस्य होते हैं। https://trendkia.com/national/tripura-vileja-kameti-chunava-natijon-men-tmp-ne-darja-ki-ekatarapha-jita-nda-gathabndhana-ne-banai-majabuta-barhata-44033 TrendKia — Har trend, sabse pehle.